अब आप सोच रहे होंगे कि आखिर ये जगह कहां है और इसे स्वर्ग का दरवाजा क्यों कहा जाता है? ऐसे में बता दें कि इस जगह का नाम तियानमेन माउंटेन है, जो चीन में स्थित है. यह चीन का प्रमुख टूरिस्ट डेस्टिनेशन भी है. दरअसल, तियानमेन माउंटेन के ऊपरी छोर पर एक गुफा है, जो जमीन से 1518 मीटर की ऊंचाई (लगभग 5 हजार फीट) पर है. इसे पहाड़ पर मौजूद दुनिया की सबसे ऊंची गुफा माना जाता है. इतना ही नहीं, इस गुफा को स्वर्ग का दरवाजा भी कहते हैं. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, तकरीबन 253 ईस्वी के आसपास इस पहाड़ का कुछ हिस्सा टूट गया, जिससे इस गुफा का निर्माण हुआ था. आपका बता दें कि इसकी लंबाई 196 फीट, ऊंचाई 431 फीट तथा चौड़ाई 187 फीट है. चूकि यह ज्यादा ऊंचाई पर होने के कारण हमेशा बादलों से घिरा रहता है, संभवत: इस कारण से लोग इसे स्वर्ग का दरवाजा कहने लगे.
सालों पहले यहां तक पहुंचना बहुत मुश्किल था. कठिन रास्तों से होकर जाने में लोगों की हालत खराब हो जाती थी. लेकिन अब टूरिस्ट यहां तक सड़क मार्ग और केबल का उपयोग कर पहुंच सकते हैं. आपको जानकर हैरानी होगी, लेकिन बता दें कि दुनिया का सबसे लंबा (24459 फीट) और ऊंचाई पर बने इस केबल वे का नाम गिनीज बुक्स ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में भी दर्ज है. लेकिन सड़क मार्ग और केबल वे से उतरने के बाद लोगों को गुफा तक पहुंचने के लिए 999 सीढ़ियां चढ़नी पड़ती हैं, जो आसान बात नहीं है. चीन की ताओ फिलॉसफी के मुताबिक, ये 999 स्टेप्स सुप्रीम नंबर है और सम्राट का प्रतीक है. बादलों के बीच इस गुफा को देखना किसी अजूबे से कम नहीं लगता है.
खजाने से भरी है ये पहाड़ी?
इस पहाड़ी को लेकर अक्सर अलग-अलग दावे किए जाते हैं. एक तरफ जहां ये स्वर्ग के दरवाजे की वजह से दुनियाभर में पॉपुलर है. वहीं, दूसरी ओर लोग ऐसा दावा करते हैं कि इन पहाड़ियों में कई खजाने भी छुपे हुए हैं. इन खजानों को ढूंढने की कोशिश भी कई लोग कर चुके हैं, लेकिन हमेशा उन्हें असफलता ही मिली. इसके अलावा ऐसा कहा जाता है कि तियानमेन माउंटेन कभी अद्भुत वाटरफॉल के लिए भी जाना जाता था. ये बात 20वीं शताब्दी की है. उस दौरान सिर्फ 15 मिनट के लिए ये झरना दिखाई देता था, इसके बाद वो गायब हो जाता था. हालांकि, धीरे-धीरे ये झरना पूरी तरह विलुप्त हो गया और अब इसका कोई नामो-निशान मौजूद नहीं है. वैसे आपको बता दें कि चीन ही नहीं, बल्कि भारत में भी एक ऐसी गुफा है, जिसमें 35000 सीढ़ियां हैं. ये गुफा राजस्थान के दौसा में आभानेरी कस्बा स्थित चांद बावड़ी में है. इस गुफे की लंबाई लगभग 17 km है, जो पास ही स्थित गांव भांडारेज में निकलती है.
करनाल के सेक्टर-12 में विनय गोयल एंड एसोसिएट्स नाम से दफ्तर है. फर्म के पार्टनर विनय गोयल ने बताया कि उन्होंने सोमवार शाम को 5:30 बजे ऑफिस बंद कर दिया था और वहां से चले गए थे. लेकिन मंगलवार सुबह 9:30 बजे उनके ऑफिस ब्वॉय संजय कुमार ने दफ्तर खोलने की कोशिश की, तो उसे दफ्तर के मेन गेट के दोनों दरवाजे टूटे हुए मिले. दफ्तर में मेन गेट के ताले टूटे होने की सूचना के बाद विनय गोयल दफ्तर पहुंचे और जांच की तो पाया कि ऑफिस से लगभग 30-31 लाख रुप. चोरी हुए है. यह पैसे 8-10 क्लाइंट्स के थे, जिनका इनकम टैक्स और जीएसटी जमा करना था. चोरों ने घटना को बहुत ही साफ तरीके से अंजाम दिया और जांच के दौरान कोई ठोस सुराग नहीं मिला.
