दिन भर में छोटी-छोटी हरकतें करना भी पेट की चर्बी घटाने में मदद करती हैं. जिम जाने की बजाय सीढ़ियां चढ़ना, फोन पर बात करते हुए तेज चलना या टीवी देखते हुए स्ट्रेचिंग करना जैसे काम भी कैलोरी जलाते हैं. इसे NEAT कहते हैं यानी नॉन-एक्सरसाइज एक्टिविटी थर्मोजेनेसिस. ये छोटी-छोटी गतिविधियां मिलकर पेट की चर्बी कम करने में बड़ा रोल निभाती हैं. अपने खाने में ऐसी मसाले शामिल करें, जो फैट कम करने में मदद करें. भारतीय रसोई में जीरा, हल्दी और दालचीनी जैसे मसाले होते हैं, जिनमें थर्मोजेनिक गुण होते हैं. सुबह जीरे का पानी पीना, खाने में हल्दी डालना या चाय में दालचीनी मिलाना आपके मेटाबॉलिज्म को बढ़ाता है और इंसुलिन की संवेदनशीलता को बेहतर करता है. इससे पेट की चर्बी कम हो सकती है.
पेट की चर्बी कम करने के लिए रोज अच्छी नींद लेना भी बहुत जरूरी है, क्योंकि खराब नींद से शरीर में कॉर्टिसोल नामक तनाव हार्मोन बढ़ जाता है, जो पेट की चर्बी बढ़ाने में मदद करता है. रोज रात को 10:30 बजे तक सोना और सुबह 6:30 बजे उठना आपके हार्मोन को संतुलित रखता है. साथ ही तनाव कम करने के लिए दिन में बीच-बीच में गहरी सांस लें, 10 मिनट मेडिटेशन करें या अपनी पसंदीदा संगीत सुनें. इससे आपका तनाव कम होगा और पेट की चर्बी भी घटेगी. इस तरह की छोटी आदतें मिलकर आपके पेट को स्लिम बनाने में मदद करेंगी.
]]>इतना होना चाहिए BMI
मेडिकल डायरेक्टर और मिनिमल एक्सेस सर्जरी डायरेक्टर, डॉ. सचिन अंबेकर और मैश ग्रुप ऑफ हॉस्पिटल्स की संस्थापक और सीईओ मानसी बंसल झुनझुनवाला ने बताया कि लोगों का बॉडी मास इंडेक्स Body mass index (BMI) लगभग 25 से 26 के बीच होना चाहिए. अगर 26 के ऊपर है तो यानी सामने वाला शख्स मोटापे का शिकार है और अगर 30 या 32 है बॉडी मास इंडेक्स तब यह खतरे की घंटी होती है.
डॉ. सचिन अंबेकर ने कहा कि मोटापा सिर्फ सौंदर्य से जुड़ी समस्या नहीं, बल्कि यह एक गंभीर मेडिकल कंडिशन है, जो डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर, हृदय रोग और यहां तक कि विभिन्न प्रकार के कैंसर का भी कारण बन सकता है. उन्होंने बताया कि बलूनिंग, 3डी लेप्रोस्कोपिक वर्टिकल स्लीव गैस्ट्रेक्टॉमी, 3डी मिनी गैस्ट्रिक बायपास और 3डी लेप्रोस्कोपिक रॉक्स एन वायगैस्ट्रिक बायपास जैसी वेट लॉस सर्जरी तकनीकें उपलब्ध हैं.
ये हैं मोटापे की वजह
डॉ. अंबेकर के अनुसार प्रोसेस्ड और हाई-कैलोरी फूड, सॉफ्ट ड्रिंक्स और पैक्ड जूस में अधिक चीनी, बड़े पोर्शन साइज, जंक फूड और स्ट्रेस के कारण ओवरईटिंग मोटापे के प्रमुख कारण हैं. तेजी से बढ़ते शहरीकरण और एक्सरसाइज़ की कमी ने भी इसे बढ़ावा दिया है. जबकि मोबाइल, लैपटॉप और टीवी के सामने बिताया गया अधिक समय निष्क्रिय जीवनशैली को बढ़ा रहा है. मोटापा न केवल शरीर की बनावट को प्रभावित करता है, बल्कि यह हृदय रोग, हाई ब्लड प्रेशर, टाइप-2 डायबिटीज, बांझपन और ऑस्टियोआर्थराइटिस जैसी बीमारियों का कारण बन सकता है. इसके अलावा, स्तन, पेट, कोलन और किडनी कैंसर का खतरा भी बढ़ जाता है. मानसिक स्वास्थ्य पर भी असर पड़ता है, जिससे डिप्रेशन और एंग्जायटी जैसी समस्याएं हो सकती हैं.
