ग्राम वेदपरसदा के युवाओं ने बताया कि चुनाव के दौरान मतदाताओं को प्रलोभित करने के लिए पैसे, कपड़े, साड़ियां और शराब जैसी वस्तुएं बांटी जा रही हैं. ऐसे प्रलोभनों के कारण अक्सर अयोग्य प्रत्याशी सत्ता में आ जाते हैं, जिससे ग्राम पंचायतों की व्यवस्था प्रभावित होती है. इसी समस्या को रोकने के लिए युवाओं ने जागरूकता रैली निकाली है, ताकि लोग इन प्रलोभनों से बचें और एक पढ़ा-लिखा, योग्य और ईमानदार प्रत्याशी को अपना समर्थन दें.
युवाओं ने हाथों में पोस्टर और बैनर लेकर पूरे गांव में रैली निकाली. इन पोस्टरों पर “पैसे नहीं, सुशासन चुनें”, “शिक्षित नेता, सशक्त गांव”, “भ्रष्टाचार हटाओ, ईमानदार लाओ” जैसे जागरूकता संदेश लिखे हुए थे. रैली में शामिल युवाओं ने गांव-गांव घूमकर मतदाताओं को जागरूक किया और बताया कि सही नेता का चुनाव गांव के विकास के लिए कितना जरूरी है.
इस अनोखी पहल से गांव के मतदाताओं में नई जागरूकता देखने को मिल रही है. माना जा रहा है कि इस प्रयास से पंचायत चुनाव में बदलाव आएगा और इस बार एक योग्य और शिक्षित प्रत्याशी की जीत सुनिश्चित होगी. ग्रामीणों ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि वे अब प्रलोभनों में नहीं आएंगे और सोच-समझकर अपने गांव के विकास के लिए सही उम्मीदवार का चयन करेंगे.
ग्राम वेदपरसदा में युवाओं द्वारा निकाली गई यह रैली न सिर्फ पंचायत चुनाव, बल्कि संपूर्ण लोकतांत्रिक प्रक्रिया के प्रति लोगों में जागरूकता लाने का एक महत्वपूर्ण कदम है. यदि हर गांव में इसी तरह की जागरूकता फैलायी जाए, तो न केवल पंचायत चुनाव, बल्कि अन्य चुनावों में भी ईमानदार और शिक्षित नेताओं का चयन संभव हो सकेगा.
]]>बुधवार को ऊना सदर के पूर्व विधायक सतपाल रायजादा ने पत्रकार वार्ता में कहा कि उनके कारोबार को लेकर भाजपा के नेता और विधायक सतपाल सिंह सत्ती विवादास्पद बयान देकर सुर्खियों में बने रहते हैं. लेकिन अब वह सतपाल सत्ती के कारोबार का खुलासा जनता के सामने करेंगे. उन्होंने हिमाचल प्रदेश पुलिस के प्रमुख पर भी सरकार को अस्थिर करने की साजिश का आरोप लगाया. उन्होंने कहा कि सरकार को अस्थिर करने के लिए पुलिस कर्मचारियों के घर पर छापेमारी की गई. लेकिन डीजीपी को यह बताना चाहिए कि पुलिस को छापेमारी में क्या मिला.
छापेमारी पर पुलिस और भाजपा को जमकर घेरा
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व विधायक सतपाल सिंह रायजादा ने हिमाचल प्रदेश पुलिस की स्पेशल टास्क फोर्स द्वारा पुलिस कर्मचारियों के घर की गई छापेमारी पर पुलिस और भाजपा को जमकर घेरा है. बुधवार को ऊना जिला मुख्यालय पर आयोजित पत्रकार वार्ता में उन्होंने कहा कि वह होटल व्यवसाय से जुड़े हैं और यह सबको पता है. लेकिन फिर भी भाजपा के नेता और विधायक सतपाल सिंह सत्ती उनके कारोबार को लेकर भ्रामक बयान देते रहते हैं.विधायक को भी बताना चाहिए कि वह क्या-क्या कारोबार चलाते हैं. यदि विधायक ने जनता को नहीं बताया तो वह खुद विधायक के कारोबार की जानकारी जनता के सामने लाएंगे. उन्होंने कहा कि विधायक के परिवार के सदस्य अवैध खनन में संलिप्त रहे हैं. विधायक के समर्थकों के ऑडियो वीडियो लीक होते रहे हैं जो अभी लोगों के पास हैं. उन्होंने कहा कि विधायक को सोच-समझकर बयान देना चाहिए.
