सीबीएसई हाईस्कूल मैथ्स परीक्षा में 80 में से 70 से ज्यादा अंक आसानी से हासिल किए जा सकते हैं. सीबीएसई 10वीं मैथ परीक्षा का रिवीजन करने के लिए अभी काफी समय बाकी है. सीबीएसई 10वीं मैथ में टॉप करने के लिए स्ट्रैटेजिक तैयारी, प्रैक्टिस और परीक्षा में स्मार्ट दृष्टिकोण की जरूरत होगी. सीबीएसई 10वीं बोर्ड परीक्षा की फाइनल तैयारी करते समय मैथ विषय का सिलेबस और मार्किंग स्कीम भी जरूर चेक करें. इससे कोई भी टॉपिक मिस होने का रिस्क नहीं रहेगा.
सीबीएसई 10वीं मैथ की तैयारी कैसे करें?
सीबीएसई 10वीं मैथ में 75 से ज्यादा मार्क्स स्कोर करके आप अपना रिजल्ट बदल सकते हैं. जानिए सीबीएसई 10वीं मैथ परीक्षा में टॉप करने के कुछ टिप्स.
1. समझें सीबीएसई 10वीं मैथ सिलेबस और मार्किंग स्कीम
सीबीएसई 10वीं मैथ्स का पेपर 80 अंकों का होता है. इसे 4 सेक्शन्स में बांटा गया है:
सेक्शन A: 20 सवाल (प्रति सवाल 1 अंक) = 20 अंक
सेक्शन B: 6 सवाल (प्रति सवाल 2 अंक) = 12 अंक
सेक्शन C: 10 सवाल (प्रति सवाल 3 अंक) = 30 अंक
सेक्शन D: 4 सवाल (प्रति सवाल 4 अंक) = 16 अंक
हाई-वेटेज चैप्टर्स पर फोकस करें: अलजेब्रा (25 अंक), ज्योमेट्री (15 अंक), ट्रिग्नोमेट्री (12 अंक) और स्टैटिस्टिक्स (10 अंक).
2. एनसीईआरटी पर करें फोकस
एनसीईआरटी की किताब के हर चैप्टर, उदाहरण और एक्सरसाइज को अच्छी तरह से हल करें.
3. हाई-स्कोरिंग टॉपिक्स पर फोकस
अलजेब्रा: क्वॉड्रैटिक इक्वेशन, अरिथमेटिक प्रोग्रेशन (AP), लीनियर इक्वेशन.
ज्योमेट्री: ट्राइएंगल, सर्कल थ्योरम, कंस्ट्रक्शन.
ट्रिग्नोमेट्री: फंडामेंटल थ्योरम, ऊंचाई-दूरी के सवाल.
स्टैटिस्टिक्स: मीन, मीडियन, मोड और ओजाइव ग्राफ.
इन टॉपिक्स से लगभग 50-60 अंक स्कोर किए जा सकते हैं. इसलिए इनमें परफेक्शन रखें.
4. टाइम मैनेजमेंट से बनेगी बात
हर दिन 2-3 घंटे मैथ्स की प्रैक्टिस जरूर करें. इससे सभी कॉन्सेप्ट समझने में मदद मिलेगी.
5. फॉर्म्यूले और शॉर्टकट्स
सीबीएसई 10वीं गणित विषय की परीक्षा 10 मार्च को है. तब तक आप फॉर्म्यूले और शॉर्टकट्स रिवाइज कर सकते हैं.
परीक्षा के दिन के लिए टिप्स
1. सवालों का क्रम
2. स्टेप्स और प्रेजेंटेशन
3. समय का उपयोग
4. कैलकुलेशन में बरतें सावधानी
लक्ष्य कैसे पूरा करें?
70+ अंक का ब्रेकडाउन:
सेक्शन A: 18-20 अंक
सेक्शन B: 10-12 अंक
सेक्शन C: 26-28 अंक
सेक्शन D: 14-16 अंक
रोजाना मेहनत और रिवीजन से आप आसानी से 85-90% तक स्कोर कर सकते हैं.
