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Sun, 19 Jul 2026 00:54:49 +0000en-US
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1 https://wordpress.org/?v=7.0.2सर्वदलीय बैठक में हाईवोल्टेज ड्रामा; TMC के बागी सांसदों को बुलाने पर पहले बहिष्कार किया, फिर मीटिंग के लिए लौटे
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https://chhattisgarh24x7.in/?p=34755#respondSun, 19 Jul 2026 00:54:49 +0000https://chhattisgarh24x7.in/?p=34755संसद के मानसून सत्र से पहले रविवार को बुलाई गई सर्वदलीय बैठक का विपक्ष ने शुरू में बहिष्कार कर दिया. हालांकि, थोड़ी देर में वह फिर से बैठक में शामिल होने के लिए लौट आए. बताया जा रहा है कि विपक्षी दल तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के बागी सांसदों को बुलाने से नाराज थे.
टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा ने कहा, “आज कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, डीएमके, झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो), आम आदमी पार्टी (आप), नेशनल कॉन्फ्रेंस, लेफ्ट पार्टियां और शिवसेना (UBT) समेत पूरा विपक्ष सर्वदलीय बैठक से विरोध स्वरूप बाहर निकल आया. ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि तथाकथित NCPI (जो एक गैर-मान्यता प्राप्त पार्टी है) के मामले में, टेबल ऑफिस द्वारा दी गई सूची में ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस की संख्या 28 सदस्य दिखाई गई है. इन तथाकथित बागी 20 सांसदों के विलय को स्पीकर ने मंजूरी नहीं दी है.”
उन्होंने आगे कहा, “अयोग्यता से जुड़ी 20 याचिकाएं अभी भी लंबित हैं. 91वें संशोधन के बाद, किसी अलग गुट के लिए कोई गुंजाइश नहीं है. तो संसदीय कार्य मंत्री ने किन आधारों पर इन 20 बागी सांसदों को निमंत्रण दिया और वे इस बैठक में कैसे शामिल हो रहे हैं? हमने अपना कड़ा विरोध दर्ज कराया है और विरोध के प्रतीक के तौर पर बैठक से बाहर निकल आए हैं. और हम अपनी सभी विपक्षी पार्टियों का धन्यवाद करते हैं.”
]]>https://chhattisgarh24x7.in/?feed=rss2&p=347550अब मानसून काटेगा गदर! 85KM की रफ्तार से आंधी-तूफान; 15 राज्यों में मूसलाधार बारिश पर IMD का अलर्ट
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https://chhattisgarh24x7.in/?p=34612#respondThu, 02 Jul 2026 19:27:18 +0000https://mr-bharat.com/?p=34612देशभर में मानसून अब पूरी ताकत के साथ आ चुका है. देश की राजधानी दिल्ली से लेकर मायानगरी मुंबई तक मूसलाधार बारिश शुरू हो गई है. जून के आखिरी दिनों तक जिन इलाकों में लोग गर्मी और उमस से बेहाल थे, वहां अब बादलों ने डेरा डाल दिया है. मौसम विभाग (IMD) का ताजा पूर्वानुमान बताता है कि अगले कुछ दिनों में देश के कई हिस्सों में भारी से बहुत भारी बारिश, 80 से 85 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं, बिजली और कुछ इलाकों में ओलावृष्टि की आशंका है. ऐसे में शहरों में जलभराव, पहाड़ी राज्यों में भूस्खलन, नदियों का जलस्तर बढ़ने और पेड़ गिरने जैसी घटनाओं का खतरा भी बढ़ गया है. IMD का कहना है कि इस बार एक साथ सक्रिय कई वेदर सिस्टम मानसून को अतिरिक्त मजबूती दे रहे हैं. इसलिए यह सामान्य बारिश नहीं, बल्कि कई राज्यों में हाई इम्पैक्ट वेदर इवेंट साबित हो सकती है.
