
गौरतलब है कि राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा जारी कार्यक्रम अनुसार नगरीय निकायों में 11 फरवरी 2025 को मतदान होना है, जिसके लिए बलरामपुर-रामानुजगंज जिले में कलेक्टर एवं जिला निर्वाचन अधिकारी श्री राजेन्द्र कटारा के मार्गदर्शन में वार्डों में ईवीएम के प्रति मतदाताओं को जागरूक किया जा रहा है। जिससे मतदाता आगामी निर्वाचन में निडर एवं भय मुक्त होकर स्थानीय निर्वाचन में अपना योगदान देंगे।
]]>इस मौके पर बोलते हुए श्रीकांत शिंदे ने कहा कि ‘मुंबा देवी आने के बाद मुझे यकीन हो गया कि शाइना एनसी जीतेंगी. 23 तारीख को बड़े अंतर से चुनाव में उनकी जीत होगी. 15 साल बाद बदलाव होना है.’ उन्होंने ऐलान किया कि सभी पार्टियों के साथ अब मनसे का भी समर्थन शाइना एनसी को है. उन्होंने कहा कि शाइना एनसी को कुछ कहकर उनका अपमान किया गया है. यह उनका नहीं बल्कि सभी महिलाओं का अपमान है. उन्होंने कहा कि कुछ लोग सिर्फ धर्म का अपमान करने वाली राजनीति करना चाहते हैं. महाराष्ट्र नंबर 1 पर है. गौरतलब है कि उद्धव ठाकरे की शिवसेना का ज्यादातर सीटों पर सीधा मुकाबला शिंदे गुट की शिवसेना से ही है.
‘शाइना एनसी में एनसी का मतलब है गैर-भ्रष्ट’
श्रीकांत शिंदे ने कहा कि मुंबई में कमाठीपुरा की तरह कई समस्याएं हैं. उन्होंने यह भी वादा किया कि हम इसका समाधान निकालेंगे. वहीं शाइन एनसी ने कहा कि मैं चुनाव लड़ रही हूं लेकिन जब विरोधी कुछ कहेंगे तो मैं उन्हें जवाब दूंगी. पिछले 15 साल में सिर्फ एक पार्टी का विधायक है, लेकिन कुछ नहीं किया, उन्होंने राजनीति की है, हम काम जरूर करेंगे. शाइना एनसी ने यह भी कहा कि शाइना एनसी नाम में एनसी का मतलब गैर-भ्रष्ट अर्थ है.
शाइना एनसी ने अरविंद सावंत पर हमला बोला
शाइना एनसी ने कहा कि अगर कमाठीपुर में आग लगती है, तो उन्होंने यहां यह कहकर राजनीति की है कि एक साधारण एम्बुलेंस या फायर ब्रिगेड की गाड़ी भी नहीं जा सकती है. हममें से कई लोग सोच रहे हैं कि शाइना देवी कहां से आईं लेकिन हम उन्हें बताते हैं कि यह शाइना देवी नहीं बल्कि शाइना ताई हैं. उन्होंने एक बार फिर अरविंद सावंत पर हमला बोलते हुए कहा कि मैं एक महिला हूं, मुझे किसी की संपत्ति की परवाह नहीं है, मैं जीतने के लिए लड़ूंगी.
बारामती पवार का गढ़ रहा है. शरद पवार ने अपने पोते युगेंद्र पवार को बारामती विधानसभा क्षेत्र से टिकट दिया है. यहां के सुपे गांव में पांच नवंबर को शरद पवार ने भावनात्मक अंदाज में लोगों से कहा, ‘मैंने बरामती से 14 चुनाव लड़े हैं. आपने मुझे हमेशा चुना. आपकी वजह से मैं विधायक बना, मंत्री बना, फिर चार बार मुख्यमंत्री बना. फिर आपने मुझे कुछ साल पहले लोकसभा के लिए सांसद चुना. इसके बाद मैंने लोकसभा चुनाव नहीं लड़ने का फैसला किया और राज्यसभा सांसद बना. मैं राज्यसभा में सांसद हूं और मेरा कार्यकाल डेढ़ साल में समाप्त हो जाएगा. अब मैं सोच रहा हूं कि दोबारा राज्यसभा सांसद न बनूं.’
