जेफरीज ने जेएसडब्ल्यू एनर्जी पर अपनी ‘बाय’ रेटिंग बरकरार रखी है और इसका टारगेट प्राइस 660 रुपये से बढ़ाकर 675 रुपये तय कर दिया है. ब्रोकरेज हाउस को मौजूदा स्तरों से इस शेयर में करीब 31% तक की जोरदार उछाल आने की संभावना नजर आ रही है. कंपनी के आक्रामक विस्तार प्लान और मजबूत फंडामेंटल्स शेयर को सहारा देंगे.
]]>विदेशी निवेशकों ने जिन सेक्टर के शेयर सबसे ज्यादा बेचे हैं, उनमें वित्तीय सेवाएं, तेल और गैस, ऑटोमोटिव (ऑटो) और ऑटो कम्पोनेंट, एफएमसीजी, उपभोक्ता सेवाएं, निर्माण और बिजली शामिल हैं. इन सात क्षेत्रों में एफआईआई की बिकवाली 2.04 लाख करोड़ रुपये रुपये रही है, जो कुल बिक्री का 96 फीसदी है. विदेशी निवेशकों ने 52,488 करोड़ रुपये मूल्य के वित्तीय सेवा क्षेत्र के शेयर बेचे. तेल और गैस शेयरों में 50,565 करोड़ रुपये, ऑटो शेयरों में 32,067 करोड़ रुपये, एफएमसीजी में 28,108 करोड़ रुपये और उपभोक्ता सेवा शेयरों में 17,005 करोड़ रुपये की बिकवाली की है. बिकवाली के बावजूद, वित्तीय सेवा क्षेत्र में एफपीआई का सर्वाधिक सेक्टोरल आवंटन (30.83 फीसदी) बना रहा. इसके बाद 9.87 फीसदी के साथ आईटी और 7 फीसदी के साथ तेल, गैस एवं उपभोग योग्य ईंधन का स्थान रहा है.
इन सेक्टरों में लगाया पैसा
भारतीय शेयरों की भारी बिकवाली के बीच कुछ सेक्टरों में एफआईआई ने पैसा भी लगाया है. जिन सेक्टरों में निवेश किया है उनमें सूचना प्रौद्योगिकी, रियल एस्टेट और दूरसंचार प्रमुख हैं. एफपीआई ने सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्र में 6,000 करोड़ रुपये, रियल एस्टेट में 3,258 करोड़ रुपये और दूरसंचार शेयरों में 738 करोड़ रुपये का निवेश किया है. टेक्स्टाइल और केमिकल शेयरों में भी विदेशी निवेशकों ने पैसा लगाया है
फिक्स्ड ब्याज दर वह होती है, जो लोन की पूरी अवधि के दौरान एक-समान रहती है. इसका मतलब है कि आपकी मासिक EMI (समान मासिक किस्त) लोन अवधि के अंत तक नहीं बदलेगी, चाहे बाजार में ब्याज दरें बढ़ें या घटें. यह विकल्प उन लोगों के लिए उपयुक्त है, जो अपने मासिक बजट में स्थिरता चाहते हैं और भविष्य में ब्याज दरों में संभावित वृद्धि से बचना चाहते हैं. हालांकि, फिक्स्ड ब्याज दरें आमतौर पर फ्लोटिंग दरों की तुलना में 1.5 से 2 फीसदी तक अधिक होती हैं. इसके अलावा, यदि बाजार में ब्याज दरें घटती हैं, तो भी आपकी EMI में कोई कमी नहीं होगी.
फ्लोटिंग ब्याज दर?
दूसरी ओर, फ्लोटिंग ब्याज दरें बाजार की स्थितियों के अनुसार समय-समय पर बदलती रहती हैं. ये दरें किसी बेंचमार्क, जैसे कि बैंक के रेपो रेट या RBI की रेपो दर से जुड़ी होती हैं. यदि बेंचमार्क दर बढ़ती है तो आपकी ब्याज दर और EMI भी बढ़ेगी. और यदि घटती है, तो EMI कम हो सकती है. फ्लोटिंग दरों का मुख्य लाभ यह है कि ये फिक्स्ड दरों की तुलना में कम हो सकती हैं, जिससे आपको कुल ब्याज भुगतान में बचत हो सकती है. हालांकि, इनकी अनिश्चितता के कारण मासिक बजट की प्लानिंग करना ज़रा चुनौतीपूर्ण हो सकता है.
