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1 https://wordpress.org/?v=7.0.2THAAD और आयरन डोम भी नहीं आ रहा काम, ईरान का सूरमा बना रहा चूरमा, अब तो जवानों को भी नहीं बचा पा रहा अमेरिका
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https://chhattisgarh24x7.in/?p=34761#respondSun, 19 Jul 2026 01:12:05 +0000https://chhattisgarh24x7.in/?p=34761ईरान लगातार खाड़ी क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बना रहा है. शनिवार को जॉर्डन स्थित एक अमेरिकी बेस पर हुए हमले में दो अमेरिकी सैनिकों की मौत हो गई. इन लगातार हमलों के बाद सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि आखिर अमेरिका के THAAD, आयरन डोम और एरो जैसे एयर डिफेंस सिस्टम के बावजूद ईरान बार-बार अपने हमलों में कैसे सफल हो रहा है. इसके पीछे ईरान की नई मिसाइल टेक्नोलॉजी और रूस-चीन से मिल रही कथित सैन्य सहायता है. ईरान ने आधिकारिक तौर पर दो हाइपरसोनिक मिसाइलों का दावा किया है- फतह-1 (Fattah-1) और फतह-2 (Fattah-2). हालांकि इस बात की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो पाई है कि ईरान इन मिसाइलों का इस्तेमाल कर रहा है या नहीं.
ईरान के पास कौन सी मिसाइलें हैं?
फतह-1 मिसाइल जून 2023 में पहली बार सार्वजनिक की गई. इस मिसाइल की रेंज लगभग 1,400 किलोमीटर बताई जाती है. ईरान का दावा है कि यह Mach 13 से Mach 15 तक की स्पीड से उड़ सकती है और एकदम आखिर में दिशा बदल सकती है, जिससे इसे रोकना बेहद मुश्किल हो जाता है.
फतह-2 मिसाइल की बात करें तो इसे नवंबर 2023 में दुनिया के सामने रखा गया था. फतह-2 की रेंज करीब 1,400 से 1,500 किलोमीटर बताई जाती है. ईरान का दावा है कि इसमें हाइपरसोनिक ग्लाइड व्हीकल (HGV) तकनीक का इस्तेमाल किया गया है, जिससे यह पारंपरिक बैलिस्टिक मिसाइलों की तुलना में कहीं अधिक जटिल उड़ान भर सकती है.
एयर डिफेंस को कैसे चकमा देती हैं ये मिसाइलें?
एक्सपर्ट्स के मुताबिक इसकी सबसे बड़ी वजह हाइपरसोनिक स्पीड और मैन्यूवर करने की क्षमता है. सामान्य बैलिस्टिक मिसाइलें एक तय रास्ते पर उड़ती हैं, इसलिए रडार पहले ही उनके संभावित लक्ष्य का अनुमान लगा लेते हैं. लेकिन यदि कोई मिसाइल Mach 5 या उससे अधिक की गति से उड़ते हुए अंतिम समय में दिशा बदल दे, तो एयर डिफेंस सिस्टम के पास प्रतिक्रिया देने के लिए केवल कुछ सेकंड ही बचते हैं. जब तक रडार नई दिशा को ट्रैक करता है, मिसाइल फिर अपना रास्ता बदल सकती है. इतना ही नहीं, इजरायल ने क्योंकि जिस तरह से खुद को मिसाइल से बचाने के लिए एयर डिफेंस लगाया है, उस लेवल की सुरक्षा गल्फ के बाकी देशों में नहीं है.
रूस की मदद मिल रही?
