स्मार्टफोन आज हर आदमी की जरूरत बन गई है. क्योंकि, वॉइस और वीडियो कॉलिंग के साथ-साथ इसमें इंटरनेट से जुड़ी तमाम सुविधाएं मिलती हैं. यूजर एक्सपीरियंस को बेहतर बनाने के लिए मोबाइल में कई ऐप इन्स्टॉल किए जाते हैं.
ऐप इन्स्टॉलेशन के दौरान यूजर्स कई बातों का ध्यान रखते हैं लेकिन, क्या आप जानते हैं कि ऐप को अनइन्स्टॉल करने के बाद भी सावधानी बरतनी जरूरी है, क्योंकि इनसे आपके मोबाइल डाटा का चोरी होने का डर बना रहता है.
ऐसा इसलिए क्योंकि, अनइन्स्टॉल करने पर मोबाइल ऐप, होम पेज से तो डिलीट हो जाते हैं लेकिन फोन की सेटिंग में छिपे होते हैं और हमारा डाटा जुटाते रहते हैं. ऐसे में आपकी गोपनीय जानकारी को लेकर खतरा बना रहता है. आइये आपको बताते हैं कि आखिर इस समस्या से कैसे निपटा जा सकता है.
ऐसे प्रोजेक्ट में विशेष तौर पर स्ट्रक्चर पूरा होने के बाद जब उसकी फिनिशिंग की बारी आती है तो उस मौके पर यह और अधिक जरूरी हो जाता है. जब प्रोजेक्ट पूरा हो जाय और बिल्डर ग्राहकों को कब्जा यानी पजेशन की पेशकश शुरू कर दे तो उस समय आपको किन कागजात और दस्तावेजों की जांच परख करनी चाहिए? यह दस्तावेज क्या है और इनका महत्व क्या है, इसकी पूरी जानकारी आपको देते हैं.
कम्प्लीशन या ऑक्यूपेंसी सर्टीफिकेट
इन दोनों ही शब्दों का अर्थ एक ही है, बस फर्क इतना है कि कुछ शहरों में इसे कम्प्लीशन तो कुछ जगहों पर इसे ऑक्यूपेंसी सर्टिफिकेट कहा जाता है. यह सर्टिफिकेट बिल्डर उस शहर की लोकल अथॉरिटी या फिर डेवलपमेंट एजेंसी से प्राप्त करता है, जहां से उसने परियोजना के निर्माण का नक्शा पास कराया है. यह दस्तावेज इस बात को स्पष्ट करता है कि परियोजना पूरी हो गई है. साथ ही प्राधिकरण के समक्ष प्रोजेक्ट बनाने से पहले जो नक्शे बिल्डर ने जमा करवाये, थे उसी के अनुरूप उसका निर्माण किया गया है. इसके साथ ही बिल्डर का प्राधिकरण के प्रति कोई बकाया नहीं है. यह बात आप समझ लें कि कई बार इस कागज के न होने पर रजिस्ट्रार ऑफिस में आपके नाम पर संपत्ति की रजिस्ट्री भी नहीं हो पाती है.
करें. कम्प्लीशन सर्टीफिकेट से ही इसका भी पता चल जाएगा. यह बात तो आप लोग भी जानते ही होंगे कि उत्तरी भारत का एक बड़ा हिस्सा सेस्मिक जोन-4 में गिना जाता है जो भूकंप के लिहाज से बेहद संवेदनशील क्षेत्रों में से एक माना जाता है. ऐसे में यह भी देख लें कि बिल्डर ने इमारतों का जो स्ट्रक्चर तैयार किया है, वह भूकंपरोधी मानकों पर भी खरा उतरता हो. कई बार इमारतों में कुछ जगहों पर दरारें दिखने लगती हैं या फिर टूटफूट हो जाती है तो उस स्थिति में मकान की पजेशन से पहले ही आप बिल्डर से उसे दुरुस्त कराने के लिए कह सकते हैं.