दिल्ली में बढ़ता मोटापा और आंकड़े
एनएफएचएस-5 (NFHS-5) सर्वे के अनुसार, दिल्ली-एनसीआर में 80.7% लोग मोटापे के शिकार हैं, लेकिन 78.5% लोग अब भी खुद को सामान्य वजन वाला मानते हैं. पंजाबी बाग, रोहिणी, ग्रेटर कैलाश-2, साउथ एक्सटेंशन और डीएलएफ में यह समस्या सबसे अधिक देखी गई है. भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (ICMR) द्वारा किए गए एक अध्ययन में पाया गया कि भारत में मोटापे की दर शहरी क्षेत्रों में ग्रामीण क्षेत्रों की तुलना में अधिक है. तमिलनाडु, महाराष्ट्र, झारखंड और चंडीगढ़ में किए गए इस अध्ययन के अनुसार, जनरल ओबेसिटी (GO) की दर तमिलनाडु में 24.6%, महाराष्ट्र में 16.6%, झारखंड में 11.8% और चंडीगढ़ में 31.3% पाई गई. एब्डॉमिनल ओबेसिटी (AO) की दर तमिलनाडु में 26.6%, महाराष्ट्र में 18.7%, झारखंड में 16.9% और चंडीगढ़ में 36.1% पाई गई. महिलाओं, उच्च सामाजिक-आर्थिक वर्ग और डायबिटीज व हाई ब्लड प्रेशर से ग्रस्त व्यक्तियों में मोटापे की संभावना अधिक पाई गई.
ऐसे करें बचाव
-डॉक्टर के मुताबिक अगर आप रोज 10000 कदम चलते हैं तो आपका वजन कंट्रोल होगा.
-इसके अलावा पैकेज फूड और शुगर मिले हुए फूड, फास्ट फूड और जंक फूड का सेवन जितना कम करेंगे उतना अच्छा रहेगा.
– अगर सीढ़ियां चढ़ते हुए आपकी सांस फूल रही है और रोजमर्रा के काम करने में आपको दिक्कत हो रही है और आपका वजन तेजी से बढ़ रहा है, तो डॉक्टर से तुरंत मिलें, क्योंकि यह मोटापे के बढ़ने के लक्षण हो सकते हैं.
– सबसे ज्यादा मोटापे का शिकार महिलाएं हैं. फिर पुरुष हैं और इसके बाद बच्चे हैं. ऐसे में सभी को एक्सरसाइज करने की जरूरत है. पानी ज्यादा से ज्यादा पिए. रोज एक्सरसाइज करें या फिर मोबाइल लैपटॉप पर हर वक्त वक्त बिताने से बेहतर है कि ग्राउंड में जाकर कोई ना कोई एक्टिविटी करें या कोई खेल खेले जैसे आउटडोर गेम तमाम हैं. कोई ना कोई गेम खेलने की कोशिश करें.
– खाने में हरी सब्जियां, फल और भारतीय थाल को अपनाएं भारतीय थाल यानी जिसमें सिर्फ देसी फूड हो.
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि देश में मोटापा तेजी से बढ़ रहा है. हर आयु वर्ग और यहां तक कि युवा भी इससे बुरी तरह प्रभावित हो रहे हैं. यह एक चिंता का विषय है, क्योंकि मोटापा डायबिटीज, दिल की बीमारियों का जोखिम बढ़ाता है. पीएम ने देशवासियों से दो चीजों पर ध्यान केंद्रित करने की अपील की. पहला हर दिन कुछ समय निकालकर व्यायाम करें, चाहे वह पैदल चलना हो या कोई और व्यायाम. दूसरा अपनी डाइट पर ध्यान दें. अनहेल्दी फैट और तेल को अपने आहार से कम करें. हर महीने हम जो तेल इस्तेमाल करते हैं, उसकी मात्रा 10 प्रतिशत तक घटा दें. ऐसे छोटे-छोटे कदम बड़े बदलाव ला सकते हैं.