दिल्ली से लेकर बिहार, उत्तर प्रदेश, झारखंड, पश्चिम बंगाल, राजस्थान, मध्य प्रदेश, पंजाब, हरियाणा, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, महाराष्ट्र और दक्षिण भारत के कई राज्यों में मौसम तेजी से करवट ले रहा है. बंगाल की खाड़ी में बना कम दबाव का क्षेत्र, उत्तर ओडिशा तट के पास सक्रिय साइक्लोनिक सर्कुलेशन, दक्षिण गुजरात से कर्नाटक तक बनी ऑफ-शोर ट्रफ और पश्चिमी विक्षोभ मिलकर मानसून को लगातार मजबूत बना रहे हैं. मौसम विभाग का कहना है कि अगले दो से तीन दिनों में यह सिस्टम और सक्रिय होगा, जिससे उत्तर और पूर्वी भारत में बारिश का दायरा और बढ़ जाएगा. कई इलाकों में तापमान 2 से 5 डिग्री सेल्सियस तक गिर सकता है, लेकिन इसके साथ तेज हवाओं और बिजली गिरने का खतरा भी रहेगा. इसलिए राहत के साथ सतर्कता भी जरूरी होगी.
देशभर में मानसून की उत्तरी सीमा अब दिल्ली, पूरे उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश के अधिकांश हिस्सों, हरियाणा, पंजाब और राजस्थान के कई इलाकों तक पहुंच चुकी है. मौसम विभाग का अनुमान है कि अगले दो-तीन दिनों में मानसून उत्तर-पश्चिम भारत के बाकी हिस्सों में भी तेजी से आगे बढ़ेगा. इसका असर खेती-किसानी पर सकारात्मक पड़ सकता है, लेकिन जिन शहरों में ड्रेनेज व्यवस्था कमजोर है वहां जलभराव और ट्रैफिक जाम जैसी समस्याएं बढ़ सकती हैं.
इस बार मौसम वैज्ञानिकों की सबसे बड़ी चिंता यह है कि कई वेदर सिस्टम एक साथ सक्रिय हैं. उत्तर-पश्चिम बंगाल की खाड़ी में बना लो-प्रेशर एरिया लगातार मजबूत हो रहा है. इसके साथ मानसूनी ट्रफ, साइक्लोनिक सर्कुलेशन, ऑफ-शोर ट्रफ और पश्चिमी विक्षोभ भी सक्रिय हैं. इन सभी के संयुक्त प्रभाव से कई राज्यों में एक ही समय पर तेज बारिश, आंधी और बिजली गिरने की घटनाएं देखने को मिल सकती हैं. यही वजह है कि मौसम विभाग ने लोगों से गैर-जरूरी यात्रा टालने और खराब मौसम के दौरान सुरक्षित स्थानों पर रहने की सलाह दी है.
]]>https://chhattisgarh24x7.in/?feed=rss2&p=346120अराघची-गालिबाफ का होने वाला था कत्ल, इजरायल ने भेज दिए थे फाइटर जेट्स, अमेरिका ने क्यों और कैसे बचाया
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https://chhattisgarh24x7.in/?p=34610#respondThu, 02 Jul 2026 19:21:52 +0000https://mr-bharat.com/?p=34610अमेरिका-ईरान के बीच एक बार फिर जंग छिड़ सकती थी. शांति वार्ता की कोशिशों को फिर झटका लग सकता था, अगर इजरायल अपने मंसूबों में कामयाब हो जाता. अमेरिका संग बातचीत में शामिल ईरान के टॉप लीडर को मारने का इजरायल ने पूरा प्लान बना लिया था. मगर अमेरिका को इस बात की भनक लग गई. तभी अमेरिका ने अपने चैनल एक्टिवेट किए और इजरायल को ऐसा करने से रोका. तब जाकर ईरान के दो टॉप लीडर की जान बची. जी हां, अमेरिका को इस साल की शुरुआत में डर था कि इजरायल, ईरान के दो बड़े नेताओं यानी गालिबाफ और अराघची को मार डालेगा. ये आशंका उस समय जताई गई, जब अमेरिका और ईरान के बीच अप्रत्यक्ष शांति वार्ता चल रही थी. इस आशंका के बारे में ईरान को आगाह करने के लिए उन्होंने क्षेत्रीय देशों से मदद मांगी. न्यूयॉर्क टाइम्स की एक रिपोर्ट में यह दावा किया गया है.
