जशपुर जिले के पत्थलगांव विकासखंड के ग्राम पंडरीपानी निवासी प्रमनाथ मिर्रे का मामला इसका एक प्रेरक उदाहरण है। दिव्यांग पेंशन प्राप्त करने के लिए लगातार प्रयास करने के बावजूद उनकी पेंशन स्वीकृत नहीं हो पा रही थी, जिससे उन्हें आर्थिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा था।
जब अन्य प्रयास सफल नहीं हुए, तब उनके पुत्र प्रताप मिर्रे ने सीएम हेल्पलाइन में शिकायत दर्ज कराई। शिकायत प्राप्त होते ही संबंधित विभाग ने प्रकरण को प्राथमिकता देते हुए आवश्यक कार्रवाई शुरू की। सभी आवश्यक प्रक्रियाएं समयबद्ध रूप से पूरी की गईं और मात्र 12 दिनों के भीतर शिकायत का निराकरण कर प्रमनाथ मिर्रे की दिव्यांग पेंशन प्रारंभ कर दी गई।
पेंशन शुरू होने के बाद प्रमनाथ मिर्रे और उनके परिवार ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय तथा जिला प्रशासन के प्रति हार्दिक आभार जताया। उन्होंने कहा कि जिस कार्य के लिए वे लंबे समय से प्रयासरत थे, वह सीएम हेल्पलाइन के माध्यम से कुछ ही दिनों में पूरा हो गया।
परिवार का कहना है कि सीएम हेल्पलाइन दिव्यांगों, वरिष्ठ नागरिकों और जरूरतमंद लोगों के लिए अत्यंत उपयोगी एवं भरोसेमंद व्यवस्था बनकर सामने आई है। इससे आम नागरिकों को अपनी समस्याओं के समाधान के लिए एक प्रभावी मंच मिला है, जहां शिकायतों का त्वरित और संवेदनशील तरीके से निराकरण किया जाता है।
प्रमनाथ मिर्रे की यह सफलता की कहानी मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में सुशासन, जवाबदेही और जनसेवा के प्रति शासन की प्रतिबद्धता को दर्शाती है। सीएम हेल्पलाइन के माध्यम से पात्र हितग्राहियों तक योजनाओं का लाभ समय पर पहुंच रहा है, जिससे आम नागरिकों का शासन के प्रति विश्वास और अधिक मजबूत हो रहा है।
]]>आत्मसमर्पित युवाओं को स्थायी आजीविका से जोड़कर आर्थिक रूप से सशक्त बनाना है
22 जून से 14 जुलाई 2026 तक आयोजित इस प्रशिक्षण में युवाओं को प्राकृतिक खेती, आधुनिक कृषि तकनीकों और कृषि आधारित व्यवसायों का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया गया। प्रशिक्षण का उद्देश्य आत्मसमर्पित युवाओं को स्थायी आजीविका से जोड़कर आर्थिक रूप से सशक्त बनाना और उन्हें समाज की मुख्यधारा में सम्मान के साथ आगे बढ़ने का अवसर देना था।
प्रशिक्षण में सीखी प्राकृतिक खेती और आधुनिक कृषि तकनीकें
प्रशिक्षण के दौरान विशेषज्ञों ने युवाओं को बीजामृत, जीवामृत, घनजीवामृत, नीमास्त्र, हांडी दवा, थ्री-जी दवा और मछली टॉनिक तैयार करने की जानकारी दी। इसके साथ ही नाडेप खाद, वर्मी कम्पोस्ट, हरी खाद और प्राकृतिक खेती की विभिन्न तकनीकों का व्यावहारिक प्रशिक्षण भी दिया गया। युवाओं ने फलदार पौधों का रोपण, नीलहरित काई उत्पादन, कृषि यंत्रों का उपयोग, सब्जी नर्सरी तैयार करना, धान की कतारबद्ध बुवाई और गर्मी में गहरी जुताई जैसी तकनीकें भी सीखीं।
कृषि के साथ पशुपालन और अन्य व्यवसायों का प्रशिक्षण
प्रशिक्षण में युवाओं को बकरी पालन, मुर्गी पालन, ऑयस्टर मशरूम उत्पादन और मत्स्य पालन जैसे कृषि आधारित व्यवसायों की जानकारी दी गई। इन गतिविधियों से युवा अपनी रुचि और संसाधनों के अनुसार स्वरोजगार शुरू कर सकते हैं।
अध्ययन भ्रमण से मिला प्रत्यक्ष अनुभव