एनसीपी (एसपी) प्रमुख ने कहा, ‘मैंने 30 साल तक बारामती के विकास और प्रगति की जिम्मेदारी संभाली और फिर अगले 30 साल के लिए यह जिम्मेदारी अजीत पवार को सौंपी. यह परंपरा आगे भी जारी रहनी चाहिए. इसलिए हमें अगले 30 साल के लिए युवा नेतृत्व को यह जिम्मेदारी सौंपनी चाहिए ताकि बारामती में जनसेवा की विरासत को आगे बढ़ाया जा सके. इसके लिए विधानसभा चुनाव में युगेंद्र को चुनना जरूरी है.’
पार्टी में शरद पवार की राजनीतिक हैसियत न के बराबर रह गई है. उनकी उम्र 83 साल हो चुकी है. जब तक उनका राज्यसभा सांसद का कार्यकाल खत्म होगा, तब तक वह करीब 85 साल के हो जाएंगे. ऐसे में चुनावी राजनीति छोड़ने का संकेत देना उनके लिए कोई बड़ी बात नहीं है. बड़ी बात है, बारामती में अपने उम्मीदवार को जिताना. इसलिए एक दांव के तौर पर उन्होंने ‘इमोशनल गेम’ खेला है. अब राजनीतिक जीवन के अंतिम पड़ाव पर उनके लिए ज्यादा जरूरी बची हुई पार्टी की नाक बचा कर रखना है.
राजनीतिक महत्वाकांक्षा के चलते शरद पवार ने कांग्रेस से अलग होकर राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) बनाई थी, लेकिन असल में उन्होंने इसे परिवारवादी पार्टी बना दिया और अभी तक बनाए रखा है. ताजा कड़ी में बारामती में पोते युगेंद्र पवार को लॉन्च कराया जा रहा है, जिसकी तैयारी कई महीने पहले शुरू हो गई थी.
युगेंद्र पवार, महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजीत पवार के भाई श्रीनिवास पवार के बेटे हैं. युगेंद्र ने राजनीति में चाचा अजित की जगह दादा शरद पवार के खेमे में रहने का फैसला किया. वह पहली बार फरवरी में एनसीपी (शरद पवार) के दफ्तर गए थे. तब शरद पवार व उनकी बेटी सुप्रिया सुले ने बात को हल्के में उड़ा दिया था. सुप्रिया ने तो यहां तक कह दिया था कि पवार परिवार को राजनीति में न घसीटा जाए. लेकिन, विधानसभा चुनाव आते ही पवार परिवार के इस कुमार को शरद पवार ने बारामती से विधायक बनाने के लिए उतार दिया.
युगेंद्र शरद पवार द्वारा स्थापित किए गए विद्या प्रतिष्ठान के कोषाध्यक्ष हैं. वह बारामती तालुका कुश्तीगीर परिषद के भी प्रमुख हैं. उन्होंने अपनी स्कूली शिक्षा मुंबई और पुणे में पूरी की और इसके बाद उच्च शिक्षा के लिए विदेश चले गए थे. उन्होंने बोस्टन के नॉर्थईस्टर्न यूनिवर्सिटी से फाइनेंस और इंश्योरेंस की पढ़ाई की. इसके बाद उन्होंने अपने पिता के व्यवसाय से जुड़कर शरयू ग्रुप ऑफ कंपनीज़ में निदेशक का पद संभाला. यह समूह लॉजिस्टिक्स, ऑटोमोबाइल डीलरशिप, कृषि उद्योग, सुरक्षा सेवाओं और रियल एस्टेट के क्षेत्र में सक्रिय है.
