डिमांड 1- आंदोलन की शुरुआत में जूनियर डॉक्टरों की मांग थी ‘जस्टिस’. इसके लिए वे सीबीआई जांच की मांग कर रहे थे. साथ ही प्रशासन की तरफ से सुरक्षा का आश्वासन और आर जी कर अस्पताल के मौजूदा प्रिंसिपल संदीप घोष को हटाए जाने की मांग. हाईकोर्ट के आदेश के बाद केस सीबीआई को ट्रांसफर हुआ. कांड के एक सप्ताह बाद ही मामला सीबीआई को सौंपा गया. जब मामला सुप्रीम कोर्ट की दहलीज तक पहुंचा तो डॉक्टरों को सुरक्षा मुहैया कराने के लिए केन्द्रीय सुरक्षा बलों को तैनात किया गया.
डिमांड 2- इसके बाद जूनियर डॉक्टरों ने आरजी कर अस्पताल में संदीप घोष की जगह भेजे गए नये प्रिंसिपल को भी हटाने की मांग की. साथ ही मेडिकल सुपरिटेंडेंट एंड वाइस प्रिंसिपल सहित अस्पताल में घटना के समय कार्यरत कई विभाग प्रमुखों को हटाने का मांग की. सरकार ने बात मानी और उन्हें हटा दिया.
डिमांड 3- फिर संदीप घोष और उनके करीबी दो डॉक्टर, जो आरजी कर अस्पताल से पहले संदीप घोष के बर्दवान और कमरहाटी में तैनात रहते थे, को सस्पेंड करने की मांग की. डॉक्टर वीरूपाक्ष विश्वास और डॉक्टर अवीक डे को आगे चलकर स्वास्थ विभाग ने सस्पेंड कर दिया.
डिमांड 4 (शर्तों के साथ)- ये सारी मांगें पूरी होने के बाद डॉक्टरों ने पुलिस मुख्यालय लालबाजार का घेराव अभियान किया. जहां वे पुलिस कमिश्नर के इस्तीफे की मांग कर रहे थे. उनकी मांग थी कि या तो पुलिस कमिश्नर विनीत गोयल इस्तीफा दें या उन छात्रों से उनकी शर्तों पर मुलाकात करें. एक दिन चले धरने के बाद पुलिस कमिश्नर ने उनकी मांगें मानीं और सभी प्रदर्शनकारियों को लालबाजार के पास तक आने दिया. साथ ही प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात भी की, जिन्होंने पुलिस कमिश्नर को स्पाइन का मॉडल गिफ्ट किया.
डिमांड 5- मंगलवार रको जूनियर डॉक्टरों ने स्वास्थ सचिव, डॉयरेक्टर हेल्थ के इस्तीफे की मांग करते हुए स्वास्थ भवन की तरफ कूच किया. इस मांग पर ये डॉक्टर तब से स्वास्थ्य भवन के सामने धरने पर बैठे हैं.
शर्तों की लड़ी: पहले स्वास्थ सचिव ने ईमेल लिखकर इन जूनियर डॉक्टरों को मिलने बुलाया. एक डॉक्टर ने कहा कि स्वास्थ्य सचिव का तो हम इस्तीफ़ा मांग रहे हैं. उनके साथ बैठक नहीं करेंगे.
उसके बाद मुख्य सचिव ने ईमेल लिखकर जूनियर डॉक्टरों को मिलने की बात कही तो जवाबी ईमेल में डॉक्टरों ने शर्तें लाद दीं. कल शाम यानी बुधवार को 6 बजे डॉक्टरों को बैठक के लिए बुलाया गया था लेकिन डॉक्टरों ने अंतिम समय बताया कि वे बैठक में शामिल होने नहीं जायेंगे. अब डॉक्टरों ने बैठक के लिए क्या शर्तें रखीं?
1- बैठक मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की मौजूदगी में होगी.
2- 10 की बजाय 30 डॉक्टर बैठक में हिस्सा लेने जायेंगे.