मार्च 2026 में प्रकाशित वाल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट के अनुसार, रूस ईरान को सैटेलाइट इमेजरी और एडवांस्ड ड्रोन टेक्नोलॉजी उपलब्ध करा रहा है, जिससे अमेरिकी सैन्य ठिकानों की बेहतर पहचान और टारगेटिंग संभव हो रही है. मार्च में कार्नेगी एंडाउमेंट की रूसी सैन्य विशेषज्ञ दारा मासीकोट ने कहा था, ईरान के पास अपने सैन्य उपग्रह सीमित हैं, इसलिए रूसी सैटेलाइट इमेजरी उसके लिए बेहद महत्वपूर्ण है. यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने भी दावा किया था कि मार्च के अंत में केवल 10 दिनों के अंदर रूसी सैटेलाइट्स ने 11 देशों में 46 सैन्य ठिकानों की तस्वीरें लीं. इनमें डिएगो गार्सिया, कुवैत एयरपोर्ट, सऊदी अरब का प्रिंस सुल्तान एयरबेस और कतर का अल उदेद एयरबेस जैसे प्रमुख अमेरिकी ठिकाने शामिल थे. रूस इसलिए मदद देता है क्योंकि उसे यूक्रेन युद्ध में ईरान से ड्रोन मिल रहे हैं. वहीं जितना अमेरिका ईरान के खिलाफ फंसा रहेगा, उतना ही वह यूक्रेन पर कम ध्यान देगा.
]]>https://chhattisgarh24x7.in/?feed=rss2&p=347610सर्वदलीय बैठक में हाईवोल्टेज ड्रामा; TMC के बागी सांसदों को बुलाने पर पहले बहिष्कार किया, फिर मीटिंग के लिए लौटे
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https://chhattisgarh24x7.in/?p=34755#respondSun, 19 Jul 2026 00:54:49 +0000https://chhattisgarh24x7.in/?p=34755संसद के मानसून सत्र से पहले रविवार को बुलाई गई सर्वदलीय बैठक का विपक्ष ने शुरू में बहिष्कार कर दिया. हालांकि, थोड़ी देर में वह फिर से बैठक में शामिल होने के लिए लौट आए. बताया जा रहा है कि विपक्षी दल तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के बागी सांसदों को बुलाने से नाराज थे.
टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा ने कहा, “आज कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, डीएमके, झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो), आम आदमी पार्टी (आप), नेशनल कॉन्फ्रेंस, लेफ्ट पार्टियां और शिवसेना (UBT) समेत पूरा विपक्ष सर्वदलीय बैठक से विरोध स्वरूप बाहर निकल आया. ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि तथाकथित NCPI (जो एक गैर-मान्यता प्राप्त पार्टी है) के मामले में, टेबल ऑफिस द्वारा दी गई सूची में ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस की संख्या 28 सदस्य दिखाई गई है. इन तथाकथित बागी 20 सांसदों के विलय को स्पीकर ने मंजूरी नहीं दी है.”
उन्होंने आगे कहा, “अयोग्यता से जुड़ी 20 याचिकाएं अभी भी लंबित हैं. 91वें संशोधन के बाद, किसी अलग गुट के लिए कोई गुंजाइश नहीं है. तो संसदीय कार्य मंत्री ने किन आधारों पर इन 20 बागी सांसदों को निमंत्रण दिया और वे इस बैठक में कैसे शामिल हो रहे हैं? हमने अपना कड़ा विरोध दर्ज कराया है और विरोध के प्रतीक के तौर पर बैठक से बाहर निकल आए हैं. और हम अपनी सभी विपक्षी पार्टियों का धन्यवाद करते हैं.”
]]>https://chhattisgarh24x7.in/?feed=rss2&p=347550समुद्र के नीचे खुदाई और 17 बड़े पुल तैयार; जानिए कितनी बदल गई आपकी बुलेट ट्रेन और कब तक होगा सफर शुरू
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https://chhattisgarh24x7.in/?p=34618#respondThu, 02 Jul 2026 19:44:24 +0000https://mr-bharat.com/?p=34618भारत और जापान के बीच बुलेट ट्रेन परियोजना को लेकर एक बड़ा और महत्वपूर्ण समझौता हुआ है, जिसने देश के हाई-स्पीड रेल नेटवर्क के विजन को एक नई रफ्तार दी है. नई दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भारत यात्रा पर आईं जापान की प्रधानमंत्री सानाए ताकाइची के बीच हुई द्विपक्षीय बैठक में मुंबई-अहमदाबाद हाई स्पीड रेल (MAHSR) परियोजना की प्रगति की समीक्षा की गई. जापान की प्रधानमंत्री ने भरोसा दिलाया कि उनका देश भारत के हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर के सपनों को साकार करने के लिए हर संभव तकनीकी और वित्तीय सहयोग जारी रखेगा. दोनों नेताओं ने इस प्रोजेक्ट में अगली पीढ़ी की E10 शिंकान्सेन (Shinkansen) तकनीक को शामिल करने का भी स्वागत किया.