युगेंद्र बारामती में शरयू फाउंडेशन के जरिए सामाजिक कार्यों में सक्रिय रहे हैं. शरद पवार के जन्मदिन पर पिछले साल दिसंबर में उन्होंने बारामती में कुश्ती प्रतियोगिता का भी आयोजन करवाया था. यह आयोजन बारामती तालुका कुश्तीगीर परिषद के जरिए कराया गया था. इस तरह बारामती में उनकी राजनीतिक जमीन तैयार होती रही थी.
भाजपा, कांग्रेस और एनसीपी (शरद पवार) ने कम से कम नौ-नौ ऐसे उम्मीदवारों का टिकट दिया है जो किसी न किसी नेता के परिवार से आते हैं और पहली बार चुनाव लड़ रहे हैं. शिंदे सेना ने आठ, उद्धव सेना ने पांच और एनसीपी (अजीत पवार) ने कम से कम एक ऐसा उम्मीदवार उतारा है. ध्यान रहे, यह आंकड़ा नेताओं के सिर्फ उन रिश्तेदारों का है, जिन्हें पहली बार विधानसभा चुनाव का टिकट मिला है.
परिवारवाद का विरोध नेताओं के भाषणों तक ही सीमित रह गया है. चाहे वह विरोध प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ही क्यों न करते हों. उनकी भाजपा ने तो कांग्रेस छोड़ कर आए पूर्व मुख्यमंत्री अशोक चह्वान की बेटी श्रीजया चह्वान को नांदेड़ में भोकर विधानसभा क्षेत्र से टिकट देकर लॉन्च किया है. अशोक चह्वान अभी राज्यसभा सांसद हैं तो उन्होंने अपनी पारंपरिक विधानसभा सीट बेटी को सौंपने का इंतजाम करा लिया.
उधर, उद्धव ठाकरे भी अपने भतीजे वरुण सरदेसाई को पहली बार विधायक बनवाने के मकसद से बांद्रा ईस्ट से मैदान में उतार चुके हैं. पुत्र-मोह में राजनीति में काफी नुकसान झेलने के बावजूद उद्धव परिवारवाद से पीछे नहीं हट पा रहे हैं.
]]>कांग्रेस द्वारा घोषित सूची में महाराष्ट्र के चार उम्मीदवार शामिल हैं. कांग्रेस ने अकोला पश्चिम से साजिद खान मनन खान, कुलब्या से हीरा देवासी, सोलापुर सिटी सेंटर से चेतन नरोटे और कोल्हापुर उत्तर से मधुरिमाराजे को मैदान में उतारा है. इस सूची के साथ ही कांग्रेस ने महाराष्ट्र में शतक पूरा कर लिया है. इसे पहले की घोषित सूची में कांग्रेस 99 तक पहुंच गई थी, अब तीन और उम्मीदवारों के शामिल होने से कांग्रेस के उम्मीदवारों की संख्या 102 हो गई है. ठाकरे की शिवसेना ने 87 उम्मीदवारों को टिकट दिया है. शरद पवार की एनसीपी ने अब तक 83 सीटों की घोषणा की है, तो महाविकास अघाड़ी में 272 सीटों की घोषणा की गई है. हालांकि 16 सीटों पर अभी फैसला नहीं हुआ है. नामांकन फॉर्म दाखिल करने की आखिरी तारीख मंगलवार 29 अक्टूबर है.