प्रशिक्षणार्थियों को दंतेवाड़ा जिले का अध्ययन भ्रमण भी कराया गया। मैलावाड़ा में उन्होंने धान की एसआरआई पद्धति और भूमगादी में प्राकृतिक खेती की उन्नत तकनीकों को प्रत्यक्ष रूप से देखा। इससे प्रशिक्षणार्थियों को सीखी गई तकनीकों को खेतों में लागू करने का व्यावहारिक अनुभव मिला।
अब खेती बनेगी नई पहचान का आधार
प्रशिक्षण के समापन अवसर पर उप संचालक कृषि श्री पी.आर. बघेल, सहायक संचालक कृषि श्री सुधीर कुजूर और कृषि विज्ञान केंद्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं प्रमुख श्री एच.एस. तोमर सहित वैज्ञानिकों ने प्रशिक्षणार्थियों को शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि खेती, पशुपालन और कृषि आधारित व्यवसाय ग्रामीण अर्थव्यवस्था की मजबूत नींव हैं। इन गतिविधियों के माध्यम से आत्मसमर्पित युवा अपने परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत करने के साथ-साथ समाज की मुख्यधारा में सम्मान के साथ आगे बढ़ सकते हैं।
कौशल का उपयोग आजीविका के साधन विकसित करने में करेंगे
प्रशिक्षणार्थियों ने कहा कि उन्हें खेती और स्वरोजगार की नई तकनीकों की जानकारी मिली है। अब वे सीखे गए कौशल का उपयोग कर अपने गांव में आजीविका के साधन विकसित करेंगे। उन्होंने आत्मनिर्भर बनने और सम्मानजनक जीवन जीने का संकल्प लिया।
आत्मसमर्पित युवाओं के जीवन में बदलाव की एक नई शुरुआत
यह प्रशिक्षण आत्मसमर्पित युवाओं के जीवन में बदलाव की एक नई शुरुआत है। हथियार छोड़कर अब ये युवा खेती और स्वरोजगार के माध्यम से अपने भविष्य का निर्माण कर रहे हैं।
]]>दंतेवाड़ा जिले की प्राथमिक लघु वनोपज सहकारी समिति गीदम ने तेंदूपत्ता विक्रय में ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है। राज्य लघु वनोपज संघ द्वारा आयोजित ऑनलाइन निविदा में समिति का तेंदूपत्ता 10 हजार 609 रुपये और 10 हजार 909 रुपये प्रति मानक बोरा की रिकॉर्ड दर पर बिका। यह गीदम समिति के 38 वर्षों के इतिहास में तेंदूपत्ता विक्रय की सबसे अधिक कीमत है।
वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री श्री केदार कश्यप ने इस उपलब्धि पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए इसे वनाश्रित परिवारों की आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में महत्वपूर्ण सफलता बताया है। उन्होंने कहा कि पारदर्शी ऑनलाइन निविदा प्रक्रिया और गुणवत्तापूर्ण कार्यप्रणाली का लाभ अब सीधे तेंदूपत्ता संग्रहकों तक पहुंच रहा है।
करीब 4 हजार संग्राहक परिवारों को मिलेगा बोनस का लाभ
वन मंत्री श्री केदार कश्यप ने कहा कि तेंदूपत्ता रिकॉर्ड दर पर बिकने से समिति को अतिरिक्त आय प्राप्त होगी। इसका लाभ बोनस के रूप में समिति से जुड़े करीब 4 हजार तेंदूपत्ता संग्रहक परिवारों को मिलेगा। इससे वनाश्रित परिवारों की आय बढ़ेगी और उनकी आर्थिक स्थिति और मजबूत होगी।
डिजिटल व्यवस्था से भुगतान में पारदर्शिता
राज्य सरकार द्वारा तेंदूपत्ता संग्रहण, बोनस, छात्रवृत्ति, बीमा और अन्य लघु वनोपज योजनाओं में डिजिटल व्यवस्था को बढ़ावा दिया जा रहा है। प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (डीबीटी) के माध्यम से संग्रहकों के बैंक खातों में राशि सीधे जमा की जा रही है। इससे भुगतान प्रक्रिया अधिक पारदर्शी, सुरक्षित और समयबद्ध हुई है।
सामूहिक प्रयासों से मिली ऐतिहासिक सफलता