इस बैठक के दौरान भारत के भावी 7,000 किलोमीटर लंबे राष्ट्रीय हाई-स्पीड रेल नेटवर्क को लेकर भी चर्चा हुई. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जापानी कंपनियों को भारत के भविष्य के नए रेल कॉरिडोर और जहाज निर्माण (शिपबिल्डिंग) जैसे क्षेत्रों में निवेश के लिए आमंत्रित किया है. दोनों देशों ने ‘नेक्स्ट-जनरेशन मोबिलिटी पार्टनरशिप’ (MoC) पर हस्ताक्षर किए हैं, जो भविष्य में दोनों देशों के निजी क्षेत्रों की भागीदारी को बढ़ाएगा. जापान की प्रधानमंत्री सानाए ताकाइची ने कहा कि वे भारत के महत्वाकांक्षी लक्ष्यों को पूरी तरह समझती हैं और इसके समय पर क्रियान्वयन के लिए प्रतिबद्ध हैं.
मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड रेल (MAHSR) परियोजना भारत का पहला बुलेट ट्रेन कॉरिडोर है. यह कुल 508 किलोमीटर लंबा ट्रैक है, जो महाराष्ट्र, गुजरात और केंद्र शासित प्रदेश दादरा और नगर हवेली से होकर गुजरेगा. इस पूरे रूट पर कुल 12 स्टेशन बनाए जा रहे हैं, जिनमें मुंबई (बीकेसी), ठाणे, विरार, बोइसर, वापी, बिलिमोरा, सूरत, भरूच, वडोदरा, आनंद, अहमदाबाद और साबरमती शामिल हैं. जब यह प्रोजेक्ट पूरी तरह चालू हो जाएगा, तो मुंबई से अहमदाबाद के बीच का सफर, जिसमें अभी रेल या सड़क मार्ग से 8 से 9 घंटे लगते हैं, घटकर मात्र 2 घंटे रह जाएगा. इस ट्रेन की अधिकतम रफ्तार 320 किलोमीटर प्रति घंटा होगी.
15 अगस्त से परिचालन शुरू
केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने हाल ही में नई दिल्ली में मीडिया को संबोधित करते हुए देश की पहली बुलेट ट्रेन की लॉन्चिंग को लेकर बेहद अहम जानकारी साझा की है. रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने घोषणा की है कि भारत में पहली बुलेट ट्रेन का व्यावसायिक संचालन 15 अगस्त 2027 को शुरू होने की पूरी संभावना है.
रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने प्रोजेक्ट की चरणबद्ध टाइमलाइन को स्पष्ट करते हुए बताया:
पहला फेज (अगस्त 2027): गुजरात के सूरत से बिलिमोरा के बीच 47 किलोमीटर लंबे प्राथमिक सेक्शन (Priority Section) पर देश की पहली बुलेट ट्रेन शुरू की जाएगी. इसके तुरंत बाद वापी से सूरत के सेक्शन को खोला जाएगा.
विस्तार (2028-2029): साल 2028 तक इस सेवा का विस्तार ठाणे तक कर दिया जाएगा और साल 2029 तक बुलेट ट्रेन मुंबई तक पहुंच जाएगी.
पूरा प्रोजेक्ट (दिसंबर 2029/2030): रेल मंत्रालय का लक्ष्य है कि दिसंबर 2029 से लेकर 2030 की शुरुआत तक इस पूरे 508 किलोमीटर के कॉरिडोर को आम जनता के लिए पूरी तरह चालू कर दिया जाए.
अब तक कितना पूरा हुआ काम?