3- डॉक्टरों की मांगों पर ही चर्चा होगी.
4- ममता संग बैठक की लाइव स्ट्रीमिंग होगी.
कब थी ममता संग मीटिंग
हालांकि, पश्चिम बंगाल के मुख्य सचिव ने गुरुवार को फिर डॉक्टरों को मिलने बुलाया. डॉक्टरों को लिखी चिट्ठी में साफ लिखा कि बैठक की लाइव स्ट्रीमिंग नहीं की जायेगी. बाकी मुख्यमंत्री ममता बनर्जी बैठक में रहेंगी और 15 लोग बैठक में शामिल हो सकेंगे. डॉक्टरों को गुरुवार को मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने शाम 4.45 पर बुलाया था, जिससे बैठक 5 बजे शुरू हो सके. मुख्यमंत्री ममता खुद शाम 4.45 से डॉक्टरों का इंतजार कर रही थीं.
डॉक्टरों ने रखा सस्पेंस, फिर खोला पत्ता
उधर, डॉक्टरों ने गुरुवार को भी बैठक में जायेंगे या नहीं, इसपर अंत समय तक सस्पेंस बनाये रखा और 4.21 पर घोषणा की कि वे थोड़ी देर में बस से रवाना होंगे और बैठक में शामिल होंगे. हालांकि, उन्होंने फिर दोहराया कि उनकी दो मांगें हैं. एक कि 15 की जगह 30 लोगों को अनुमति दी जाये और दूसरी कि बैठक की लाइव स्ट्रीमिंग हो. इसके बाद डॉक्टर्स नबान्नो शाम 5.25 पर पहुंचे. उसके बाद जिद पर अड़ गए कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होंगी, वे भीतर नहीं जायेंगे. मुख्यमंत्री ममता अंदर इंतजार करती रहीं और डॉक्टर सभागार के अंदर नहीं गए. इस बीच मुख्य सचिव आये, डीजीपी आये और डॉक्टरों से कहा कि 15 की बजाय 32 लोग भले बैठक में चलें लेकिन बैठक की लाइव स्ट्रीमिंग नहीं हो सकती है. ममता करीब 2 घंटे तक इंतजार करती रहीं, मगर डॉक्टर्स मीटिंग के लिए नहीं ही गए.
ममता ने कितने देर किया इंतजार?
बातचीत के लिए सीएम ममता बनर्जी ने कुल 2 घंटे 10 मिनट तक डॉक्टरों का इंतजार किया. जब डॉक्टर नहीं गए तो वो प्रेस के सामने आईं और कहा कि उन्हें लगता है कुछ डॉक्टर ऐसे हैं, जिन्हें बाहर से इंस्ट्रक्शन्स आ रहे हैं कि वे बातचीत न करें. मगर वे फिर भी डॉक्टरों को माफ करती हैं. उन्होंने फिर दोहराया कि उन डॉक्टरों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की जाएगी. बता दें कि 9 अगस्त को आरजी कर अस्पताल के सेमिनार हॉल में लेडी ट्रेनी डॉक्टर का शव मिला था. 10 अगस्त को आरोपी संजय रॉय को गिरफ्तार किया गया. कोलकाता डॉक्टर रेप-मर्डर कांड के बाद से ही सियासत भी जारी है.
दरअसल डॉक्टर्स मिलने के लिए अपनी शर्त रख रहे हैं. इस शर्त में उन्होंनों ममता बनर्जी के साथ बैठक के लाइव टेलीकास्ट की बात कही है. वहीं सुप्रीम कोर्ट द्वारा काम पर लौटने के आदेश के बाद भी डॉक्टर काम पर नहीं लौटे हैं. बता दें कि कोलकाता में आरजी कर हॉस्पिटल में ट्रेनी लेडी डॉक्टर के साथ रेप के मर्डर कर दिया गया था. इसके बाद यह मामला सुर्खियों में है. ट्रेनी लेडी डॉक्टर को न्याय दिलाने के लिए डॉक्टर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं.
