रामनवमी से पहले मोथाबारी क्षेत्र में मस्जिद के सामने पटाखे फोड़ने की घटना को लेकर विरोध प्रदर्शन के दौरान कट्टरपंथियों ने हिंदुओं की दुकानों और गाड़ियों पर हमला किया. इसके बाद बवाल हो गया. राज्य मंत्री और स्थानीय टीएमसी विधायक सबीना यास्मिन ने बताया, हमने दोनों समुदायों के लोगों के साथ बैठक की है. हमें विश्वास है कि स्थिति जल्द ही सामान्य हो जाएगी. उन्होंने कहा कि इंटरनेट बंद होने के बावजूद ईद और राम नवमी त्योहारों के मद्देनजर धारा 144 लागू नहीं की गई है.
कोर्ट ने दिए निर्देश
कलकत्ता हाईकोर्ट ने प्रशासन से 3 अप्रैल तक हिंसा पर की गई कार्रवाई की रिपोर्ट दाखिल करने को कहा है. अदालत ने मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए सावधानी से काम करने के निर्देश दिए हैं. कोर्ट ने कहा कि राम नवमी और ईद को ध्यान में रखते हुए, धारा 144 लागू नहीं की जाएगी. लेकिन पुलिस और प्रशासन ने संदेश फैलाया है कि कोई भी बड़ा जमावड़ा नहीं होने दिया जाएगा.
रायपुर के देवेंद्र नगर के एचडीएफसी बैंक शाखा से ऐसी ही एक खबर सामने आई है. यहां बैंक मैनेजर नितिन देवांगन के ऊपर ग्राहकों के खाते से बिना उनकी जानकारी के पैसे निकालने का आरोप लगा है. जांच में सामने आया कि बैंक मैनेजर इन पैसों को पर्सनल यूज के लिए इस्तेमाल कर रहा था. अब बैंक मैनेजर पर पुलिस ने आपराधिक मुकदमा दर्ज किया है. उसे गिरफ्तार कर लिया गया है.
6 खातों से हुआ फर्जीवाड़ा
पुलिस की एफआईआर के मुताबिक़, एचडीएफसी बैंक के ब्रांच मैनेजर की पोस्ट पर नितिन 2020 से 2023 तक पदस्थ थे. इस दौरान उन्होंने ग्राहकों के छह खातों से बिना उनकी अनुमति के 82 लाख 83 हजार रुपए निकाले और उन्हें पर्सनल यूज में इस्तेमाल किया. जब बैंक की तरफ से विभागीय जांच की गई, तब जाकर ये पूरा मामला सामने आया. बैंक की तरफ से नितिन को दोषी माना गया और उन्हें ग्राहकों के पैसे लौटाने को कहा गया.
नहीं दिए तीन लाख
नितिन ने बैंक के आदेश के बाद कुछ महीनों का समय मांगा. इसके बाद उसने बैंक को मात्र 78 लाख 85 हजार ही लौटाए. ऐसी स्थिति में बैंक ने तीन लाख 98 हजार के लिए देवेंद्र नगर थाने में शिकायत दर्ज करवाई. अब पुलिस ने नितिन के खिलाफ धोखाधड़ी का मुकदमा दर्ज कर लिया है और उसे अरेस्ट कर लिया है.
महिला की पहचान ज्योति गुप्ता के रूप में हुई है. उसका कहना है कि दिल्ली में तैनात पुलिसकर्मी है और इसी वजह से उसने अपने पास यह पिस्तौल रखी थी. हालांकि पुलिस ने पिस्तौल की जांच की तो पाया कि उसकी लाइसेंस अवधि समाप्त हो चुकी थी. घटना के बाद तुरंत रियासी पुलिस ने महिला को गिरफ्तार कर लिया और हथियार जब्त कर लिया.
इस मामले में कटरा के भवन पुलिस स्टेशन में एफआईआर दर्ज कर ली गई है और पुलिस ने आर्म्स एक्ट के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है. मंदिर परिसर में इस तरह से सुरक्षा में सेंध लगना गंभीर चिंता का विषय बन गया है, जिसके बाद मंदिर प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियां सतर्क हो गई हैं.
पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि महिला अवैध हथियार के साथ मंदिर परिसर तक कैसे पहुंची और इसका क्या मकसद था. मंदिर प्रशासन ने भी सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा करने का फैसला किया है, ताकि भविष्य में ऐसी किसी घटना को रोका जा सके.
]]>आम आदमी पार्टी के लीगल हेड संजीव नासियार ने कहा, यह बहुत ही आश्चर्यजनक है. पिछले कई घंटे से एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) के अधिकारी बैठे हुए थे. उनके पास कोई कागजात या निर्देश नहीं थे. वे लगातार किसी से फोन पर बात कर रहे थे. हमने उनसे जांच के लिए नोटिस मांगा मगर उनके पास कुछ भी नहीं थे.
केजरीवाल से ACB के सवाल
ACB: X प्लैटफ़ॉर्म पर किसने पोस्ट जारी किया
ACB: किन 16 उम्मीदवारों को रुपयों की पेशकश की गई
ACB: जिन लोगों ने पेशकश की उनके फ़ोन नंबर बताएँ
ACB: रुपयों की पेशकश के बारे में सबूत दें
ACB: ऐसी ख़बरें फैलाने वालों पर ऐक्शन क्यों न हो?
केजरीवाल का आया ट्ववीट
एसीबी की टीम घर में मौजूद थी, उसी वक्त अरविंद केजरीवाल ने एक ट्वीट किया. उन्होंने एसीबी की कार्रवाई के बारे में कुछ नहीं बताया. लेकिन चुनाव आयोग को लेकर सवाल उठाए. लिखा, कई अनुरोधों के बावजूद चुनाव आयोग ने फॉर्म 17सी और प्रत्येक विधानसभा में प्रति बूथ डाले गए वोटों की संख्या अपलोड करने से इनकार कर दिया है. आम आदमी पार्टी ने एक वेबसाइट बनाई है – http://transparentelections.in जहां हमने हर विधानसभा के सभी फॉर्म 17C अपलोड किए हैं. इस फॉर्म में हर बूथ पर पड़े वोटों का पूरा ब्यौरा है. दिन भर हम हर विधानसभा और हर बूथ का डेटा डालेंगे ताकि हर मतदाता तक यह जानकारी पहुंच सके. यह कुछ ऐसा है जो चुनाव आयोग को पारदर्शिता के हित में करना चाहिए था लेकिन यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि वे ऐसा नहीं कर रहे हैं.
फाइनेंशियल फ्रॉड मामले में वॉन्टेड और इंटरपोल की ओर से रेड कॉर्नर जारी भगोड़े को भारत लाने में कामयाबी मिली है. सीबीआई ने तमिलनाडु पुलिस द्वारा वॉन्टेड जनार्दनन सुंदरम को बैंकॉक से इंडिया लाया है. सुंदरम के कोलकाता एयरपोर्ट पर लैंड करते ही उसे गिरफ्तार कर किया गया और तमिलनाडु पुलिस के हवाले कर दिया गया. इकोनॉमिक ऑफेंस विंग (ईओडब्ल्यू) चेन्नई (तमिलनाडु) ने साल 2022 में सुंदरम के खिलाफ मामला दर्ज किया था. आरोपी पर धोखाधड़ी समेत अन्य गंभीर आरोप थे. सुंदरम पर सुंदरम 87,50,73,778 रुपये का फ्रॉड करने का आरोप है. अब उसके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जा जाएगी.
रेड कॉर्नर नोटिस
तमिलनाडु पुलिस के अनुरोध पर सीबीआई ने साल 2023 में इंटरपोल से को-ऑर्डिनेट किया और पूरे मामले की जानकारी देकर रेड कॉर्नर नोटिस इश्यू करवाया था. वॉन्टेड क्रिमिनल पर नजर रखने के लिए डिटेल विश्व स्तर पर सभी एजेंसियों को भेजा भी गया था.28 जनवरी 2025 को बैंकॉक की यात्रा करने वाले सुंदरम को रेड कॉर्नर नोटिस के आधार पर एंट्री से रोक दिया गया. साथ उसे बैंकॉक से भारत भेज दिया गया. सुंदरम 29 जनवरी 2025 को बैंकॉक से कोलकाता एयरपोर्ट पर लैंड किया. इंडिया पहुंचते ही उसे गिरफ्तार कर लिया गया. बाद में उसे तमिलनाडु पुलिस टीम को सौंप दिया गया.