मंत्रालय द्वारा जारी ताजा आंकड़ों के अनुसार, इस बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट ने निर्माण के मामले में अभूतपूर्व गति पकड़ी है. गुजरात और महाराष्ट्र में भूमि अधिग्रहण का काम 100% पूरा हो चुका है और सभी वैधानिक मंजूरियां ली जा चुकी हैं.
पिलर और वायाडक्ट: पूरे रूट पर अब तक 450 किलोमीटर से ज्यादा दूरी का पिलर (Pier) निर्माण पूरा हो चुका है, जबकि 354 किलोमीटर से अधिक के वायाडक्ट (ब्रिज का ऊपरी हिस्सा) का ढांचा तैयार किया जा चुका है.
स्टेशन और पुल: गुजरात के सभी 8 स्टेशनों (वापी, बिलिमोरा, सूरत, भरूच, आनंद, वडोदरा, अहमदाबाद और साबरमती) पर फाउंडेशन का काम पूरा हो चुका है और सुपरस्ट्रक्चर का काम एडवांस स्टेज में है. इसके अलावा रूट पर पड़ने वाली विभिन्न नदियों पर बने 17 बड़े पुल पूरी तरह तैयार हो चुके हैं.
अंडर-सी और माउंटेन टनल: इस प्रोजेक्ट में 4 पहाड़ी सुरंगों का काम पूरा हो चुका है. वहीं महाराष्ट्र के हिस्से में बांद्रा कुर्ला कॉम्प्लेक्स (BKC) स्टेशन पर 91% खुदाई पूरी हो चुकी है और भारत की पहली 21 किलोमीटर लंबी अंडर-सी (समुद्र के नीचे) सुरंग का काम भी शुरू हो गया है, जिसमें से घनसोली और शिलफाटा के बीच 4.8 किलोमीटर की टनलिंग पूरी की जा चुकी है.
]]>https://chhattisgarh24x7.in/?feed=rss2&p=346180एशिया को किसी की जागीर नहीं बनने देंगे’, पीएम मोदी से आज मिलेंगी ताकाइची, फोकस में होंगे 4 एजेंडे
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https://chhattisgarh24x7.in/?p=34582#respondWed, 01 Jul 2026 19:40:13 +0000https://mr-bharat.com/?p=34582जापान की प्रधानमंत्री सनाए ताकाइची पहली बार भारत दौरे पर पहुंच चुकी हैं. दुनिया के हर कोने में मची उथल-पुथल के बीच 2 जुलाई को पीएम मोदी के साथ उनकी अहम बैठक होनी है. एक्सपर्ट्स मान रहे हैं कि ये सिर्फ दो नेताओं की मुलाकात नहीं है, बल्कि एशिया का भविष्य तय करने वाला महामंथन है. दोनों देश मिलकर एक ऐसी चक्रव्यूह की तैयारी कर रहे हैं, जिसके बाद ये साफ हो जाएगा कि एशिया एक किसी एक देश की जागीर नहीं है. रक्षा समझौतों से लेकर करेंसी की नई डील तक, इस समिट में कुछ ऐसा होने जा रहा है जो आने वाले दशकों तक वैश्विक राजनीति की दिशा तय करेगा.
जब दो ‘नेचुरल एलाइज’ ने मिलाया हाथ
जियो-पॉलिटिकल एक्सपर्ट डॉ ब्रह्मा चेलानी के मुताबिक, जापानी प्रधानमंत्री सनाए ताकाइची का ये दिल्ली दौरा इंडो-पैसिफिक के लिए एक गेम-चेंजर साबित होने वाला है. दुनिया में इस समय समीकरण बहुत तेजी से बदल रहे हैं. यूक्रेन-रूस, ईरान-अमेरिका संकट से लेकर ताइवान तक तनाव चरम पर है. ऐसे माहौल में भारत और जापान की ‘स्पेशल स्ट्रेटेजिक एंड ग्लोबल पार्टनरशिप’ यानी एशिया में शांति और स्थिरता का सबसे मजबूत खंभा बनकर उभरी है.