वन मंत्री श्री केदार कश्यप ने इस उपलब्धि के लिए मुख्य वन संरक्षक, दंतेवाड़ा वनमंडलाधिकारी, जिला लघु वनोपज सहकारी संघ, समिति के पदाधिकारियों, फड़ मुंशियों और सभी अधिकारी-कर्मचारियों को बधाई दी। उन्होंने कहा कि सभी के सामूहिक प्रयासों से गीदम समिति ने यह ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार वनाश्रित परिवारों के हितों को सर्वाेच्च प्राथमिकता देते हुए लघु वनोपज के माध्यम से उनकी आय बढ़ाने के लिए लगातार कार्य कर रही है। आने वाले समय में भी तेंदूपत्ता और अन्य लघु वनोपज से जुड़े परिवारों को बेहतर आर्थिक लाभ दिलाने के प्रयास जारी रहेंगे।
]]>मुख्यमंत्री श्री साय आज राजधानी रायपुर के ग्राम-बरौदा में आयोजित झेरिया यादव समाज के महासम्मेलन एवं सामाजिक भवन लोकार्पण समारोह को संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर उन्होंने रायपुर में झेरिया यादव समाज के सामाजिक भवन के लिए 15 लाख रुपये की घोषणा की तथा ग्राम बरौदा में नवनिर्मित सामाजिक भवन का लोकार्पण भी किया।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि यादव समाज भारतीय संस्कृति, जीवन-मूल्यों और गौ-सेवा की समृद्ध परंपरा का संवाहक है। भगवान श्रीकृष्ण के आदर्शों पर चलने वाला यह समाज धर्म, सेवा और सामाजिक समरसता का संदेश देता है। उन्होंने कहा कि संगठित और जागरूक समाज ही मजबूत राष्ट्र की आधारशिला होता है तथा ऐसे सामाजिक सम्मेलन समाज सुधार और सामाजिक एकता को नई दिशा देते हैं।
मोदी गारंटियों को पूरा करने में छत्तीसगढ़ अग्रणी
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि सरकार गठन के बाद पहली ही कैबिनेट बैठक में 18 लाख प्रधानमंत्री आवास स्वीकृत करने का ऐतिहासिक निर्णय लिया गया। विशेष पिछड़ी जनजातियों (पीवीटीजी) के लिए 32 हजार प्रधानमंत्री आवास स्वीकृत किए गए हैं, जिससे समाज के अंतिम व्यक्ति तक विकास का लाभ पहुंचाया जा रहा है।
किसानों को 3100 रुपये प्रति क्विंटल धान का मूल्य
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार किसानों से 3100 रुपये प्रति क्विंटल की दर से धान खरीदी कर रही है। किसान कल्याण सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में है और खेती को लाभकारी बनाने के लिए लगातार प्रभावी कदम उठाए जा रहे हैं।
महतारी वंदन योजना से महिलाओं का आर्थिक सशक्तिकरण
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि महतारी वंदन योजना के माध्यम से प्रदेश की माताओं-बहनों के खातों में प्रतिमाह एक हजार रुपये की राशि अंतरित की जा रही है। इस योजना ने महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण को नई मजबूती प्रदान की है और परिवारों की आर्थिक सुरक्षा बढ़ाई है।
बस्तर में शांति और विकास का नया दौर
मुख्यमंत्री ने कहा कि कभी बस्तर के विकास में सबसे बड़ी बाधा नक्सलवाद था, लेकिन अब वहां शांति और विकास का नया वातावरण निर्मित हुआ है। सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य, आवास और रोजगार जैसी सुविधाओं का तेजी से विस्तार हो रहा है तथा विकास की मुख्यधारा अंतिम गांव तक पहुंच रही है।
रामलला दर्शन योजना से आस्था को मिला सम्मान
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ भगवान श्रीराम का ननिहाल है। रामलला दर्शन योजना के माध्यम से अब तक 50 हजार से अधिक श्रद्धालुओं को अयोध्या धाम में प्रभु श्रीराम के दर्शन का अवसर मिल चुका है। उन्होंने कहा कि सरकार “विकास भी और विरासत भी” के मूलमंत्र पर कार्य कर रही है।
