– संजय अग्रवाल, सचिव, कृषि और किसान कल्याण विभाग, भारत सरकार
हालांकि भारतीय अर्थव्यवस्था में कृषि क्षेत्र की हिस्सेदारी पिछले कुछ वर्षों में लगातार बढ़ी है, लेकिन भारत के आर्थिक और सामाजिक ताने-बाने में इस क्षेत्र का महत्व इस संकेतक से बहुत अधिक है। सबसे पहले, भारत के लगभग तीन-चौथाई परिवार ग्रामीण आय पर निर्भर हैं और देश की खाद्य सुरक्षा, अनाज के उत्पादन के साथ-साथ फलों और सब्जियों के उत्पादन में वृद्धि पर निर्भर करती है, ताकि बढ़ती जनसंख्या, जिनकी आय में निरंतर वृद्धि हो रही है, की मांगों को पूरा किया जा सके। ऐसा करने के लिए, एक उत्पादक, प्रतिस्पर्धी, विविध और दीर्घकालिक कृषि क्षेत्र को तेज गति से उभरने की आवश्यकता है।
इस पृष्ठभूमि में, भारत सरकार एक अधिक समावेशी, उत्पादक, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धी और विविधतापूर्ण कृषि क्षेत्र को मज़बूत आधार देने के लिए नीतिगत कार्य तथा सार्वजनिक कार्यक्रमों को शुरू करने के लिए प्रतिबद्ध है- एक ऐसा विज़न, जिसे माननीय प्रधानमंत्री ने ही लोगों के समक्ष रखा है।
कई अर्थशास्त्रियों का सुझाव है कि किसानों को उनकी आय बढ़ाने के लिए और उन्हें कृषि एवं संबद्ध गतिविधियों के साथ-साथ घरेलू जरूरतों से संबंधित खर्चों को पूरा करने में सक्षम बनाने के लिए एक निश्चित प्रकार की दीर्घकालिक वित्तीय सहायता, कृषि छूट देने के विकल्प से कहीं बेहतर है।
देश में किसान परिवारों के लिए ऐसी सकारात्मक व पूरक आय सहायता की आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए, माननीय प्रधानमंत्री ने 24 फरवरी 2019 को किसानों के कल्याण के लिए एक महत्वाकांक्षी योजना- प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि (पीएम-किसान) का शुभारंभ किया। योजना के तहत, पात्र किसान परिवारों को हर चार महीने में 2000 रुपये की तीन समान किस्तों के साथ कुल 6000 रुपये प्रति वर्ष का लाभ प्रदान किया जाता है। आधुनिक डिजिटल तकनीक का उपयोग करते हुए, प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण मोड के माध्यम से लाभ की धनराशि सीधे पात्र लाभार्थियों के बैंक खातों में हस्तांतरित की जाती है।
इस महत्वपूर्ण योजना के शुरू होने के बाद से, पीछे मुड़कर देखने की भी जरूरत नहीं महसूस हुई है। इस योजना ने कई मील के पत्थर पार किए हैं और विश्व बैंक समेत विभिन्न संगठनों ने योजना के व्यापक दृष्टिकोण, बड़े पैमाने और पात्र किसानों के खातों में सीधे धन के निर्बाध हस्तांतरण की प्रक्रिया की प्रशंसा की है। उत्तर प्रदेश के किसानों को लेकर अंतर्राष्ट्रीय खाद्य नीति अनुसंधान संस्थान (आईएफपीआरआई) द्वारा किए गए एक अध्ययन से पता चलता है कि पीएम-किसान के तहत हस्तांतरित लाभ अधिकांश किसानों तक सीधे पहुंचा और उन्हें बिना नुकसान या कमी के पूरी धनराशि प्राप्त हुई। अध्ययन के अनुसार, इस योजना से उन किसान परिवारों को काफी मदद मिली है, जो कृषि पर अपेक्षाकृत अधिक निर्भर हैं