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक भारत में मोटापे की समस्या लगातार बढ़ रही है और इसकी एक बड़ी वजह तेल का ज्यादा सेवन करना भी है. दिल्ली के साकेत मैक्स हॉस्पिटल के कार्डियोलॉजी डिपार्टमेंट के हेड डॉ. बलबीर सिंह का कहना है कि तेल और फैट हमारी डाइट में जरूरी होते हैं, क्योंकि इनमें आवश्यक फैटी एसिड्स होते हैं, जो शरीर में सूजन कम करने में मदद करते हैं और ब्रेन हेल्थ को प्रोटेक्ट करते हैं. तेल शरीर में कई तरह के विटामिन्स को अब्जॉर्ब करने में मदद करते हैं. हालांकि ज्यादा तेल खाने से शरीर में एक्स्ट्रा कैलोरी जमा हो जाती है. अगर कोई व्यक्ति एक्सरसाइज नहीं करता है, तो शरीर में फैट जमा हो सकती है, जिससे दिल में ब्लॉकेज और हार्ट अटैक का खतरा बढ़ता है.
एक महीने में कितना तेल खाना चाहिए?
मैक्स हेल्थकेयर की क्लीनिकल न्यूट्रिशन और डाइटेटिक्स रितिका समद्दार के मुताबिक एक सामान्य व्यक्ति को दिन में 20 से 25 मिलीलीटर तेल की जरूरत होती है. यह करीब 4 से 5 चम्मच होता है. इस हिसाब से एक व्यक्ति के लिए महीने में करीब 750 से 900 मिलीलीटर तेल की आवश्यकता होती है. यह मात्रा सेहत के लिहाज से ठीक है. हालांकि अधिकतर भारतीय एक महीने में एक लीटर से ज्यादा तेल का सेवन करते हैं. जो लोग दिल की बीमारियों और डायबिटीज से पीड़ित हैं, उन्हें महीने में 500 मिलीलीटर तेल ही खाना चाहिए. इस हिसाब से रोज करीब 3 चम्मच से ज्यादा तेल नहीं खाना चाहिए.
कौन सा तेल मोटापा कर सकता है कंट्रोल?
कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. बलबीर सिंह के अनुसार कोई भी तेल दिल के लिए अच्छा नहीं हो सकता, जब उसे ज्यादा गर्म किया जाए या बार-बार गर्म किया जाए. ऐसा करने से इससे टॉक्सिक एलीमेंट्स, ट्रांस फैट्स और फ्री रेडिकल्स बनते हैं, जो बैड कोलेस्ट्रॉल लेवल बढ़ाते हैं और दिल की धमनियों को नुकसान पहुंचाते हैं. डॉक्टर केवल मोनोअनसैचुरेटेड या पॉलीअनसैचुरेटेड फैट का सेवन करने की सलाह देते हैं. जैतून का तेल, कैनोला तेल, राइस ब्रान ऑयल, रैपसीड ऑयल और सरसों का तेल सावधानी के साथ डाइट में शामिल करें. घी में ओमेगा-3 फैटी एसिड्स होते हैं, जो सूजन कम करते हैं और ट्राइग्लिसराइड्स के स्तर को घटाते हैं, लेकिन इसे केवल बहुत कम मात्रा में उपयोग करना चाहिए.
जर्मन फेडरेशन ऑफिस ने ऐसे स्मार्टफोन हैंडसेट की एक लिस्ट जारी की है, जिनमें सबसे ज्यादा रेडिएशन की शिकायत है. आपको ऐसे फोन से सावधान रहने की जरूरत है, ताकि इससे होने वाले रेडिएशन से शारीरिक नुकसान न होने पाए.
जर्मन फेडरेशन ऑफिस ने किया अलर्ट
जर्मन फेडरेशन ऑफिस ने कहा है कि डेली बेसिस पर हम जिन डिवाइस का इस्तेमाल करते हैं, उनके साथ हमारा लगातार बॉडी कॉन्टैक्ट होता है. इसलिए इनसे निकलने वाले रेडिएशन के कारण हेल्थ से जुड़ी समस्याएं हो सकती हैं. खासतौर से कान और ब्रेन को सबसे ज्यादा नुकसान होता है, क्योंकि आप कान पर रखकर ही फोन से बात करते हैं. जर्मन फेडरेशन के विकिरण संरक्षण कार्यालय ने उन स्मार्टफोन पर डेटा इकट्ठा किया है जो सबसे अधिक रेडिएशन देते हैं. रेडिएश के आंकड़े को शरीर के वजन के प्रति किलोग्राम वाट में दिखाया गया है. इस लिस्ट में शामिल कई नाम आपको चौंका सकते हैं.