अतिरिक्त सलाह
इंस्टिट्यूट ऑफ चार्टर्ड एकाउंटेंट्स ऑफ़ इंडिया (ICAI)
इंस्टिट्यूट ऑफ चार्टर्ड एकाउंटेंट्स ऑफ़ इंडिया (ICAI), भारत में चार्टर्ड अकाउंटेंसी के पेशे को रेगुलेट एंड प्रमोट करने का कार्य करता है. ICAI द्वारा प्रमाणित प्रोफेशनल्स को CA (चार्टर्ड अकाउंटेंट) कहा जाता है. ये पेशेवर फाइनेंसियल एकाउंटिंग, ऑडिटिंग, टैक्सेशन एंड एडवाइजरी सर्विसेज में स्पेशलिस्ट होते हैं. CA का कार्य वित्तीय पारदर्शिता को सुनिश्चित करना, रेगुलेशन का अनुपालन करना और व्यवसायों के फाइनेंशिय हेल्थ को मजबूत करना है.
इंस्टिट्यूट ऑफ़ कॉस्ट एकाउंटेंट्स ऑफ़ इंडिया (ICMAI)
इंस्टिट्यूट ऑफ़ कॉस्ट एकाउंटेंट्स ऑफ़ इंडिया (ICMAI) को पहले इंस्टिट्यूट ऑफ़ कॉस्ट एंड वर्क्स एकाउंटेंट्स ऑफ़ इंडिया(ICWAI) के नाम से भी जाना जाता था. यह मुख्य रूप से कॉस्ट एंड मैनेजमेंट एकाउंटिंग पर केंद्रित है. ICMAI का उद्देश्य संगठनात्मक निर्णयों के लिए वित्तीय जानकारी को व्यवस्थित रूप से रिकॉर्ड करना, विश्लेषण करना और उसकी व्याख्या करना है. यह संस्थान ऐसे प्रोफेशनल्स को प्रमाणित करता है, जिन्हें CMA (कॉस्ट एंड मैनेजमेंट अकाउंटेंट) कहा जाता है.
ICAI और ICMAI दोनों संस्थान अकाउंटिंग के क्षेत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, उनके कार्यक्षेत्र और ध्यान केंद्रित करने के क्षेत्र में अंतर है. ICAI कम्प्रेहैन्सिव फाइनेंसियल सर्विसेज के लिए जिम्मेदार है, जिसमें फाइनेंसियल अकाउंटिंग, टैक्सेशन, एंड फाइनेंसियल कंप्लायंस शामिल हैं. यह संस्थान वित्तीय पारदर्शिता और प्रभावी नियंत्रण के लिए काम करता है. वहीं ICMAI की बात करें तो कॉस्ट एंड मैनेजमेंट अकाउंटिंग पर जोर देता है, जहां मुख्य उद्देश्य संगठन की कॉस्ट स्ट्रक्चर एंड मैनेजमेंट को ऑप्टिमाइज करना होता है.
ICAI और ICMAI दोनों ही भारत में फाइनेंसियल प्रैक्टिसेज की मजबूती और विश्वसनीयता में महत्वपूर्ण योगदान देते हैं. जहां ICAI फाइनेंसियल स्ट्रक्चर एंड ओर्गनइजेशनल कंटेंट पर एक व्यापक दृष्टिकोण प्रदान करता है. वहीं ICMAI फाइनेंसियल मैनेजमेंट के विशिष्ट पहलुओं पर ध्यान केंद्रित करता है.
]]>इनकम टैक्स संबंधी जो बिल सेलेक्ट कमेटी को भेजा गया है. वो अपनी रिपोर्ट संसद के अगले सत्र के पहले दिन सौंप सकती है.आप कह सकते हैं कि किस जटिल या महत्वपूर्ण बिल पर विचार-विमर्श और समीक्षा के लिए ऐसी खास कमेटी की जरूरत होती है. इसका गठन लोकसभा अध्यक्ष या राज्यसभा के सभापति द्वारा किया जाता है.
– भारतीय संसद में संसदीय सेलेक्ट कमेटी (Parliamentary Select Committee) एक विशेष समिति होती है जो किसी विशेष विधेयक (बिल) या मुद्दे की जांच और विस्तार से विचार-विमर्श के लिए गठित की जाती है. यह समिति संसद के सदस्यों से बनी होती है. इसका मुख्य उद्देश्य किसी विशेष मामले पर गहन अध्ययन करना और उस पर रिपोर्ट तैयार करना होता है.