कांग्रेस नेता सतपाल रायजादा ने हिमाचल प्रदेश पुलिस अतुल वर्मा के प्रमुख पर प्रदेश की सरकार को अस्थिर करने की साजिश में शामिल होने का आरोप लगाया. उन्होंने कहा कि हाल ही में पुलिस कर्मचारियों के घर की गई छापेमारी इस बात का सबूत है कि पुलिस सरकार को बदनाम करने की साजिश रच रही है. उन्होंने कहा कि डीजीपी द्वारा केंद्रीय जांच एजेंसियों के इनपुट के आधार पर छापेमारी करने की बात कहना यह दर्शाता है कि पुलिस केंद्रीय जांच एजेंसियों के इशारे पर काम कर रही है. उन्होंने कहा कि पुलिस कर्मचारियों के घर की गई छापेमारी से स्पेशल टास्क फोर्स की टीम को क्या मिला, यह डीजीपी को सार्वजनिक करना चाहिए था. उन्होंने पुलिस द्वारा पुलिस कर्मचारियों के घर की गई छापेमारी को गलत बताया और इसे सरकार के खिलाफ गहरी साजिश करार दिया.
]]>बुधवार को ऊना सदर के पूर्व विधायक सतपाल रायजादा ने पत्रकार वार्ता में कहा कि उनके कारोबार को लेकर भाजपा के नेता और विधायक सतपाल सिंह सत्ती विवादास्पद बयान देकर सुर्खियों में बने रहते हैं. लेकिन अब वह सतपाल सत्ती के कारोबार का खुलासा जनता के सामने करेंगे. उन्होंने हिमाचल प्रदेश पुलिस के प्रमुख पर भी सरकार को अस्थिर करने की साजिश का आरोप लगाया. उन्होंने कहा कि सरकार को अस्थिर करने के लिए पुलिस कर्मचारियों के घर पर छापेमारी की गई. लेकिन डीजीपी को यह बताना चाहिए कि पुलिस को छापेमारी में क्या मिला.
छापेमारी पर पुलिस और भाजपा को जमकर घेरा
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व विधायक सतपाल सिंह रायजादा ने हिमाचल प्रदेश पुलिस की स्पेशल टास्क फोर्स द्वारा पुलिस कर्मचारियों के घर की गई छापेमारी पर पुलिस और भाजपा को जमकर घेरा है. बुधवार को ऊना जिला मुख्यालय पर आयोजित पत्रकार वार्ता में उन्होंने कहा कि वह होटल व्यवसाय से जुड़े हैं और यह सबको पता है. लेकिन फिर भी भाजपा के नेता और विधायक सतपाल सिंह सत्ती उनके कारोबार को लेकर भ्रामक बयान देते रहते हैं.विधायक को भी बताना चाहिए कि वह क्या-क्या कारोबार चलाते हैं. यदि विधायक ने जनता को नहीं बताया तो वह खुद विधायक के कारोबार की जानकारी जनता के सामने लाएंगे. उन्होंने कहा कि विधायक के परिवार के सदस्य अवैध खनन में संलिप्त रहे हैं. विधायक के समर्थकों के ऑडियो वीडियो लीक होते रहे हैं जो अभी लोगों के पास हैं. उन्होंने कहा कि विधायक को सोच-समझकर बयान देना चाहिए.