फायर फाइटिंग अप्रूवल
बीते तीन दशकों से मल्टीस्टोरी रूप में रिहाइशी इमारतों का प्रचलन बढ़ा है. ऐसे में वक्त के साथ ही इन इमारतों में आग से निपटने के लिए पानी का टैंक हर टॉवर में पाइप की व्यवस्था, कॉमन एरिया के साथ मकानों के भीतर भी स्मोक डिटेक्टर, फायर एक्सटिंग्विशर आदि की व्यवस्थाएं अब जरूरी हो गई हैं. प्रोजेक्ट पूरा हो जाने के बाद बिल्डर को अग्निशमन विभाग से भी संबंधित स्वीकृति लेनी होती है. संबंधित विभाग प्रोजेक्ट का अवलोकन करता है और उपकरणों की परख करने के बाद स्वीकृति देता है. ऐसे में कब्जा लेने से पहले यह भी जरूर देख लें कि वहां आग बुझाने संबंधी उचित इंजताम किए गए हों.
बिजली-पानी सीवेज कनेक्शन
इन दस्तावेजों को परखने के बाद यह भी देखें कि परियोजना में बिजली-पानी की सुचारू आपूर्ति शुरू हो गई हो और सीवेज का कनेक्शन भी मिल गया हो. निश्चय ही किसी भी जगह रहने के लिए यह बुनियादी जरूरतें हैं. कई बार परियोजनाओं में तय समय पर कब्जा देने में देरी होने पर बिल्डरों की तरफ से ग्राहकों को कहा जाता है कि वह अपने मकानों का कब्जा ले लें और शेष सुविधाएं कुछ ही दिनों में शुरू करवा दी जाएंगी. बिल्डर की तरफ से यह कदम पजेशन में होने वाली देरी पर ग्राहक को चुकाई जाने वाली पेनाल्टी से बचने के लिए उठाया जाता है. लिहाजा समझदारी इसी में है कि जब तक बुनियादी सुविधाएं न मिलें आप भूलकर भी कब्जा न लें.
मकान मालिकों के हितों की सुरक्षा के लिए ही ज्यादातर मामलों में रेंट एग्रीमेंट बनवाया जाता है. हालांकि, इस एग्रीमेंट के बावजूद बड़े पैमाने पर किरायेदार से मकान मालिक की हितों की पूरी तरह रक्षा नहीं हो पाती. ऐसे में किसी भी विवाद से बचने के लिए अब मालिकों ने ‘लीज ऐंड लाइसेंस’ एग्रीमेंट का विकल्प अपनाना शुरू कर दिया है. लीज ऐंड लाइसेंस भी काफी हद तक रेंट अथवा लीज एग्रीमेंट या किरायानामा की तरह ही होता है, बस इसमें लिखे जाने वाले कुछ क्लॉज बदल दिये जाते हैं. प्रॉपर्टी मामलों के एक्सपर्ट और ओरम डेवलपमेंट्स के सीएमडी प्रदीप मिश्रा से हम जानते हैं कि लीज एंड लाइसेंस कैसे बनता है और इसके क्या लाभ हैं.
पूरी तरह मकान मालिक के हित में
चाहे रेंट या लीज एग्रीमेंट हो या फिर लीज ऐंड लाइसेंस इन सभी दस्तावेजों को एकतरफा रूप में मकान मालिक के हितों की रक्षा में बनाया जाता है. दोनों ही दस्तावजों में स्पष्ट तौर पर उल्लेख कर किया जाता है कि संपत्ति का स्वामी उसके किरायेदार को नियत समय के लिए रिहाइशी अथवा व्यावसायिक इस्तेमाल करने को दे रहा है. समय की यह अवधि 11 महीनों से लेकर कुछ वर्षों तक हो सकती है. इसमें यह भी लिखा जाता है कि यदि किरायेदार रिहाइशी इस्तेमाल के लिए संपत्ति ले रहा है तो उसका इस्तेमाल व्यावसायिक गतिविधियों के लिए नहीं किया जा सकेगा. साथ ही तय की गई अवधि पूरी होने के बाद यदि एग्रीमेंट अथवा लीज ऐंड लाइसेंस को आगे नहीं बढ़ाया जाता तो उन परिस्थितियों में किरायेदार को संपत्ति खाली करनी होगी.