जब कोई महत्वपूर्ण विधेयक संसद में पेश किया जाता है, तो उसे और अधिक विस्तृत विचार-विमर्श के लिए सेलेक्ट कमेटी को भेजा जा सकता है. समिति विधेयक के प्रावधानों की जांच करती है. संभावित संशोधनों की सिफारिश कर सकती है. कभी-कभी किसी विशेष मुद्दे या समस्या पर गहन अध्ययन करने के लिए भी सेलेक्ट कमेटी का गठन किया जाता है.
समिति अपनी जांच के आधार पर एक रिपोर्ट तैयार करती है, जिसमें उसके निष्कर्ष और सिफारिशें शामिल होती हैं. यह रिपोर्ट संसद में पेश की जाती है. इस पर चर्चा की जा सकती है.
यह समिति विधेयकों में संभावित त्रुटियों या कमियों को दूर करने में मदद करती है।
यह संसदीय प्रक्रिया को और अधिक पारदर्शी और प्रभावी बनाती है. संसदीय सेलेक्ट कमेटी भारतीय संसदीय प्रणाली का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, जो विधायी प्रक्रिया को और अधिक मजबूत और प्रभावी बनाने में मदद करती है.
– सेलेक्ट कमेटी का गठन संसद के किसी भी सदन (लोकसभा या राज्यसभा) द्वारा किया जा सकता है. ये गठन स्पीकर या राज्यसभा में सभापति द्वारा किया जाता है. समिति के सदस्य संसद के विभिन्न दलों के प्रतिनिधि होते हैं, जिन्हें उनके दलों द्वारा नामित किया जाता है. सदस्यों की संख्या और संरचना सदन द्वारा तय की जाती है. सदस्यों का चयन आमतौर पर दलों के बीच आपसी सहमति से होता है.
– समिति का अध्यक्ष भी संसद सदस्यों में चुना जाता है. आमतौर पर सेलेक्ट कमेटी के सभी सदस्य मिलकर उसका चुनाव करते हैं.
– संसद के किसी सदस्य द्वारा एक प्रस्ताव पेश किया जाता है कि किसी विशेष विधेयक या मुद्दे पर विचार करने के लिए एक सेलेक्ट कमेटी का गठन किया जाए. यह प्रस्ताव सदन (लोकसभा या राज्यसभा) में चर्चा के लिए रखा जाता है. यदि सदन इस प्रस्ताव को स्वीकार कर लेता है, तो कमेटी का गठन होता है.
– सेलेक्ट कमेटी का कार्यकाल उसके गठन के उद्देश्य पर निर्भर करता है. एक बार जब कमेटी अपना कार्य पूरा कर लेती है. अपनी रिपोर्ट सदन में पेश कर देती है, तो उसका कार्यकाल समाप्त हो जाता है. सेलेक्ट कमेटी का गठन अस्थायी होता है और यह केवल उस विशेष विधेयक या मुद्दे के लिए किया जाता है, जिसके लिए इसे बनाया गया है.
– नहीं, हर बिल (विधेयक) पर समीक्षा करने के लिए सेलेक्ट कमेटी (Select Committee) का गठन नहीं किया जाता. सेलेक्ट कमेटी का गठन केवल विशेष परिस्थितियों में किया जाता है.
– लोकसभा के नियमों के अनुसार, एक सेलेक्ट कमेटी में आमतौर पर 30 सदस्य हो सकते हैं. जिसमें अध्यक्ष शामिल होता है. राज्यसभा में यह संख्या 25 सदस्यों की हो सकती है. इसें अध्यक्ष शामिल होता है. हालाकि ये संख्या लचीली हो सकती है और स्थिति के अनुसार बदल सकती है.
– सेलेक्ट कमेटी संसदीय प्रक्रिया में एक महत्वपूर्ण और शक्तिशाली भूमिका निभाती है. हालांकि इसकी शक्तियां सीमित और विशिष्ट होती हैं. इसके निर्णय अंतिम नहीं होते हैं.
– सेलेक्ट कमेटी को विधेयक के प्रावधानों की गहन जांच करने और उसमें संशोधन की सिफारिश करने का अधिकार होता है.