उन हैंडसेट की लिस्ट जिससे सबसे ज्यादा रेडिएशन निकलता है
1. सोनी एक्सपीरिया एक्सजेड प्रीमियम
सोनी के एक्सपीरिया एक्सजेड प्रीमियम की SAR दर 1.21 है.
2. हुआवेई नोवा 2
हुआवेई नोवा 2 की SAR 1.25 है.
.3. वनप्लस 9
इस लिस्ट में वनप्लस मॉडल भी हैं, इस फोन की SAR 1.26 है.
4. हुआवेई पी स्मार्ट
चीनी कंपनी 1.27 की SAR दर के साथ इस सूची में शामिल है.
5. ZTE AXON 7 मिनी
ZTE का यह छोटा मॉडल 1.29 वाट प्रति किलोग्राम के SAR के साथ उच्च स्थान पर है.
6. वनप्लस 6
इस लिस्ट में वनप्लस का दूसरा मॉडल, इस स्मार्टफोन की SAR 1.33 है.
7. Google Pixel 3
इस लिस्ट में Google की पहली उपस्थिति इसी मॉडल के साथ है, जिसकी SAR 1.33 है.
8. सोनी एक्सपीरिया XZ1 कॉम्पैक्ट
सोनी एक्सपीरिया XZ1 कॉम्पैक्ट की SAR 1.36 है.
9. ओप्पो रेनो5 5जी
चीनी कंपनी ओप्पो के इस मॉडल का SAR 1.37 वाट प्रति किलोग्राम है.
10. गूगल पिक्सल 4ए
एक और गूगल फोन, इस मॉडल का SAR 1.37 वाट प्रति किलोग्राम है.
11. गूगल पिक्सल 3 एक्सएल
फिर से गूगल. इस मॉडल की दर 1.39 वाट प्रति किलोग्राम है.
12. सोनी एक्सपीरिया एक्सए2 प्लस
जापानी कंपनी के पास 1.41 के SAR के साथ सबसे ज्यादा रेडिएशन उत्सर्जित करने वाले फोन में से एक है.
13. वनप्लस 6टी
चीनी कंपनी का यह मॉडल 1.55 वाट प्रति किलोग्राम का SAR उत्सर्जित करता है.
14. जेडटीई एक्सॉन 11 5जी
चीनी कंपनी फिर से सूची में है, इस मॉडल की दर 1.59 है.
ग्रीन टी-ग्रीन टी में एंटीऑक्सीडेंट्स कैटेचिन्स होता है. यह लिवर की सेहत को बेहतर बनाने में मदद करता है. कैटेचिन्स लिवर में टॉक्सिन पदार्थों को निष्क्रिय करने वाले एंजाइमों को सक्रिय करता है जिससे लिवर की डिटॉक्सिफिकेशन प्रक्रिया में सुधार होता है. ग्रीन टी लीवर की सूजन को कम करने और फैटी लिवर डिजीज जैसी समस्याओं को रोकने में भी सहायक होती है. इसके अलावा ग्रीन टी लिवर की कोशिकाओं को फ्री रेडिकल्स से होने वाले नुकसान से बचाती है, जिससे लिवर का फंक्शन बढ़ जाता है.
आंवला जूस-आंवला जूस में विटामिन C, एंटीऑक्सीडेंट्स और फ्लेवोनॉइड्स होते हैं, जो लिवर की कार्यक्षमता को बढ़ाने में मदद करते हैं. यह लिवर को डिटॉक्सिफाई करता है और शरीर से हानिकारक विषाक्त पदार्थों को बाहर निकालने में मदद करता है. आंवला जूस लिवर की सूजन को कम करने और फैटी लिवर जैसी समस्याओं को रोकने में सहायक होता है. इसके अलावा, यह लिवर की कोशिकाओं को पुनर्जीवित करता है, जिससे लिवर की कार्यप्रणाली में सुधार होता है. आंवला जूस नियमित रूप से पीने से लिवर के स्वास्थ्य में सकारात्मक बदलाव आते हैं.