मुख्य सचिव मनोज पंत द्वारा बुधवार (11 सितंबर) शाम को वार्ता के लिए राज्य सचिवालय नबन्ना में 15 से अधिक सदस्यों के प्रतिनिधिमंडल को आमंत्रित करने के कुछ घंटों बाद, प्रदर्शनकारियों ने 30 प्रतिनिधियों की एक बड़ी टीम पर जोर दिया और बैठक का लाइव प्रसारण करने की मांग पर अड़े रहे. डॉक्टरों ने मुख्य सचिव के आमंत्रण का जवाब दिया है.
डॉक्टरों ने जवाब में कहा है, “हम कम से कम 30 प्रतिनिधियों की एक प्रतिनिधि टीम भेजना चाहते हैं. हम चाहते हैं कि सभी पक्षों के बीच पारदर्शिता के लिए बैठक का लाइव प्रसारण किया जाए. हम चाहते हैं कि बैठक हमारी मांगों पर आधारित हो. हम अपनी बात पर फिर से जोर दे रहे हैं कि हम चाहते हैं कि हमारी चर्चा माननीय मुख्यमंत्री की मौजूदगी में हो.” उन्होंने कहा कि वे राज्य सरकार से “सकारात्मक प्रतिक्रिया” का इंतजार कर रहे हैं.
सरकार की ये है शर्त
ईमेल का जवाब देने वाले पंत ने कहा कि केवल 12 से 15 डॉक्टरों को ही अनुमति दी जाएगी, लेकिन उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया कि मुख्यमंत्री बैठक की अध्यक्षता करेंगे या नहीं. उन्होंने जूनियर डॉक्टरों को लिखे अपने पत्र में कहा, “एक बार फिर, एक और अवसर के रूप में, हम आपके प्रतिनिधिमंडल को आमंत्रित करते हैं, जिसमें अधिमानतः 12-15 सहकर्मी शामिल हों, जो आज शाम 6 बजे, यानी 11.09.2024 को नबन्ना में चर्चा के लिए हमारे साथ शामिल हों. कृपया अपने प्रतिनिधिमंडल के सदस्यों की सूची ईमेल द्वारा सूचित करें.”
डॉक्टरों की अपनी शर्त
बनर्जी को लिखे गए ईमेल में डॉक्टरों ने सबसे महत्वपूर्ण शर्त यह रखी कि बंद कमरे में होने वाली बैठक के बजाय खुले मंच पर चर्चा का लाइव प्रसारण किया जाए. उन्होंने “अभया” (मामले में पीड़िता को दिया गया प्रतीकात्मक नाम) के लिए शीघ्र न्याय, सरकारी स्वास्थ्य सेवा के सभी पहलुओं में व्याप्त “धमकी संस्कृति” का अंत और सभी महिला स्वास्थ्य पेशेवरों के लिए पर्याप्त सुरक्षा और संरक्षा उपायों की भी मांग की.
गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को प्रदर्शनकारी रेजिडेंट डॉक्टरों को मंगलवार शाम 5 बजे तक काम पर लौटने का निर्देश दिया और कहा कि काम पर लौटने पर उनके खिलाफ कोई प्रतिकूल कार्रवाई नहीं की जाएगी. दालत ने यह निर्देश दिया पश्चिम बंगाल सरकार द्वारा यह आश्वासन दिए जाने के बाद कि काम पर लौटने पर प्रदर्शनकारी डॉक्टरों के खिलाफ दंडात्मक तबादलों सहित कोई कार्रवाई नहीं की जाएगी. आरजी कर मेडिकल कॉलेज और अस्पताल में एक ट्रेनी डॉक्टर के साथ बलात्कार किया गया और उसकी हत्या कर दी गई और उसका शव 9 अगस्त को अस्पताल के सेमिनार हॉल में अर्धनग्न अवस्था में मिला. इस घटना ने पूरे देश में भारी हंगामा मचा दिया और डॉक्टरों ने कार्यस्थल पर सुरक्षा की मांग करते हुए विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया.