– यह विधेयक के हर पहलू पर विस्तृत विचार-विमर्श कर सकती है.
– कमेटी विधेयक से संबंधित विषयों पर विशेषज्ञों, हितधारकों और जनता से सलाह ले सकती है.
– यह जनसुनवाई आयोजित कर सकती है और लोगों की राय जान सकती है.
– यदि कमेटी की रिपोर्ट में महत्वपूर्ण संशोधनों की सिफारिश की जाती है, तो संसद उन पर विचार कर सकती है.
– सेलेक्ट कमेटी को सरकारी विभागों, मंत्रालयों और अन्य संस्थानों से जानकारी और दस्तावेज़ मांगने का अधिकार होता है.
– यह कमेटी सरकारी अधिकारियों को बुलाकर उनसे सवाल पूछ सकती है.
शोधकर्ताओं ने पाया है कि इसकी टक्कर से भूकंप और सुनामी पैदा हो जाएगी. इस टक्कर से अंतरिक्ष में लाखों टन धूल पहुंच जाएगी. यह धूल इतनी होगी कि पृथ्वी पर सूर्य की रोशनी का आना भी मुश्किल होगा. इस वजह से दो साल की ठंड ग्रह पर पड़ेगी. दुनिया ठंडी और शुष्क हो जाएगी. वैश्विक तापमान में 4 डिग्री सेल्सियस की गिरावट दर्ज होगी. इसके अलावा वैश्विक वर्षा में 15 फीसदी की कमी आएगी. दक्षिण कोरिया में पुसान नेशनल यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने सुपर कंप्यूटर और अत्याधुनिक जलवायु सिमुलेशन का उपयोग किया. उत्तरी अमेरिका के कुछ इलाकों में वर्षा 30-60 फीसदी के बीच कम हो जाएगी. यानी कि फसलों की पैदावार लगभग असंभव होगी.
डायनासोर की तरह हो जाएगा खात्मा?
इस शोध के प्रमुख लेखक डॉ. लान दाई के मुताबिक दुनिया में इससे एक बड़ा खाद्य संकट पैदा हो सकता है. चिक्सुलब एस्टेरॉयड की टक्कर से पृथ्वी पर डायनासोर का सफाया हो गया था. लेकिन बेन्नू की टक्कर से बड़े पैमाने पर जीवों का खात्मा नहीं होगा. माना जाता है कि बेन्नू के आकार का एस्टेरॉयड हर 100,000-200,000 वर्षों में पृथ्वी से टकराते हैं. इसलिए संभावना है कि हमारे शुरुआती पूर्वज पहले ही इनमें से किसी अंतरिक्ष चट्टान में खत्म होने से बच गए हैं. लेकिन यह तय है कि बड़े पैमाने पर जलवायु परिवर्तन ट्रिगर होगा.
ओजोन परत को होगा नुकसान
बेन्नू की टक्कर से उसी तरह की तबाही मचेगी जैसा किसी परमाणु हमले के बाद होने की कल्पना की जाती है. डॉ. दाई और स्टडी के अन्य लेखकों का मानना है कि 100 से 400 मिलियन टन धूल लगभग दो वर्षों तक पृथ्वी के ऊपर बनी रहेगी. यूरेशिया और उत्तर अमेरिका में सबसे भयानक ठंड देखी जाएगी. इसके अतिरिक्त शोधकर्ताओं का अनुमान है कि महासागरों के ऊपर वाष्पीकरण के पैटर्न में व्यवधान के कारण दुनिया के कई हिस्सों में बड़े पैमाने पर सूखा होगा. इसके अलावा बेन्नू की टक्कर से निकली धूल ओजोन परत को नुकसान पहुंचाएगी. इससे ओजोन परत 32 फीसदी तक कमजोर होने का खतरा रहेगा.
12वीं के बाद सही कोर्स में एडमिशन लेना बहुत जरूरी है (Career Options after 12th). अगर आप किसी ऐसे कोर्स में एडमिशन ले लेते हैं, जिसका भविष्य में कोई काम नहीं है तो आपकी पूरी पढ़ाई बर्बाद हो जाएगी. इन दिनों पढ़ाई बहुत महंगी हो गई है. लोगों के लिए फीस भरना तक मुश्किल हो जाता है. ऐसे में गलत कोर्स में एडमिशन लेकर अपने फ्यूचर के साथ खिलवाड़ करने से बचना चाहिए. जानिए कुछ ऐसे कोर्सेस, जिनकी डिमांड पूरी तरह से खत्म होने वाली है.