न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट में मौजूदा और पूर्व अमेरिकी अधिकारियों का हवाला दिया गया है. रिपोर्ट की मानें तो अमेरिका का डर अप्रैल में शुरू हुई युद्धविराम वार्ता के दौरान ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची और संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाघेरी गालिबाफ को लेकर थीं. यानी इजरायल के टारगेट पर अब्बास अराघची और बाघेरी गालिबाफ थे. ये दोनों वो नेता हैं जो अमेरिका संग बातचीत में ईरान की ओर से अहम भूमिका निभा रहे हैं. या यूं कहिए कि ईरान की ओर से यही दोनों शांति वार्ता के नेगोशिएटर हैं.
अमेरिका को किस बात का डर?
रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी अधिकारियों का मानना था कि बातचीत के दौरान इन दो नेताओं पर हत्या की किसी भी कोशिश से बातचीत पटरी से उतर सकती है और फिर से लड़ाई शुरू हो सकती है. इसमें कहा गया है कि वाशिंगटन ने क्षेत्र के अन्य देशों से ईरान को इस संभावना के बारे में सतर्क करने को कहा कि इजरायल इन दो नेताओं को निशाना बना सकता है.
]]>https://chhattisgarh24x7.in/?feed=rss2&p=346100डोनाल्ड ट्रंप हुए और ताकतवर, सुप्रीम कोर्ट ने बढ़ा दी शक्ति, अब उनका फैसला ही ब्रह्मा की लकीर
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https://chhattisgarh24x7.in/?p=34520#respondMon, 29 Jun 2026 19:03:40 +0000https://mr-bharat.com/?p=34520अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को सुप्रीम कोर्ट ने बड़ी ताकत दी है. अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रपति की शक्तियों का दायरा काफी बढ़ा दिया है. सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा स्वतंत्र फेडरल एजेंसियो के प्रमुखों को हटाए जाने के फैसले को सही ठहराया है. सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को राष्ट्रपति के अधिकारों का दायरा बढ़ाते हुए कहा कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अब ज्यादातर स्वतंत्र संघीय एजेंसियों के प्रमुखों को अपनी इच्छा से पद से हटा सकते हैं. हालांकि, इस फैसले में फेडरल रिजर्व यानी अमेरिकी केंद्रीय बैंक को इससे अलग रखा गया है.
अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के जजों अपने फैसले में यह भी कहा कि फेडरल रिजर्व की गवर्नर लिसा कुक (Lisa Cook) फिलहाल अपने पद पर बनी रहेंगी. वह ट्रंप प्रशासन की ओर से उन्हें हटाने की कोशिश के खिलाफ कानूनी लड़ाई लड़ रही हैं. डोनाल्ड ट्रंप ने उन पर मॉर्गेज फ्रॉड के आरोप लगाए हैं. हालांकि, कुक ने इन आरोपों से इनकार किया है.