कांग्रेस नेता सतपाल रायजादा ने हिमाचल प्रदेश पुलिस अतुल वर्मा के प्रमुख पर प्रदेश की सरकार को अस्थिर करने की साजिश में शामिल होने का आरोप लगाया. उन्होंने कहा कि हाल ही में पुलिस कर्मचारियों के घर की गई छापेमारी इस बात का सबूत है कि पुलिस सरकार को बदनाम करने की साजिश रच रही है. उन्होंने कहा कि डीजीपी द्वारा केंद्रीय जांच एजेंसियों के इनपुट के आधार पर छापेमारी करने की बात कहना यह दर्शाता है कि पुलिस केंद्रीय जांच एजेंसियों के इशारे पर काम कर रही है. उन्होंने कहा कि पुलिस कर्मचारियों के घर की गई छापेमारी से स्पेशल टास्क फोर्स की टीम को क्या मिला, यह डीजीपी को सार्वजनिक करना चाहिए था. उन्होंने पुलिस द्वारा पुलिस कर्मचारियों के घर की गई छापेमारी को गलत बताया और इसे सरकार के खिलाफ गहरी साजिश करार दिया.
]]>95 करोड़ की संपत्ति के मालिक हैं प्रवेश वर्मा
चुनाव आयोग को दिए हलफनामे के मुताबिक, प्रवेश वर्मा के पास कुल संपत्ति 95 करोड़ है. उनकी संपत्तियों में कृषि योग्य भूमि, गोदाम और घर शामिल हैं. उन्होंने 77.89 करोड़ रुपये की चल संपत्ति और 12.19 करोड़ रुपये की अचल संपत्ति घोषित की है. उनके पास 3 गाड़ियां हैं- टोयोटा फॉर्च्यूनर, टोयोटा इनोवा और महिंद्रा एक्सयूवी. उनके पास 200 ग्राम सोना है जिसकी कीमत 8.25 लाख रुपये है. प्रवेश वर्मा की पत्नी के पास 17.53 करोड़ रुपये की चल संपत्ति और 6.91 करोड़ रुपये की अचल संपत्ति है.
प्रवेश वर्मा के ऊपर भारी कर्ज
प्रवेश वर्मा के ऊपर 62.60 करोड़ रुपये का कर्ज भी है. इस कर्ज में भाई सिद्धार्थ सिंह से लिया गया 22.59 करोड़ का पर्सनल लोन भी शामिल है. प्रवेश वर्मा की पत्नी के नाम 11.45 करोड़ का लोन भी है.
दिल्ली विधानसभा चुनाव-2025 में बीजेपी ने बहुमत हासिल कर लिया है और 48 सीटों पर बढ़त बना ली है. वहीं, चुनाव आयोग के आंकड़ों के मुताबिक नई दिल्ली विधानसभा सीट से प्रवेश वर्मा ने अरविंद केजरीवाल को 4089 वोटों से हरा दिया.
]]>दिल्ली के एक वरिष्ठ अधिकारी ने दिल्ली चुनाव में आप की हार के बाद सरकारी दस्तावेजों और डेटा की सुरक्षा के लिए दिल्ली सचिवालय के अधिकारियों को पत्र लिखा है. प्रदीप तायल ने अपने आदेश में कहा कि सुरक्षा चिंताओं और अभिलेखों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए, यह अनुरोध किया जाता है कि जीएडी (जनरल एडमिनिस्ट्रेटिव ब्रांच) की अनुमति के बिना दिल्ली सचिवालय परिसर से कोई भी फाइल या दस्तावेज, कंप्यूटर हार्डवेयर आदि बाहर न ले जाया जाए.
पेन ड्राइव तक बाहर नहीं ले जाने का आदेश
इस ऑर्डर में आगे कहा कि यह निर्देश दिया जाता है कि दिल्ली सचिवालय में स्थित विभागों/कार्यालयों के अंतर्गत संबंधित शाखा प्रभारियों को उनके अनुभागों/शाखाओं के अंतर्गत अभिलेखों, फाइलों, दस्तावेजों, इलेक्ट्रॉनिक फाइलों आदि की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक निर्देश जारी किए जाएं. यह आदेश सचिवालय कार्यालयों और मंत्रिपरिषद के ऑफिस पर भी लागू होगा और दोनों ऑफिस के प्रभारियों को भी इस आदेश का पालन करने का निर्देश दिया गया है.