आरबीआई ने कहा- स्विच कर पाएंगे लोन लेने वाले
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने हाल ही में स्पष्ट किया है कि लोन लेने वालों को ब्याज दर के प्रकार को बदलने का विकल्प मिलेगा. नए दिशानिर्देशों के तहत, बैंक और वित्तीय संस्थान लोन की शर्तों को रीसेट करते समय उधारकर्ताओं को फिक्स्ड और फ्लोटिंग दरों के बीच स्विच करने का विकल्प प्रदान करने के लिए बाध्य हैं. इस परिवर्तन से उपभोक्ताओँ को अपने लोन की शर्तों पर अधिक नियंत्रण मिलेगा और ब्याज दरों में उतार-चढ़ाव के प्रभाव को कम करने में मदद मिलेगी.
आपके लिए कौन-सी सही?
फिक्स्ड और फ्लोटिंग ब्याज दरों के बीच चयन करना आपके वित्तीय लक्ष्यों, जोखिम सहनशीलता और बाजार की स्थितियों पर निर्भर करता है. यदि आप स्थिरता और पूर्वानुमानित EMI चाहते हैं, तो फिक्स्ड ब्याज दर उपयुक्त हो सकती है. वहीं, यदि आप बाजार की स्थितियों के अनुसार ब्याज दरों में संभावित कमी का लाभ उठाना चाहते हैं और जोखिम लेने के लिए तैयार हैं, तो फ्लोटिंग ब्याज दर एक बेहतर विकल्प हो सकता है. निर्णय लेने से पहले अपने वित्तीय स्थिति, जोखिम सहनशीलता और भविष्य की योजनाओं पर विचार करना महत्वपूर्ण है.
सरकार का कहना है कि अगले 1-2 हफ्तों में कीमतों में और गिरावट आएगी, क्योंकि बिहार और झारखंड से मजदूर त्योहारी छुट्टियों के बाद प्याज उत्पादक केंद्रों पर लौटने लगे हैं. इसके अलावा, राजस्थान, विशेष रूप से अलवर से प्याज की आपूर्ति बढ़ने से भी कीमतों में कमी आएगी.
ट्रेन से दिल्ली आ रहा प्याज
सरकारी सहकारी संस्थाएं नैफेड और एनसीसीएफ ने देश की राजधानी दिल्ली में प्याज की कीमतों को नियंत्रित करने के लिए ट्रेनों के जरिए प्याज मंगवा रही है. ट्रेनों के जरिए 3,170 टन प्याज दिल्ली-एनसीआर में पहुंचाया जाएगा. टाइम्स ऑफ इंडिया की एक रिपोर्ट के अनुसार, उपभोक्ता मामलों के विभाग के एक अधिकारी ने बताया, “12 नवंबर को 730 टन प्याज लेकर एक ट्रेन दिल्ली पहुंची और शनिवार को 840 टन प्याज की एक और खेप राजधानी पहुंचेगी. यह नई आपूर्ति खुदरा बाजार में दखल के लिए इस्तेमाल की जाएगी. हमें उम्मीद है कि अगले 7-10 दिनों में कीमतों में और गिरावट आएगी.”