विभिन्न राज्यों/केंद्र-शासित प्रदेशों की सरकारों से त्रुटिरहित, सत्यापित और विधिमान्य डेटा प्राप्त करने के बाद अब तक- 11 करोड़ से अधिक पात्र किसान परिवारों को पीएम– किसान के तहत लाभ प्रदान किया गया है। पात्र परिवारों को कुल 1,60,982 करोड़ रुपये से अधिक की राशि जारी की गई है। और तो और, कोविड अवधि के दौरान पीएम– किसान योजना के तहत किसानों को 1,07,484 करोड़ रुपये हस्तांतरित किए गए हैं। वर्तमान वित्तीय वर्ष 2021-22 में ही, कुल 44,689 करोड़ रुपये से अधिक की राशि जारी की जा चुकी है और माननीय प्रधानमंत्री द्वारा 01 जनवरी 2022 को इसकी दसवीं किस्त जारी किए जाने के साथ यह राशि बढ़कर 65,000 करोड़ रुपये से अधिक हो जाने की उम्मीद है।
जैसा कि इस किस्म की व्यापक आकार की योजनाओं के साथ हमेशा होता है, पीएम-किसान के कार्यान्वयन ने कई चुनौतियों का सफलतापूर्वक सामना किया है। इस योजना को धन के हस्तांतरण के आकार, उसके तौर-तरीकों और उससे संबंधित तंत्र में निरंतर सुधार करते हुए लागू किया जा रहा है। लाभार्थियों को वित्तीय लाभों का सुचारू और त्वरित हस्तांतरण सुनिश्चित करने के उद्देश्य से समय-समय पर कई प्रक्रियात्मक उपाय और अभियान शुरू किए गए हैं। परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए इस योजना के संचालन से संबंधित दिशा-निर्देशों को समय-समय पर संशोधित किया गया है ताकि देश के किसानों के कल्याण के इस प्रशंसनीय काम में सभी राज्यों का योगदान सुनिश्चित किया जा सके। यह योजना वास्तव में सहकारी संघवाद का एक उत्कृष्ट उदाहरण रही है।
इस योजना के तहत किसानों के नाम दर्ज कराने की प्रक्रिया को अब सरल बना दिया गया है। पहले जहां एक किसान को इस योजना के तहत पंजीकरण के लिए राज्य सरकार द्वारा नामित स्थानीय पटवारी/राजस्व अधिकारी/नोडल अधिकारी (पीएम-किसान) से संपर्क करना पड़ता था, वहीं अब पीएम किसान के वेब पोर्टल पर ‘किसान कॉर्नर’ की एक विशेष सुविधा शुरू की गई है जिसके माध्यम से किसान अब अपना पंजीकरण करा सकते हैं। किसान कॉर्नर के माध्यम से किसान अपने आधार कार्ड के अनुरूप पीएम-किसान डेटाबेस में अपना नाम संपादित भी कर सकते हैं। किसान कॉर्नर के माध्यम से वे अपने भुगतान की स्थिति के बारे में भी जान सकते हैं। लाभार्थियों का ग्रामवार विवरण भी ‘किसान कॉर्नर’ पर उपलब्ध है। देश भर के कॉमन सर्विस सेंटर (सीएससी) को भी एक मामूली शुल्क के भुगतान पर इस योजना के लिए किसानों का पंजीकरण करने के लिए अधिकृत किया गया है। किसानों के पंजीकरण को और भी अधिक आसान बनाने के लिए भारत सरकार द्वारा एक विशेष मोबाइल ऐप भी लॉन्च किया गया है। इस योजना के कार्यान्वयन में अधिक पारदर्शिता लाने के उद्देश्य से सभी राज्यों/केंद्र-शासित प्रदेशों को ग्राम सभा स्तर पर सामाजिक आकलन (सोशल ऑडिट) करने के लिए भी कहा गया है। वास्तव में, कुछ राज्यों ने अपने सभी ग्राम सभाओं में इस सामाजिक आकलन (सोशल ऑडिट) को पहले ही पूरा कर लिया है।