भारत और जापान को ‘नेचुरल सहयोगी’ माना जाता है. दोनों के बीच न तो कोई सीमा विवाद है और न ही कोई ऐतिहासिक कड़वाहट. इसके उलट, दोनों का एक ही लक्ष्य है- एशिया को किसी एक देश की जागीर बनने से रोकना. चीन जिस तरह से दक्षिण चीन सागर से लेकर भारतीय सीमाओं तक अपनी विस्तारवादी नीति चला रहा है, उसे रोकने के लिए इन दोनों महाशक्तियों का एक साथ आना बेहद जरूरी हो गया था.
इस शिखर सम्मेलन का सबसे बड़ा एजेंडा आर्थिक मोर्चे पर है. दोनों देश ‘येन-रुपया सेटलमेंट मैकेनिज्म’ को अंतिम रूप देने की तैयारी में हैं. आसान भाषा में कहें तो अब भारत और जापान आपस में व्यापार करने के लिए अमेरिकी डॉलर पर निर्भर नहीं रहेंगे. भारत जापानी येन में और जापान भारतीय रुपए में सीधे कारोबार कर सकेंगे.
]]>https://chhattisgarh24x7.in/?feed=rss2&p=3458203 गुना रेंज, पर वजन आधा… दुश्मन का काल बनने आ रहा ब्रह्मोस का NG अवतार, अब सुखोई-तेजस से भी बरसेगी तबाही
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https://chhattisgarh24x7.in/?p=34580#respondWed, 01 Jul 2026 19:33:22 +0000https://mr-bharat.com/?p=34580भारत और रूस की जुगलबंदी से तैयार दुनिया की सबसे घातक सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल ब्रह्मोस अब एक ऐसे विनाशकारी रूप में सामने आने वाली है. यह नया संस्करण वैश्विक हथियार बाजार का पूरा समीकरण ही बदल देगा. जहां मौजूदा ब्रह्मोस अपने 3 टन के भारी-भरकम वजन और विशाल आकार के कारण केवल चुनिंदा प्लेटफॉर्म्स से ही तबाही मचा सकती थी, वहीं अब आ रहे ब्रह्मोस-एनजी (BrahMos-NG) आधा से भी कम यानी महज 1.2 टन का होगा. आकार में छोटा होने का मतलब यह कतई नहीं है कि इसकी मारक क्षमता कम होगी. यह नया वेरिएंट और भी ज्यादा स्लीक, बेहद चालाक और पहले से कहीं ज्यादा खतरनाक होने जा रहा है.
इस बदलाव का सबसे बड़ा फायदा युद्ध के मैदान में वायुसेना को मिलेगा. भारी वजन के कारण सुखोई-30 MKI जैसे लड़ाकू विमान अभी सीमित संख्या में ही ब्रह्मोस ले जा पाते हैं लेकिन ब्रह्मोस-एनजी के आते ही लड़ाकू विमान प्रति उड़ान पहले से कई गुना ज्यादा मिसाइलें लोड कर सकेंगे. यानी एक ही चक्कर में दुश्मन के कई ठिकानों का नामोनिशान मिटाना मुमकिन होगा. सिर्फ यही नहीं, यह कॉम्पैक्ट मिसाइल अब तेजस और मिग-29K जैसे हल्के लड़ाकू विमानों के साथ-साथ छोटी पनडुब्बियों पर भी आसानी से तैनात की जा सकेगी
आधी से भी कम वजन की होगी नई मिसाइल
ब्रह्मोस एयरोस्पेस के पूर्व एमडी और सीईओ सुधीर कुमार मिश्रा ने बताया कि मौजूदा ब्रह्मोस का वजन करीब 3 टन है, जबकि नया ब्रह्मोस-NG बेहद हल्का (करीब 1.2 टन) और एडवांस तकनीकों से लैस होगा. वजन कम करने के लिए एडवांस कंपोजिट मैटेरियल्स का इस्तेमाल किया जा रहा है. विशेषज्ञों के मुताबिक, वजन कम होने से सुखोई जैसे लड़ाकू विमान प्रति सॉर्टी (उड़ान) में पहले से ज्यादा मिसाइलें ले जा सकेंगे, जिससे युद्ध के समय मारक क्षमता कई गुना बढ़ जाएगी. इसके अलावा, इसमें बेहतरीन स्टील्थ फीचर्स होंगे, जिससे दुश्मन के आधुनिक एयर डिफेंस सिस्टम भी इसे पकड़ नहीं पाएंगे
]]>https://chhattisgarh24x7.in/?feed=rss2&p=345800पेट्रोल एक्सपोर्ट करना हुआ महंगा, डीजल और एटीएफ पर राहत, जानिए क्या आपकी जेब पर पड़ेगा इसका असर!