बैरीज जूस-बैरीज जूस जैसे कि ब्लूबेरी, स्ट्रॉबेरी और रास्पबेरी, लिवर के लिए बहुत फायदेमंद होता है क्योंकि इनमें एंटीऑक्सीडेंट्स, विशेष रूप से फ्लेवोनॉयड्स और विटामिन C भरपूर मात्रा में होते हैं. ये तत्व लिवर को डिटॉक्सिफाई करने में मदद करते हैं और लिवर की कोशिकाओं को हेल्दी बनाते हैं. बैरीज जूस लिवर की सूजन को कम करने, फैटी लिवर को नियंत्रित करने और लिवर के सामान्य कार्य को बढ़ाने में सहायक होता है. यह लिवर के एंजाइम्स के स्तर को स्थिर रखता है और विषाक्त पदार्थों को शरीर से बाहर निकालने में मदद करता है.
धनिया का पानी-धनिया का पानी लिवर की हेल्थ के लिए बहुत ज्यादा फायदेमंद है. इसमें एंटीऑक्सीडेंट्स और एंटी-इन्फ्लेमेटरी गुण होते हैं जो लिवर के फंक्शन को बेहतर बनाने में मदद करते हैं. यह लिवर से विषाक्त पदार्थों को बाहर निकालने में सहायक है और लिवर की डिटॉक्सिफिकेशन प्रक्रिया को बढ़ाता है. धनिया का पानी लिवर की सूजन को कम करता है और उसकी कार्यक्षमता को बेहतर बनाता है. साथ ही यह लिवर में चर्बी को कम करने और फैटी लिवर से बचाव करने में मदद करता है. इसके नियमित सेवन से लिवर का स्वास्थ्य अच्छा रहता है.
अदरक,नींबू का पानी- अदरक और नींबू का पानी लिवर के लिए एक कुदरती टॉनिक है. अदरक में एंटी-इंफ्लेमेटरी और एंटीऑक्सीडेंट गुण होते हैं जो लिवर की क्लीनिंग और डिटॉक्सिफिकेशन में मदद करते हैं. नींबू में विटामिन C और साइट्रिक एसिड होता है जो लिवर से विषाक्त पदार्थों को बाहर निकालने में सहायक है. यह लिवर की कार्यक्षमता को बढ़ाता है और जिगर के एंजाइमों को सक्रिय करता है. साथ ही शरीर में हानिकारक तत्वों को नष्ट करने में मदद करता है. अदरक-नींबू का पानी नियमित सेवन से लिवर की सूजन को कम करता है और उसके स्वास्थ्य को दुरुस्त रखता है.
]]>ग्रीन टी-ग्रीन टी में एंटीऑक्सीडेंट्स कैटेचिन्स होता है. यह लिवर की सेहत को बेहतर बनाने में मदद करता है. कैटेचिन्स लिवर में टॉक्सिन पदार्थों को निष्क्रिय करने वाले एंजाइमों को सक्रिय करता है जिससे लिवर की डिटॉक्सिफिकेशन प्रक्रिया में सुधार होता है. ग्रीन टी लीवर की सूजन को कम करने और फैटी लिवर डिजीज जैसी समस्याओं को रोकने में भी सहायक होती है. इसके अलावा ग्रीन टी लिवर की कोशिकाओं को फ्री रेडिकल्स से होने वाले नुकसान से बचाती है, जिससे लिवर का फंक्शन बढ़ जाता है.
आंवला जूस-आंवला जूस में विटामिन C, एंटीऑक्सीडेंट्स और फ्लेवोनॉइड्स होते हैं, जो लिवर की कार्यक्षमता को बढ़ाने में मदद करते हैं. यह लिवर को डिटॉक्सिफाई करता है और शरीर से हानिकारक विषाक्त पदार्थों को बाहर निकालने में मदद करता है. आंवला जूस लिवर की सूजन को कम करने और फैटी लिवर जैसी समस्याओं को रोकने में सहायक होता है. इसके अलावा, यह लिवर की कोशिकाओं को पुनर्जीवित करता है, जिससे लिवर की कार्यप्रणाली में सुधार होता है. आंवला जूस नियमित रूप से पीने से लिवर के स्वास्थ्य में सकारात्मक बदलाव आते हैं.