जब किसानों के पंजीकरण और पीएम-किसान के तहत प्राप्त लाभों का उपयोग करने में उनकी मदद करने की बात आती है तो हमारे कृषि संस्थान सबसे आगे रहे हैं। इसमें कोई आश्चर्य नहीं कि पीएम-किसान के लाभार्थियों द्वारा आधुनिक तकनीकों को अपनाए जाने में 36 प्रतिशत वृद्धि होने का कारण कृषि विज्ञान केंद्र तक उनकी पहुंच होना है। इसका अर्थ है कि पीएम-किसान योजना से कृषि विज्ञान केंद्रों की उपयोगिता बढ़ी है। इससे इस बात की पुष्टि होती है कि कृषि विज्ञान केंद्र के माध्यम से आधुनिक तकनीकों को अपनाने के लिए प्रेरित करने में पीएम-किसान योजना की महत्वपूर्ण भूमिका है, जो किसानों को कृषि क्षेत्र में लाभदायक निवेश करने के लिए प्रोत्साहित करती है।
अंतर्राष्ट्रीय खाद्य नीति अनुसंधान संस्थान (आईएफपीआरआई) के अध्ययन के अनुसार, पीएम-किसान के तहत नकद राशि प्राप्त करने वाले किसानों की बीज, उर्वरक और कीटनाशक खरीदने में निवेश करने की अधिक क्षमता थी। इसके अलावा, कोविड लॉकडाउन के दौरान किए गए अध्ययनों के अनुसार, सरकारी हस्तांतरण पैकेज के तहत प्राप्त धन ऋण संबंधी बाधाओं को दूर करने और कृषि में निवेश बढ़ाने के संदर्भ में महत्वपूर्ण था।
कई राज्यों के कुछ लाभार्थियों के साथ सीधे बातचीत के दौरान, किसानों में से एक, उत्तराखंड के पौड़ी गढ़वाल जिले के खिर्सू गाँव के एक छोटे किसान यशवंत सिंह ने बताया कि वह अपनी 0.40 हेक्टेयर भूमि में सभी प्रकार की दालें उगाते हैं और वह पीएम-किसान योजना से प्राप्त धनराशि का उपयोग बीज तथा पाइप जैसे अन्य कच्चा माल खरीदने के लिए करते हैं, जो कुशल और उत्पादक खेती के लिए आवश्यक हैं। उनका मानना है कि पीएम-किसान योजना ने उनकी फसलों के लिए कच्चे माल के लिए अतिरिक्त सहायता प्रदान करके प्रत्यक्ष तथा अप्रत्यक्ष रूप से उनकी आय में वृद्धि की है और उनकी कृषि संबंधी अधिकांश जरूरतों के लिए यह एक महत्वपूर्ण सहायता बन गई है।
इसी तरह, जम्मू-कश्मीर के कठुआ जिले के एक किसान राकेश कुमार, जिनके पास 4 एकड़ जमीन है। वे अपनी भूमि पर गन्ना उगाते हैं और अपनी फसलों के लिए उर्वरकों और कीटनाशकों की व्यवस्था करना कोविड महामारी के दौरान उनके लिए मुश्किल था। लेकिन पीएम-किसान के तहत लाभ प्राप्त होना वास्तव में उनके और उनके परिवार के लिए एक बड़ी राहत थी। इस पैसे की मदद से वे समय पर बीज, खाद और कीटनाशक खरीदने में कामयाब रहे।