अमेरिका से आया आरोपी एयरपोर्ट पर गिरफ्तार
धोखाधड़ी, जालसाजी और आपराधिक साजिश के एक अन्य मामले में इंटरपोल की ओर से रेड कॉर्नर नोटिस वॉन्टेड वीरेंद्रभाई मणिभाई पटेल को अहमदाबाद एयरपोर्ट से गिरफ्तार किया गया. सीबीआई ने वीरेंद्रभाई के खिलाफ नोटिस जारी करवाया था. फ्रॉड के एक मामले में गुजरात पुलिस के अनुरोध पर आरोपी के खिलाफ नोटिस जारी किया गया था. गुजरात पुलिस ने साल 2002 में आपराधिक साजिश, दस्तावेजों की जालसाजी, जाली दस्तावेज़ का उपयोग, धोखाधड़ी और बेईमानी से संपत्ति की डिलीवरी के मामलों में केस दर्ज किया गया था. वीरेंद्रभाई पटेल पर 77 करोड़ रुपये का घपला करने का आरोप है.
सेबी ने शेयर ब्रोकर और डिपॉजिटरी भागीदार मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज लिमिटेड का अप्रैल, 2021 से जून, 2022 तक की अवधि के लिए शेयर बाजारों और डिपॉजिटरी के साथ संयुक्त रूप से जांच की. इसके बाद सेबी 4 जुलाई 2024 को ब्रोकिंग फर्म को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया.
ये हैं आरोप
सेबी के नोटिस में मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज पर जो मुख्य आरोप लगाए गए, उनमें गलत रिपोर्टिंग और मार्जिन की कम वसूली, कैश और कैश इक्विवेलेंट बैलेंस का गलत डेटा (57 मामलों में), सिक्योरिटीज बिजनेस के अलावा अन्य कार्यों में शामिल होना (जिससे पर्सनल फाइनेंशियल लायबिलिटी पैदा हुई) और मार्जिन ट्रेडिंग फंडिंग पर गलत रिपोर्टिंग शामिल हैं. मार्केट रेगुलेटर के नोटिस में आरोप लगाया गया कि SCORES प्लेटफॉर्म और एक्सचेंजों से प्राप्त 300 से ज्यादा (334) शिकायतें 30 दिनों से ज्यादा समय से पेंडिंग थीं. इसके अलावा मार्केट इंटरमीडियरी ने अकाउंट्स को सही तरीके से मेंटेन नहीं किया.
मोतीलाल ओसवाल ने आरोपों पर दी सफाई
मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज ने नोटिस के जवाब में कहा कि कुछ उल्लंघन पूरी तरह से अनजाने में हुए और जानबूझकर की गई गलत रिपोर्टिंग नहीं थे. इसमें आगे कहा गया है कि कुछ टेक्निकल इश्यू भी थे, जिनके चलते उल्लंघन हुए और उन्हें पहले ही ठीक कर लिया गया है.
जिसमें उसकी पहचान जिया पटेल नाम की लड़की से हुई थी. जिया ने खुद को मोरबी का बताया और भोपाल के एक ब्यूटी पार्लर में काम करने वाली बताया बाद में उसने युवक से मिलने की मीठी-मीठी बातें कीं. जब युवक उससे मिलने भोपाल गया तो जिया ने बहाना बनाकर उससे मिलना टाल दिया. बाद में नलसरोवर लंबी ड्राइव पर गए और शारीरिक संबंध बनाने का मीठा प्रलोभन दिया.