https://chhattisgarh24x7.in/?p=34554
https://chhattisgarh24x7.in/?p=34554#respondTue, 30 Jun 2026 11:20:25 +0000https://mr-bharat.com/?p=34554पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव के बीच केंद्र सरकार ने देश में ईंधन की सप्लाई को मजबूत बनाए रखने के लिए विंडफॉल गेंस टैक्स की समीक्षा पूरी कर ली है. वित्त मंत्रालय द्वारा जारी ताजा अधिसूचना के मुताबिक, 1 जुलाई से पेट्रोल के निर्यात पर विशेष अतिरिक्त उत्पाद शुल्क (एसएईडी) को 1.5 रुपये प्रति लीटर से बढ़ाकर सीधे 4 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया है. सरकार का यह कदम साफ तौर पर तेल कंपनियों द्वारा घरेलू बाजार के बजाय विदेशी बाजारों में मुनाफा कमाने के लिए किए जाने वाले पेट्रोल निर्यात को हतोत्साहित करने के उद्देश्य से उठाया गया है.
दूसरी तरफ, अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों के रुख को देखते हुए सरकार ने डीजल और हवाई ईंधन यानी एटीएफ के निर्यातकों को बड़ी राहत दी है. डीजल के निर्यात पर लगने वाले शुल्क को 14 रुपये प्रति लीटर से घटाकर 8.5 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया है, जबकि एटीएफ पर लगने वाले टैक्स को 12.5 रुपये प्रति लीटर से कम करके 7.5 रुपये प्रति लीटर पर ला दिया गया है. सरकार के इस संतुलित फैसले से जहां एक तरफ घरेलू बाजार में सप्लाई सुरक्षित रहेगी, वहीं दूसरी तरफ तेल रिफाइनिंग कंपनियों को डीजल और एटीएफ के मोर्चे पर अपना मार्जिन सुधारने में मदद मिलेगी.
इस पूरी अधिसूचना में आम उपभोक्ताओं के लिए सबसे राहत की बात यह है कि सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि घरेलू खपत के लिए जारी होने वाले पेट्रोल और डीजल पर मौजूदा शुल्क दरों में कोई बदलाव नहीं किया गया है. इसका सीधा मतलब यह है कि देश के भीतर पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतों पर इस फैसले का कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा और आम आदमी के लिए तेल के दाम जस के तस बने रहेंगे. यह विंडफॉल टैक्स केवल उन तेल कंपनियों और रिफाइनर्स पर लागू होता है जो वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की बढ़ी कीमतों का फायदा उठाने के लिए बड़े पैमाने पर विदेशों में तेल का निर्यात करते हैं.
]]>https://chhattisgarh24x7.in/?feed=rss2&p=345540अयोध्या राम मंदिर दान चोरी केस: क्या आरोपियों को नहीं मिलेगा वकील? संविधान और सुप्रीम कोर्ट का फैसला क्या कहता है
https://chhattisgarh24x7.in/?p=34552
https://chhattisgarh24x7.in/?p=34552#respondTue, 30 Jun 2026 11:19:12 +0000https://mr-bharat.com/?p=34552अयोध्या राम मंदिर में चढ़ावे और दान से जुड़ी कथित गड़बड़ी के मामले में गिरफ्तार आरोपियों को लेकर एक नया विवाद खड़ा हो गया है। अयोध्या बार एसोसिएशन ने आरोपियों का मुकदमा नहीं लड़ने का फैसला किया है। इसके बाद सवाल उठ रहा है कि अगर कोई वकील पैरवी करने से इनकार कर दे तो क्या आरोपी को कानूनी मदद से वंचित किया जा सकता है?