उद्धव को सबसे बड़ा नुकसान
कांग्रेस के प्रदेशाध्यक्ष नाना पटोले लगातार 100 से 105 सीटों पर चुनाव लड़ने पर अड़े हुए थे. बीते लोकसभा चुनाव में पार्टी ने 17 सीटों पर उम्मीदवार उतारे थे. राज्य में हर लोकसभा में छह विधानसभा सीटें हैं. इस तरह कांग्रेस के खाते में 17 गुना 6 यानी 102 सीटें बैठती है. पार्टी ने अपने कोटे की सभी 102 सीटों पर उम्मीदवार उतार दिए हैं. सबसे बड़ा नुकसान शिवसेना उद्धव गुट को होते दिख रहा है. लोकसभा में उसने 21 सीटों पर उम्मीदवार उतारे थे. इस हिसाब से उसे 126 सीटें मिलनी चाहिए थी, लेकिन अब तक वह केवल 87 सीटों पर ही उम्मीदवार घोषित कर पाई है. शरद पवार की एनसीपी सबसे ज्यादा फायदे में रही है. लोकसभा के हिसाब से उसे केवल 60 सीटें मिलनी चाहिए थी लेकिन वह अब तक 83 सीटों पर उम्मीदवार घोषित कर चुकी है.
बायकुला सीट पर शिंदे गुट की विधायक यामिनी जाधव के खिलाफ शिवसेना ठाकरे गुट ने मनोज जामसुतकर को मैदान में उतारा है. पूर्व महापौर श्रद्धा जाधव को वडाला से जबकि विधानमंडल समूह के नेता अजय चौधरी को शिवडी से उम्मीदवार बनाया गया है. चार दिन पहले शिवसेना ठाकरे समूह में शामिल हुईं अनुराधा नागवाड़े को श्रीगोंडा से उम्मीदवार बनाया गया है.
ठाकरे समूह की दूसरी सूची में किसे मिला टिकट
महा विकास अघाड़ी में करीब 15 सीटों पर कांग्रेस और शिवसेना के बीच पेच फंसा हुआ है. इसे ही सुलझाने के लिए आज यानी मंगलवार को दोपहर एक बजे एमवीए की बैठक होगी. इस बैठक में शरद पवार और उद्धव ठाकरे भी शामिल होंगे. सूत्रों का दावा है कि महा विकास अघाड़ी में कांग्रेस और शिवसेना (UBT) के बीच 15 विधानसभा सीटों को लेकर अब तक बात नहीं बन पाई है. इनमें से तीन सीटें मुंबई और 12 पूर्वी विदर्भ की हैं. दोनों ही पार्टियां इन सीटों पर दावा कर रही हैं. ऐसे में अब शरद पवार, उद्धव ठाकरे और कांग्रेस महासचिव रमेश चेन्निथला मंगलवार को बैठक कर कोई हल निकालने की कोशिश करेंगे.
कितनी सीटों पर फंसा है पेच
सूत्रों की मानें तो सीट बंटवारे को लेकर एमवीए की एक दर्जन से ज्यादा बैठकें हो चुकी हैं. लेकिन इन 15 सीटों पर गतिरोध खत्म होने का नाम नहीं ले रहा है. मुंबई की जिन तीन सीटों पर कांग्रेस और उद्धव वाली शिवसेना का दावा है, वे हैं बायकुला, बांद्रा पूर्व और वर्सोवा. वहीं, विदर्भ में रामटेक, गोंदिया, दक्षिण नागपुर, भंडारा और गढ़चिरौली जैसी सीटों पर दोनों पार्टियां अपनी-अपनी दावेदारी पेश कर रही हैं.
किसके खाते में कितनी सीटें
सूत्रों का दावा है कि कांग्रेस के खाते में आई 96 सीटों पर चर्चा पूरी हो चुकी है. एमवीए सहयोगियों के बीच बनी सहमति के मुताबिक, शरद पवार की एनसीपी 80 सीटों पर, जबकि उद्धव ठाकरे वाली शिवसेना लगभग 90 सीटों पर चुनाव लड़ सकती है. बाकी सीटें कांग्रेस के खाते में जा सकती हैं. पिछले हफ्ते जिन सीटों को लेकर पटोले और UBT सेना सांसद संजय राउत के बीच तीखी बहस हुई थी. इसके बाद कयास लगाए जाने लगे कि कांग्रेस अलग चुनाव लड़ सकती है. मगर आज यह तस्वीर पूरी तरह साफ हो जाएगी.