कई जिलों में कांड कर चुकी है महिला
22 नवंबर को युवक और जिया की मुलाकात हुई. जिया ने युवक को नालासरोवर रोड पर एक सुनसान जगह पर ले जाने को कहा और युवक उसे वहां ले गया. लड़की के दोस्त वहां आ गए और उसे पीटने लगे और धमकी देने लगे. बाद में आरोपी ने नकली पुलिस बनकर लड़की से बात कर कानून का डर दिखाया. बाद में आरोपियों ने युवक का क्रेडिट और डेबिट कार्ड लूट लिया. जिससे उसे नकदी मिली और उसने आभूषण खरीदे. इस मामले में नालासरोवर पुलिस ने केस दर्ज किया. जांच के बाद ग्रामीण एलसीबी, एसओजी, नालासरोवर पुलिस सहित टीमों ने गिरोह के चार आरोपियों को गिरफ्तार कर पूछताछ की है. फिर पुलिस ने इस संदेह पर जांच तेज कर दी है कि इस गिरोह के लोगों ने अन्य शहरों या जिलों में और भी वारदातें की हैं.
ये गिरोह के सदस्य पकड़े गए
जानकी कनकभाई के ऊपर (शेष. ध्रोल, जामनगर)
नासिर जसराया (शेष. ध्रोल, जामनगर)
कौसर उर्फ जिया उर्फ खुशी पिंजारा (निवासी धरोल, जामनगर)
साहिल वाघेला (शेष. ध्रोल, राजकोट)
राज कोटाई (शेष धरोल, जामनगर)
शहर में एक लड़की ने भी अपराध किया है. पुलिस जांच में पता चला कि आरोपी जानकी, नसीर, कौसर, साहिल और राज एक ही गांव में रहते हैं और आपस में दोस्त हैं. पैसा कमाने के लालच में उन्होंने इस एप्लीकेशन के जरिए कई लोगों को अपना शिकार बनाया है. कौसर इस गैंग का मास्टरमाइंड है और उसने सूरतनगर में भी एक शख्स को हनीट्रैप में फंसाया था. होटल में प्रवेश पर रोक लगाने वाले इस गिरोह के सदस्य पहले से ही योजना बना रहे थे. कौसर किसी भी टारगेट को फंसा लेता था. मिलने की बात तय होने पर जब कौसर को एक होटल में ले जाने की पेशकश की गई तो उसने इनकार कर दिया. यह कहते हुए कि हाईवे के होटल खतरनाक हैं, वह एक सुनसान जगह पर मिलने का फैसला करता था और अपने गिरोह के सदस्यों को डकैती करने के लिए वहां बुलाता था.
]]>गाजियाबाद कमिश्नरेट के सहायक पुलिस आयुक्त रजनीश उपाध्याय ने बताया खोड़ा थाने में एक युवक पहुंचा और उसने अपना नाम राजू बताया और कहा कि दिल्ली-नोएडा के आसपास किसी जगह का रहने वाला है. 31 साल पहले उसका अपहरण हुआ था.
9 साल की उम्र में हुआ था अपहरण
उस समय उकी उम्र केवल नौ साल थी. उसकी चार बहन हैं और अकेला भाई है. एक दिन बड़ी बहन के साथ स्कूल से लौट रहा था. किसी बात को लेकर बहन से झगड़ा हो गया, वो आगे आगे चलने लगा और पास में खड़े एक टेंपो में बैठ गया. उसमें कुछ लोग बैठे थे, बातचीत की, उसने झगड़े की बात बताई. इसके बाद वे कुछ दूर तक टेंपो से ले गए. इसके बाद ट्रक से राजस्थान के किसी शहर में ले गए. बाद उसे पता चला कि जहां पर रखा गया है, वो जैसलमेर जिले में आता है.
दिनभर काम कराते और रात में बांध देते थे
वहां उससे दिनभर भेड़ बकरियां चराने का काम कराया जाता था और रात में बांध दिया जाता है. इस तरह उसके 31 साल गुजर रहे. उसके साथ इसी के और भी कई बच्चे थे. पूछताछ में उसने बातया कि गांव इतने बीहड़ में था, जहां से रोड तक जाने में दो दिन लगते थे. इस वजह से वो कभी भागने की हिम्मत नहीं करा पाया.