बैरीज जूस-बैरीज जूस जैसे कि ब्लूबेरी, स्ट्रॉबेरी और रास्पबेरी, लिवर के लिए बहुत फायदेमंद होता है क्योंकि इनमें एंटीऑक्सीडेंट्स, विशेष रूप से फ्लेवोनॉयड्स और विटामिन C भरपूर मात्रा में होते हैं. ये तत्व लिवर को डिटॉक्सिफाई करने में मदद करते हैं और लिवर की कोशिकाओं को हेल्दी बनाते हैं. बैरीज जूस लिवर की सूजन को कम करने, फैटी लिवर को नियंत्रित करने और लिवर के सामान्य कार्य को बढ़ाने में सहायक होता है. यह लिवर के एंजाइम्स के स्तर को स्थिर रखता है और विषाक्त पदार्थों को शरीर से बाहर निकालने में मदद करता है.
धनिया का पानी-धनिया का पानी लिवर की हेल्थ के लिए बहुत ज्यादा फायदेमंद है. इसमें एंटीऑक्सीडेंट्स और एंटी-इन्फ्लेमेटरी गुण होते हैं जो लिवर के फंक्शन को बेहतर बनाने में मदद करते हैं. यह लिवर से विषाक्त पदार्थों को बाहर निकालने में सहायक है और लिवर की डिटॉक्सिफिकेशन प्रक्रिया को बढ़ाता है. धनिया का पानी लिवर की सूजन को कम करता है और उसकी कार्यक्षमता को बेहतर बनाता है. साथ ही यह लिवर में चर्बी को कम करने और फैटी लिवर से बचाव करने में मदद करता है. इसके नियमित सेवन से लिवर का स्वास्थ्य अच्छा रहता है.
अदरक,नींबू का पानी- अदरक और नींबू का पानी लिवर के लिए एक कुदरती टॉनिक है. अदरक में एंटी-इंफ्लेमेटरी और एंटीऑक्सीडेंट गुण होते हैं जो लिवर की क्लीनिंग और डिटॉक्सिफिकेशन में मदद करते हैं. नींबू में विटामिन C और साइट्रिक एसिड होता है जो लिवर से विषाक्त पदार्थों को बाहर निकालने में सहायक है. यह लिवर की कार्यक्षमता को बढ़ाता है और जिगर के एंजाइमों को सक्रिय करता है. साथ ही शरीर में हानिकारक तत्वों को नष्ट करने में मदद करता है. अदरक-नींबू का पानी नियमित सेवन से लिवर की सूजन को कम करता है और उसके स्वास्थ्य को दुरुस्त रखता है.
]]>1. पानी की मात्रा बढ़ा दें
दिवाली के बाद शरीर में पकवान-मिठाई के असर को कम करने के लिए हाइड्रेटेड रहना बेहद जरूरी है. पर्याप्त मात्रा में पानी पीने से शरीर के विषैले तत्व बाहर निकलते हैं, जिससे मेटाबॉलिज्म बेहतर होता है.लिहाजा दिन में कम से कम 8-10 गिलास पानी पिएं. इसके अलावा, नींबू पानी, नारियल पानी, ग्रीन टी और हर्बल टी को भी अपनी दिनचर्या में शामिल कर सकते हैं जो शरीर को डिटॉक्स करने में मदद करते हैं.
3. फाइबर युक्त आहार लें
फाइबर से भरपूर आहार जैसे फल, सब्जियां और साबुत अनाज न केवल पाचन को दुरुस्त रखते हैं, बल्कि शरीर को विषैले तत्वों से भी मुक्त करते हैं. सलाद, हरी पत्तेदार सब्जियां और फल जैसे केला, सेब और संतरा खाने से पेट लंबे समय तक भरा महसूस करता है. इससे भूख कम लगती है और वजन नियंत्रित रहता है.
4. मीठा और नमक एकदम घटा दें
त्योहार के दौरान मिठाई और नमकीन की अधिक मात्रा लेने के बाद अब इन्हें कम करना जरूरी है. ज्यादा मीठा खाने से ब्लड शुगर बढ़ सकता है इसलिए गुड़, शहद या फलों का प्राकृतिक मीठापन चुनें. साथ ही नमक का सेवन भी खाने में कम कर दें. इससे शरीर खुद को बेलेंस कर लेगा.