]]>https://chhattisgarh24x7.in/?feed=rss2&p=345200अमेरिका ने लगातार दूसरे दिन किया ईरान पर हमला, ट्रंप की धमकी- धरती से मिटा देंगे वजूद
https://chhattisgarh24x7.in/?p=34494
https://chhattisgarh24x7.in/?p=34494#respondSun, 28 Jun 2026 08:33:20 +0000https://mr-bharat.com/?p=34494अमेरिका और ईरान के बीच युद्धविराम के बाद की शांति एक हफ्ते भी पूरी तरह टिक नहीं सकी. अमेरिका ने शनिवार को लगातार दूसरे दिन ईरान के कई सैन्य ठिकानों पर हवाई हमले किए. इसके बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को बेहद आक्रामक चेतावनी दी है. उन्होंने कहा कि अगर ईरान अपनी हरकतों से बाज नहीं आया तो अमेरिका सैन्य अभियान को पूरी तरह अंजाम देगा और ऐसी स्थिति में ‘इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान’ का अस्तित्व ही खत्म हो जाएगा. वहीं दूसरी ओर कुवैत ने कहा है कि उसके ऊपर भी मिसाइल और ड्रोन से हमले हो रहे हैं, जिन्हें उनका एयर डिफेंस रोक रहा है.
अमेरिका ने फिर क्यों किया हमला?
अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के मुताबिक यह कार्रवाई ईरान की ओर से युद्धविराम समझौते के लगातार उल्लंघन के जवाब में की गई. अमेरिका का दावा है कि गुरुवार को ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य के पास मालवाहक जहाज एवर लवली पर हमला किया था. इसके जवाब में शुक्रवार को अमेरिकी सेना ने ईरानी सैन्य ठिकानों पर कार्रवाई की थी. CENTCOM के अनुसार, इसके बावजूद शनिवार सुबह एक अन्य तेल टैंकर एम/टी किकू (M/T Kiku) पर ड्रोन हमला किया. इसके बाद राष्ट्रपति ट्रंप के निर्देश पर अमेरिकी सेना ने फिर से ईरानी ठिकानों को निशाना बनाया.
किन ठिकानों पर बरसे अमेरिकी बम?
अमेरिकी सेना के अनुसार लड़ाकू विमानों ने ईरान के मिसाइल और ड्रोन स्टोरेज सेंटर, रडार साइट, सैन्य निगरानी केंद्र, संचार प्रणाली और समुद्र में बारूदी सुरंग बिछाने से जुड़े ठिकानों पर हमले किए. अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि इन हमलों का उद्देश्य ईरान की सैन्य क्षमता को कमजोर करना था.
]]>https://chhattisgarh24x7.in/?feed=rss2&p=344940भारत के लिए ईरान का बड़ा ऑफर! रियायती कच्चा तेल देने की तैयारी, 60 दिन की छूट बना मौका
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https://chhattisgarh24x7.in/?p=34468#respondSat, 27 Jun 2026 09:52:12 +0000https://mr-bharat.com/?p=34468अमेरिका की ओर से ईरान को 60 दिनों की अस्थायी प्रतिबंध राहत मिलने के बाद तेहरान ने अपने तेल निर्यात को बढ़ाने की कोशिशें तेज कर दी हैं. इसी कड़ी में भारतीय रिफाइनरियों को रियायती कीमतों पर ईरानी कच्चा तेल खरीदने के प्रस्ताव भेजे गए हैं. जानकारी के अनुसार, ईरान चाहता है कि इस सीमित समय का अधिकतम फायदा उठाकर वह अपने पुराने ग्राहकों के साथ व्यापार फिर से बढ़ाए. भारत, जो कभी ईरान का प्रमुख तेल खरीदार रहा है, अब एक बार फिर उसकी प्राथमिकता में शामिल दिखाई दे रहा है. इससे दोनों देशों के ऊर्जा सहयोग को नई दिशा मिलने की संभावना जताई जा रही है.
NIOC और कई ट्रेडर्स ने भारतीय कंपनियों से किया संपर्क
रिपोर्ट के अनुसार, भारत की रिफाइनरियों से सीधे ईरान की सरकारी तेल कंपनी नेशनल ईरानियन ऑयल कंपनी (NIOC) ने संपर्क किया है. इसके अलावा सिंगापुर और दुबई की कई छोटी और मध्यम ट्रेडिंग कंपनियां भी भारतीय कंपनियों को ईरानी तेल खरीदने का प्रस्ताव दे रही हैं. सूत्रों का कहना है कि कई ट्रेडर्स के पास NIOC की ओर से आवंटित तेल उपलब्ध है और वे जल्द सौदे करना चाहते हैं. हालांकि भारतीय रिफाइनरियों की प्राथमिकता फिलहाल सीधे NIOC के साथ बातचीत करने की बताई जा रही है. इस दौरान ईरान के पेट्रोलियम मंत्री मोहसिन पाकनेजाद की भारत यात्रा के दौरान कच्चे तेल और एलपीजी की संभावित आपूर्ति पर भी चर्चा हुई.