Career Options after 12th Arts: आर्ट्स स्ट्रीम के इन कोर्स में न लें एडमिशन
इतिहास, राजनीति विज्ञान, समाजशास्त्र जैसे कोर्सेस पहले बहुत डिमांड में थे. आर्ट्स स्ट्रीम का नाम ही इन कोर्सेस से था. लेकिन बीते कुछ सालों में इन कोर्सेस में एडमिशन लेने वालों की संख्या में गिरावट दर्ज की गई है. ये थ्योरेटिकल विषय नॉलेज के हिसाब से सही हैं, लेकिन प्रैक्टिकल लाइफ यानी असलियत में इनकी डिमांड कम होती है. आर्ट्स स्ट्रीम के इन कोर्सेस में तभी एडमिशन लें, जब आपको इनमें फ्यूचर की संभावनाएं नजर आएं.
Career Options after 12th Science and Math: विज्ञान और गणित के कुछ कोर्स भी हो गए बेकार
विज्ञान और गणित फॉरएवर ट्रेंडिंग स्ट्रीम्स हैं. इनमें नौकरी के बहुत ऑप्शन होते हैं. लेकिन इन स्ट्रीम्स के कुछ कोर्सेस भी अब अपनी पहचान खोते जा रहे हैं. जियोलॉजी या मैथमेटिकल स्टैटिस्टिक्स जैसे कोर्सेस में नौकरी मिलना आसान नहीं होता है. इन क्षेत्रों में काम कर रहे लोग रोजगार के लिए परेशान हो रहे हैं. अगर आपके पास इन क्षेत्रों में विशेषज्ञता नहीं है या आगे इनमें रिसर्च नहीं करना चाहते हैं तो कॉलेज के किसी भी साल में इन्हें पढ़कर टाइम वेस्ट न करें.
Engineering Courses after 12th: इंजीनियरिंग के ये कोर्सेस हैं आउट ऑफ फोकस
इंजीनियरिंग में पढ़ाई और नौकरी, दोनों लिहाज से बहुत ऑप्शन हैं. लेकिन अब इस क्षेत्र में भी काफी डेवलपमेंट हो चुका है. टेक्नोलॉजी अपडेट होने से इंजीनियरिंग कोर्सेस में बदलाव देखा गया है. ऐसे में प्लास्टिक इंजीनियरिंग या पेपर टेक्नोलॉजी जैसे कुछ पुराने इंजीनियरिंग कोर्स की पढ़ाई करने के बाद नौकरी ढूंढना चैलेंजिंग साबित हो सकता है. प्रिंट टेक्नोलॉजी में भी प्रोफेशनल्स की डिमांड कम हो गई है. इससे बेहतर है कि आप एआई और एमएल में इंजीनियरिंग कर लें.
हर साल की तरह 2025 में भी लाखों 12वीं पास युवा मेडिकल कॉलेज में एडमिशन के लिए नीट यूजी परीक्षा देंगे (Medical College Admission). नीट यूजी परीक्षा मई, 2025 में होने की संभावना है. नेशनल टेस्टिंग एजेंसी की परीक्षाओं में सुधार के लिए उच्च स्तरीय कमेटी बनाई गई है. इसकी रिपोर्ट अक्टूबर के अंत तक जारी होगी. नीट यूजी 2025 परीक्षा पैटर्न में संभावित बदलावों को लेकर हाल ही में एक आरटीआई फाइल की गई थी. एनटीए ने आरटीआई के जवाब में कुछ जरूरी बातें बताई हैं.
आरटीआई में क्या पूछा गया?