विनय गोयल ने इस घटना में मौजूदा या पूर्व स्टाफ के शामिल होने का शक जताया है. उन्होंने संदेह जताया है कि किसी बाहरी या अज्ञात व्यक्ति की मिलीभगत से यह चोरी की घटना हुई है. पीड़ित ने मामले की शिकायत पुलिस को की है. सिविल लाइन थाना के जांच अधिकारी रणजीत सिंह ने बताया कि विनय गोयल की शिकायत के आधार पर अज्ञात चोरों के खिलाफ विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है.
विनय गोयल ने इस घटना में मौजूदा या पूर्व स्टाफ के शामिल होने का शक जताया है. उन्होंने संदेह जताया है कि किसी बाहरी या अज्ञात व्यक्ति की मिलीभगत से यह चोरी की घटना हुई है. पीड़ित ने मामले की शिकायत पुलिस को की है. सिविल लाइन थाना के जांच अधिकारी रणजीत सिंह ने बताया कि विनय गोयल की शिकायत के आधार पर अज्ञात चोरों के खिलाफ विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है.
]]>करनाल के सेक्टर-12 में विनय गोयल एंड एसोसिएट्स नाम से दफ्तर है. फर्म के पार्टनर विनय गोयल ने बताया कि उन्होंने सोमवार शाम को 5:30 बजे ऑफिस बंद कर दिया था और वहां से चले गए थे. लेकिन मंगलवार सुबह 9:30 बजे उनके ऑफिस ब्वॉय संजय कुमार ने दफ्तर खोलने की कोशिश की, तो उसे दफ्तर के मेन गेट के दोनों दरवाजे टूटे हुए मिले. दफ्तर में मेन गेट के ताले टूटे होने की सूचना के बाद विनय गोयल दफ्तर पहुंचे और जांच की तो पाया कि ऑफिस से लगभग 30-31 लाख रुप. चोरी हुए है. यह पैसे 8-10 क्लाइंट्स के थे, जिनका इनकम टैक्स और जीएसटी जमा करना था. चोरों ने घटना को बहुत ही साफ तरीके से अंजाम दिया और जांच के दौरान कोई ठोस सुराग नहीं मिला.
विनय गोयल ने इस घटना में मौजूदा या पूर्व स्टाफ के शामिल होने का शक जताया है. उन्होंने संदेह जताया है कि किसी बाहरी या अज्ञात व्यक्ति की मिलीभगत से यह चोरी की घटना हुई है. पीड़ित ने मामले की शिकायत पुलिस को की है. सिविल लाइन थाना के जांच अधिकारी रणजीत सिंह ने बताया कि विनय गोयल की शिकायत के आधार पर अज्ञात चोरों के खिलाफ विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है.
विनय गोयल ने इस घटना में मौजूदा या पूर्व स्टाफ के शामिल होने का शक जताया है. उन्होंने संदेह जताया है कि किसी बाहरी या अज्ञात व्यक्ति की मिलीभगत से यह चोरी की घटना हुई है. पीड़ित ने मामले की शिकायत पुलिस को की है. सिविल लाइन थाना के जांच अधिकारी रणजीत सिंह ने बताया कि विनय गोयल की शिकायत के आधार पर अज्ञात चोरों के खिलाफ विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है.
]]>बस्तर दशहरा पर्व का हर रस्म पूरे विधी विधान से पूरा किया जाता है. इसके लिए मां काछन देवी से अनुमति ली जाती है. लगभग 600 सालों से भी अधिक समय से चली आ रही परंपरा को पूरा करने आज भी पूरे लाव लश्कर के साथ बस्त महाराजा मां काछन देवी से अनुमती लेने काछन गुड़ी पहुंचते हैं.
माता से आशीर्वाद मांगते है कि बस्तर सहित प्रदेश में खुशहाली बना रहे और दशहरा पर्व बिना किसी विघ्नन के पूरा हो सके. माता से अनुमति लेने बस्तर दशहरा की शुरुआत की जाती है. छत्तीसगढ़ का बस्तर दशहरा 2 खास वजहों से काफी फेमस है. पहला यहां दशहरा 75 दिनों का होता है. तो दूसरा इसमें रावण का दहन नहीं किया जाता. यहां रथ की परिक्रमा की परंपरा है.