बाड़मेर डीएसपी रमेश कुमार शर्मा ने बताया कि जेल में अचानक मौत के शिकार हुए विचाराधीन कैदी भोमाराम पर हिरण के शिकार का आरोप था. इस मामले में वह बाड़मेर जिला जेल में बंद था. वह धोरीमन्ना थाना इलाके के खुमे की बेरी गांव का रहने वाला था. शुक्रवार को उसे जमानत मिली थी. शाम को उसका भाई उसे लेने आया था. भोमाराम जेल से बाहर आने से पहले वहां रजिस्टर में साइन कर रहा था. उसी दौरान अचानक उसकी तबीयत बिगड़ गई और वह वहीं पर गिर पड़ा.
शव का आज मेडिकल बोर्ड से करवाया जाएगा पोस्टमार्टम
इससे जेल प्रशासन की सांसें फूल गई. कैदी को आनन-फानन में स्थानीय अस्पताल ले जाया गया. लेकिन वहां डॉक्टर ने उसे मृत घोषित कर दिया. उसके बाद जेल प्रशासन ने कैदी के शव को वहां मोर्चरी में रखवाया. मौत के कारणों का फिलहाल पता नहीं चल पाया है. बाद में जेल प्रशासन ने पुलिस, न्यायिक मजिस्ट्रेट और कैदी के परिजनों को घटनाक्रम की जानकारी दी. इस पर न्यायिक मजिस्ट्रेट अस्पताल पहुंचे और उन्होंने कैदी की वीडियोग्राफी करवाई. कैदी के शव का पोस्टमार्टम करवाने के लिए मेडिकल बोर्ड का गठन किया गया है. आज शव का पोस्टमार्टम करवाया जाएगा.
एक दिन पहले देचू थाने में हुई थी युवक की मौत
उल्लेखनीय है कि इससे एक दिन गुरुवार रात को फलौदी जिले के देचू थाने में एक युवक की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई थी. उस युवक को पुलिस रेप केस में पूछताछ के लिए थाने लाई थी. वहां उसकी मौत हो गई. उसके बाद वहां बवाल मच गया. पुलिस का कहना है कि युवक ने सुसाइड किया है. दूसरी तरफ युवक के परिजनों का आरोप है कि उसके साथ पुलिस ने मारपीट की थी. इससे उसकी मौत हुई है. बाद में युवक के आक्रोशित परिजनों और लोगों ने देचू थाना घेर लिया था. पुलिस ने इस मामले में देचू थाने के 24 पुलिसकर्मियों को लाइन हाजिर कर दिया है.
केंद्र सरकार ने कहा कि शास्त्रीय भाषाएं भारत की प्राचीन सांस्कृतिक विरासत की संरक्षक के रूप में काम करती हैं, तथा हर समुदाय के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक सार को पेश करती हैं. भारत सरकार ने 12 अक्टूबर 2004 को ‘शास्त्रीय भाषा’ के रूप में भाषाओं की एक नई श्रेणी बनाने का फैसला लिया. जिसके तहत तमिल को शास्त्रीय भाषा घोषित किया गया तथा उसके बाद संस्कृत, तेलुगु, कन्नड़, मलयालम और उड़िया को शास्त्रीय भाषा का दर्जा दिया गया.
एक सरकारी बयान में कहा गया है कि 2013 में महाराष्ट्र सरकार की ओर से एक प्रस्ताव हासिल हुआ था, जिसमें मराठी को शास्त्रीय भाषा का दर्जा देने का अनुरोध किया गया था. इस प्रस्ताव को भाषा विज्ञान विशेषज्ञ समिति (एलईसी) को भेज दिया गया था. एलईसी ने शास्त्रीय भाषा के लिए मराठी की सिफारिश की.