सुशासन और डिजिटल सेवाओं से आसान हो रहा जनजीवन
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ देश का पहला राज्य है जहां सुशासन एवं अभिसरण विभाग की स्थापना की गई है। सरकारी सेवाओं को पारदर्शी, जवाबदेह और समयबद्ध बनाने के लिए प्रक्रियाओं का तेजी से डिजिटलीकरण किया जा रहा है। मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 1076 के माध्यम से नागरिक 24 घंटे, सप्ताह के सातों दिन अपनी शिकायत दर्ज करा सकते हैं। शिकायतों के त्वरित समाधान के लिए विभिन्न विभागों के लगभग 8 हजार अधिकारियों और कर्मचारियों को चार स्तरीय व्यवस्था से जोड़ा गया है। साथ ही प्रत्येक पंचायत में अटल डिजिटल सेवा केंद्र स्थापित किए जा रहे हैं, जहां नागरिकों को विभिन्न प्रमाणपत्र और सरकारी सेवाएं एक ही स्थान पर आसानी से उपलब्ध हो रही हैं।
कार्यक्रम में विधायक श्री अनुज शर्मा, श्री रामकुमार यादव, छत्तीसगढ़ झेरिया यादव समाज के प्रदेश अध्यक्ष श्री जगनीक यादव, श्री भगत सिंह यादव, श्रीमती आशा संतोष यादव सहित प्रदेशभर से आए समाज के पदाधिकारी एवं बड़ी संख्या में समाजजन उपस्थित थे।
]]>छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले में स्व-सहायता समूहों की दीदियां इस बार रक्षाबंधन के पर्व को प्रकृति संरक्षण से जोड़ने की एक अनूठी मिसाल पेश कर रही हैं। कलेक्टर श्री मयंक चतुर्वेदी के मार्गदर्शन में जिला पंचायत रायगढ़ और राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन बिहान के सहयोग से जिले भर में पर्यावरण-अनुकूल बीज राखियां तैयार की जा रही हैं।
फेंकने पर अंकुरित होंगे देसी बीज
इन राखियों की सबसे विशेष बात यह है कि इन्हें धान, मक्का, भुट्टा, सेमी, करेला और बरबटी जैसे विभिन्न देसी बीजों से बेहद आकर्षक ढंग से बनाया जा रहा है। यदि त्योहार के बाद यह राखी मिट्टी में मिल जाती है या बाहर फेंक दी जाती है, तो इसमें लगे बीज अंकुरित होकर पौधे का रूप ले लेंगे। इससे भाई-बहन के अटूट प्रेम के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण को भी बढ़ावा मिलेगा।
गांव-गांव में दिख रहा उत्साह
जिले के सभी सातों विकासखंडों में इस अभियान को लेकर महिलाओं में भारी उत्साह है। धरमजयगढ़ के ग्राम दुलियामुड़ा-कोयलार में कृष्णा स्व-सहायता समूह की सक्रिय महिला कविता राठिया ने आकर्षक बीज राखियां तैयार कर मिसाल पेश की है। रायगढ़ के बैसपाली, जुनवानी, लोइंग, गोपालपुर, संबलपुरी, लैलूंगा, तमनार के लिबरा गांव (जननी समूह), घरघोड़ा के बड़ेगुमड़ा (गायत्री समूह) और पुसौर के पुटकापुरी क्लस्टर सहित जिले भर की कृषि सखियां और महिलाएं इस कार्य में जुटी हुई हैं।
सातों विकासखंडों से चुनी जाएगी सर्वश्रेष्ठ बीज राखी
रायगढ़ जिले के सभी सातों विकासखंडों में इस रचनात्मकता और नवाचार को बढ़ावा देने के लिए कल यानी 20 जुलाई को जिले के सभी सात विकासखंडों से एक-एक सर्वश्रेष्ठ बीज राखी का चयन किया जाएगा। चयन का आधार राखी की आकर्षक डिज़ाइन, देसी बीजों का उपयोग और पर्यावरण संरक्षण का संदेश जैसी खूबियों को बनाया जाएगा।
जिले के शीर्ष अधिकारियों को राखी बांधेंगी विजेता दीदियां