आपको बता दें कि काछन देवी एक 6 साल की कन्या पर सवार होती हैं और वह पंनका जाती की होती, जिसे रण की देवी कहा जाता है. ये पंरपरा सदियों से चली आ रही है और इसे आज भी पूरे विधि विधान के साथ पूरा किया जाता है.

बस्तर दशहरे के दौरान रथ को घुमाया जाता है. रथ की चोरी भी होती है. इस बीच पर्व के तमाम रस्म चलते रहते हैं. फिर इसके बाद मुरिया दरबार होता है. फिर देवी विदाई के साथ बस्तर दशहरा का खत्म हो जाता है.
बस्तर राजपरिवार के सदस्य कमल चंद भंजदेव ने बताया कि सैकड़ों सालों से चली आ रही पंरपरा को राज परिवार निभाते आ रहा है. माता से पूरे प्रदेश सहित बस्तर की खुशहाली की कामना करती हैं. बस्तर सांसद महेश कश्यप ने कहा कि बस्तर की संस्कृति और अनूठी परम्परा का संगम बस्तर दशहरा में देखने को मिलता हैं. इसे देखने कई पर्यटक भी यहां आते हैं.
29 सितंबर से ये दुनिया की परिक्रमा करनी शुरू करेगा और फिर करीब दो महीने तक पृथ्वी के साथ रहेगा. 25 नवंबर को फिर ये हमें टाटा-बाय-बाय कह देगा.
क्या होगा इसका आकार
खगोलविदों ने पहली बार 7 अगस्त को दक्षिण अफ्रीका स्थित वेधशाला में इसे पृथ्वी की ओर आते देखा था. ये ऐसा छोटा चांद है, जिसे क्षुद्रग्रह और एस्टेरायड भी कहा जा रहा है.इसे “अर्जुन क्षुद्रग्रह” के रूप में जाना जाता है.
इसका साइज एक बड़े कमरे के बराबर यानि 11 मीटर या 37 फीट के आसपास बताया जा रहा है. ये घोड़े की नाल सरीखा होगा. हालांकि इसके मुकम्मल साइज का पता तभी लगेगा जब ये पृथ्वी के परिवार में शामिल होकर घूमने लगेगा. इसके बाद ये फिर सूर्य की उस कक्षा में लौट जाएगा, जिसे हेलियोसेंट्रिक ऑर्बिट कहा जाता है.
2013 मिले चंद्रमा का क्या हुआ था
क्षुद्रग्रह को अंतरिक्ष चट्टान भी कहा जाता है. इसी तरह पृथ्वी को ऐसा ही एक चंद्रमा वर्ष 2013 मिला था. ये करीब 55 से 65 फीट (17 से 20 मीटर) आकार का था. ये क्षुद्रग्रह हवा में ही फट गया. इससे जापान के हिरोशिमा पर गिराए गए परमाणु बम की तुलना में 20 से 30 गुना अधिक ऊर्जा निकली. सूरज से भी अधिक चमक पैदा हुई. इसके मलबे ने 7,000 से अधिक इमारतों को नुकसान पहुंचाया और 1,000 से अधिक लोग घायल हुए.
कितनी दूर से करेगा पृथ्वी की परिक्रमा
हालांकि इस एक छोटे चंद्रमा से टकराने का कोई खतरा नहीं है. ये 2.6 मिलियन मील (4.2 मिलियन किलोमीटर) दूर पृथ्वी की परिक्रमा करेगा. आमतौर पर दो तरह के क्षुद्रग्रह पृथ्वी की कक्षा में आते हैं. एक वो जो ग्रह के चारों ओर कई चक्कर लगाते हैं और कई सालों तक रहते हैं. दूसरे ऐसे होते हैं जो पृथ्वी के चारों ओर एक पूर्ण चक्कर भी पूरा नहीं करता.
अस्थायी तौर पर पकड़ी गई मक्खी
पृथ्वी का गुरुत्वाकर्षण अक्सर छोटे क्षुद्रग्रहों को उसकी कक्षा में खींच लेता है. इससे वे अस्थायी रूप से “छोटे-चंद्रमा” बन जाते हैं. शोधकर्ताओं ने इस मिनी-मून को “अस्थायी रूप से पकड़ी गई मक्खी(flyby)” कहा है.