आरटीआई कार्यकर्ता डॉ. विवेक पांडेय ने यह आरटीआई फाइल की थी (Dr. Vivek Pandey RTI). इसमें उन्होंने जुलाई और अगस्त 2024 में नीट 2025 परीक्षा पैटर्न में बदलावों से जुड़ी जानकारी मांगी थी. इसका जवाब देते हुए एनटीए ने कहा है कि फिलहाल, नीट यूजी 2025 परीक्षा पैटर्न में संभावित बदलावों पर विचार-विमर्श किया जा रहा है. बता दें कि आरटीआई में नीट 2024 और नीट 2025 परीक्षा के संबंध में आयोजित बैठकों की डिटेल्स भी मांगी गई थीं.
लाखों स्टूडेंट्स पर पड़ेगा फर्क
आरटीआई के जवाब में बताया गया कि एक उच्च स्तरीय जांच समिति सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर मामले को लेकर विचार कर रही है. इस समिति के अनुसार, नीट यूजी 2025 परीक्षा पैटर्न में बदलाव किया जाएगा (NEET UG 2025 Exam Pattern). आरटीआई के जवाब में आई प्रतिक्रिया से नीट यूजी उम्मीदवार चिंतित हैं. मेडिकल एंट्रेंस एग्जाम पैटर्न में जरा सा भी बदलाव लाखों स्टूडेंट्स को प्रभावित कर सकता है. इससे एग्जाम की तैयारी करने के पैटर्न पर भी फर्क पड़ सकता है.
स्मार्टफोन आज हर आदमी की जरूरत बन गई है. क्योंकि, वॉइस और वीडियो कॉलिंग के साथ-साथ इसमें इंटरनेट से जुड़ी तमाम सुविधाएं मिलती हैं. यूजर एक्सपीरियंस को बेहतर बनाने के लिए मोबाइल में कई ऐप इन्स्टॉल किए जाते हैं.
ऐप इन्स्टॉलेशन के दौरान यूजर्स कई बातों का ध्यान रखते हैं लेकिन, क्या आप जानते हैं कि ऐप को अनइन्स्टॉल करने के बाद भी सावधानी बरतनी जरूरी है, क्योंकि इनसे आपके मोबाइल डाटा का चोरी होने का डर बना रहता है.
ऐसा इसलिए क्योंकि, अनइन्स्टॉल करने पर मोबाइल ऐप, होम पेज से तो डिलीट हो जाते हैं लेकिन फोन की सेटिंग में छिपे होते हैं और हमारा डाटा जुटाते रहते हैं. ऐसे में आपकी गोपनीय जानकारी को लेकर खतरा बना रहता है. आइये आपको बताते हैं कि आखिर इस समस्या से कैसे निपटा जा सकता है.
कौन हैं हिंटन?
जेफ्री एवरेस्ट हिंटन एक ब्रिटिश-कनाडाई कंप्यूटर वैज्ञानिक और कॉग्नेनेटिव साइकोलॉजिस्ट हैं, जो आर्टिफिशियल न्यूरल नेटवर्क पर अपने काम के लिए सबसे ज़्यादा जाने जाते हैं. इसी के कारण उन्हें “AI के गॉडफ़ादर” की उपाधि मिली है. उन्हें नोबेल पुरस्कार एक ऐसी विधि के आविष्कार के लिए मिला जो डेटा में गुणों को अपने आप ही (ऑटोमैटिक रूप से) खोज सकती है, जिससे चित्रों में खास तत्वों की पहचान की जा सकती है.
एआई में PHD
हिंटन की शिक्षा ब्रिस्टल के क्लिफ्टन कॉलेज और किंग्स कॉलेज, कैम्ब्रिज, इंग्लैंड में हुई. प्राकृतिक विज्ञान, कला का इतिहास और दर्शन जैसे विभिन्न विषयों के बीच अपनी डिग्री को बार-बार बदलने के बाद, उन्होंने 1970 में प्रायोगिक मनोविज्ञान में आर्ट्स ग्रेजुएट की उपाधि हासिल की. उन्हें एडिनबर्ग विश्वविद्यालय से 1978 में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) में पीएचडी से सम्मानित किया गया.
ब्रिटेन से अमेरिका
अपनी पीएचडी के बाद, हिंटन ने ससेक्स विश्वविद्यालय में काम किया और ब्रिटेन में फंडिंग पाने में कठिनाई के बाद, कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय, सैन डिएगो और कार्नेगी मेलन विश्वविद्यालय में काम किया. वे यूनिवर्सिटी कॉलेज लंदन में गैट्सबी चैरिटेबल फाउंडेशन कम्प्यूटेशनल न्यूरोसाइंस यूनिट के संस्थापक निदेशक थे.