दरअसल, कांग्रेस की तरफ से पांच सीटों की डिमांड की गई थी. कांग्रेस ने समाजवादी पार्टी से उन सीटों की मांग की थी जहां बीजेपी को 2022 के चुनाव में हार मिली थी. लेकिन बात नहीं बन पाई तो कांग्रेस की तरफ से फूलपुर और मंझवा सीट मांगी गई. लेकिन अखिलेश यादव ने इन दोनों ही सीटों पर प्रत्याशी उतार दिए. हालांकि, गठबंधन के तहत समाजवादी पार्टी ने गाजियाबाद और अलीगढ़ की खैर सीट कांग्रेस के लिए छोड़ दी. इन दोनों ही सीटों पर इंडिया गठबंधन के लिए राह आसान नहीं है. यहां बीजेपी काफी मजबूत है. यही वजह है कि कांग्रेस अपने हिस्से की दो सीटों को बदलवाना चाह रही थी, लेकिन बात नहीं बनी, जिसके बाद अब कांग्रेस ने मन बना लिया है कि वह अपने हिस्से की दोनों सीटों को भी सपा को दे देगी.
ताकि कार्यकर्ता का मनोबल न टूटे
कांग्रेस सूत्रों के मुताबिक लोकसभा चुनाव में 6 सीटें जीतने के बाद पार्टी कार्यकर्ताओं का मनोबल बढ़ा है. अब उसकी निगाहें 2027 के विधानसभा चुनाव पर है. कांग्रेस नहीं चाहती की गाजियाबाद और खैर सीट पर उपचुनाव लड़कर वह हारे और कार्यकर्ताओं का मनोबल टूटे. साथ ही कांग्रेस गठबंधन के तहत त्याग का सन्देश भी देना चाहती है. ठीक वैसे ही जैसा हरियाणा चुनाव में सीट न मिलने के बाद अखिलेश यादव ने कहा था कि बीजेपी को हराने के लिए वह कुर्बानी दे रहे हैं.
हारने से बेहतर न लड़ा जाये
दरअसल, कांग्रेस के खाते में जो दो सीटें गई हैं, वहां सपा की स्थिति भी ठीक नहीं है. 2022 के विधानसभा चुनाव में गाजियाबाद में बीजेपी को 61.37 फीसदी, सपा को 18.25 फीसदी और कंग्रेस को 4.81 फीसदी वोट मिले थे. यहां तक कि लोकसभा चुनाव में भी बीजेपी ने इस सीट को बड़े अंतर से जीता था. लोकसभा चुनाव में गठबंधन के तहत यह सीट कांग्रेस के खाते में थी. यही हाल खैर विधानसभा सीट का रहा. 2022 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी के अनूप प्रधान को इस सीट पर 55 फीसदी से अधिक वोट मिले थे, जबकि रालोद को 16 फीसदी से अधिक वोट मिले थे. यहां सपा और रालोद का संयुक्त प्रत्याशी मैदान में था. कांग्रेस को महज 0.6 प्रतिशत वोट मिले थे. आंकड़ों के हिसाब से दोनों ही सीट पर सपा कांग्रेस गठबंधन के बावजूद कमजरो नजर आती है. ऐसे में कांग्रेस नेताओं का मानना है कि चुनाव लड़कर हारने से बेहतर है कि न लड़कर सपा को समर्थन दिया जाए, जिससे कार्यकर्ताओं का मनोबल बना रहे.