महाराष्ट्र में इस साल के अंत में विधानसभा चुनाव होने हैं और यह राज्य में एक बड़ा चुनावी मुद्दा था. बयान में कहा गया कि इस बीच, बिहार, असम और पश्चिम बंगाल से भी पाली, प्राकृत, असमिया और बांग्ला को शास्त्रीय भाषा का दर्जा देने के प्रस्ताव हासिल हुए थे.
]]>2024 में अब तक बीएसई सेंसेक्स 17 फीसदी से ज्यादा ऊपर है. 2015 के बाद से अब तक हर साल सेंसेक्स पॉजिटिव रिटर्न दिया है. 2015 में इंडेक्स में 5 फीसदी की गिरावट देखने को मिली थी. साल 2012 के बाद से एनुअल बेसिस पर सेंसेक्स में केवल एक ही बार गिरावट देखने को मिली है. इस तरह पिछले 12 साल से सेंसेक्स औसतन एनुअल बेसिस पर 17 फीसदी का रिटर्न दिया है.
एफएंडओ स्पेस को लेकर सेबी द्वारा उठाए जाने वाले किसी भी संभावित कदम के संदर्भ में मोबियस ने कहा, ”मुझे लगता है कि सेंसेक्स शायद साल के अंत तक 100,000 तक पहुंच जाएगा, बशर्ते कि सेबी द्वारा उठाए गए कदमों से बाजार पर कोई बड़ा असर न पड़े, यह ऐसी चीज है जिस पर हमें नजर रखनी होगी,”
चीन के बाजार में तेजी से दूसरे इमरजिंग मार्केट्स को मिलेगा फायदा
मोबियस ने चीन के शेयर बाजारों में हालिया तेजी पर भी बातचीत की. उन्होंने कहा कि यह हालिया बेहतर प्रदर्शन अस्थायी प्रकृति का होगा क्योंकि यह अभी भी पूरी तरह से साफ नहीं है कि चीनी सरकार अपने बड़े उद्यमियों के साथ पूरी तरह से खड़ी है या नहीं. हालांकि चीन के बाजारों में आउटपरफॉर्मेंस से दूसरे इमरजिंग मार्केट्स के लिए नजरिया पॉजिटिव होगा.”
इन सेक्टर्स के स्टॉक्स में मौके मिलेंगे
मशहूर इमर्जिंग मार्केट इन्वेस्टर मार्क मोबियस ने कहा कि मेटल, ऑटो, रियल एस्टेट और फार्मा में अभी मौके हैं. भारतीय बाजार में गिरावट पर खरीदारी के लिए तैयार रहना होगा. सेमीकंडक्टर स्पेस में पर्याप्त मौके मिलेंगे.
दरअसल, हिमालयी नदियों का नेटवर्क पिछले 89 हजार सालों से इसकी निचले हिस्सों को काट कर अपनी घाटी का निर्माण करती रही हैं. इसके वजह से हिमालय का द्रव्यमान लगातार कम होते जाता है. बाकी का रहा सहा काम टेक्टोनिक फोर्स कर देता है. चूंकि, नदियों के काटने से हिमालय का द्रव्यमान कम होते जाता है, जिसके वजह से टेक्टोनिक फोर्स हिमालय पर ऊपर की ज्यादा बल लगा पाते हैं. इसकी ऊंचाई साल दर सार बढ़ती जाती है.
टेक्टोनिक बल क्या होता है
आगे बढ़ने से पहले आपको टेक्टोनिक बल के बारे में बता दें. टेक्टोनिक फोर्स तीन तरीके के होते हैं- अपसारी, अभिसारी और रूपांतरित बल.
अपसारी टेक्टोनिक बल में जब दो प्लेट एक दूसरे से अलग होती हैं. इससे उस भूभाग पर गहरे घाटी का निर्माण होता है. जैसे कि नर्मदा वैली घाटी.