सरदार जी तरस खाकर दिल्ली छोड़ गए
राजू ने बताया कि हाल फिलहाल में एक सरदार जी भेड़ बकरी खरीदने आए थे. राजू की बढ़ी दाढ़ी बाल और नाखून देखकर तरस आ गया. उन्होंने राजू के परिवार के संबंध में पूछ तो उसने बताया कि दिल्ली नोएडा के करीब है. वो किसी तरह उसको दिल्ली लेकर आए. यहां पर बाल दाढ़ी कटवाई. कपड़े खरीदवाए और कुछ रुपये दे दिए. उसे यहीं छोड़ वापस चले गए.
नोएडा, स्कूल और मंदिर ही याद था
उसे दिल्ली-नोएडा का नाम याद था, स्कूल जानें में मंदिर पड़ता था. लेकिन 31 साल में पूरा बदल गया. पहले जंगल होता था, लेकिन अब बदल गया है, इसलिए पहचान नहीं पा रहा था. नोएडा के पास खोड़ा था पड़ता है इसलिए लोगों ने उसे सलाह दी कि खोड़ा थाने में संपर्क करे. यहां पर पहुंचकर उसने आपबीती बताई. उसकी कहानी सुनकर पुलिसकर्मी तरस आया और उन्होंने अपने तरीके से पता लगाना शुरू किया. साथ ही मीडिया और सोशल मीडिया में भी खबरें चलवाईं.
थाने पहुंचने लगे कई परिवार
खबर पढ़ते ही वो सभी लोग थाने पहुंचने लगे, जिनके बच्चों का अपहरण या गायब 1993 में हुए थे. राजू को भी स्वयं कुछ भी याद नहीं था. इसी बीच साहिबाबाद थाने के शहीदनगर में रहने वाले तुलाराम पत्नी के साथ पहुंचे. उन्होंने बताया कि उनका बेटा भी 1993 में स्कूल से लौटते समय गायब हो गया था. पुलिस साहिबाबाद थाने के रिकार्ड खंगलाए तो तुलाराम की ओर से मामला दर्ज है. इसके बाद शरीर में कुछ निशान बताए, जो राजू के शरीर में मिले. तुलाराम के घर से स्कूल जाने में रास्ते में मंदिर पड़ता है. इस तरह तय हुआ कि वो तुलाराम का बेटा है. जिसका असली नाम भीम सिंह है. राजू नाम जैसलमेर में रखा गया था. पुलिस ने कागजी कार्रवाई करके परिजनों को सौंप दिया है.
]]>कटेया थाने के गौरा बाजार के रहनेवाले पीड़ित कारोबारी अरुण कुमार पटवा ने इस मामले को लेकर साइबर थाने में प्राथमिकी दर्ज करायी है. पीड़ित कारोबारी ने पुलिस को बताया कि कास्मेटिक सामान खरीदने के सिलसिले में सितंबर महीने में मुंबई गया हुआ था. मुंबई से लौटने पर बीते 25 अक्तूबर को कॉल आया और खुद को टेलिकॉम ऑफिस बताया़ कॉल करनेवाले जोया प्रवीन ने कहा कि उसके आधार कार्ड से एक सिमकार्ड निकला हुआ है और कुछ ही सेकेंड में उसने कॉल दूसरे जगह ट्रांसफर कर दिया.
जानकारी के अनुसार वहां बात करनेवाले साइबर अपराधी ने खुद को मुंबइ क्राइम बांच का अधिकारी बताया और कारोबारी के ऊपर 17 एफआइआर दर्ज होने का झांसा देकर 99 हजार रुपये बैंक खाते में मंगा लिया़ इसके बाद आरबीआइ का अधिकारी बनकर तीसरा साइबर अपराधी ने कॉल किया और मनी लाउंड्री का केस दर्ज होने की बात कहकर 84 हजार रुपये खाते में मंगा लिया.