]]>दरअसल डॉक्टर्स मिलने के लिए अपनी शर्त रख रहे हैं. इस शर्त में उन्होंनों ममता बनर्जी के साथ बैठक के लाइव टेलीकास्ट की बात कही है. वहीं सुप्रीम कोर्ट द्वारा काम पर लौटने के आदेश के बाद भी डॉक्टर काम पर नहीं लौटे हैं. बता दें कि कोलकाता में आरजी कर हॉस्पिटल में ट्रेनी लेडी डॉक्टर के साथ रेप के मर्डर कर दिया गया था. इसके बाद यह मामला सुर्खियों में है. ट्रेनी लेडी डॉक्टर को न्याय दिलाने के लिए डॉक्टर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं.
मुख्य सचिव मनोज पंत द्वारा बुधवार (11 सितंबर) शाम को वार्ता के लिए राज्य सचिवालय नबन्ना में 15 से अधिक सदस्यों के प्रतिनिधिमंडल को आमंत्रित करने के कुछ घंटों बाद, प्रदर्शनकारियों ने 30 प्रतिनिधियों की एक बड़ी टीम पर जोर दिया और बैठक का लाइव प्रसारण करने की मांग पर अड़े रहे. डॉक्टरों ने मुख्य सचिव के आमंत्रण का जवाब दिया है.
डॉक्टरों ने जवाब में कहा है, “हम कम से कम 30 प्रतिनिधियों की एक प्रतिनिधि टीम भेजना चाहते हैं. हम चाहते हैं कि सभी पक्षों के बीच पारदर्शिता के लिए बैठक का लाइव प्रसारण किया जाए. हम चाहते हैं कि बैठक हमारी मांगों पर आधारित हो. हम अपनी बात पर फिर से जोर दे रहे हैं कि हम चाहते हैं कि हमारी चर्चा माननीय मुख्यमंत्री की मौजूदगी में हो.” उन्होंने कहा कि वे राज्य सरकार से “सकारात्मक प्रतिक्रिया” का इंतजार कर रहे हैं.
सरकार की ये है शर्त
ईमेल का जवाब देने वाले पंत ने कहा कि केवल 12 से 15 डॉक्टरों को ही अनुमति दी जाएगी, लेकिन उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया कि मुख्यमंत्री बैठक की अध्यक्षता करेंगे या नहीं. उन्होंने जूनियर डॉक्टरों को लिखे अपने पत्र में कहा, “एक बार फिर, एक और अवसर के रूप में, हम आपके प्रतिनिधिमंडल को आमंत्रित करते हैं, जिसमें अधिमानतः 12-15 सहकर्मी शामिल हों, जो आज शाम 6 बजे, यानी 11.09.2024 को नबन्ना में चर्चा के लिए हमारे साथ शामिल हों. कृपया अपने प्रतिनिधिमंडल के सदस्यों की सूची ईमेल द्वारा सूचित करें.”
डॉक्टरों की अपनी शर्त
बनर्जी को लिखे गए ईमेल में डॉक्टरों ने सबसे महत्वपूर्ण शर्त यह रखी कि बंद कमरे में होने वाली बैठक के बजाय खुले मंच पर चर्चा का लाइव प्रसारण किया जाए. उन्होंने “अभया” (मामले में पीड़िता को दिया गया प्रतीकात्मक नाम) के लिए शीघ्र न्याय, सरकारी स्वास्थ्य सेवा के सभी पहलुओं में व्याप्त “धमकी संस्कृति” का अंत और सभी महिला स्वास्थ्य पेशेवरों के लिए पर्याप्त सुरक्षा और संरक्षा उपायों की भी मांग की.
गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को प्रदर्शनकारी रेजिडेंट डॉक्टरों को मंगलवार शाम 5 बजे तक काम पर लौटने का निर्देश दिया और कहा कि काम पर लौटने पर उनके खिलाफ कोई प्रतिकूल कार्रवाई नहीं की जाएगी. दालत ने यह निर्देश दिया पश्चिम बंगाल सरकार द्वारा यह आश्वासन दिए जाने के बाद कि काम पर लौटने पर प्रदर्शनकारी डॉक्टरों के खिलाफ दंडात्मक तबादलों सहित कोई कार्रवाई नहीं की जाएगी. आरजी कर मेडिकल कॉलेज और अस्पताल में एक ट्रेनी डॉक्टर के साथ बलात्कार किया गया और उसकी हत्या कर दी गई और उसका शव 9 अगस्त को अस्पताल के सेमिनार हॉल में अर्धनग्न अवस्था में मिला. इस घटना ने पूरे देश में भारी हंगामा मचा दिया और डॉक्टरों ने कार्यस्थल पर सुरक्षा की मांग करते हुए विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया.
]]>दरअसल डॉक्टर्स मिलने के लिए अपनी शर्त रख रहे हैं. इस शर्त में उन्होंनों ममता बनर्जी के साथ बैठक के लाइव टेलीकास्ट की बात कही है. वहीं सुप्रीम कोर्ट द्वारा काम पर लौटने के आदेश के बाद भी डॉक्टर काम पर नहीं लौटे हैं. बता दें कि कोलकाता में आरजी कर हॉस्पिटल में ट्रेनी लेडी डॉक्टर के साथ रेप के मर्डर कर दिया गया था. इसके बाद यह मामला सुर्खियों में है. ट्रेनी लेडी डॉक्टर को न्याय दिलाने के लिए डॉक्टर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं.
मुख्य सचिव मनोज पंत द्वारा बुधवार (11 सितंबर) शाम को वार्ता के लिए राज्य सचिवालय नबन्ना में 15 से अधिक सदस्यों के प्रतिनिधिमंडल को आमंत्रित करने के कुछ घंटों बाद, प्रदर्शनकारियों ने 30 प्रतिनिधियों की एक बड़ी टीम पर जोर दिया और बैठक का लाइव प्रसारण करने की मांग पर अड़े रहे. डॉक्टरों ने मुख्य सचिव के आमंत्रण का जवाब दिया है.
डॉक्टरों ने जवाब में कहा है, “हम कम से कम 30 प्रतिनिधियों की एक प्रतिनिधि टीम भेजना चाहते हैं. हम चाहते हैं कि सभी पक्षों के बीच पारदर्शिता के लिए बैठक का लाइव प्रसारण किया जाए. हम चाहते हैं कि बैठक हमारी मांगों पर आधारित हो. हम अपनी बात पर फिर से जोर दे रहे हैं कि हम चाहते हैं कि हमारी चर्चा माननीय मुख्यमंत्री की मौजूदगी में हो.” उन्होंने कहा कि वे राज्य सरकार से “सकारात्मक प्रतिक्रिया” का इंतजार कर रहे हैं.
सरकार की ये है शर्त
ईमेल का जवाब देने वाले पंत ने कहा कि केवल 12 से 15 डॉक्टरों को ही अनुमति दी जाएगी, लेकिन उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया कि मुख्यमंत्री बैठक की अध्यक्षता करेंगे या नहीं. उन्होंने जूनियर डॉक्टरों को लिखे अपने पत्र में कहा, “एक बार फिर, एक और अवसर के रूप में, हम आपके प्रतिनिधिमंडल को आमंत्रित करते हैं, जिसमें अधिमानतः 12-15 सहकर्मी शामिल हों, जो आज शाम 6 बजे, यानी 11.09.2024 को नबन्ना में चर्चा के लिए हमारे साथ शामिल हों. कृपया अपने प्रतिनिधिमंडल के सदस्यों की सूची ईमेल द्वारा सूचित करें.”