आम आदमी पार्टी साल 2015 से लगातार दिल्ली की सत्ता में काबिज है. पिछले दो चुनावों में उन्होंने बीजेपी को बुरी तरह से मात दी थी. इस बार बीजेपी ने अरविंद केजरीवाल की पार्टी को बुरी तरह दिल्ली चुनाव में शिकस्त दी. अरविंद केजरीवाल खुद नई दिल्ली सीट से परवेश वर्मा से हार गए. इसके अलावा मनीष सिसोदिया और सत्येंद्र जैन को भी हार का सामना करना पड़ा. ताजा रुझानों में बीजेपी को 49 और आम आदमी पार्टी को 21 सीटें मिलती दिख रही हैं.
]]>इस चुनाव में सबसे करीबी जीत बीजेपी के चंदन कुमार चौधरी ने दर्ज की. उन्होंने संगम विहार सीट से ‘आप’ के दिनेश मोहनिया को 344 वोट से हराया है. बीजेपी उम्मीदवार को 54,049 वोट और मोहनिया को 53,705 वोट मिले. खास बात यह रही कि यहां जीत के अंतर से ज्यादा 537 वोट नोटा पर पड़े. कांग्रेस उम्मीदवार हर्ष चौधरी 15,863 मतों के साथ तीसरे स्थान पर रहे.
त्रिलोकपुरी सीट पर भी मुकाबला काफी करीबी रहा. वहां बीजेपी के रविकांत ने ‘आप’ की अंजना परचा को 392 वोटों से हरा दिया. रविकांत को 58,217 वोट मिले, जबकि परचा को 57,825 लोगों ने वोट दिया. यहां भी नोटा को 683 वोट पड़े जो हार-जीत के अंतर से ज्यादा है. कांग्रेस के अमरदीप 6,147 मतों के साथ तीसरे स्थान पर रहे.
जंगपुरा सीट पर बीजेपी के तरविंदर सिंह मारवाह ने ‘आप’ उम्मीदवार और पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया के खिलाफ करीबी मुकाबले में 675 वोटों से जीत दर्ज की. मारवाह को 38,859 वोट मिले, जबकि सिसोदिया को 38,184 मत मिले. कांग्रेस के फरहाद सूरी को 7,350 मत मिले. इस सीट पर 441 लोगों ने नोटा का बटन दबाया.
राजिंदर नगर सीट पर बीजेपी के उमंग बजाज ने ‘आप’ के दुर्गेश पाठक को 1,231 मतों से हराया. बजाज को 46,671 और पाठक को 45,440 वोट मिले. कांग्रेस के विनीत यादव 4,015 वोट के साथ तीसरे स्थान पर रहे. इस सीट पर नोटा के खाते में 571 लोगों के वोट पड़े.
महरौली सीट पर बीजेपी के गजेंद्र सिंह यादव ने ‘आप’ के महेंद्र चौधरी को 1,782 मतों के नजदीकी अंतर से हराया. इस सीट पर 19 में 17 राउंड की गिनती तक ‘आप’ उम्मीदवार आगे थे. यादव को 48,349 और चौधरी को 46,567 मत मिले. इस सीट पर तीसरे नंबर पर निर्दलीय उम्मीदवार जिन्हें 9,731 वोट मिले. कांग्रेस उम्मीदवार पुष्पा सिंह 9,338 वोटों के साथ चौथे स्थान पर रहीं. यहां नोटा का आंकड़ा 846 रहा.
रिठाला से कुलवंत राणा ने 1,04,371 वोट हासिल करते हुए 29,616 वोटों के अंतर से जीत हासिल की. वहीं शालीमार बाग से रेखा गुप्ता ने 68,200 वोटों के साथ 29,595 वोटों के अंतर से जीत दर्ज की.