5. प्राकृतिक ड्रिंक लें
दिवाली के बाद कु दिन तक गुनगुने पानी में नींबू और शहद मिलाकर पिएं. यह शरीर को साफ करने और पाचन तंत्र को मजबूत करने में मदद करता है. हल्दी वाला दूध, अजवाइन का पानी और अदरक की चाय भी अच्छे विकल्प हैं जो शरीर को अंदर से शुद्ध करते हैं.
6. व्यायाम और योग का महत्व
त्यौहार के बाद नियमित रूप से व्यायाम, योग या कोई शारीरिक गतिविधि करना बहुत फायदेमंद होता है. यह न केवल वजन को नियंत्रित रखने में मदद करता है, बल्कि मेटाबॉलिज्म को भी तेज करता है. सुबह के समय सूर्य नमस्कार, प्राणायाम और हल्की दौड़ को अपनी दिनचर्या में शामिल करें.
7. नींद पूरी करें
त्योहारों के दौरान कम नींद लेने से शरीर थका हुआ महसूस करता है. इसलिए दिवाली के बाद पूरी नींद लेना जरूरी है ताकि शरीर को ठीक से आराम मिल सके और ऊर्जा का स्तर फिर से बढ़ से रोजाना 7-8 घंटे की नींद लें.
गौरतलब है कि, यह घटना 24 अक्टूबर को दंतेवाड़ा जिला अस्पताल में घटी. यहां जिला स्वास्थ्य विभाग की टीम मोतियाबिंद से जुड़े 30 मरीजों का ऑपरेशन कर रही थी. इस ऑपरेशन के कुछ देर बाद ही कई मरीजों आंखों में इंफेक्शन फैल गया. यह इंफेक्शन इतना फैल गया कि 25 अक्टूबर को इन मरीजों से जिला अस्पताल से जगदलपुर मेडिकल कॉलेज और रायपुर रेफर करना पड़ा. जानकारा के मुताबिक, 10 मरीजों की आंखों में ज्यादा इंफेक्शन हुआ है. एक मरीज को जगदलपुर भेजा गया है. जबकि, 9 मरीजों को रायपुर रेफर किया गया है.
जांट टीम कर रही पूछताछ
दूसरी ओर, अब स्वास्थ्य विभाग ने अस्पताल के ऑपरेशन थिएटर को सील कर दिया है. बताया जा रहा है ऑपेरशन थिएटर को स्टरलाइज नहीं किया गया था. इसी वजह से ऑपरेशन थिएटर में वायरस पनपा है. इधर स्वास्थ्य विभाग ने इसकी जांच के लिए तीन सदस्यी जांच दल का गठन किया है. यह जांच दल ऑपरेशन थिएटर में तैनात कर्मचारियों से पूछताछ कर रही है. इस मामले की खबर रायपुर के वरिष्ठ अधिकारियों तक पहुंच गई है. वहां से तीन आई स्पेशलिस्ट डॉक्टरों की टीम दंतेवाड़ा पहुंची है. ये मरीजों को देख रहे हैं. मरीजों को देखने के बाद ऑपरेशन थिएटर की बारीकी से पड़ताल करेंगे.
एमबीबीएस और बीडीएस, दोनों ही मेडिकल कोर्स हैं. ये दोनों ही अंडरग्रेजुएट कोर्स हैं. हालांकि बीडीएस और एमबीबीएस, दोनों ही कोर्स स्टूडेंट को डॉक्टर की डिग्री प्रदान करते हैं. अगर आप 12वीं के बाद डॉक्टरी की पढ़ाई करना चाहते हैं तो जानिए एमबीबीएस और बीडीएस में से किसमें लें एडमिशन, कौन सा कोर्स ज्यादा आसान है और किसकी फीस कम है. ये सभी फैक्टर्स जानकर एमबीबीएस और बीडीएस में से बेस्ट करियर ऑप्शन चुनना आसान हो जाएगा.
MBBS Full Form: एमबीबीएस कोर्स क्या है?
एमबीबीएस का फुल फॉर्म बैचलर ऑफ मेडिसिन, बैचलर ऑफ सर्जरी है. इस कोर्स की अवधि 5.5 साल (4.5 साल एकेडमिक+1 साल इंटर्नशिप) है. इसकी फीस लाखों में है. एमबीबीएस सिलेबस में मानव शरीर की संरचना, पैथोलॉजी, फिजियोलॉजी, बायोकेमिस्ट्री, फार्माकोलॉजी, माइक्रोबायोलॉजी जैसे टॉपिक्स शामिल हैं. एमबीबीएस की पढ़ाई करके जनरल मेडिसिन, सर्जरी, पीडियाट्रिक्स, गायनोकोलॉजी आदि में विशेषज्ञता हासिल कर सकते हैं. इसके बाद डॉक्टर, सर्जन, रिसर्चर, एकेडमिशियन बन सकते हैं.