विधानसभा चुनाव को लेक बढ़ी सियासी हलचल के बीच शुक्रवार देर रात तक केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के घर पर एक अहम बैठक हुई. इस बैठख में एकनाथ शिंदे की शिवसेना, अजित पवार की एनसीपी और भाजपा के नेता भी शामिल थे. अमित शाह की मौजूदगी में सीट शेयरिंग को लेकर काफी देर तक मंथन हुआ. यह बैठक तड़के 2.37 बजे तक हुई है. इसी बैठक में सीटों को लेकर सहमति बनी. सूत्रों के मुताबिक बीजेपी आज यानी शनिवार को अपनी पहली लिस्ट में 107 सीटों पर उम्मीदवारों का ऐलान कर सकती है.
वहीं झारखंड चुनाव में भारतीय जनता पार्टी (BJP) सबसे अधिक 68 सीटों पर चुनाव लड़ेगी. ऑल झारखंड स्टूडेंट्स यूनियन (AJSU) 10 सीटों पर चुनाव लड़ेगी. साथ ही नीतीश कुमार की जेडीयू (JDU) के खाते में 2 सीटें आई है. चिराग पासवान की पार्टी लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) की बात करें तो 1 सीट मिली है
]]>राहुल गांधी शनिवार को दोपहर करीब 2 बजकर 25 मिनट पर रांची एयरपोर्ट पहुंचेंगे. वहां कांग्रेस के तमाम बड़े नेता उनका स्वागत करेंगे. इसके बाद वो रांची के रेडिशन ब्लू में करीब 45 मिनट तक समय गुजारने के बाद शाम 4 बजे डोरंडा के शौर्य सभागार पहुंचेंगे. शौर्य सभागार में संविधान सम्मान सम्मेलन का आयोजन किया गया है. इस सम्मेलन में राज्य के ST/ SC/OBC और अल्पसंख्यक समाज के प्रबुद्ध लोग शिरकत करेंगे. आदिवासी-मूलवासी से संबंधित सामाजिक संगठनों के अगुवा प्रतिनिधियों को भी सम्मेलन शामिल होने का मौका मिलेगा.
शौर्य सभागार में करीब 500 लोगों के बैठने की व्यवस्था की गई है. इसके साथ ही सभागार के बाहर LED स्क्रीन भी लगाया जा रहा है. संविधान सम्मान सम्मेलन में संविधान में ST/SC/OBC और अल्पसंख्यक समाज के लोगों के हक अधिकार पर चर्चा होगी. संविधान में निहित अधिकारों पर भी बात होगी. आज के दौर में संविधान के अधिकार के तहत क्या मिला और क्या नहीं मिला, इसको लेकर कौन है दोषी और कैसे मिलेगा अधिकार… ऐसे तमाम विषयों पर चर्चा होगी.
इस सम्मेलन की एक सबसे बड़ी खासियत ये है कि इसको सिर्फ राहुल गांधी ही संबोधित नहीं करेंगे, बल्कि सम्मेलन में भाग ले रहे करीब 8 से 10 लोगों को भी राहुल गांधी से सवाल पूछने का मौका मिलेगा. संविधान सम्मान सम्मेलन को सफल बनाने के लिए राहुल गांधी की टीम के साथ-साथ कांग्रेस के नेता भी दिन रात लगे हैं. सम्मेलन करीब 1 घंटे का होगा और उसके बाद राहुल गांधी शाम 5 : 30 बजे रांची से दिल्ली के लिए रवाना हो जाएंगे.
चुनाव की तारीखों की घोषणा के साथ ही तीनों विधानसभा सीटों पर आचार संहिता लागू हो गई है. गौरतलब है कि, मध्य प्रदेश बीजेपी ने 14 अक्टूबर को ही विजयपुर-बुधनी विधानसभा उपचुनाव को लेकर बैठक की थी. प्रदेश चुनाव समिति ने सर्वसम्मति से वन मंत्री रामनिवास रावत को विजयपुर से प्रत्याशी चुना. दूसरी ओर, बुधनी विधानसभा को लेकर बीजेपी पैनल का गठन करेगी. इस बैठक में उपचुनाव के संभावित नामों पर चर्चा की गई. पदाधिकारियों ने कहा कि पार्टी चुनाव के लिए पूरी तरह तैयार है. ये दोनों उपचुनाव सरकार के कामों के आधार पर लड़े जाएंगे. सीहोर से पूर्व सांसद रमाकांत भार्गव, जिला अध्यक्ष रवि मालवीय, प्रदेश मंत्री रघुनाथ भाटी और सुनील चौहान का नाम पैनल के लिए सामने आ रहा है.