प्रतियोगिता में चुनी जाने वाली सातों विकासखंडों की विजेता दीदियों को 27 जुलाई को एक विशेष गरिमामय समारोह में सम्मानित किया जाएगा। इस अवसर पर ये दीदियां स्वयं कलेक्टर सहित जिले के शीर्ष अधिकारियों को अपने हाथों से बनाई हुई बीज राखी बांधेंगी। बिहान की दीदियों द्वारा शुरू किया गया यह अभियान अब केवल एक प्रतियोगिता न रहकर प्रकृति के प्रति जिम्मेदारी निभाने का एक बड़ा जनआंदोलन बनता जा रहा है।
]]>मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने विद्यार्थियों से आत्मीय संवाद करते हुए कहा कि आज के विद्यार्थी ही विकसित भारत और विकसित छत्तीसगढ़ के भविष्य के निर्माता हैं। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र केवल मतदान तक सीमित नहीं है, बल्कि जनप्रतिनिधियों के माध्यम से जनता की आकांक्षाओं को सदन में अभिव्यक्त करने की सतत प्रक्रिया है। विधानसभा में जनहित से जुड़े विषयों पर सार्थक चर्चा होती है और जनता के कल्याण के लिए नीतियां एवं कानून बनाए जाते हैं।
विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने विद्यार्थियों का स्वागत करते हुए कहा कि उन्होंने विद्यार्थियों से अध्ययन के साथ-साथ संविधान, लोकतांत्रिक मूल्यों और नागरिक कर्तव्यों के प्रति जागरूक रहने का आग्रह किया।उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि ऐसे शैक्षणिक भ्रमण उन्हें लोकतांत्रिक संस्थाओं की कार्यप्रणाली को समझने, संविधान के प्रति सम्मान विकसित करने तथा जिम्मेदार नागरिक बनने की प्रेरणा देते हैं।
इस अवसर पर स्कूल शिक्षा मंत्री श्री गजेंद्र यादव तथा विधायक श्री रिकेश सेन भी उपस्थित थे।
शैक्षणिक भ्रमण के दौरान विद्यार्थियों ने सदन की कार्यवाही को दर्शक दीर्घा से देखा और प्रश्नकाल, विभिन्न विषयों पर चर्चा तथा संसदीय प्रक्रियाओं को निकट से समझा। उन्होंने विधानसभा भवन की संरचना, कार्यप्रणाली और लोकतांत्रिक व्यवस्था से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारियां भी प्राप्त कीं।
विद्यार्थियों ने इस अनुभव को अत्यंत ज्ञानवर्धक, प्रेरणादायक और अविस्मरणीय बताते हुए कहा कि पुस्तकों में पढ़ी गई संसदीय व्यवस्था को प्रत्यक्ष रूप से देखने का अवसर उनके लिए विशेष रहा। उन्होंने कहा कि इससे लोकतंत्र, संविधान और जनप्रतिनिधियों की भूमिका के प्रति उनकी समझ और अधिक विकसित हुई है।
]]>मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने कहा कि स्व. डॉ. तीजन बाई केवल छत्तीसगढ़ की नहीं, बल्कि पूरे देश की सांस्कृतिक पहचान थीं। उन्होंने अपनी विलक्षण प्रतिभा, अद्भुत साधना और पंडवानी की कापालिक शैली के माध्यम से छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति को विश्व पटल पर प्रतिष्ठित किया।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि स्व. डॉ. तीजन बाई का योगदान आने वाली पीढ़ियों को भी निरंतर प्रेरित करता रहेगा। स्व. डॉ. तीजन बाई का संपूर्ण जीवन लोककला, संस्कृति और परंपरा के संरक्षण एवं संवर्धन को समर्पित रहा। उन्होंने पंडवानी को विश्व मंच तक पहुंचाकर न केवल छत्तीसगढ़, बल्कि भारतीय लोक संस्कृति को वैश्विक पहचान दिलाई। उनकी कला, साधना और सांस्कृतिक विरासत आने वाली पीढ़ियों के लिए सदैव प्रेरणा का स्रोत बनी रहेगी।
