खरसिया (वीएनएस)। सोमवार से शुरू इम्यूनाइजेशन को लेकर किशोरों में विशेष उत्साह देखा गया। हालांकि परीक्षाओं ने परिणाम को कुछ प्रभावित जरूर किया। बावजूद खरसिया ब्लॉक ने लक्ष्य के मुकाबले 720 में से 527 अर्थात 73 प्रतिशत किशोरवर्ग के टीकाकरण में सफलता प्राप्त की।
परीक्षाओं के बावजूद भी किशोर वर्ग के टीकाकरण के पहले दिन अभियान को पर्याप्त सफलता प्राप्त हुई। वहीं ब्लॉक में किशोर वर्ग के टीकाकरण को लेकर कुल 9 केंद्र बनाए गए। जिसमें सिविल अस्पताल खरसिया, सीएचसी चपले, पीएचसी बिंजकोट, पीएचसी सोंड़का, पीएचसी तुरेकेला, पीएचसी सरवानी, पीएचसी जोबी, पीएचसी बर्रा एवं पीएचसी गोरपार केंद्रों में बीएमओ डॉ.अभिषेक पटेल की सतत निगरानी रही। वहीं मेडिकल स्टाफ ने देर शाम तक अपनी ड्यूटी निभाते हुए अधिक से अधिक किशोरों के टीकाकरण का प्रयास किया।
मानसी ने लगवाया पहला टीका
ग्राम छोटे डूमरपाली निवासी कक्षा दसवीं की छात्रा कुमारी मानसी दर्शन ने सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र चपले पहुंचकर कोरोना का पहला टीका लगवाया। वहीं मानसी ने समस्त छात्र-छात्राओं को प्रेरणा देते हुए कहा कि यह टीका हमारे जीवन की रक्षा एवं बेहतर स्वास्थ्य के लिए है। इसलिए हर हाल में हम सभी को किसी भी प्रकार के वहम को छोड़ते हुए कोरोना का टीका जरूर लगवाना चाहिए।
रायगढ़ (वीएनएस)। दृढ़ निश्चय के साथ कड़ी मेहनत से हर व्यक्ति सफलता हासिल सकता है, इसे रायगढ़ की पुसौर विकासखण्ड के ग्राम जकेला निवासी चन्द्रमा प्रधान ने सही साबित किया है। उन्होंने अपने हौसलों से एक सामान्य गृहणी से सफल उद्यमी बनने तक की राह तय की है। अपनी सफलता से वह अब अपने समान अनेक गृहणियों के लिए एक मिसाल बन गई हैं।
चन्द्रमा प्रधान घरेलू कामकाजी महिला थी, लेकिन उनके मन में कुछ करने की ललक और चाह हमेशा से थी। इसी बीच उन्हें खादी ग्रामोद्योग बोर्ड की योजनाओं के बारे में पता चला। उन्होंने जिला पंचायत रायगढ़ में जाकर खादी ग्रामोद्योग विभाग में संपर्क किया। विभाग में उन्हे प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम योजना की जानकारी दी गई। जानकारी मिलने पर चन्द्रमा में काम शुरू करने का उत्साह फिर से जागा और उन्होंने पेयजल संबंधी मिनरल वॉटर प्लांट के लिए वर्ष 2020-21 में ऑनलाईन आवेदन कर दिया। उन्हें सरकार से व्यवसाय के लिए 25 लाख रूपये का ऋण मिला। महिला होने के कारण उन्हे लगभग 35 प्रतिशत ग्रामोद्योग विभाग से अनुदान प्राप्त हुआ। आज उनका उद्योग प्रधान मिनरल वॉटर के नाम से स्थापित हो गया है। यहां सुचारू रूप से मिनरल वाटर बनाया जा रहा है।
श्रीमती प्रधान अपने मिनरल वॉटर प्लांट से पानी पाऊच, केन तैयार करती हैं, जिसका विक्रय आस-पास के क्षेत्र के साथ रायगढ़ जिला मुख्यालय, एनटीपीसी लारा एवं रायगढ़-ओड़िसा के आसपास के इलाकों में किया जा रहा है। उन्होंने उद्योग से अपने बेटों को स्वरोजगार के साथ स्थानीय लोगों को भी रोजगार उपलब्ध कराया है। मिनरल वॉटर प्लांट से उन्हें प्रति माह लगभग 25 से 30 हजार रूपये शुद्ध लाभ प्राप्त हो रहा है। इससे उनके सामाजिक एवं आर्थिक स्थिति में लगातार सुधार हो रहा है। चन्द्रमा प्रधान ने उनके स्वावलंबी बनने में सहायता के लिए विभाग सहित सरकार का आभार व्यक्त किया है।

रायगढ़ (वीएनएस)। कोयला मंत्रालय ने कोल ब्लॉक की कमर्शियल नीलामी के लिए 14 वीं सूची जारी कर दी है। इसमें 99 कोल ब्लॉक रखे गए हैं। रायगढ़ जिले से एक बड़ी खदान गारे पेलमा 4/6 को शामिल किया गया है। यह खदान कई कंपनियों की रडार में है। सरकार ने कंपनियों से बोली मंगवाई है।
जिले के कोयला खदानों के इतिहास में गारे पेलमा 4/6 का नाम अलग से लिया जाता रहा है। पूर्व में जेएसपीएल को इस माइंस का आवंटन हुआ था लेकिन जनसुनवाई ने तमनारवासियों को दर्द दिया है, वह अभी तक उसे याद करके सिहर उठते हैं। कोल ब्लॉक की पर्यावरणीय सम्मति के लिए हुई जनसुनवाई में लाठीचार्ज हो गया था। गारे में इस घटना के बाद भी जनसुनवाई के पूरा होने का दावा किया गया लेकिन एनजीटी में इसके खिलाफ अपील की गई। अदालत ने दोबारा जनसुनवाई कराने को कहा था। 2012 में दोबारा जनसुनवाई कराई गई थी। इसके खिलाफ भी अपील की गई थी क्योंकि जनसुनवाई स्थल प्रोजेक्ट एरिया से बाहर था। नीलामी की वेबसाइट से मिली जानकारी के मुताबिक सरकार ने खदान के लिए पर्यावरण क्लीयरेंस दे दिया है। माइनिंग लीज स्वीकृत नहीं की गई थी। सुप्रीम कोर्ट ने सभी कोल ब्लॉकों का आवंटन रद्द किया था तब से यह माइंस अविकसित ही है। अब यह खदान फिर से सुर्खियों में है। कोल मिनिस्ट्री ने गारे पेलमा 4/6 को नीलामी की 14 वीं सूची में डाला है। इस बार कमर्शियल यूज के लिए नीलामी की जाएगी। इसके साथ रायगढ़ जिले से डोलेसरा, जरेकेला समेत पांच दूसरी माइंस भी हैं।
तीन गांव हो सकते हैं विस्थापित : गारे पेलमा 4/6 के डेवलपमेंट का हमेशा से पुरजोर विरोध होता रहा है। इसकी वजह गांवों की आबादी का विस्थापन है। गारे, खम्हरिया, सरसमाल और सराईटोला निवासी ग्रामीण इस माइंस के विकसित होने पर भूमिहीन हो जाएंगे। पूर्व में इसीलिए जनसुनवाई में आक्रोश फूटा था। जिसकी वजह से लाठीचार्ज हुआ। करीब 119 हे. भूमि अधिग्रहित बताई जा रही है लेकिन अभी भी बड़ा भूभाग अधिग्रहण से बचा है।