गूगल में काम और वहां से इस्तीफे का ऐलान
हिंटन ने 2013 से 2023 तक, अपना समय गूगल और टोरंटो विश्वविद्यालय के लिए काम करते हुए बिताया. मई 2023 में उन्होंने गूगल से अपने इस्तीफे का सार्वजनिक तौर पर ऐलान किया. इस्तीफा देते समय उन्होंने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) तकनीक के जोखिमों के बारे में चिंता जताई. उन्होंने टोरंटो में वेक्टर इंस्टीट्यूट की सह-स्थापना की और उसके मुख्य वैज्ञानिक सलाहकार बन गए. वे वर्तमान मेंटोरंटो विश्वविद्यालय में कंप्यूटर विज्ञान विभाग में प्रोफेसर हैं.
जीत चुके हैं कम्पूटिंग का नोबेल पुरस्कार
हिंटन को डीप लर्निंग पर उनके काम के लिए योशुआ बेंगियो और यान लेकन के साथ मिलकर 2018 ट्यूरिंग अवार्ड मिला, जिसे अक्सर “कंप्यूटिंग का नोबेल पुरस्कार” कहा जाता है. उन्हें कभी-कभी “डीप लर्निंग के गॉडफादर” भी कहा जाता है. नोबेल पुरस्कार पाने के बाद हिंटन ने कहा कि वे पुरस्कार पाकर “हैरान” हैं.
एआई का समाज पर असर
जब पत्रकारों ने उनके शोध से विकसित की गई तकनीक के संभावित महत्व के बारे में पूछा, उन्होंने कहा कि एआई का हमारे समाजों पर “बहुत बड़ा प्रभाव” होगा. उन्होंने घोषणा के बाद एक फ़ोन साक्षात्कार में कहा.”यह औद्योगिक क्रांति के बराबर होगा. लेकिन शारीरिक शक्ति में लोगों से आगे निकलने के बजाय, यह बौद्धिक क्षमता में लोगों से आगे निकलने वाला है. हमें इस बात का कोई अनुभव नहीं है कि हमसे ज़्यादा स्मार्ट चीजें होना कैसा होता है,”
भविष्यवाणी और चेतावनी
हिंटन ने भविष्यवाणी की कि यह तकनीक स्वास्थ्य सेवा जैसी चीज़ों में क्रांति लाएगी, जिससे “उत्पादकता में बहुत बड़ा सुधार होगा.” उन्होंने चेतावनी दी,”लेकिन हमें विशेष रूप से इन चीज़ों के नियंत्रण से बाहर हो जाने के ख़तरे के बारे में, कई संभावित बुरे परिणामों के बारे में भी चिंता करनी होगी. उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि AI “प्रोग्राम करना जानता है, इसलिए यह हमारे द्वारा लगाए गए प्रतिबंधों से बचने के तरीके खोज लेगा. यह लोगों को अपने हिसाब से काम करने के लिए प्रेरित करने के तरीके खोज लेगा “
एआई के अग्रणी होने के साथ-साथ, हिंटन ने तकनीक के बारे में सावधानी बरतने का भी आग्रह किया है. मई 2023 में, उन्होंने इस बात की चिंता करने के बाद कि यह कितना स्मार्ट होता जा रहा है, Google में अपनी भूमिका छोड़ दी. और “व्हिसिल ब्लोअर के रूप में मशहूर हो गए थे.”
]]>RRB Exam Date 2024: कब होंगी परीक्षाएं?
रेलवे भर्ती बोर्ड की ओर से एएलपी (ALP), आरपीएफ एसआई (RPF SI), तकनीशियन, जेई (JE)समेत कई पदों पर होने वाली भर्तियों के लिए परीक्षाएं कराई जाएंगी. तय किए गए परीक्षा कार्यक्रम के मुताबिक आरआरबी सहायक लोको पायलट भर्ती परीक्षा 25 से 29 नवंबर के बीच आयोजित की जाएगी. इस परीक्षा के बारे में उम्मीदवारों को इसकी जानकारी 15 नवंबर को दी जाएगी कि उनकी परीक्षा किस शहर में होगी. बता दें कि इन परीक्षाओं के लिए एडमिट कार्ड 22 नवंबर को जारी कर दिया जाएगा.