निस्संदेह, पीएम-किसान योजना का महत्व यह है कि पहली बार मूल्य नीति (इनपुट या आउटपुट) का उपयोग किए बिना किसानों को सीधे धनराशि हस्तांतरित करने का प्रयास किया गया है। यह उन छोटे, सीमांत और जरूरतमंद किसानों को सहायता प्रदान करती है, जो कृषि लागत अथवा तकनीक में निवेश करने के लिए संघर्ष करते हैं। यह एक व्यापक ग्रामीण विकास एजेंडे के लिए एक महत्वपूर्ण पूरक का काम कर सकता है, जिसमें कृषि पर ध्यान केंद्रित करने वाली किसान-समर्थक विकास रणनीति और अंततः किसानों की आय में वृद्धि करना शामिल है।
आईएफपीआरआई के अध्ययन के अनुसार, कई राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में नकद धनराशि हस्तांतरण से पता चला है कि पीएम-किसान योजना का लाभ देश के कमजोर किसानों के लिए अग्रिम रूप से राहत पैकेज साबित हुआ है। कुल मिलाकर, इन राज्यों में 89-94 प्रतिशत परिवार सीधे तौर पर नकद धनराशि हस्तांतरण से लाभान्वित हुए। किसानों के लिए सीधे नकद हस्तांतरण होने से लेन-देन की लागत में कमी होने के साथ-साथ बिना नुकसान और तत्काल वितरण सुनिश्चित होने से पीएम-किसान योजना एक वरदान साबित हुई है।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा पीएम-किसान के तहत देश के 10 करोड़ से अधिक पात्र किसानों के लिए पहली जनवरी, 2022 को दसवीं किस्त जारी की जाएगी, जो कुछ ही मिनटों में अपने बैंक खातों में सीधे तौर पर 20,000 करोड़ रुपये से अधिक धनराशि प्राप्त करेंगे। यह बात बिल्कुल स्पष्ट है कि किसानों को उनकी जरूरतों के समय सीधे तौर पर धन उपलब्ध कराने से उनका जीवन अत्यधिक सार्थक हुआ है, जबकि इस कार्य में उनके और प्रधानमंत्री के बीच कोई अन्य व्यक्ति नहीं है।

स्वास्थ्य विभाग द्वारा बताया गया कि ग्राम चिपुरपाल में कुल 414 परिवार, 2250 सदस्य निवासरत हैं। जिन्हें शत प्रतिशत हेल्थ कार्ड उपलब्ध करा दिया गया है। हेल्थ कार्ड के जरिए अब चिपुरपाल के ग्रामीण डॉ. खूबचंद बघेल स्वास्थ्य सहायता योजना, मुख्यमंत्री विशेष स्वास्थ्य सहायता योजना सहित अन्य स्वास्थगत योजनाओं के अंतर्गत पंजीकृत शासकीय या निजी अस्पतालों में पात्रतानुसार निःशुल्क उपचार की सुविधा का लाभ उठा सकेंगे।
कैंसर, हदय रोग, बच्चों के दिल की गंभीर बीमारी एवं अन्य जटिल रोगों के उपचार में निःशुल्क स्वास्थ्य सुविधा :
आयुष्मान भारत योजना के अन्तर्गत प्राथमिकता और अंत्योदय राशन कार्डधारी परिवारों को प्रतिवर्ष पांच लाख रुपए एवं अन्य राशन कार्ड धारी परिवारों को 50 हजार तक की चिकित्सा सुविधा राज्य के किसी भी पंजीकृत निजी एवं शासकीय चिकित्सालय में प्रदान की जाएगी। वहीं मुख्यमंत्री विशेष स्वास्थ्य सहायता योजना के अंतर्गत चिन्हित दुर्लभ बीमारियों के लिए राज्य के पात्र परिवारों को राज्य स्तर तथा प्रदेश के बाहर स्थित तथा योजनांतर्गत पंजीकृत सुपर स्पेशिलिटी एवं मल्टी स्पेशिलिटी चिकित्सालयों में अधिकतम 20 लाख रूपए तक के इलाज की सुविधा प्रदान की जाती है।