फिलहाल सीमित है खरीद की गुंजाइश
हालांकि ईरान की ओर से प्रस्ताव मिलने के बावजूद भारतीय कंपनियों के लिए तुरंत बड़ी मात्रा में तेल खरीदना आसान नहीं होगा. इसकी वजह यह है कि अधिकांश रिफाइनरियां अगस्त तक की अपनी जरूरत के अनुसार पहले ही दूसरे देशों से आपूर्ति के समझौते कर चुकी हैं. इसके अलावा मध्य पूर्व के अन्य तेल आपूर्तिकर्ता भी चाहते हैं कि भारतीय कंपनियां अपने वार्षिक अनुबंधों का पालन करें. ऐसे में ईरानी तेल की खरीद शुरू होने में कुछ समय लग सकता है. विशेषज्ञों का मानना है कि भुगतान व्यवस्था और बैंकिंग चैनलों को लेकर स्पष्टता आने के बाद ही बड़े स्तर पर व्यापार संभव होगा.
]]>https://chhattisgarh24x7.in/?feed=rss2&p=344680ईरान ने बना लिया न्यूक्लियर से भी खतरनाक ‘हथियार’, AI का भी बाप है BI! अमेरिका से आगे निकला दुश्मन
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https://chhattisgarh24x7.in/?p=34466#respondSat, 27 Jun 2026 09:49:52 +0000https://mr-bharat.com/?p=34466अमेरिका, ईरान के न्यूक्लियर हथियार के पीछे पड़ा है. इस हथियार की वजह से ही मिडिल ईस्ट के देशों ने मिसाइल-ड्रोन अटैक झेली हैं. हालांकि, अब इसी पर समझौता हो गया है और जंग खत्म होने की कगार पर है लेकिन इस बीच एक ऐसी खबर आई है, जो अमेरिका के लिए किसी झटके से कम नहीं होगी. ईरान ने कुछ ऐसा तैयार कर लिया है, जो गलत हाथों में पहुंच जाए तो न्यूक्लियर हथियार से भी खतरनाक साबित हो सकता है. ईरान का ये नया आविष्कार ‘आर्टिफिशियल दिमाग’ है, जो AI नहीं बल्कि BI है, यानी ‘बायोलॉजिकल इंटेलिजेंस’. ये कोई साधारण कंप्यूटर प्रोग्राम नहीं है, बल्कि जिंदा इंसानी न्यूरॉन्स से बना एक ऐसा नेटवर्क है जो खुद फैसले ले सकता है और इंसानी दिमाग की तरह ही नई चीजें सीख सकता है.
ईरान ने बना लिया AI का बाप!
ये कोई साधारण कंप्यूटर प्रोग्राम नहीं है, बल्कि जिंदा इंसानी न्यूरॉन्स से बना एक ऐसा नेटवर्क है जो खुद फैसले ले सकता है और इंसानी दिमाग की तरह ही नई चीजें सीख सकता है. ईरान के वैज्ञानिकों ने इसे लैब के अंदर इंसानी कोशिकाओं का इस्तेमाल करके तैयार किया है, जो देखने में एक छोटे इंसानी दिमाग की तरह है. इसके साथ ईरान ने ‘ऑर्गेनॉइड इंटेलिजेंस’ की वैश्विक रेस में एंट्री मारकर अमेरिका और पश्चिमी देशों को सीधे चुनौती दे दी है, जिससे अब पूरी दुनिया का पावर बैलेंस बदलने वाला है.