मजदूरों की कमी ने बढ़ाई मुश्किलें
त्योहारी सीजन के दौरान, नासिक में प्याज की छंटाई के लिए मजदूरों की कमी के कारण आपूर्ति बाधित हुई थी. प्याज की छंटाई मैन्युअल रूप से की जाती है, जिसमें आकार, गुणवत्ता और अन्य मापदंडों का ध्यान रखा जाता है. आजादपुर मंडी के प्याज व्यापार संघ के अध्यक्ष श्रीकांत मिश्रा ने कहा, “प्याज की कीमतों में स्थिरता आने में एक महीने का समय लग सकता है. इस साल कीमतें असामान्य रूप से ऊंची रही हैं. खरीफ फसल की आवक से कीमतों में कमी की उम्मीद है. अगले कुछ दिनों में आपूर्ति बढ़ने से स्थिति में सुधार होगा.
सरकार का कहना है कि अगले 1-2 हफ्तों में कीमतों में और गिरावट आएगी, क्योंकि बिहार और झारखंड से मजदूर त्योहारी छुट्टियों के बाद प्याज उत्पादक केंद्रों पर लौटने लगे हैं. इसके अलावा, राजस्थान, विशेष रूप से अलवर से प्याज की आपूर्ति बढ़ने से भी कीमतों में कमी आएगी.
ट्रेन से दिल्ली आ रहा प्याज
सरकारी सहकारी संस्थाएं नैफेड और एनसीसीएफ ने देश की राजधानी दिल्ली में प्याज की कीमतों को नियंत्रित करने के लिए ट्रेनों के जरिए प्याज मंगवा रही है. ट्रेनों के जरिए 3,170 टन प्याज दिल्ली-एनसीआर में पहुंचाया जाएगा. टाइम्स ऑफ इंडिया की एक रिपोर्ट के अनुसार, उपभोक्ता मामलों के विभाग के एक अधिकारी ने बताया, “12 नवंबर को 730 टन प्याज लेकर एक ट्रेन दिल्ली पहुंची और शनिवार को 840 टन प्याज की एक और खेप राजधानी पहुंचेगी. यह नई आपूर्ति खुदरा बाजार में दखल के लिए इस्तेमाल की जाएगी. हमें उम्मीद है कि अगले 7-10 दिनों में कीमतों में और गिरावट आएगी.”
मजदूरों की कमी ने बढ़ाई मुश्किलें
त्योहारी सीजन के दौरान, नासिक में प्याज की छंटाई के लिए मजदूरों की कमी के कारण आपूर्ति बाधित हुई थी. प्याज की छंटाई मैन्युअल रूप से की जाती है, जिसमें आकार, गुणवत्ता और अन्य मापदंडों का ध्यान रखा जाता है. आजादपुर मंडी के प्याज व्यापार संघ के अध्यक्ष श्रीकांत मिश्रा ने कहा, “प्याज की कीमतों में स्थिरता आने में एक महीने का समय लग सकता है. इस साल कीमतें असामान्य रूप से ऊंची रही हैं. खरीफ फसल की आवक से कीमतों में कमी की उम्मीद है. अगले कुछ दिनों में आपूर्ति बढ़ने से स्थिति में सुधार होगा.
LPG सिलेंडर के दाम
आमतौर हर महीने की एक तारीख को सरकार एलपीजी के दाम में बदलाव करती है. कमर्शियल गैस सिलेंडर से लेकर रसोई गैस के दाम में बदलाव देखा जाता है. ऐसे में इस बार भी एलपीजी सिलेंडर के दाम में बदलाव की उम्मीद की जा रही है. अक्टूबर में कमर्शियल LPG गैस सिलेंडर के दाम बढ़े थे, जबकि घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया गया. इस बार 14 किलो वाले एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में कटौती होने की उम्मीद जताई जा रही है.
म्यूचुअल फंड्स में इनसाइडर ट्रेडिंग रोकने के लिए लागू होंगे नए नियम
अगर आप म्यूचुअल फंड में पैसा लगाते हैं या लगाने की सोच रहे हैं तो इसस जुड़ा एक नियम जान लें, जो 1 नवंबर से लागू होने जा रहा है. सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया (SEBI) ने म्यूचुअल फंड्स में इनसाइडर ट्रेडिंग को रोकने के लिए नए नियम जारी किए हैं. ये नियम 1 नवंबर से लागू होगा. सेबी ने म्यूचुअल फंड यूनिट्स को ‘इनसाइडर ट्रेडिंग’ नियमों के तहत शामिल किया है यानी अब म्यूचुअल फंड्स के यूनिट्स पर भी वैसे ही नियम लागू होंगे जैसे अन्य सिक्योरिटीज पर होते हैं.