उल्लेखनीय है कि हेल्थ कार्ड के माध्यम से देश के प्रत्येक नागरिकों को एक यूनिक नम्बर प्रदाय किया जाएगा। जो कि आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन के अन्तर्गत रजिस्टर्ड होगा जिसमें उनके सभी स्वास्थ्य संबंधी जानकारी डेटा के रूप से सुरक्षित रहेगा। जिससे संबंधित व्यक्ति की स्वास्थ्य की जानकारी, पूर्व की बीमारियों एवं दवा की जानकारी प्राप्त होगी जो मरीज के उपचार में सहायक होते हैं। इस कार्ड के जरिए कई तरह की बीमारियों की स्क्रीनिंग में शामिल किया गया है। जिसमें बी.पी., मधुमेह, मुख कैंसर, स्तन कैंसर, सर्वाइकल कैंसर, हदय रोग, बच्चों के दिल की गंभीर बीमारी एवं अन्य जटिल रोगों के साथ अन्य कई बीमारियों को शामिल किया गया है। ’’आपके द्वार आयुष्मान अभियान’’ आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना डॉ. खूबचंद बघेल स्वास्थ्य सहायता योजना अंतर्गत पात्र समस्त हितग्राहियों के आयुष्मान कार्ड जिला अस्पताल, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र तथा कॉमन च्वाईस सेंटर में निःशुल्क बनाया जा रहा है।
विदित हो कि जिला प्रशासन द्वारा ग्राम चिपुरपाल को जिले के आदर्श ग्राम के रुप में स्थापित किए जाने की दिशा में निरंतर रुप से कार्य किया जा रहा है। यहाँ के ग्रामीणों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधा, स्वच्छता, बेहतर शिक्षा व्यवस्था, पोषण, विद्युत आपूर्ति, स्वच्छ पेयजल आदि मूलभूत जरुरतों को पूर्ण करने के साथ ही स्थानीय तौर पर प्रशिक्षण भी प्रदाय किया जा रहा है। चिपुरपाल को आदर्श ग्राम के रुप में विकसित करने हेतु सभी विभागों द्वारा विभिन्न कार्य और विभागीय योजनाओं के तहत लाभ प्रदाय किया जाता है।

– परमानंद वर्मा
नानपन के बाते। गांव मं रेहेन तब खेत-खार, ढोड़गी नरवा, नदिया के बस खाली किंजरई राहय। झट कोनो पेड़ मं चिरई-चुरगुन दीख जाय ते बस बेंदरा असन ये डारा ले ओ डारा मं फलांग मारे के सिवा अउ कांही नइ करेन। एक घौं एक ठीन ढोड़गा मं मेचका पकड़त-पकड़त एक ठन सांप दीखगे। ओला मारे ले डंडा उठायेन ते ओहर अइसन दउड़ाइस नहीं ते बस भागते-भागत घर आगेन। घर मं बतायेन तब बुढ़वा बबा हर कहिथे-चोट्टा बुज्जरी हो रे जिये खाय ले नइ आय हव का, सांप, बिच्छी संग उतीअइल करिहौ तब ओहर तुमन ल देखत रइही का? बस्ती भीतर खेले-कूदे ले छोड़ दीन वहा डीह मं मरे ले जाथव। `बंदर-बालक एक समाना` केहे गेहे तउन बात हर मोला ओ दिन सही लागिस जउन दिन मोला कोन जनी कोन कुकुर काट दे रिहिसे ते अमली पेड़ में चढ़ परेंव। तीर-तार मं ओ दिन कोनो मनखे रोवइया नइ रिहिन हे। बस जइसने मैं डारा ल पकड़त रेहेंव मोला अइसे लागिस जना-मना कोनो जबरदस्ती धक्का मार के पेड़ ले गिरा दिस बाचगेंव ओ दिन नइ ते मोर हाड़ा-गोड़ा टूट जाय रहितिस नइ ते फेर सीधा ऊपर कोती सदा दिन बर रेंग दे रहितेंव।