वहीं ठगी का शिकार होने के बाद कारोबारी ने मामले को गंभीरता से लिया और इसकी शिकायत साइबर हेल्पलाइन नंबर पर दर्ज कराते हुउ साइबर थाने में की. साइबर थाने की पुलिस इस मामले में प्राथमिकी दर्ज कर जांच पड़ताल करने में जुटी हुई है.
]]>मौजूदा समय में दुनिया में 30 से ज्यादा ऐसे क्रिकेटर हैं, जिन पर कभी ना कभी मैच फिक्सिंग का आरोप लगा. पाकिस्तान के पूर्व कप्तान सलीम मलिक दुनिया के पहले क्रिकेटर थे, जिन पर मैच फिक्सिंग का आरोप साबित हुआ और उन पर आजीवन प्रतिबंध लगा. सलीम मलिक पर सिर्फ बैन ही नहीं लगा, बल्कि उन्हें जेल की हवा भी खानी पड़ी. पाकिस्तान के ही अता उर रहमान पर मैच फिक्सिंग के लिए आजीवन बैन लगा.
अजहर-जडेजा-मनोज प्रभाकर…
भारतीय क्रिकेटरों पर भी मैच फिक्सिंग के आरोप लगे और उन्हें सजा भी हुई. साल 2000 में दक्षिण अफ्रीकी कप्तान हैंसी क्रोन्ये ने दावा किया कि मोहम्मद अजहरुद्दीन ने उन्हें बुकी से मिलवाया और मैच फिक्स करने का ऑफर किया. मैच फिक्सिंग के इन आरोपों से क्रिकेट वर्ल्ड हिल गया. जांच के बाद बीसीसीआई ने कप्तान रहे अजहरुद्दीन, अजय जडेजा, अजय शर्मा पर आजीवन बैन लगा और मनोज प्रभाकर को 5 साल के लिए प्रतिबंधित किया गया. हालांकि, कोर्ट ने इन चारों पर लगा प्रतिबंध हटा दिया.
क्रोन्ये के खुलासे से मचा बवाल
हैंसी क्रोन्ये के खुलासे ने सिर्फ भारतीय क्रिकेट को नहीं डसा. दक्षिण अफ्रीका के क्रिकेटर भी इसकी चपेट में आए. हैंसी क्रोन्ये तो आजीवन प्रतिबंधित किए ही गए. हर्शेल गिब्स, हेनरी विलियम्स पर भी छह-छह महीने का बैन लगा. केन्या के मॉरिस ओडुम्बे और वेस्टइंडीज के मर्लोन सैमुअल्स पर भी अलग-अलग मामलों में क्रमश: 5 और 3 साल के लिए प्रतिबंधित किए गए.
2010 में आया सबसे बड़ा तूफान
साल 2010 में फिक्सिंग का बड़ा तूफान आया, जब स्टिंग ऑपरेशन में पाकिस्तान के मोहम्मद आमिर, मोहम्मद आसिफ और तत्कालीन कप्ताान सलमान बट पैसे के बदले अपना खेल बेचते नजर आए. हालांकि, यह मैच फिक्सिंग की बजाय स्पॉट फिक्सिंग का मामला ज्यादा था. पाकिस्तान के इन क्रिकेटरों पर इंग्लैंड में केस चला और सजा भी हुई. सलमान बट को 30 महीने, आसिफ को 12 महीने और आमिर को 6 महीने की जेल हुई.
दानिश कनेरिया पर आजीवन बैन
यूट्यूब पर खूब एक्टिव रहने वाले पाकिस्तानी क्रिकेटर दानिश कनेरिया भी आजीवन प्रतिबंधित हैं. कनेरिया ने इंग्लैंड में काउंटी क्रिकेट में स्पॉट फिक्सिंग की थी. पाकिस्तान के उमर अकमल, शर्जील खान, बांग्लादेश के पूर्व कप्तान मोहम्मद अशरफुल, शरीफ उल हक, न्यूजीलैंड के ल्यू विंसेट, पाकिस्तान के लोनावाबो सोत्सोबे, अलवीरो पीटरसन भी फिक्सिंग के अलग-अलग मामलों में प्रतिबंध झेल चुके हैं.