RRB ALP Exam Date 2024: एएलपी भर्ती परीक्षा का कार्यक्रम
आरआरबी सहायक लोको पायलट भर्ती परीक्षा 25 से 29 नवंबर के बीच आयोजित की जाएगी. उम्मीदवारों को इस बात की जानकारी 15 नवंबर को दे दी जाएगी कि उनकी परीक्षा किस शहर में होने वाली है. इसके लिए एडमिट कार्ड 22 नवंबर को जारी कर दिया जाएगा. इसी तरह आरपीएफ एसआई की परीक्षा दो से पांच दिसंबर के बीच होगी, जिसका एडमिट कार्ड 29 नवंबर को जारी होगा और एग्जाम सिटी स्लिप डेट 22 नवंबर को जारी होगा. टेक्निशियन की परीक्षा 16 से 26 दिसंबर के बीच होगी. एडमिट कार्ड 13 दिसंबर को जारी होगा. एग्जाम सिटी स्लिप 6 दिसंबर को आएगी. जेई की परीक्षा 6 से 13 दिसंबर तक होगी. एडमिट कार्ड 3 दिसंबर को जारी होगा. अभी पैरामेडिकल और एनटीपीसी परीक्षा की डेट घोषित नहीं हुई है.
एसबीआई के चेयरमैन सी एस शेट्टी ने पीटीआई-भाषा से बातचीत में कहा, “हम अपने कार्यबल को प्रौद्योगिकी पक्ष के साथ-साथ सामान्य बैंकिंग पक्ष पर भी मजबूत कर रहे हैं. हमने हाल ही में प्रवेश स्तर और थोड़े उच्चस्तर पर लगभग 1,500 प्रौद्योगिकी लोगों की भर्ती की घोषणा की है.”
इन पदों पर भी भर्ती की योजना
उन्होंने कहा, “हमारी टेक्नोलॉजी रिक्रूटमेंट, डेटा साइंटिस्ट, डेटा आर्किटेक्ट्स, नेटवर्क ऑपरेटर्स आदि जैसी विशेष नौकरियों पर भी है. हम उन्हें प्रौद्योगिकी पक्ष में विभिन्न प्रकार की नौकरियों के लिए भर्ती कर रहे हैं… इसलिए, कुल मिलाकर, हमारी वर्तमान वर्ष की आवश्यकता लगभग 8,000 से 10,000 लोगों की होगी। लोगों को विशेष और सामान्य दोनों पक्षों में जोड़ा जाएगा.”
मार्च, 2024 तक बैंक के कुल कर्मचारियों की संख्या 2,32,296 थी. इसमें से पिछले वित्त वर्ष के अंत में 1,10,116 अधिकारी बैंक में कार्यरत थे. क्षमता निर्माण के बारे में पूछे जाने पर शेट्टी ने कहा कि यह एक सतत प्रक्रिया है और बैंक ग्राहकों की उभरती जरूरतों को पूरा करने के लिए मौजूदा कर्मचारियों को पुनः प्रशिक्षित और उन्नत बनाता है.
जरूरतों के हिसाब से तकनीक पर काम करना होगा
उन्होंने कहा, “ग्राहकों की अपेक्षाएं बदल रही हैं, तकनीक बदल रही है, डिजिटलीकरण को व्यापक रूप से अपनाया जा रहा है इसलिए, हम सभी स्तर पर अपने कर्मचारियों को लगातार नया कौशल प्रदान कर रहे हैं.” उन्होंने कहा कि बैंक ग्राहकों की बढ़ती जरूरतों को पूरा करने और बेहतर बैंकिंग अनुभव प्रदान करने के लिए कुछ विशिष्ट क्षेत्रों में विशेष कौशल विकास प्रदान करता है.
जहां तक नेटवर्क विस्तार की बात है, शेट्टी ने कहा कि एसबीआई चालू वित्त वर्ष में देशभर में 600 शाखाएं खोलने की योजना बना रहा है. मार्च, 2024 तक एसबीआई के पास देशभर में 22,542 शाखाओं का नेटवर्क है.
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