सीलमपुर से चौधरी जुबैर अहमद ने 42,477 वोटों के बड़े अंतर से जीत दर्ज की. वहीं मटिया महल से आले मोहम्मद इकबाल ने 42,724 वोटों के अंतर से शानदार जीत हासिल की. इसके अलावा दिल्ली कैंट से वीरेंद्र सिंह कादियान ने 2,029 वोटों के अंतर से जीत दर्ज की, जो आप उम्मीदवार को सबसे कम वोट अंतर से मिल जीत रही.
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इस मुद्दे पर आम आदमी पार्टी के नेता चुनाव आयोग से मिलकर जांच कराने की मांग कर रहे थे. ऐसे में चुनाव आयोग ने अरविंद केजरीवाल को बुधवार रात 8 बजे तक सबूत उपलब्ध कराने का वक्त दिया है. हालांकि, चुनाव आयोग के पुराने ट्रैक रिकॉर्ड देखने से पता चलता है कि अरविंद केजरीवाल के जहर वाले बयान पर कम से कम 72 घंटे तक प्रतिबंध लग सकता है.
दो दिन पहले दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने आरोप लगाया था कि हरियाणा सरकार यमुना में अमोनिया नामक जहर छोड़ रही है. इससे दिल्ली के लोगों की सेहत पर खतरा है. इसके बाद इस मुद्दे पर आम आदमी पार्टी का एक प्रतिनिधिमंडल चुनाव आयोग से भी मिला था. बाद में बीजेपी और कांग्रेस के नेता भी चुनाव आयोग पहुंच गए. दोनों विपक्षी पार्टियों ने मांग की कि केजरीवाल के आरोप की जांच की जाए. साथ ही अगर कोई पार्टी गलतबयानी कर रही है तो उसपर कार्रवाई की जाए. इसके कुछ ही देर बाद आयोग ने अरविंद केजरीवाल से जवाब मांग लिया गया.
चुनाव आयोग ने अरविंद केजरीवाल से कहा कि आपके दावों के मुताबिक, ‘यमुना नदी में जहर डाला जा रहा है और सामूहिक नरसंहार की कोशिश हो रही है. इस आरोप को सही साबित करने के लिए आप 29 जनवरी रात 8 बजे तक साक्ष्य के साथ रिपोर्ट पेश करें. चुनाव आयोग ने कानूनों का हवाला देते हुए कहा कि इस तरह के बयान देश की एकता और सद्भाव को बिगाड़ने वाले हो सकते हैं. ऐसे में तीन साल तक की कैद का प्रावधान है. इस तरह के राजनीतिक बयानों और आरोपों से कानून व्यवस्था बिगड़ सकती है. इसलिए पूरी जानकारी उपलब्ध कराएं.’
चुनाव आयोग आचार संहिता के बीच गलत बयानी की इजाजत नहीं देता है. चुनाव आयोग ने अशोक चव्हाण बनाम माधवराव किन्हालकर, अनूप बर्नवाल बनाम केंद्र सरकार जैसे मामलों पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हवाला देते हुए कहा कि गलत बयान तनाव पैदा कर सकते हैं. बीते लोकसभा चुनाव में भी चुनाव आयोग ने भाजपा सांसद हेमा मालिनी के खिलाफ कथित अपमानजनक टिप्पणी को लेकर कांग्रेस नेता रणदीप सुरजेवाला को 48 घंटे के लिए प्रचार करने से रोक दिया था.
चुनाव आयोग पूर्व में सत्ताधारी और विपक्षी नेताओं को धार्मिक आधार पर विभाजनकारी भाषण देने के मामले में अस्थाई तौर रोक लगा चुकी है. अमूमन भड़काऊ बयानबाजी और घृणास्पद भाषण धार्मिक ध्रुवीकरण को बढ़ावा देने के मामले में यूपी के मौजूदा सीएम योगी आदित्यनाथ, गृह मंत्री अमित शाह, मायावती जैसे नेताओं पर भी 72 घंटे तक कैंपेन पर प्रतिबंध लगा चुका है. बीते लोकसभा चुनाव में कांग्रेस नेता रणदीप सुरजेवाला पर 48 घंटे के प्रतिबंध लगे थे. ऐसे में चुनाव आयोग अरविंद केजरीवाल पर अगर 72 घंटे तक बैन लगा दे तो हैरानी नहीं होगी.