SBI क्रेडिट कार्ड के नियम में बदलाव
एसबीआई के क्रेडिट कार्ड के जरिए एक स्टेटमेंट साइकिल में 50 हजार रुपये से ज्यादा के यूटिलिटी बिल पेमेंट पर 1 फीसदी एक्सट्रा चार्ज लिया जाएगा. एसबीआई ने शौर्य/डिफेंस क्रेडिट कार्ड को छोड़कर सभी अनसिक्योर्ड क्रेडिट कार्ड के फाइनेंस चार्ज में भी बदलाव किया है. अब एसबीआई के अनसिक्योर्ड क्रेडिट कार्ड पर 3.75 फीसदी फाइनेंस चार्ज लगेगा. ये नियम भी 1 नवंबर, 2024 से लागू होंगे.
1 नवंबर से कॉलिंग का बदलेगा ये नियम
1 नवंबर से मैसेज ट्रैसेबिलिटी लागू हो जाएगा. सरकार ने टेलीकॉम कंपनियों को मैसेज ट्रैसेबिलिटी लागू करने का निर्देश दिया है. मोबाइल पर आने वाले मैसेज की जांच की जा सकेगी. इससे फेक कॉल्स और स्पैम को रोकने के लिए कुछ कीवर्ड्स की पहचान की जाएगी.
13 दिनों तक बैंकों में कोई काम नहीं
भारतीय रिजर्व बैंक ने नवंबर के लिए बैंक हॉलिडे लिस्ट जारी कर दी है. इसके मुताबिक, नवंबर में कुल 13 दिन बैंकों में छु्ट्टी रहेगी. ऐसे में बेहतर होगा कि आप नवंबर के लिए छोड़े गए कामों के लिए ब्रांच जाने से पहले बैंकों की छुट्टियों की लिस्ट जरूर देख लें.
विदेशी कोषों की निकासी के मामले में अक्टूबर का महीना सबसे खराब साबित हो रहा है. मार्च, 2020 में, एफपीआई ने शेयरों से 61,973 करोड़ रुपये निकाले थे. इससे पहले सितंबर में एफपीआई ने भारतीय शेयर बाजार में 57,724 करोड़ रुपये का निवेश किया था, जो उनके निवेश का नौ माह का उच्चस्तर है. डिपॉजिटरी के आंकड़ों के अनुसार, जून से विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक लगातार लिवाल बने हुए थे. अप्रैल-मई में उन्होंने जरूर 34,252 करोड़ रुपये की निकासी की थी.
मॉर्निंगस्टार इन्वेस्टमेंट रिसर्च इंडिया के एसोसिएट निदेशक, प्रबंधक शोध हिमांशु श्रीवास्तव ने कहा कि भविष्य में एफपीआई का भारतीय बाजार में निवेश भू-राजनीतिक स्थिति और ब्याज दरों में उतार-चढ़ाव जैसे वैश्विक घटनाक्रमों पर निर्भर करेगा. उन्होंने कहा कि घरेलू मोर्चे पर मुद्रास्फीति का रुख, कंपनियों के तिमाही नतीजे और त्योहारी सत्र की मांग पर एफपीआई की निगाह रहेगी.
आंकड़ों के अनुसार, एफपीआई ने एक से 25 अक्टूबर के बीच भारतीय शेयर बाजार से शुद्ध रूप से 85,790 करोड़ रुपये निकाले हैं. एफपीआई की निरंतर बिकवाली ने बाजार की धारणा को प्रभावित किया है, जिससे एनएसई का निफ्टी अपने शीर्ष स्तर से आठ प्रतिशत नीचे आ गया है.