अभिसारी टेक्टोनिक बल में दो टेक्टोनिक प्लेटें एक दूसरे की तरफ आते जाते हैं. इसी बल की हिमालय पर्वत का निर्माण हुआ है.
रूपांतरित टेक्टोनिक बल दो प्लेटें एक दूसरे के साथ रगड़ करती हैं. यहां न तो किसी बल का निर्माण होता है ना ही नष्ट होता है. इससे धरती पर फॉल्ट का निर्माण होता है. कैलिफोर्निया में बना सैन एंड्रियास फॉल्ट एक ट्रांसफॉर्म बाउंड्री का बड़ा एग्जांपल है.
नदियों के अपरदन का अहम योगदान
हिमालय की बढ़ती ऊंचाई पर एक नया शोध किया गया. जैसे-जैसे नदियों के अपरदन से हिमालय का द्रव्यमान कम होता है, इसपर धरती के मेंटल से ऊपर की ओर धक्का मिलता है, जिसके कारण यह सामान्य गति से अधिक गति बढ़ता है. 8,849 मीटर ऊंचा माउंट एवरेस्ट पृथ्वी का सबसे ऊंचा पर्वत है और यह हिमालय की दूसरी सबसे ऊंची चोटी से लगभग 250 मीटर ऊंचा है. आपको बता दें कि जब हिमालय की दो नदियां कोसी और अरूणा एक दूसरे से मिलीं तो एक बड़ा नेक बन गया और दोनों ने हिमालय से एक बड़े अमाउंट में मिट्टी को बहा दिया.
हर साल 2 मिलीमीटर बढ़ती है ऊंचाई
इन नदियों की वजह से हिमालय का एक बहुत बड़ा भूभाग के नष्ट हो कर इनके साथ बह गया. जिससे पहाड़ हल्का हो गया और यह हर साल 2 मिलीमीटर तक ऊपर की ओर उछलता रहा. पिछले 89 हजार सालों में इसकी ऊंचाई 15 से 50 मीटर के बीच बढ़ती रही है.
लेटेस्ट रिसर्च में क्या पता चला
यूनिवर्सिटी ऑफ लंदन के रिसर्च में बताया गया है कि माउंट एवरेस्ट मिथक और किंवदंती का यह एक ऐसा पर्वत है जो आज भी बढ़ रहा है. हमारे शोध से पता चलता है कि जैसे-जैसे पास की नदी प्रणाली गहरी खाई बनाती है, पहाड़ और ऊपर की ओर उछलता जाता है. यह आइसोस्टेटिक रिबाउंड नामक प्रभाव के कारण होता है. जहां पृथ्वी की पपड़ी का एक हिस्सा जब द्रव्यमान खो देता है, वह ऊपर की ओर झुकता है और “तैरने” लगता है. यह इलिए होता है क्योंकि द्रव्यमान के नुकसान के बाद धरती के नीचे के तरल मेंटल का तीव्र दबाव धरती गुरुत्वाकर्षण बल से अधिक होता है.
गूगल वेबसाइट पर दी गई जानकारी के अनुसार, गूगल विंटर इंटर्नशिप जनवरी 2025 (Google Winter Internship January 2025) में शुरू होगी. यह 22-24 हफ्तों की रहेगी. बैचलर्स/ मास्टर्स डिग्री कोर्स के फाइनल ईयर या कंप्यूटर साइंस में डुअल डिग्री प्रोग्राम के स्टूडेंट्स गूगल इंटर्नशिप के लिए अप्लाई कर सकते हैं. इसके लिए सिर्फ वही स्टूडेंट्स आवेदन करें, जिनका कोर्स 2025 में पूरा हो जाएगा. इसकी विस्तृत डिटेल्स गूगल की ऑफिशियल वेबसाइट पर इस डायरेक्ट लिंक से चेक कर सकते हैं.
Google Internship Qualification: गूगल इंटर्नशिप के लिए कौन अप्लाई कर सकता है?