कांग्रेस ने गठित की दो समितियां
कांग्रेस ने विजयपुर-बुधनी उपचुनाव के लिए दो समितियों का गठन किया है. बुधनी में चुनावी मैनेजमेंट के लिए पूर्व केंद्रीय मंत्री अरुण यादव, पूर्व मंत्री सज्जन सिंह वर्मा और पूर्व विधायक शैलंद्र पटेल को जिम्मेदारी की गई है. जबकि, विजयपुर विधानसभा सीट की जिम्मेदारी कांग्रेस सचिव चंदन यादव, पूर्व मंत्री जयवर्धन सिंह और राज्य सभा सांसद अशोक सिंह को दी गई है.
अपनी-अपनी जीत का दावा
एमपी के उपचुनाव को लेकर उपनेता प्रतिपक्ष हेमंत कटारे ने कहा कि जैसे ही सीट खाली हुई थी उसके बाद से कांग्रेस पार्टी के नेता ग्राउंड पर काम कर रहे हैं. हमारे नेता सरकार की नीतियों के खिलाफ जनता से लगातार संपर्क बना रहे हैं. हमारे बड़े नेता भी दो दिन से लगातार बुधनी और विजयपुर के दौरे पर हैं. जल्दी प्रत्याशियों के नाम का ऐलान होगा. दोनों सीटों पर कांग्रेस जीत दर्ज करेगी. वहीं, भाजपा प्रवक्ता राजपाल सिसोदिया ने कहा कि विजयपुर और बुधनी की जनता विकास को चुनेगी और वर्तमान सरकार के साथ चलेगी. पार्टी ने कल ही बैठक करके संभावित नाम का पैनल तैयार किया है.
सिंहदेव ने उठाए चुनाव आयोग पर सवाल
रायपुर दक्षिण सीट के उपचुनाव की तारीखे आने के बाद पूर्व उप मुख्यमंत्री टीएस सिंहदेव ने कहा कि यह सीट भले ही टफ है, लेकिन हम तैयार हैं. उन्होंने कहा कि इस सीट पर बृजमोहन अग्रवाल का लंबा वर्चस्व रहा है. उन्होंने इशारों में ‘दूध में मक्खी’ वाली कहावत को लेकर कि मैं वो शब्द नहीं कहना चाहता कि निकाल फेंका गया. इसका जवाब उनका वोटर देगा. कांग्रेस चुनाव समिति की बैठक होगी. इसके बाद वहां की जो भी भौगोलिक स्थिति है उसके अनुसार नाम तय किया जाएगा. दोनों पार्टियों के बीच बराबर का मुकाबला है, लेकिन कांग्रेस जीतेगी. उन्होंने चुनाव की तारीखों को लेकर चुनाव आयोग पर सवाल उठाए हैं. टीएस सिंहदेव ने कहा कि चुनाव आयोग ने जो तारीखें दी हैं वह एक पर्टिकुलर पार्टी को फायदा पहुंचाने के लिए दी हैं. तारीखें ऐसे सेट की गई हैं जिससे बीजेपी को महाराष्ट्र में घर-घर बर्तन पहुंचाने का मौका मिल जाए. उनके नेताओं को प्रचार का पर्याप्त मौका मिल जाए. जो पार्टी वन नेशन वन इलेक्शन की बात करती थी, वह चार राज्यों में एक साथ चुनाव नहीं करा पाई. ये केवल राजनीतिक शिगूफा छोड़ते हैं.