जियोजीत फाइनेंशियल सर्विसेज के मुख्य निवेश रणनीतिकार वी के विजयकुमार ने कहा कि एफपीआई की निरंतर बिकवाली के रुख में तत्काल बदलाव आने की संभावना नहीं है. चीन के प्रोत्साहन उपायों की वजह से एफपीआई वहां के बाजार का रुख कर रहे हैं. इसके अलावा भारत में मूल्यांकन ऊंचा होने की वजह से भी एफपीआई बिकवाल बने हुए हैं.
बॉन्ड बाजार से भी निकाले पैसे
आंकड़ों के अनुसार, एफपीआई ने समीक्षाधीन अवधि के दौरान बॉन्ड से सामान्य सीमा के माध्यम से 5,008 करोड़ रुपये निकाले हैं और स्वैच्छिक प्रतिधारण मार्ग (वीआरआर) से 410 करोड़ रुपये का निवेश किया. इस साल अब तक एफपीआई ने शेयरों में 14,820 करोड़ रुपये और ऋण या बॉन्ड बाजार में 1.05 लाख करोड़ रुपये का निवेश किया है.
प्रॉपर्टी मामलों के जानकार प्रदीप मिश्रा का कहना है कि अगर आप प्रॉपर्टी खरीदने जा रहे हैं तो कुछ चीजों को बिना चेक किए सौदा न करें. खास बात ये है कि री-सेल पर कोई संपत्ति अगर खरीद रहे तो किन बातों का ध्यान रखना जरूरी होगा. अगर इन चीजों को कुछ परख के साथ खरीदा जाय तो मालिकाना हक को लेकर विवाद की स्थिति नहीं बनेगी. लिहाजा आप 5 चीजों को ध्यान में रखकर ही अपना सौदा पूरा करें.
प्रॉपर्टी का ओरिजनल डॉक्यूमेंट मांगें
री-सेल पर कोई संपत्ति खरीदते समय उसके मालिक से वास्तविक कागज की मांग करें. संपत्ति का कोई भी स्वामी, संपत्ति की बिक्री से पहले आपको ओरिजनल कागज नहीं सौंपेगा, लेकिन अपनी तसल्ली के लिए आप उन्हें दिखाने के लिए कह सकते हैं. साथ ही एक बार बयाना या टोकन मनी देने के बाद उससे उन कागजात की फोटो प्रति देने के लिए कह सकते हैं, जिससे उन कागजों की वास्तविकता का पता लगवाया जा सके. इन कागजात में सेल डीड, सेल की चेन अर्थात उस संपत्ति को पूर्व में कितनी बार बेचा गया और किसने खरीदा, टाइटल, लैंड यूज, पूर्व में की गई पेमेंट की मूल रसीदें, कब्जा यानी पजेशन सर्टीफिकेट आदि की जांच करा सकते हैं.
प्रॉपर्टी का टाइटल जरूर देखें
संपत्ति की खरीद-फरोख्त में टाइटल का अर्थ उसके स्वामी यानी मालिक से होता है. साथ ही उस संपत्ति को बेचने का अधिकार भी उसे मिलता है. यह देखने वाली बात है कि संपत्ति का मालिक जिस टाइटल पर अपना दावा कर रहा है या जिस संपत्ति पर अपना स्वामित्व बता रहा है, उसे उस संपत्ति का स्वामित्व किस तरह मिला है. क्या उस व्यक्ति ने वह संपत्ति अपने खुद के पैसों से खरीदी है? क्या वह उस संपत्ति का सह-स्वामित्व रखता है या फिर उसे वह संपत्ति अपने पूर्वजों के जरिये वसीयत, उपहार स्वरूप या फिर देश के अन्य प्रावधानों के जरिये प्राप्त हुई है. संपत्ति का टाइटल स्पष्ट हो जाने के बाद आप उस संपत्ति में निवेश के लिए कदम बढ़ा सकते हैं. टाइटल की जांच के लिए सब रजिस्ट्रार कार्यालय जा सकते हैं.