उन्होंने कहा कि राज्योत्सव के अवसर पर प्रतिवर्ष ‘डॉ. तीजन बाई लोककला अलंकरण’ प्रदान किया जाएगा, जिसके माध्यम से लोक कला के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान देने वाले कलाकारों का सम्मान किया जाएगा। उन्होंने कहा कि ग्राम गनियारी स्थित शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय का नामकरण स्व. डॉ. तीजन बाई के नाम पर किया जाएगा, ताकि इस क्षेत्र के विद्यार्थी उनके जीवन, संघर्ष और उपलब्धियों से प्रेरणा प्राप्त कर सकें। मुख्यमंत्री ने यह कहा कि लोककला की महान साधिका डॉ. तीजन बाई की स्मृतियों को राज्य सरकार द्वारा चिरस्थायी रखते हुए उनकी जीवनभर की कला-साधना के प्रतीक रहे तंबूरे को रायपुर के संग्रहालय में पूरे सम्मान के साथ संरक्षित रखा जाएगा, जिससे भविष्य की पीढ़ियां उनकी अमूल्य सांस्कृतिक विरासत से परिचित हो सकें।
श्रद्धांजलि सभा को सांसद श्री विजय बघेल, प्रदेश के पर्यटन, संस्कृति, धार्मिक न्यास एवं धर्मस्व मंत्री श्री राजेश अग्रवाल तथा विधायक पद्मश्री श्री अनुज शर्मा ने भी संबोधित किया। उन्होंने स्व. डॉ. तीजन बाई के व्यक्तित्व, कृतित्व और लोककला के क्षेत्र में उनके अतुलनीय योगदान पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की।
सभा में उपस्थित सभी लोगों ने दो मिनट का मौन रखकर दिवंगत आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की तथा उन्हें सामूहिक श्रद्धांजलि अर्पित की।
इस अवसर पर पद्मश्री श्री आर.एस. बारले, स्कूल शिक्षा मंत्री श्री गजेन्द्र यादव, विधायक श्री डोमन लाल कोर्सेवाड़ा, छत्तीसगढ़ फिल्म विकास निगम की अध्यक्ष सुश्री मोना सेन सहित अन्य गणमान्यजन, छत्तीसगढ़ प्रदेश के विभिन्न अंचलों से पहुंचे कलाकार, स्थानीय पंचायत प्रतिनिधि तथा बड़ी संख्या में नागरिकगण उपस्थित थे।
]]>मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने रुद्राक्ष का पौधा लगाया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि यशस्वी प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के आह्वान पर प्रारंभ हुआ श्एक पेड़ मां के नामश् अभियान आज पूरे देश में जनआंदोलन का स्वरूप ले चुका है। यह अभियान केवल पौधे लगाने तक सीमित नहीं है, बल्कि अपनी मां के प्रति कृतज्ञता, प्रकृति के प्रति संवेदनशीलता और आने वाली पीढि़यों के प्रति उत्तरदायित्व का सशक्त प्रतीक है। उन्होंने कहा कि जब कोई व्यक्ति अपनी मां के नाम पर पौधा लगाता है तो उस पौधे के साथ उसका भावनात्मक रिश्ता भी जुड़ जाता है और वह उसके संरक्षण के लिए स्वयं प्रेरित होता है। यही भाव इस अभियान को स्थायी, प्रभावी और जनभागीदारी आधारित बनाता है।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ विधानसभा में विधायकों द्वारा अपनी माताओं के नाम पर पौधारोपण किया जाना अत्यंत प्रेरणादायी पहल है। विधानसभा परिसर से दिया गया यह संदेश निश्चित रूप से पूरे प्रदेश में पर्यावरण संरक्षण के प्रति नई जागरूकता उत्पन्न करेगा। उन्होंने इस अभिनव आयोजन के लिए विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह पहल समाज में वृक्षारोपण को जनआंदोलन बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने कहा कि आज पूरा विश्व जलवायु परिवर्तन, ग्लोबल वार्मिंग, अनियमित वर्षा, बढ़ते तापमान और जैव विविधता के क्षरण जैसी गंभीर चुनौतियों का सामना कर रहा है। इन परिस्थितियों में वृक्षारोपण केवल पर्यावरणीय कार्यक्रम नहीं, बल्कि मानव जीवन की सुरक्षा, प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण और भावी पीढि़यों के भविष्य को सुरक्षित करने का सबसे प्रभावी माध्यम है। उन्होंने कहा कि वृक्ष पृथ्वी के संतुलन के आधार हैं। वे हमें शुद्ध वायु, जल संरक्षण, जैव विविधता का संरक्षण और स्वस्थ पर्यावरण प्रदान करते हैं। इसलिए प्रत्येक नागरिक को अपने जीवन में कम से कम एक पौधा अवश्य लगाना चाहिए और उसकी देखभाल भी उसी आत्मीयता से करनी चाहिए, जिस भाव से वह अपने परिवार के किसी सदस्य की देखभाल करता है।