आईएमडी ने बताया कि कोलकाता से 80 किलोमीटर दूर बंगाल की खाड़ी में एक भारी डीप डिप्रेशन बना हुआ है. यह लगातार पश्चिम की ओर बढ़ रहा है और अगले 24 घंटे में यह गंगैय बंगाल को पार करते हुए झारखंड, छत्तीसगढ़ और पूर्वी उत्तर प्रदेश तक पहुंच सकता है. मौसम विभाग ने बताया कि इस डीप डिप्रेशन की वजह से झारखंड छत्तीसगढ़ उड़ीसा पूर्वी उत्तर प्रदेश बिहार और गंगैय बंगाल में भारी बारिश हो सकती हैं.
आईएमडी के मुताबिक बंगाल की खाड़ी में उपजे डीप डिप्रेशन की वजह से पूर्वी भारत में ओडिशा और बंगाल के आसपास वाले हिस्से में काफी तेज हवाएं चल रही हैं. अगर इन इलाकों में बारिश हुई तो हवाओं का रफ्तार 45 किलोमीटर प्रति घंटे से बढ़कर 55 से 65 किलोमीटर प्रति घंटे हो सकती हैं. जिससे बिहार, छत्तीसगढ़, झारखंड, औडिशा, पूर्वी उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल में तूफान जैसी स्तिथि हो सकती है.
अब बात करते हैं दिल्ली एनसीआर क्षेत्र की. लगभग दिल्ली एनसीआर में बारिश का दौर थम चुका है. मौसम विभाग ने बताया कि दिल्ली में आसमान में हल्के बादल छाए रहेंगे लेकिन मौसम खिला हुआ रहेगा. दिल्ली में आज अधिकतम तापमान 32 डिग्री तक पहुंच सकता है जबकि न्यूनतम तापमान अभी 22 से 25 डिग्री के आसपास में रहेगा. मौसम विभाग ने बताया कि नोएडा, ग्रेटर नोएडा और गाजियाबाद में बुधवार तक आसमान में धूप खिला रहेगा. दिल्ली-एनसीआर में बुधवार और गुरुवार को हल्की बारिश की संभावना है.
]]>इसके अलावा सोयाबीन के कच्चे तेल, सूरजमुखी के कच्चे तेल और ताड़ के कच्चे तेल पर आयात शुल्क को 0 से बढ़ाकर 20 फीसदी कर दिया गया है. कृषि मंत्री के अनुसार, इसमें कुछ और फैक्टर्स को जोड़ने यह शुल्क 27.5 फीसदी हो जाएगा. शिवराज सिंह चौहान ने इस जानकारी के साथ लिखा है, “इस निर्णय से रिफाइनरी तेल के लिए सरसों, सूरजमुखी और मूंगफली की फसल की मांग बढ़ेगी. किसानों को इन फसलों के बेहतर दाम मिल सकेंगे और साथ ही छोटे एवं ग्रामीण क्षेत्रों में रिफाइनरी बढ़ने से वहां रोजगा के अवसर भी बढ़ेंगे.
सोया को लेकर मचा था बवाल
इसी सप्ताह की शुरुआत में सोयाबीन की फसल को लेकर मध्य प्रदेश में काफी बवाल मचा हुआ था. सरकार ने इस फसल की एमएसपी को 4892 रुपये कर दिया था इसके बावजूद किसान खुश नहीं दिख रहे थे. उनकी मांग थी कि एमएसपी या न्यूनतम समर्थन मूल्य को बढ़ाकर 6000 रुपये प्रति क्विंटल किया जाए. इस मांग को लेकर एमपी में प्रदर्शन भी हुए थे.
प्याज और बासमती चावल
तेल के अलावा प्याज के निर्यात शुल्क को भी 40 फीसदी से घटाकर 20 फीसदी कर दिया गया है. कृषि मंत्री का कहना है कि निर्यात शुल्क घट जाने से उत्पादक किसानों को प्याज के अच्छे दाम मिलेंगे और प्याज का निर्यात भी बढ़ेगा. उन्होंने कहा कि सरकार के इस निर्णय से किसानों के साथ प्याज से जुड़े अन्य सेक्टर्स को भी सीधा लाभ मिलेगा. सरकार ने बासमती चावल के न्यूनतम निर्यात शुल्क को भी हटा दिया है. इससे बासमती चावल उगाने वाले किसानों को फसल के ऊंचे दाम मिलने की उम्मीद है.
UIDAI की आधिकारिक वेबसाइट के अनुसार, आधार कार्डधारक अब 14 दिसंबर 2024 तक फ्री में ऑनलाइन जानकारी अपडेट कर सकते हैं. आज के समय में आधार एक बेहद अहम दस्तावेज बन चुका है, जिसका इस्तेमाल सरकारी योजनाओं, बैंक खाते खोलने, ट्रेन और फ्लाइट टिकट बुकिंग समेत कई कार्यों में किया जाता है. आधार कार्ड में हर व्यक्ति की डेमोग्राफिक जानकारी जैसे नाम, पता, उम्र, लिंग, और बायोमेट्रिक डेटा दर्ज होता है.