गूगल में इंटर्नशिप के लिए अक्टूबर में अप्लाई कर सकते हैं. इसके लिए आपकी मिनिमम क्वॉलिफिकेशन यह होनी चाहिए-
1- असोसिएट, बैचलर्स या मास्टर्स डिग्री प्रोग्राम में एनरोल्ड हों.
2- सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट या संबंधित टेक्निकल फील्ड में ट्रेनिंग का अनुभव हो.
3- सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट का अनुभव हो.
4- C, C++, Java, JavaScript, Python या अन्य प्रोग्रामिंग लैंग्वेज में कोडिंग का अनुभव हो.
Google Internship Skills: गूगल में इंटर्नशिप के लिए अन्य योग्यता क्या होनी चाहिए?
1- इनमें से कुछ में काम करने का अनुभव होना चाहिए- वेब एप्लिकेशन डेवलपमेंट, Unix/Linux, मोबाइल एप्लिकेशन डेवलपमेंट, डिस्ट्रिब्यूटेड और पैरलल सिस्टम्स, मशीन लर्निंग, इन्फॉर्मेशन रिट्रीवल, नैचुरल लैंग्वेज प्रोसेसिंग, नेटवर्किंग, बड़े सॉफ्टवेयर सिस्टम डेवलप करने का अनुभव, सिक्योरिटी सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट का अनुभव.
2- स्कूल या वर्कप्लेस के अंदर या बाहर से इकट्ठा किए गए डेटा स्ट्रक्चर या एल्गोरिदम का अनुभव होना चाहिए (इसमें ओपन सोर्स हॉबी कोडिंग भी शामिल है).
3- यूनिवर्सिटी टर्म टाइम के बाहर कम से कम 6 महीने तक फुल टाइम काम करने के लिए उपलब्ध हों.
4- कॉम्प्लेक्स टेक्निकल डिस्कशन में शामिल होने के लिए अंग्रेजी में धाराप्रवाह बात कर सकते हों.
Google Intern Salary: गूगल में इंटर्न को कितनी सैलरी मिलती है?
गूगल अपने खास वर्क कल्चर और हाई सैलरी के लिए जाना जाता है (Google Intern Salary). गूगल में नौकरी करने वाले महीने में लाखों रुपये कमाते हैं. गूगल में इंटर्नशिप करने वालों को भी महीने में 60-70 हजार रुपये ऑफर किए जाते हैं. गूगल में सैलरी आपके विभाग और वर्क प्रोफाइल पर निर्भर करती है. ग्लासडोर पर दर्ज जानकारी के अनुसार, गूगल में इंटर्नशिप करने वाले युवाओं का पैकेज 10.6 लाख-16.8 लाख रुपये के बीच होता है.
Google Internship Application: गूगल इंटर्नशिप के लिए कैसे अप्लाई करें?
गूगल इंटर्नशिप एप्लिकेशन प्रोसेस शुरू करने के लिए अपने सीवी या रिज्यूमे को अपडेट कर लें. आपका रिज्यूमे और कवर लेटर इंग्लिश में ही होना चाहिए. गूगल इंटर्नशिप के लिए अप्लाई करते समय वहां जो भी डॉक्यूमेंट्स मांगे जाएं, उन्हें पीडीएफ में ही अपलोड करें.
1- गूगल करियर्स के रिज्यूमे सेक्शन में अपडेटेड सीवी या रिज्यूमे अपलोड करें. कोडिंग से जुड़ा कोई भी कोर्स किया हो तो उसकी जानकारी जरूर दें.
2- हायर एजुकेशन सेक्शन में सभी डिटेल्स सही से भरें. अगर आप पढ़ाई कर रहे हैं तो डिग्री स्टेटस में ‘Now attending’ ऑप्शन सेलेक्ट करें. फिर इंग्लिश में एक ऑफिशियल ट्रांसक्रिप्ट अपलोड करें.
3- इस पोजिशन के लिए अप्लाई करने पर आपको भारत में स्थित गूगल ऑफिस की किसी भी ब्रांच से काम करने का मौका मिल सकता है- बेंगलुरु (कर्नाटक), हैदराबाद (तेलंगाना).