सुने रेहेंव, ये पेड़ मं परेतीन रहिथे कइके ।अइसे ओ बगीचा मं मैं कई घौं गेंव, कतको पेड़ चढ़ेंव फेर न कभू परेत देखेंव न परेतीन। हां अतका जरूर देखे अउ सुने हौं के इहां कतको झन पेड़ ले गिर गेहे, कतको झन के हाथ-गोड़ घला टूटगे अउ कतको झन ल भूत-परेत घला धरलिन जौंन ल बइगा बुलवाके झड़वइन-फुकवइन तहां ले बने होगे। भगवान मोर ऊपर ओ दिन जब्बर मया करिस के मैं बाल-बाल बाचगेंव। न मोर परान पखेरू उड़िस न तो हाड़ा-गोड़ा टूटिस, हां गिरेंव तब थोकन खरोंच जरूर आगे रिहिसे। बगीचा ले दउड़े-दउड़े सीधा घरे आयेंव। दाई ल बतायेंव तहां ले गोंदली, लहसून के पोतनी बना के गरम-गरम अइसे सेकिस ते लागे रहिसे तौंन मेर हर मिटागे तइसे लागिस। खरोंच के दरद हर चार-पांच दिन ले बने रिहिसे। तभो ले ओ बगीचा कोती जाय बर मैं नइ छोड़ेंव। आजो गांव जाथौं तब ओती किंजरे असन जरूर जाथौं। संझा-बिहनिया बहुत तांक-झांक करथौं फेर ओ मेर कभू न भूत दिखिस अउ न परेत न परेतीन।
माघ-फागुन के महीना आवय तहां ले आमा खाये के लालच मं हमर संगवारी मन के जीभ हर दूदी बीता बाढ़ जाय। चार-पांच संगवारी देखन तहां ले चोट्टामन कस कलेचुप बगीचा मं खुसरजन। दू झन पेड़ मं चढ़हन, दू झन बिनइया जइसने कोनो आवय चाहे ओहर रखवार भले मत होय, अवइया-जवइया मन के आरो ओहर बिनइया मन ल देवय। अउ कहूं रखवार आय के खबर होय, तब तो बस बिजली कस काम होवय। झट पेड़ ले कूद जान अउ जतका धरत बनय तउन ला धरन अउ बगीचा ले भागना इही ये टोली के काम राहय। ओ बगीचा के जतका उजाड़ बेंदरा अउ चिरई चुरगुन मन नइ करिन होही ततका तो ये टोली के बड़े-बड़े बेंदरा मन करके रख दे रिहिन हे। रखवार कतको पकड़े के कोशिश करिस फेर ये लाली-लाली मुंह के बड़े-बड़े बेंदरा ल कभू अपन फांदा मं फांस नइ सकिस।
अइसे हमन ल रखवार हर पकड़े के बहुत उदीम करिस फेर एको घौं पार नइ पाइस। संझा-बिहनिया ठेही मारत आवय, कभू कलेचुप घला आ जाय। कोन राते, कोन बिकाले ओकर करा कांही चिन्हारी नइ रिहिसे। जइसने रखवार चतुरा वइसने आमा चोर मन घलो चतुरा। एक घौं तो अधरतिहा ये चोर मन सपड़ मं आवत आवत बाचगे। असल मं होइस का, ओ दिन गांव मं नाचा होवत राहय तेला देखे बर ओ रखवार घला गे राहय। मोला संगवारी मन कहिथे-दसरथ, अब चलव न आमा टोरे बर इही तो मउका हे। मैं पूछतेंव येकर पहिली ओहर बताथे, अरे रखवार हर तो नाचा देखे ले गे हे। मैं फिरंता, मेहतर, चमरू, नकछेदन ल घला बता डरेंव हौं। ओमन वही दे लीम तरी खड़े हे।
रखवार येती नाचा देखत हे, हमन आमा टोर-टोर के झोला मं धरत जाथन। कोन जनी कतका बेर रखवार दनदना के शेर बरोबर आगे अउ दूरिहे ले कहिथे- गजब दिन मं सप्पड़ मं आय हौ रे चोर सारे हो, आज तुमन ल बजेड़े बिगन नइ छोड़व। बस रखवार के अतका भाखा ल ओरखना होइसे ते जउन जिंहें रिहिसे विहें ले जी-परान लेके अइसे हिरना बरोबर कूदत-नाचत, फांदत भागे हन के अपन-अपन घरे मं जाके खुसरेन तभे हमर मन के जीव मं जीव अइस। कतको झन के तो कोहनी माड़ी फूटगे रिहिसे। बिहनिया सबो झन जब एक तीर जुरियाथन तब अपन-अपन हाथ-गोड़ ल एक दूसर ल देखाथन| तब ओ रखवार ल गारी देवत, अच्छा चकमा देन सारे रखवार ल काहत सब हांस परथन।