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि राज्य सरकार विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण को भी सर्वाेच्च प्राथमिकता दे रही है। प्रदेश में वन संरक्षण, हरित आवरण में वृद्धि, जल संरक्षण, जैव विविधता के संवर्धन तथा जनभागीदारी आधारित पर्यावरणीय अभियानों को निरंतर बढ़ावा दिया जा रहा है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि श्एक पेड़ मां के नाम 3.0श् अभियान प्रदेश के गांव-गांव, शहर-शहर और प्रत्येक परिवार तक पहुंचेगा तथा प्रकृति संरक्षण को सामाजिक दायित्व और जन आंदोलन का स्वरूप प्रदान करेगा। उन्होंने कहा कि यदि प्रत्येक नागरिक अपनी मां के नाम पर एक पौधा लगाकर उसके संरक्षण का संकल्प ले, तो आने वाले वर्षों में उत्कृष्ट मॉडल बन सकता है।
कार्यक्रम में विधानसभा के सभी सदस्यों ने उत्साहपूर्वक भाग लेते हुए अपनी माताओं के नाम पर विभिन्न प्रजातियों के पौधे लगाए और उनके संरक्षण का संकल्प लिया। इस अवसर पर प्रमुख सचिव, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग श्री मनोज कुमार पिंगुआ, प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं वन बल प्रमुख श्री अरुण पाण्डेय सहित अनेक वरिष्ठ अधिकारी, जनप्रतिनिधि तथा वन विभाग के अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित थे।
]]>10 हजार रूपए की सरकारी योजना से हुई शुरुआत
अशोक कुमार की इस कामयाबी की नींव पशुधन विकास विभाग द्वारा वर्ष 2024-25 में संचालित सूकर प्रजनन वितरण योजना से पड़ी। पशु औषधालय कुरी के माध्यम से उन्हें 21 जून 2024 को 2 मादा एवं 1 नर सूकर की एक इकाई उपलब्ध कराई गई। इस पूरी इकाई की कुल लागत 10 हजार रूपए थी, जिसमें शासन द्वारा 90 प्रतिशत का भारी-भरकम अनुदान (सब्सिडी) दिया गया। अशोक को हितग्राही अंशदान के रूप में महज 10 प्रतिशत की मामूली राशि देनी पड़ी।
परंपरागत ढर्रे को छोड़ अपनाया वैज्ञानिक तरीका
योजना का लाभ मिलने से पहले अशोक के पास परंपरागत तरीके से पाले जा रहे केवल 6 सूकर थे, जिससे परिवार का गुजारा बड़ी मुश्किल से होता था। लेकिन सरकारी मदद मिलते ही उन्होंने वैज्ञानिक पद्धति को अपनाया। पशुधन विकास विभाग के अधिकारियों के तकनीकी मार्गदर्शन में उन्होंने सूकरों का समय पर टीकाकरण सुनिश्चित किया। सूकरों का नियमित स्वास्थ्य परीक्षण और संतुलित आहार प्रबंधन पर ध्यान दिया और उन्नत प्रजनन तकनीकों का इस्तेमाल किया। वैज्ञानिक देखरेख का यह सुखद परिणाम रहा कि उनके फार्म में सूकरों की संख्या देखते ही देखते 266 तक पहुंच गई।
सूकर बेचकर कमाए 2.22 लाख रूपए की शुद्ध आय
इस बेहतर प्रबंधन से अशोक को लगातार आर्थिक लाभ मिलना शुरू हो गया। वर्ष 2025 में उन्होंने 7 सूकरों का विक्रय कर अतिरिक्त आय अर्जित की। उनकी मेहनत का सबसे बड़ा प्रतिफल 12 जुलाई 2026 को मिला, जब उन्होंने अपने फार्म से 37 पूरी तरह स्वस्थ सूकरों का विक्रय किया। बाजार में औसतन 6,000 प्रति सूकर की दर से उन्हें एकमुश्त 2 लाख 22 हजार रूपए (दो लाख बाइस हजार रुपये) की शानदार शुद्ध आय प्राप्त हुई। इतनी बड़ी संख्या में सूकर बेचने के बाद भी वर्तमान में उनके फार्म में 15 वयस्क सूकर और 7 बच्चे शेष हैं, जो आगे भी उनकी आमदनी का स्थायी जरिया बने रहेंगे।