अरविंद केजरीवाल पर चुनाव आयोग संविधान के अनुच्छेद 324 द्वारा प्रदत्त शक्तियों के तहत किसी भी सार्वजनिक बैठक, सार्वजनिक जुलूस, सार्वजनिक रैलियां, रोड शो और साक्षात्कार, मीडिया (इलेक्ट्रॉनिक, प्रिंट, सोशल मीडिया) आदि में सार्वजनिक भाषण देने से रोक लगा सकता है. इसकी अवधि अभी तक 72 घंटे अधिकतम रही है. ऐसे में देखना है कि अरविंद केजरीवाल के केस में चुनाव आयोग कितने दिनों का प्रतिबंध लगा सकता है?
]]>जानकारी के अनुसार, ईडी ने कोल्डप्ले और दिलजीत दोसांझ के कंसर्ट की टिकटों की अवैध बिक्री के मामले में दिल्ली, मुंबई, जयपुर, चंडीगढ़ और बेंगलुरु में छापेमारी की है. दिलजीत और कोल्डप्ले का ‘म्यूज़िक ऑफ़ द स्फ़ेयर्स वर्ल्ड टूर’ शो है. दोनों शो के प्रमुख आधिकारिक टिकटिंग पार्टनर्स बुक माई शो और ज़ोमैटो लाइव ने बताया कि उनके प्लेटफॉर्म पर कुछ ही मिनटों में सभी टिकट बिक गए. इन दोनों कर्मिशयल पार्टनर का कहना है कि टिकटों की कालाबाजारी हुई है. तेजी से टिकट बिकने के बाद, फर्जी टिकट बिक्री के जरिए ठगी की कई शिकायतें मिली हैं. कई लोगों को पता चला कि उन्हें नकली टिकट बेचे गए थे या सही टिकटों के लिए काफी ज्यादा पैसे लिए गए.
कई राज्यों में FIR
इस मामले में कई राज्यों में कई FIR दर्ज की गई हैं. बुक माई शो ने भी कई संदिग्धों के खिलाफ FIR दर्ज करवाई है. ED ने मनीलॉन्ड्रिंग के तहत जांच शुरू की और 25 अक्टूबर को 5 राज्यों दिल्ली, मुंबई, जयपुर, बेंगलुरु और चंडीगढ़ में 13 से अधिक जगहों पर छापेमारी की है. छापेमारी के दौरान कई आपत्तिजनक सामग्री जैसे मोबाइल फोन, लैपटॉप, सिमकार्ड आदि जब्त किए गए हैं. इस कार्रवाई का उद्देश्य टिकटों की अवैध बिक्री और इस घोटाले में शामिल वित्तीय नेटवर्क की जांच करना और ऐसी अवैध गतिविधियों से कमाई गई अपराध की आय का पता लगाना था.
टिकट बेचने के लिए सोशल मीडिया का इस्तेमाल
ईडी की जांच से पता चला है कि नकली टिकट इंस्टाग्राम, व्हाट्सएप और टेलीग्राम का उपयोग करके बेचे जा रहे थे. मामले की तह तक जाने के लिए जांच एजेंसी ED द्वारा दिल्ली, महाराष्ट्र, राजस्थान, चंडीगढ़ और कर्नाटक में सर्च ऑपरेशन की कार्रवाई की गई. चर्चित गायक दिलजीत दोसांझ और कोल्डप्ले से जुड़े कंसर्ट की अवैध टिकट की बिक्री से जुड़े मामले में की जा रही है.
इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने एनसीपी के अजित पवार गुट को हलफनामा दाखिल करने को कहा. कोर्ट 6 नवंबर को इस मामले में अगली सुनवाई करेगा. सुप्रीम कोर्ट ने जो उसका पिछला आदेश है, उसका पालन करने को कहा है. सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में कहा था कि शरद पवार का फोटो का इस्तेमाल अजित पवार गुट नहीं करेगा. अजित पवार को सुप्रीम कोर्ट से राहत बरकरार रखी गई है. इससे महाराष्ट्र चुनाव से पहले शरद पवार को बड़ा झटका सुप्रीम कोर्ट ने दिया है. अजित पवार गुट को चुनाव निशान ‘घड़ी’ का इस्तेमाल करने से रोकने से सुप्रीम कोर्ट ने मना किया है.
अजित पवार घड़ी चुनाव निशान का इस्तेमाल कर सकेंगे
अजित पवार इस विधानसभा चुनाव में घड़ी चुनाव निशान का इस्तेमाल कर सकेंगे. सुप्रीम कोर्ट ने अजित पवार से कहा कि एनसीपी को आगामी महाराष्ट्र विधानसभा चुनावों के लिए ‘घड़ी’ निशान का इस्तेमाल करना चाहिए. साथ ही यह भी कहा कि इसका एक डिस्क्लेमर भी देना चाहिए कि घड़ी चुनाव निशान का इस्तेमाल अदालतों में विवाद का विषय है और यह शरद पवार द्वारा दायर याचिका के अंतिम फैसले के अधीन है.
डिस्क्लेमर शामिल करने का निर्देश
लोकसभा चुनावों से पहले 19 मार्च और 4 अप्रैल को कोर्ट ने एनसीपी को सभी प्रचार सामग्रियों में यह डिस्क्लेमर शामिल करने का निर्देश दिया था कि ‘घड़ी’ निशान का इस्तेमाल न्यायालय के विचाराधीन है. आज सुप्रीम कोर्ट ने अजित पवार को यह भी निर्देश दिया कि वे इस आशय का एक अंडरटेकिंग दाखिल करें कि राज्य विधानसभा चुनावों के लिए भी पिछले आदेशों का पालन किया जाएगा.
इस बीच एमवीए के भीतर पैदा इस रार को सुलझाने की जिम्मेदारी वयोवृद्ध नेता शरद पवार के कंधों पर आ गई है. राज्य में सीट बंटवारे को लेकर रार नहीं सुलझ पाने के कारण कांग्रेस की केंद्रीय चुनाव समिति की रविवार को होने वाली बैठक भी स्थगित कर दी गई. रविवार को शिवसेना उद्धव गुट के नेता आदित्य ठाकरे ने शरद पवार से मुलाकात की. इस बीच कांग्रेस पार्टी गठबंधन टूटने की स्थिति में राज्य की सभी 288 सीटों पर चुनाव लड़ने की योजना पर भी काम कर रही है.
शरद पवार पर एमवीए बचाने की जिम्मेदारी
कांग्रेस पार्टी ने अपनी ओर से पार्टी कार्यसमिति के सदस्य नसीम खान को शरद पवार के साथ बातचीत के लिए नियुक्त किया है. नसीम खान ने बताया कि शरद पवार एमवीए के संस्थापक हैं. उनसे उनकी बातचीत हुई है. इसके बाद उन्होंने उद्धव ठाकरे और संजय राउत दोनों नेताओं से बातचीत की है. उन्होंने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि शरद पवार के हस्तक्षेप के बाद मामला सुलझा लिया जाएगा.
हालांकि, इस रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि हाल के दिनों में कांग्रेस पार्टी ने राज्य की सभी 288 सीटों की समीक्षा की है और उन सीटों के लिए संभावित उम्मीदवारों के नाम भी तय कर लिए हैं. ऐसा इसलिए कि अगर गठबंधन टूटता है तो पार्टी अपने दम पर सभी सीटों पर चुनाव लड़ने के लिए तैयार रहे. कांग्रेस का कहना है कि शिवसेना उद्धव गुट और एनसीपी शरद गुट की अनुचित मांगों की वजह से सीट बंटवारे पर मसला उलझा हुआ है.