डॉक्टरों की अपनी शर्त
बनर्जी को लिखे गए ईमेल में डॉक्टरों ने सबसे महत्वपूर्ण शर्त यह रखी कि बंद कमरे में होने वाली बैठक के बजाय खुले मंच पर चर्चा का लाइव प्रसारण किया जाए. उन्होंने “अभया” (मामले में पीड़िता को दिया गया प्रतीकात्मक नाम) के लिए शीघ्र न्याय, सरकारी स्वास्थ्य सेवा के सभी पहलुओं में व्याप्त “धमकी संस्कृति” का अंत और सभी महिला स्वास्थ्य पेशेवरों के लिए पर्याप्त सुरक्षा और संरक्षा उपायों की भी मांग की.
गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को प्रदर्शनकारी रेजिडेंट डॉक्टरों को मंगलवार शाम 5 बजे तक काम पर लौटने का निर्देश दिया और कहा कि काम पर लौटने पर उनके खिलाफ कोई प्रतिकूल कार्रवाई नहीं की जाएगी. दालत ने यह निर्देश दिया पश्चिम बंगाल सरकार द्वारा यह आश्वासन दिए जाने के बाद कि काम पर लौटने पर प्रदर्शनकारी डॉक्टरों के खिलाफ दंडात्मक तबादलों सहित कोई कार्रवाई नहीं की जाएगी. आरजी कर मेडिकल कॉलेज और अस्पताल में एक ट्रेनी डॉक्टर के साथ बलात्कार किया गया और उसकी हत्या कर दी गई और उसका शव 9 अगस्त को अस्पताल के सेमिनार हॉल में अर्धनग्न अवस्था में मिला. इस घटना ने पूरे देश में भारी हंगामा मचा दिया और डॉक्टरों ने कार्यस्थल पर सुरक्षा की मांग करते हुए विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया.
]]>संदीप घोष आरजी कर मेडिकल कॉलेज और अस्पताल के पूर्व प्रिंसिपल हैं, जहां 9 अगस्त को एक ट्रेनी लेडी का शव मिला था. पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में यह बात सामने आई कि हत्या से पहले ट्रेनी डॉक्टर संग रेप किया गया था. समाचार एजेंसी एनआई के मुताबिक, ईडी की छापेमारी कई इलाकों में भी चल रही है. बताया जा रहा है कि कोलकाता के तीन से चार ठिकानों पर ED छापेमारी जारी है.
फिलहाल, संदीप घोष न्यायिक हिरासत में हैं. 10 सितंबर को संदीप घोष को वित्तीय अनियमितताओं के मामले में सीबीआई की एक विशेष अदालत ने 23 सितंबर तक न्यायिक हिरासत में भेज दिया था. अदालत ने उनके सुरक्षा कर्मी, अफसर अली, और दो कथित सहयोगियों – चिकित्सा उपकरण विक्रेता, बिप्लब सिंघा, और फार्मेसी दुकान के मालिक, सुमन हजारा- को भी 23 सितंबर तक न्यायिक हिरासत में भेज दिया.
हालांकि, आरोपियों को पहले आठ दिनों के लिए सीबीआई की हिरासत में भेजा गया था, जिससे जांच एजेंसी को अधिकतम छह दिनों की रिमांड की मांग करने का विकल्प मिल गया था. लेकिन जांचकर्ताओं ने अदालत के समक्ष ऐसी कोई याचिका दायर नहीं की.
आरजी कर अस्पताल में डॉक्टर के साथ बलात्कार और हत्या के विरोध के बीच संदीप घोष और अन्य को सीबीआई ने 2 सितंबर को वित्तीय अनियमितताओं के आरोप में गिरफ्तार किया था. संदीप घोष लेडी डॉक्टर रेप-मर्डर केस में भी सीबीआई की रडार पर हैं. उनसे सीबीआई ताबड़तोड़ पूछताछ कर चुकी है.