BDS Full Form: बीडीएस कोर्स क्या है?
बीडीएस का फुल फॉर्म बैचलर ऑफ डेंटल सर्जरी है. बीडीएस कोर्स की अवधि 5 साल (4 साल एकेडमिक+1 साल इंटर्नशिप) है. बीडीएस सिलेबस में डेंटल साइंस, डेंटल स्ट्रक्चर, डेंटल केयर, ऑर्थोडोंटिक्स, पीडियोडोंटिक्स आदि शामिल हैं. बीडीएस की पढ़ाई करके दंत चिकित्सा, ऑर्थोडोंटिक्स, पीडियोडोंटिक्स, प्रोस्थोडोंटिक्स में विशेषज्ञता हासिल कर सकते हैं. बीडीएस करके डेंटिस्ट, डेंटल सर्जन, डेंटल रिसर्चर बन सकते हैं. इस कोर्स की फीस MBBS की तुलना में कम है.
Difference between MBBS and BDS: एमबीबीएस और बीडीएस में क्या अंतर है?
एमबीबीएस या बीडीएस (MBBS or BDS) में से किसी में भी एडमिशन लेने से पहले जानिए दोनों कोर्स के बीच 10 बड़े अंतर-
1. अवधि
एमबीबीएस: 5.5 साल (4.5 साल एकेडमिक+1 साल इंटर्नशिप)
बीडीएस: 5 साल (4 साल एकेडमिक+1 साल इंटर्नशिप)
2. पाठ्यक्रम
एमबीबीएस सिलेबस (MBBS Syllabus): मानव शरीर की संरचना, फिजियोलॉजी, बायोकेमिस्ट्री, फार्माकोलॉजी, पैथोलॉजी, माइक्रोबायोलॉजी, आदि.
बीडीएस सिलेबस (BDS Syllabus): दंत विज्ञान, दंत संरचना, दंत चिकित्सा, ऑर्थोडोंटिक्स, पीडियोडोंटिक्स आदि.
3. विशेषज्ञता
एमबीबीएस: जनरल मेडिसिन, सर्जरी, पीडियाट्रिक्स, गायनोकोलॉजी, आदि.
बीडीएस: दंत चिकित्सा, ऑर्थोडोंटिक्स, पीडियोडोंटिक्स, प्रोस्थोडोंटिक्स.
4. करियर ऑप्शन
एमबीबीएस (Career Options after MBBS): डॉक्टर, सर्जन, रिसर्चर, एकेडमिशियन
बीडीएस (Career Options after BDS): दंत चिकित्सक, दंत शल्य चिकित्सक, दंत अनुसंधानकर्ता
5. फीस
एमबीबीएस की फीस (MBBS Fees): उच्च (लाखों रुपये)
बीडीएस की फीस (BDS Fees): कम (लाखों रुपये से कम)
6. प्रवेश आवश्यकताएं
एमबीबीएस एंट्रेंस एग्जाम (MBBS Entrance Exam): नीट (NEET) परीक्षा
बीडीएस एंट्रेंस एग्जाम (BDS Entrance Exam): नीट (NEET) परीक्षा
7. काम का क्षेत्र
एमबीबीएस (MBBS Careers): हॉस्पिटल, क्लिनिक, रिसर्च सेंटर
बीडीएस (BDS Careers): डेंटल क्लिनिक, डेंटल अस्पताल
8. वेतन
एमबीबीएस सैलरी (MBBS Doctor Salary): उच्च (लाखों रुपये प्रति वर्ष)
बीडीएस सैलरी (Dentist Salary): मध्यम (लाखों रुपये प्रति वर्ष)
9. जिम्मेदारी
एमबीबीएस: मरीजों की सामान्य स्वास्थ्य देखभाल
बीडीएस: मरीजों की दंत स्वास्थ्य देखभाल
10. मान्यता
एमबीबीएस: मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया (MCI)
बीडीएस: डेंटल काउंसिल ऑफ इंडिया (DCI)