]]>सुबह 11 बजे आकाशवाणी पर ‘मन की बात’ कार्यक्रम शुरू हो चुका है. उन्होंने अपने इस मासिक प्रोग्राम की शुरुआत जल-शक्ति, जल संरक्षण और नारी शक्ति से की. उन्होंने मध्य प्रदेश के छत्तरपुर गांव के महिलाओं के जल संरक्षण की बात की.
पीएम मोदी के मन की बात रोडियो प्रोग्राम ने आज 10 साल पूरे कर लिए हैं. इस प्रोग्राम 114वां संबोधन करेंगे. इस माध्यम से वह देश की जनता से रूबरू होते हैं. साथ ही देश के कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा करते हैं. इस कार्यक्रम का उद्देश्य सरकार की योजनाओं और पहलों के बारे में जानकारी देना. साथ ही जनता की समस्या पर बात करना. इस प्रोग्राम में किसान, युवा, महिला सशक्तिकरण और स्वच्छता जैसे मुद्दे मुख्य फोकस में रहते हैं.
यह कार्यक्रम आकाशवाणी और दूरदर्शन के पूरे नेटवर्क, AIR न्यूज़ वेबसाइट और न्यूज़ऑनएयर मोबाइल ऐप पर प्रसारित किया जाएगा. लोग यूट्यूब चैनल पर भी पीएम मोदी के विचार सुन सकते हैं. वहीं, बताई जा रही है कि प्रोग्राम खत्म होने के बात आकाशवाणी इसे लोकल लैंग्वेज पर भी प्रसारित किया जा सकता है. इस प्रोग्राम के लिए 5 सितंबर से 27 सितंबर तक जनता की राय जानने के लिए टेलिफोन लाइनें खोली गईं थी.
]]>चेहरे को खिला-खिला बनाए रखने के लिए खाएं ये चीजें
अब काम करना तो छोड़ नहीं सकते.
-चने की दाल और सौंफ को साथ मिलाकर खाने से कई फायदे होते हैं. आयुर्वेद के अनुसार, सुबह चने की दाल के साथ सौंफ खाने से चेहरे पर झुर्रियां आने की समस्या नहीं होती है.
-एक कटोरी चने की दाल को पानी में भिगोकर रख दें. कुछ देर बाद इसे किसी दूसरे बर्तन में निकाल लें. इसमें 1 या 2 चम्मच सौंफ मिलाएं.
ऐसे में चेहरे को फ्रेश और हेल्दी बनाए रखने के लिए कुछ तरीके अपना सकते हैं. अपनी डाइट में कुछ ऐसी चीजों को शामिल कर सकते हैं, जिससे चेहरा दिन भर खिला-खिला और स्वस्थ रह सकता है. बाजार में कई ऐसे प्रोडक्ट होते हैं, जो स्किन को खूबसूरत बनाए रखने के लिए बनाए जाते हैं. हालांकि, कुछ लोगों को ये ब्यूटी प्रोडक्ट्स सूट नहीं करते हैं. कई तरह के साइड एफेक्ट्स नजर आने लगते हैं. यदि आपको भी कम उम्र में ही चेहरे पर झुर्रियां, बुढ़ापे का असर नजर आने लगा है तो हर दिन आप चने की दाल और सौंफ का सेवन करके देखें. इसके रेगुलर सेवन से कमजोरी, थकान, चेहरे पर पड़ने वाली झुर्रियां को दूर किया जा सकता है.
– चने की दाल में न सिर्फ प्रोटीन, बल्कि ढेरों पोषक तत्व होते हैं. इसे दाल की तरह पका कर खाना भी काफी हेल्दी है. सौंफ के सेवन से शरीर में एनर्जी बनी रहती है. हालांकि, जब आप इन दोनों को मिक्स करके खाने का सोचें तो पहले किसी एक्सपर्ट की सलाह जरूर ले लें, ताकि आपको कोई एलर्जी या दूसरी समस्या न हो.
]]>