बेचने वाले की भी पुष्टि करें
संपत्ति के टाइटल की जानकारी पुष्ट करने के बाद आप खरीदार के बारे में भी जानकारी जुटाना न भूलें. आप उससे सीधे पूछ सकते हैं कि कहीं उस संपत्ति में किसी तरह का सह-स्वामित्व तो नहीं है. इसका मतलब यह है कि क्या वह व्यक्ति अकेले ही उस संपत्ति को बेचने का अधिकार रखता है या फिर उसकी बिक्री में किसी अन्य व्यक्ति की सहमति की जरूरत है. किसी मानसिक तौर पर बीमार व्यक्ति से खरीदी गई संपत्ति भी आपको झंझटों में फंसा सकती है. इसलिए पहले ही यह जानकारी भी प्राप्त कर लें कि संपत्ति का विक्रेता मानसिक रूप से पूरी तरह स्वस्थ है.
उपयोग और निर्माण की जांच
संपत्ति के स्वामी और स्वामित्व का निर्धारण हो जाने के बाद आप यह देखें कि आप उस संपत्ति पर किस तरह का निर्माण करवा सकते हैं और आप उसका कैसा इस्तेमाल कर सकते हैं? संभव है कि आपका मन कोई ऐसी संपत्ति लेने का हो जिसके भूतल पर आप दुकान बनवा लें और ऊपर के तलों पर मकान बनवाकर किराया लेना चाहते हों. इसी तरह आप कोई कृषि भूमि लेने पर विचार कर रहे हों जिसे आप फार्म हाउस के रूप में विकसित करवाना चाहते हों. इसका पता आपको लोकल एजेंसियों या जोनल प्लानिंग कार्यालयों से हो जाएगा कि आपकी प्रॉपर्टी पर क्या-क्या करने की इजाजत है.
सेल डीड और चेन भी जांचें
हर तरफ से निश्चिंत हो जाने के बाद सेल डीड की बारी आती है. यह वह दस्तावेज होता है जो यह बताता है कि विक्रेता के जरिये किन शर्तों और किस दाम पर क्रेता उस संपत्ति को खरीदेगा. इस दस्तावेज में संपत्ति के आकार और उपयोग जैसी चीजों का जिक्र भी किया जाता है. सेल डीड बनवाते समय यह ध्यान रखें कि यह दस्तावेज एक पक्षीय न हो साथ ही उसमें यह लिखवाना न भूलें कि संपत्ति खरीद लेने के बाद भी यदि संपत्ति खरीदे जाने के पहले किसी तरह का कोई बकाया होगा तो वह रकम विक्रेता द्वारा ही दी जाएगी. इसी तरह पूर्व में वह संपत्ति कितनी बार बिकी है और उसका स्वामित्व किन लोगों के पास कितने समय तक के लिए रहा है, यह सभी जानकारियां लेना न भूलें.
पजेशन सर्टीफिकेट और वेरीफिकेशन
संपत्ति की खरीद के लिए अंतिम रकम देने से पहले यह भी सुनिश्चित कर लें कि उस संपत्ति पर उसी व्यक्ति का पजेशन यानी कब्जा है जिससे आप उसे खरीद रहे हैं. यदि उस संपत्ति में कोई किरायेदार रह रहा हो तो अपने नाम पर रजिस्ट्री करवाने से पहले ही आप विक्रेता से संपत्ति खाली कराने को कहें. इसके बाद सुनिश्चित भी कर लें कि संपत्ति खाली हो चुकी है और विक्रेता के कब्जे में संपत्ति आ चुकी है. जैसे ही रजिस्ट्री हो जाय संपत्ति को आप अपने कब्जे में ले लें और अपना ताला भी उस पर लगा दें. इस बात को आप दो दैनिक समाचार पत्रों में विज्ञापन के तौर पर प्रकाशित करवा सकते हैं कि आप वह संपत्ति खरीदने जा रहे हैं और यदि किसी व्यक्ति को आपत्ति हो या उसे लेकर उसका कोई दावा करना हो तो वह आपसे संपर्क कर सकता है.