]]>संदीप घोष आरजी कर मेडिकल कॉलेज और अस्पताल के पूर्व प्रिंसिपल हैं, जहां 9 अगस्त को एक ट्रेनी लेडी का शव मिला था. पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में यह बात सामने आई कि हत्या से पहले ट्रेनी डॉक्टर संग रेप किया गया था. समाचार एजेंसी एनआई के मुताबिक, ईडी की छापेमारी कई इलाकों में भी चल रही है. बताया जा रहा है कि कोलकाता के तीन से चार ठिकानों पर ED छापेमारी जारी है.
फिलहाल, संदीप घोष न्यायिक हिरासत में हैं. 10 सितंबर को संदीप घोष को वित्तीय अनियमितताओं के मामले में सीबीआई की एक विशेष अदालत ने 23 सितंबर तक न्यायिक हिरासत में भेज दिया था. अदालत ने उनके सुरक्षा कर्मी, अफसर अली, और दो कथित सहयोगियों – चिकित्सा उपकरण विक्रेता, बिप्लब सिंघा, और फार्मेसी दुकान के मालिक, सुमन हजारा- को भी 23 सितंबर तक न्यायिक हिरासत में भेज दिया.
हालांकि, आरोपियों को पहले आठ दिनों के लिए सीबीआई की हिरासत में भेजा गया था, जिससे जांच एजेंसी को अधिकतम छह दिनों की रिमांड की मांग करने का विकल्प मिल गया था. लेकिन जांचकर्ताओं ने अदालत के समक्ष ऐसी कोई याचिका दायर नहीं की.
आरजी कर अस्पताल में डॉक्टर के साथ बलात्कार और हत्या के विरोध के बीच संदीप घोष और अन्य को सीबीआई ने 2 सितंबर को वित्तीय अनियमितताओं के आरोप में गिरफ्तार किया था. संदीप घोष लेडी डॉक्टर रेप-मर्डर केस में भी सीबीआई की रडार पर हैं. उनसे सीबीआई ताबड़तोड़ पूछताछ कर चुकी है.
]]>संदीप घोष आरजी कर मेडिकल कॉलेज और अस्पताल के पूर्व प्रिंसिपल हैं, जहां 9 अगस्त को एक ट्रेनी लेडी का शव मिला था. पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में यह बात सामने आई कि हत्या से पहले ट्रेनी डॉक्टर संग रेप किया गया था. समाचार एजेंसी एनआई के मुताबिक, ईडी की छापेमारी कई इलाकों में भी चल रही है. बताया जा रहा है कि कोलकाता के तीन से चार ठिकानों पर ED छापेमारी जारी है.
फिलहाल, संदीप घोष न्यायिक हिरासत में हैं. 10 सितंबर को संदीप घोष को वित्तीय अनियमितताओं के मामले में सीबीआई की एक विशेष अदालत ने 23 सितंबर तक न्यायिक हिरासत में भेज दिया था. अदालत ने उनके सुरक्षा कर्मी, अफसर अली, और दो कथित सहयोगियों – चिकित्सा उपकरण विक्रेता, बिप्लब सिंघा, और फार्मेसी दुकान के मालिक, सुमन हजारा- को भी 23 सितंबर तक न्यायिक हिरासत में भेज दिया.
हालांकि, आरोपियों को पहले आठ दिनों के लिए सीबीआई की हिरासत में भेजा गया था, जिससे जांच एजेंसी को अधिकतम छह दिनों की रिमांड की मांग करने का विकल्प मिल गया था. लेकिन जांचकर्ताओं ने अदालत के समक्ष ऐसी कोई याचिका दायर नहीं की.
आरजी कर अस्पताल में डॉक्टर के साथ बलात्कार और हत्या के विरोध के बीच संदीप घोष और अन्य को सीबीआई ने 2 सितंबर को वित्तीय अनियमितताओं के आरोप में गिरफ्तार किया था. संदीप घोष लेडी डॉक्टर रेप-मर्डर केस में भी सीबीआई की रडार पर हैं. उनसे सीबीआई ताबड़तोड़ पूछताछ कर चुकी है.
]]>