कानून के जानकारों के मुताबिक, किसी भी आरोपी को न्याय पाने और अपना पक्ष रखने का संवैधानिक अधिकार हासिल है. अपराध कितना भी गंभीर क्यों न हो अदालत किसी व्यक्ति को बिना बचाव के सजा नहीं दे सकती.
संविधान देता है वकील चुनने का अधिकार
भारतीय संविधान का अनुच्छेद 22(1) हर व्यक्ति को अपनी पसंद के वकील के जरिए अपना बचाव करने का अधिकार देता है. इसके अलावा संविधान का अनुच्छेद 14 कानून के सामने समानता की बात करता है जबकि अनुच्छेद 39A सभी को समान न्याय और जरूरतमंदों को मुफ्त कानूनी सहायता उपलब्ध कराने की व्यवस्था करता है. यानी अगर किसी आरोपी को निजी वकील नहीं मिलता है तो अदालत की जिम्मेदारी होती है कि उसे कानूनी सहायता उपलब्ध कराई जाए.
पहले भी कई मामलों में हुआ वकीलों का विरोध
देश में यह पहली बार नहीं है जब किसी मामले में बार एसोसिएशन ने आरोपी की पैरवी करने से इनकार किया हो. निर्भया गैंगरेप केस, मुंबई हमले के दोषी अजमल कसाब का मामला, संसद हमले के दोषी अफजल गुरु का मामला और कठुआ रेप केस जैसे मामलों में भी कई बार वकीलों के विरोध की स्थिति सामने आई थी. हालांकि न्यायिक प्रक्रिया के तहत बाद में आरोपियों को कानूनी सहायता के जरिए वकील उपलब्ध कराए गए ताकि मुकदमे की सुनवाई निष्पक्ष तरीके से हो सके.
]]>https://chhattisgarh24x7.in/?feed=rss2&p=345520फैसले नहीं, रिजल्ट बताओ…पीएम मोदी ने 4 घंटे तक आला अफसरों की लगाई क्लास, बोले-बदलाव दिखना चाहिए
https://chhattisgarh24x7.in/?p=34550
https://chhattisgarh24x7.in/?p=34550#respondTue, 30 Jun 2026 11:16:48 +0000https://mr-bharat.com/?p=34550प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को देश के आला अफसरों को एक साथ बुलाया. उनके साथ 4 घंटे तक क्लास चलाई.एक एक से पूछा, क्या फैसले लिए और उनका जमीन पर कितना असर हुआ. कितने लोगों को फायदा पहुंचा. पीएम मोदी ने मंत्रालयों के सचिवों को क्लियर मैसेज दिया कि सरकारी योजनाओं को फाइल से बाहर निकालो. असर सिर्फ कागजों पर नहीं, लोगों की जिंदगी में दिखना चाहिए. रिजल्ट दिखना चाहिए. बदलाव आम लोगों को महसूस होना चाहिए.
मीटिंग में दो बड़े मुद्दों पर खास फोकस रहा. पहला, ईज ऑफ डूइंग बिजनेस और ईज ऑफ लिविंग को बेहतर बनाने के लिए गैर-जरूरी नियमों को खत्म करना और जरूरी सुधार लागू करना. दूसरा, आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को और तेज गति से आगे बढ़ाना. सचिवों ने अपने-अपने मंत्रालयों में चल रहे सुधारों, चुनौतियों और भविष्य की योजनाओं की जानकारी प्रधानमंत्री को दी. प्रधानमंत्री मोदी ने अधिकारियों से कहा कि मंत्रालयों के बीच तालमेल बढ़ाना समय की जरूरत है. उन्होंने विभागों के अलग-अलग काम करने की पुरानी व्यवस्था से बाहर निकलने और ‘होल ऑफ गवर्नमेंट’ यानी पूरी सरकार के एक साथ काम करने के मॉडल पर जोर दिया. उनका कहना था कि कई योजनाएं तभी सफल होंगी, जब अलग-अलग मंत्रालय मिलकर काम करेंगे.