वाजिब मं बचपन के बात कभू भूले नइ भुलावय। जतके सुरता करबे ओतके मन भर जथे, गुदगुदी आथे, हांसी आथे। मन कहिथे-जइसे साल में किंजर फिरके बादर आ जथे, फल-फूल आ जथे वइसने कहूं ये बचपन कोनो कोती ले घूमत फिरत आ जातिस, तब ये जिनगी के कतेक मजा आतिस। फेर अइसन मनखे के भाग में कहां लिखाय हे। जउन अवस्था ले एक घौं ओहर गुजरगे तउन अब ओला दुबारा कभू देखे ले नइ मिलय, हां ओला सपना मं देख सकथन। वइसने बचपन के एक ठन करतब मोला रही-रही के सुरता आथे। सुरता का जब ओला नजर भर देखथौं तब मन हर भर जाथे अउ आंखी कोती ल तरर..तरर.. आंसू घला आ जाथे। रूंधे गला मं कही घला परथौं कहां गये रे मोर पड़की परेवना। हां, मोर करा एक ठन पड़की-परेवना रिहिसे। ओला बहुत पिंयार करके पालत रेहेंव। दाना-पानी रोज खवावत-पियावत रेहेंव। गांव मं रहिके संगवारी मन संग महूं उतीअइल होगे रेहेंव। असाढ़ के महीना तो नइ लगे रिहिसे, फेर पानी एक-दू घौं अवस के गिरगे रिहिसे। बस हमर बानर दल के काम राहय एती ओती खेत-खार, नदी-नरवा नइते ढोड़गी-ढोड़गा किंजरना| कोनो कांही पकड़त हे तब कोनो कांही। पेड़ मं बेंदरा असन छलांग पारना तो लगथे जइसे जनम-जात सीखके आगे रेहेन। कोनो कउआं, कबूतर, सलहई नइ ते पड़की चिरई पकड़थें तब कोनो ओकर गार (अंडा) ल खोंधरा ले मार देंवय। सबो झन तहां ले ओकर चिला बनाके खान। कउआं गार खाय ले आंखी नइ आवय कहिके सुनें रेहेन तब महूं हर कई घौं ओकर चिला खायेंव। वाजिब मं गऊकीन, ईमान से काहथौं आंखी पीरा काये तौंन ल मैं आज तक नइ जानेंव।
मोला बहुत करलई अउ दुख ओ दिन लागे रिहिसे जउन दिन पड़की ल खेत के बंभरी (बबुल) पेड़ ले निकाल के लाय रेहेंव। ओला धरेंव ततके मं गुजगुज ले लागिस फेर का करबे, लइका सुभाव के सेती ओला पकड़े के मोह ल नइ छोड़ सकेंव। गार फोर के जनमे ओला तीन-चार दिन ले जादा नइ होय रिहिसे। बने ढंग के डेना मं पांख घला नइ उगे रिहिसे। पांच-छै ठन रिहिसे तेमा के दू ठन ल टूप ले धरेंव अउ घर ले आयेंव। पुट्ठा के खोंधरा बना के ओकर चारा-पानी के सब बेवस्था कर देंव। दाई हर दुसरइया दिन देख परिस तब बखानत कहिथे- कहां के चलिख नइ तो, काबर लाये होबे येला, मार डारबे का? जा येला पहुंचा के आव। ओ बखानते रिहिसे अउ मैं बाहिर भागगेंव, संझाकन फेर ओमन ला चारा
चुगायेंव, पानी पिलायेंव। बिहनिया इसकूल ले आके फेर खवाहूं- पियाहूं कइके देखथौं तब दूनों पड़की मर जाय रहिथे। मोर जीव ओतके बेर धक्क ले करिसे। देख तो देख ओकर दाई-ददा करा ले मैं जबरन छोड़ा के ले आनेव अउ मैं येमन ल बचा घला नइ सकेंव। कतेक जाड़ मैं पाप कर डरेंव ना! मोर मन रोवासी भइगे। मन कहिथे, अरे चंडाल! तोला एक दिन पहिली दाई घला समझाइस तेकरो कहना नइ माने। मन बहुत रोइस ओ दिन..बने ढंग ले खाना घला नइ खवइस ओकर दुख मं। गऊकिन काहथौं-मैं विही दिन ले अपन सब उतीअइलपना ल छोड़ देंव।