एक बड़े बिजनेस के रूप में खड़ा करने में मदद मिली
प्रगतिशील पशुपालक श्री अशोक कुमार चांद ने कहा कि पशुधन विकास विभाग के अधिकारियों द्वारा समय-समय पर दिए गए तकनीकी परामर्श, रोग नियंत्रण और व्यावहारिक प्रशिक्षण से मुझे इस व्यवसाय को एक बड़े बिजनेस के रूप में खड़ा करने में मदद मिली। इससे पशुओं की मृत्यु दर में भारी कमी आई और मेरा जोखिम पूरी तरह खत्म हो गया।
स्वरोजगार के लिए बने प्रेरणास्रोत
सूकर पालन से हुई अतिरिक्त आय से अशोक अब अपने बच्चों के लिए उच्च शिक्षा, परिवार के लिए बेहतर पोषण और भविष्य की आर्थिक सुरक्षा सुनिश्चित कर रहे हैं। उनकी इस बड़ी कामयाबी को देखकर अब आसपास के गांवों के अन्य ग्रामीण और युवा भी पशुपालन को स्वरोजगार के एक प्रभावी माध्यम के रूप में अपनाने के लिए प्रेरित हो रहे हैं।
]]>नारायणपुर के घने जंगलों और दुर्गम पहाड़ियों के बीच बसी अबूझमाड़ की सदियों पुरानी पाक संस्कृति ने आज छत्तीसगढ़ विधानसभा के गलियारों में अपनी अनूठी छाप छोड़ी। विधानसभा परिसर में आयोजित एक विशेष खाद्य प्रदर्शनी में जब जनप्रतिनिधियों के सामने अबूझमाड़ के पारंपरिक और स्वास्थ्यवर्धक व्यंजन परोसे गए, तो हर कोई इस समृद्ध विरासत का मुरीद हो गया। यह आयोजन केवल व्यंजनों का प्रदर्शन मात्र नहीं था, बल्कि नारायणपुर की जनजातीय संस्कृति, स्थानीय कृषि उत्पादों और महिला सशक्तिकरण की एक शानदार सफलता की कहानी है।
अरक चावल- प्रकृति की सुगंध और अनमोल विरासत
इस विशेष आयोजन में सबसे बड़ा आकर्षण रहा अबूझमाड़ का पारंपरिक श्अरक चावलश्। हल्के पीले रंग और अपनी भीनी-भीनी प्राकृतिक खुशबू के लिए पहचाने जाने वाले इस चावल से बनी खीर ने विधानसभा में मौजूद सभी मंत्रियों, विधायकों और अतिथियों का दिल जीत लिया।
इस खीर का स्वाद चखने के बाद जनप्रतिनिधियों ने इसकी मुक्त कंठ से प्रशंसा की और इसे छत्तीसगढ़ की एक अनमोल और दुर्लभ खाद्य धरोहर बताया।
मार्गदर्शन और सामूहिक प्रयासों से मिली नई पहचान
अबूझमाड़ के इन पारंपरिक स्वादों को सुदूर अंचलों से निकालकर राज्य के शीर्ष सदन तक पहुँचाने का यह सफर आसान नहीं था। इस पूरी पहल को धरातल पर उतारने में महत्वपूर्ण भूमिका रही। वन मंत्री श्री केदार कश्यप और नारायणपुर कलेक्टर,जिनके मार्गदर्शन और दूरदर्शी प्रयासों ने इस आयोजन को एक बड़े मंच पर स्थापित किया।
महिला आत्मनिर्भरता और संस्कृति का सशक्त संगम
इस आयोजन ने छत्तीसगढ़ की समृद्ध सांस्कृतिक धरोहर को तो प्रदर्शित किया ही, साथ ही स्थानीय महिलाओं के कौशल और आत्मनिर्भरता को भी एक नया आयाम दिया है। स्व-सहायता समूह की दीदियों ने अपनी कड़ी मेहनत से साबित कर दिखाया कि यदि सही मंच मिले, तो वनांचल के पारंपरिक ज्ञान को राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर सराहा जा सकता है। अबूझमाड़ की पाक परंपरा केवल भोजन नहीं, बल्कि हमारी जीवनशैली और प्रकृति के प्रति सम्मान का प्रतीक है। विधानसभा में मिला यह सम्मान हमारे पारंपरिक कृषि उत्पादों और स्थानीय महिलाओं की आत्मनिर्भरता को एक नई दिशा देगा।
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