क्या है ये जिंदा दिमाग का खेल?
ईरान की ब्रेन रिसर्च और टेक्नोलॉजी टीम के चीफ अताउल्लाह पोर-अब्बासी ने मीडिया को एक बेहद चौंकाने वाला इंटरव्यू दिया है. उन्होंने बताया कि ईरान ने शरीर के बाहर नसों की कोशिकाओं को न सिर्फ जीवित रखने की बल्कि उन्हें विकसित करने की पूरी तकनीक अपने दम पर हासिल कर ली है. ये जिंदा कोशिकाएं लैब के अंदर ठीक उसी तरह आपस में संपर्क बना रही हैं और अपना नेटवर्क तैयार कर रही हैं, जैसे हमारे और आपके सिर के अंदर मौजूद असली दिमाग में होता है. सबसे ज्यादा डराने वाली बात ये है कि इस नेटवर्क के पास खुद से सीखने की अद्भुत क्षमता है. यानी ये दिमाग बिना किसी मानवीय कोडिंग के, खुद के अनुभवों से सीख रहा है
]]>https://chhattisgarh24x7.in/?feed=rss2&p=344660खत्म हो जाएगा OPEC! UAE के बाद अब इराक छोड़ेगा? बादशाहत जाने से डर से कांप गया सऊदी अरब
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https://chhattisgarh24x7.in/?p=34406#respondThu, 25 Jun 2026 10:52:12 +0000https://mr-bharat.com/?p=34406अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल सप्लाई पर कब्जा रखने वाले सबसे बड़े सिंडिकेट ‘ओपेक’ (OPEC) में जंग छिड़ गई है. संयुक्त अरब अमीरात (UAE) जैसी महाशक्ति के ओपेक छोड़ने के महज दो महीने बाद, अब संगठन के दूसरे सबसे बड़े तेल उत्पादक देश इराक ने खुलेआम बगावत का बिगुल फूंक दिया है. इराक ने ओपेक को बाय-बाय करने की धमकी दे डाली है. अगर इराक इस संगठन से बाहर निकलता है तो ये सऊदी अरब के राज और पूरे ओपेक के लिए एक ऐसा आत्मघाती झटका होगा जिससे दुनिया भर में कच्चे तेल की कीमतें आसमान छूने लगेंगी और पूरी ग्लोबल इकोनॉमी चरमरा जाएगी.
सऊदी अरब इस बात को हल्के में न ले: इराक की सीधी चेतावनी
जिस ओपेक संगठन की स्थापना साल 1960 में खुद इराक की राजधानी बगदाद में हुई थी, आज वही इराक इसे ठुकराने कगार पर खड़ा है. संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के ओपेक छोड़ने के महज दो महीने बाद इराक के इस कदम ने सऊदी किंगडम के होश उड़ा दिए हैं. इराक के तेल मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बेहद आक्रामक लहजे में सऊदी अरब को अल्टीमेटम दिया है.
सऊदी को सीधी धमकी: ‘सऊदी अरब और ओपेक के अन्य सहयोगियों को इराक के कोटे वाले मामले को बेहद गंभीरता से लेना चाहिए. अगर ऐसा नहीं किया गया, तो इराक अपने सभी विकल्पों यानी संगठन छोड़ने पर विचार करने के लिए मजबूर हो जाएगा’.
युद्ध की मार और मजबूरी: इराक अपनी कमाई के लिए पूरी तरह तेल पर निर्भर है लेकिन ईरान युद्ध के चलते उसका निर्यात बुरी तरह प्रभावित हुआ है. इराक का उत्पादन जो फरवरी में 42 लाख बैरल प्रति दिन था, वो मई में घटकर महज 14.8 लाख बैरल प्रति दिन रह गया है.