]]>https://chhattisgarh24x7.in/?feed=rss2&p=345500अपना पक्का घर बनाने का सपना सरकार करेगी पूरा! ‘आवास योजना’ के तहत अपने बैंक खाते में पाएं 1.20 लाख रुपये की सीधी मदद
https://chhattisgarh24x7.in/?p=34528
https://chhattisgarh24x7.in/?p=34528#respondMon, 29 Jun 2026 19:17:59 +0000https://mr-bharat.com/?p=34528हर परिवार का सपना होता है कि उसके पास अपना पक्का घर हो, लेकिन आर्थिक तंगी के कारण यह सपना कई बार अधूरा रह जाता है. ऐसे लोगों की मदद के लिए केंद्र सरकार प्रधानमंत्री आवास योजना चला रही है. इस योजना के तहत पात्र लाभार्थियों को घर बनाने के लिए आर्थिक सहायता सीधे बैंक खाते में दी जाती है. अगर आप भी इस योजना की शर्तों को पूरा करते हैं, तो आवेदन कर इसका लाभ उठा सकते हैं.
प्रधानमंत्री आवास योजना का उद्देश्य उन परिवारों को पक्का घर उपलब्ध कराना है, जिनके पास रहने के लिए सुरक्षित मकान नहीं है. योजना के तहत पात्र लाभार्थियों को घर निर्माण के लिए आर्थिक सहायता दी जाती है. ग्रामीण क्षेत्रों में पात्र परिवारों को निर्धारित नियमों के अनुसार 1.20 लाख रुपये तक की सहायता उपलब्ध कराई जाती है. यह राशि सीधे लाभार्थी के बैंक खाते में किस्तों के रूप में भेजी जाती है, ताकि घर का निर्माण तय प्रक्रिया के अनुसार पूरा किया जा सके. सरकार का लक्ष्य है कि आर्थिक रूप से कमजोर परिवार भी सम्मान के साथ अपने पक्के घर में रह सकें
]]>https://chhattisgarh24x7.in/?feed=rss2&p=345280सरकार को अचानक मिले ₹9,400 करोड़! वित्त मंत्री ने चेक के साथ खिंचाई फोटो, कहां से आया ये पैसा
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https://chhattisgarh24x7.in/?p=34524#respondMon, 29 Jun 2026 19:08:38 +0000https://mr-bharat.com/?p=34524देश के सरकारी बैंकों ने सोमवार को अचानक वित्त मंत्रालय के खजाने का रुख किया और केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को एक ऐसी रकम सौंप दी, जिसने पूरे बाजार का ध्यान अपनी तरफ खींच लिया है. वित्तीय सेवा विभाग के उच्च अधिकारियों की मौजूदगी में सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के प्रमुखों ने एक के बाद एक कुल मिलाकर 9,400 करोड़ रुपये से ज्यादा के भारी-भरकम डिविडेंड के चेक वित्त मंत्री के हाथों में थमा दिए. यह सारा पैसा पिछले वित्त वर्ष यानी 31 मार्च 2026 को समाप्त हुई अवधि के शानदार कामकाज के बदले मुनाफे के हिस्से के रूप में सरकार की जेब में गया है
इस बार के इस पूरे घटनाक्रम में सबसे बड़ी बाजी बैंक ऑफ बड़ौदा ने मारी है, जिसने अकेले ही सरकार को अब तक का सबसे बड़ा हिस्सा दिया है. सरकार को मिले इस अप्रत्याशित वित्तीय सहयोग के पीछे बैंकों का वह रिकॉर्डतोड़ मुनाफा है, जिसने इस साल देश के बैंकिंग इतिहास के कई पुराने रिकॉर्ड ध्वस्त कर दिए हैं. बैंकों के इस कदम से न सिर्फ सरकार की वित्तीय स्थिति मजबूत होगी, बल्कि इससे यह भी साफ हो गया है कि सरकारी बैंकों के अच्छे दिन अब पूरी तरह लौट आए हैं.