क्या आधार अपडेट कराना अनिवार्य है?
आधार को अपडेट कराना अनिवार्य नहीं है. UIDAI ने कई बार स्पष्ट किया है कि आधार को अपडेट करना आवश्यक नहीं है। हालांकि,.अगर आधार कार्ड पुराना है, तो इसे अपडेट कराना फायदेमंद साबित हो सकता है. UIDAI ने सुझाव दिया है कि पहचान और पते के प्रमाण संबंधी दस्तावेजों को अपडेट कराना उचित रहेगा. यदि आपके आधार में पुराना पता या फोटो है, तो इसे अपडेट करना आपके लिए लाभदायक होगा. लेकिन, अगर आप अपना 10 साल पुराना आधार अपडेट नहीं कराते, तो भी आपका आधार कार्ड पहले की तरह काम करता रहेगा और उसे ब्लॉक या निलंबित नहीं किया जाएगा.
आधार अपडेट के तरीके
आधार को ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों तरीकों से अपडेट किया जा सकता है. यानी आप आधार सेंटर जाकरअ अपने आधार में दर्ज कोई गलत जानकारी को ठीक करा सकते हैं. इसके अलावा आप घर बैठे ऑनलाइन भी आधार को फ्री में अपडेट कर सकते हैं.
ऑनलाइन ऐसे अपडेट करें आधार
नए टोल सिस्टम की मुख्य विशेषता यह है कि गाड़ियों की आवाजाही की निगरानी के लिए सैटेलाइट या कुछ सैटेलाइट्स के समूह की मदद ली जाएगी. यात्रा की सटीक दूरी के आधार पर टोल या उपयोगकर्ता शुल्क को तय किया जाएगा. सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने इस सप्ताह की शुरुआत में सैटेलाइट बेस्ड टोल कलेक्शन सिस्टम का उपयोग करके टोल संग्रह की अनुमति देने के लिए एनएच शुल्क नियमों में संशोधन किया है. जानकारी के मुताबिक नए टोल सिस्टम को लागू करने के लिए भारतीय सैटेलाइट NavIC का उपयोग किया जाएगा. मौजूदा समय नए टोल सिस्टम की टेस्टिंग के लिए कुछ गाड़ियों को ऑन-बोर्ड यूनिट के साथ चलाया जाएगा, लेकिन आपको कब तक इसे अपनी गाड़ी में लगाना होगा, आइए जानते हैं.
गाड़ियों में पहले से ही लगे आएंगे ट्रैकिंग डिवाइस
सैटेलाइट आधारित टोल सिस्टम काम करे इसलिए गाड़ियों में ऑन-बोर्ड यूनिट लगवाना अनिवार्य होगा. आने वाले कुछ वर्षों के भीतर नई गाड़ियां प्री-फिटेड ऑन-बोर्ड यूनिट के साथ आने लगेंगी. वहीं मौजूदा गाड़ियों में बाहर से ऑन-बोर्ड यूनिट लगवाया जा सकेगा. ऑन-बोर्ड यूनिट को फास्टैग की तरह जारी किया जाएगा और इसका काम इशुइंग अथाॅरिटी को सौंपा जाएगा.
पहले ट्रकों में लगाए जाएंगे ऑन-बोर्ड यूनिट
सैटेलाइट आधारित टोल कलेक्शन सिस्टम के लिए ऑन-बोर्ड यूनिट को पहले ट्रकों, बसों और खतरनाक सामान के जाने वाले वाहनों में लगाया जाएगा. अन्य तरह के कमर्शियल वाहनों को अगले चरण में शामिल किया जाएगा. हालांकि, निजी वाहनों को 2026-27 में अंतिम चरण के तहत नए टोल सिस्टम में शामिल किया जाएगा.
2025 से शुरू हो जाएगा नए सिस्टम से टोल कलेक्शन
सैटेलाइट आधारित टोल सिस्टम को जून 2025 तक 2,000 किलोमीटर के राष्ट्रीय राजमार्गों पर लागू किया जाएगा. इसे नौ महीनों में 10,000 किलोमीटर, 15 महीनों में 25,000 किलोमीटर और दो वर्षों में 50,000 किलोमीटर तक बढ़ाने का लक्ष्य रखा गया है. इसके लिए केंद्र सरकार की राजमार्ग-स्वामित्व वाली एजेंसियों ने राष्ट्रीय राजमार्गों की लगभग पूरी लंबाई की जियो-फेंसिंग पूरी कर ली है. टोल कैलकुलेशन के उद्देश्य से सटीक एंट्री और एग्जिट पॉइंट को चिह्नित करने के लिए जियो-फेंसिंग महत्वपूर्ण है. भारत में राष्ट्रीय राजमार्गों की कुल लंबाई लगभग 1.4 लाख किलोमीटर है, जिसमें से लगभग 45,000 किलोमीटर पर टोल वसूला जाता है.