]]>https://chhattisgarh24x7.in/?feed=rss2&p=344060बाप रे, ये क्या हुआ! SpaceX के शेयरों को लगी किसकी नजर? तीन दिन में 600 अरब डॉलर की वैल्यू घटी, जानें वजह
https://chhattisgarh24x7.in/?p=34322
https://chhattisgarh24x7.in/?p=34322#respondMon, 22 Jun 2026 21:36:32 +0000https://mr-bharat.com/?p=34322एलन मस्क की दिग्गज कंपनी स्पेसएक्स के शेयरों में लगातार तीसरे कारोबारी सेशन में गिरावट देखने को मिली. कंपनी के शेयर सोमवार को करीब 16 फीसदी टूटकर 154.60 डॉलर पर बंद हुए. पिछले तीन दिनों में शेयर लगभग 23 फीसदी गिर चुका है, जिससे कंपनी के बाजार मूल्य में करीब 600 अरब डॉलर की कमी आई है.
हाल ही में स्पेसएक्स ने एआई स्टार्टअप रिफ्लेक्शन एआई के साथ एक अहम समझौता भी किया है. इस साझेदारी के तहत कंपनी अपनी कंप्यूटिंग कैपेसिटी भी उपलब्ध कराएगी. इससे पहले एलन मस्क की एआई कंपनी xAI के अधिग्रहण के बाद स्पेसएक्स का कारोबार अंतरिक्ष, सैटेलाइट और एआई जैसे सेक्टर्स तक और मजबूत हो गया है. निवेशकों को उम्मीद है कि कंपनी भविष्य में नई तकनीकों के जरिए अपने कारोबार का विस्तार कर सकती है.
]]>https://chhattisgarh24x7.in/?feed=rss2&p=343220ट्रंप ने ईरान से कैसे की तेल चोरी? ओमान-UAE को घसीटा, US Apache यूं ही शहीद नहीं हुआ!
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https://chhattisgarh24x7.in/?p=34201#respondTue, 16 Jun 2026 08:35:48 +0000https://mr-bharat.com/?p=34201होर्मुज जलडमरूमध्य की नाकेबंदी के बीच ट्रंप प्रशासन ने खाड़ी देशों के तेल को सुरक्षित निकालने के लिए खुद ईरान की ही पुरानी और शातिर ‘स्मगलिंग तकनीक’ को चुराकर एक बेहद खुफिया ‘डार्क फ्लीट’ ऑपरेशन चलाया. अमेरिकी सेना द्वारा ओमान के सोहार और यूएई के फुजैराह तट पर चलाए जा रहे इस गुप्त ‘शिप-टू-शिप’ तेल ट्रांसफर नेटवर्क में अब तक 92 से ज्यादा जहाज शामिल हो चुके हैं, जिनके जरिए करीब 9 करोड़ बैरल कच्चा तेल निकाला जा चुका है. इसी ऑपरेशन में Apache शहीद हुआ था.
ईरान के साथ भले ही ट्रंप ने जंग खत्म करने की शुरुआत कर दी है लेकिन उनके बस में जितना डैमेज था, वो ईरान में कर चुके हैं. मिसाइलें-ड्रोन की तबाही तो दुनिया ने देखी लेकिन ट्रंप ने ईरानी तेल को भी नहीं छोड़ा. ट्रंप ने होर्मुज नाकेबंदी की आड़ में छुपकर ईरानी तेल चोरी किया है. ये बात उन्होंने कुछ दिन पहले ही कबूली है लेकिन अब सामने आया है कि ट्रंप ने इस चोरी को अंजाम आखिरी कैसे दिया है? ट्रंप की इसी चालबाजी की नतीजा है कि उनका अपाचे हेलीपॉप्टर शहीद हो गया. ट्रंप ने इस तेल चोरी को अंजाम देने के लिए ईरान की ही पुरानी और शातिर ‘स्मगलिंग तकनीक’ का इस्तेमाल किया, जिससे ईरान सालों तक अमेरिकी प्रतिबंधों को ठेंगा दिखाता आया था.