क्यों इसे नंगी आंखों से नहीं देख सकते
हम इस मिनी-मून को देख नहीं सकते क्योंकि इसकी चमक मैग्निट्यूड 22 है, जो इसे नंगी आंखों से या यहां तक कि बाजार में उपलब्ध शक्तिशाली टेलीस्कोप से देखना भी असंभव बनाती है. इसे केवल बड़े 30-इंच वाले पेशेवर टेलीस्कोप से ही देखा जा सकता है.
कहां से आते हैं ऐसे मिनी मून
मिनी-मून वे क्षुद्रग्रह भी हो सकते हैं जो मंगल और बृहस्पति के बीच स्थित मुख्य क्षुद्रग्रह बेल्ट से आते हैं. मिनी मून यानि 2024 PT5 अभी तो कुछ समय बाद पृथ्वी की कक्षा से निकल जाएगा लेकिन खगोलविदों को उम्मीद है कि यह नवंबर 2055 में कुछ दिनों के लिए और फिर 2084 के आरंभ में कुछ सप्ताहों के लिए पृथ्वी का छोटा चंद्रमा बन जाएगा.
यूनिवर्सिडैड कॉम्प्लूटेंस डी मैड्रिड के रिसर्चर डॉ. कार्लोस डे ला फूएंते मार्कोस और डॉ. राउल डे ला फूएंते मार्कोस ने अपने पेपर में लिखा, “पृथ्वी नियमित रूप से निकट-पृथ्वी वस्तु (NEO) की आबादी से क्षुद्रग्रहों को पकड़ सकती है. उन्हें कक्षा में खींच सकती है, जिससे वे छोटे चंद्रमा बन जाते हैं.
इसका कोई असर नहीं होगा
अपने छोटे आकार के कारण, इस मिनी-मून के बारे में भविष्यवाणी की गई है कि यह कोई भी देखने योग्य प्रभाव नहीं पैदा करेगा या हमारे लिए कोई खतरा नहीं माना जाएगा। इसके अलावा, इसके आकार के कारण, यह ज्वार को प्रभावित नहीं करेगा.
ऐसा पहली बार नहीं हो रहा
दिलचस्प बात यह है कि शोधकर्ताओं ने यह भी बताया कि यह पहली बार नहीं है जब पृथ्वी के दो चंद्रमा हैं. 1981 और 2022 में क्षुद्रग्रह 2022 एनएक्स1 के साथ यह घटना देखी गई, जो 2051 में फिर से दिखाई देगा.
हालांकि बाद में साइटिस्ट को पता लग गया कि इसकी वजह क्या थी लेकिन 09 दिनों तक पूरी दुनिया के वैज्ञानिक अंधेरे में थे कि ये हो क्या रहा है. क्यों ये आवाज आ रही है, कहां से आ रही है और सबसे बड़ी बात कि लगातार आ रही है.
बाद में पता लगा कि ये आवाज ग्रीनलैंड के पूर्वी छोर पर बने एक फ्योर्ड से आ रही है. अब ये भी सवाल हो सकता है कि ये फ्योर्ड क्या होता है.
क्या होता है फ्योर्ड
भूगोल में फ्योर्ड या फिओर्ड एक लंबा, संकरा समुद्रीप्रवेश द्वार होता है, जिसके किनारे चट्टानें खड़ी होती हैं. जो किसी ग्लेशियर, अंटार्कटिका,आर्कटिक और उत्तरी या दक्षिणी गोलार्ध के आसपास के भूभाग के तटों पर हो सकता है. एक सच्चा फ्योर्ड तब बनता है जब एक ग्लेशियर घर्षण से यू-आकार की घाटी को काटता है. समुद्र में बाढ़ आने पर ऐसी घाटियां फ्योर्ड बन जाती हैं.
ग्रीनलैंड में रॉकस्लाइड से पैदा हुआ बड़ा कंपन
साइंस जर्नल में प्रकाशित एक नए अध्ययन में कहा गया कि ये आवाज ग्रीनलैंड के रॉकस्लाइड के कारण डिक्सन फ्योर्ड में तरंगों द्वारा उत्पन्न हुआ. जो ग्रीनलैंड के पूर्वी छोर पर है. इसके कंपन से ऐसी आवाज निकलने लगी, जो पूरी दुनिया में सुनाई पड़ी.
ग्लेशियर टूटा और पैदा हुई भूकंपीय तरंगें
दरअसल यहां जो ग्लेशियर मौजूद था, उसकी मोटाई दशकों में लगातार तेजी से घट रही थी, इससे पहाड़ का सहारा कमज़ोर हो गया. जब पहाड़ ढहा तो इसने पृथ्वी में कंपन पैदा किया, इससे ग्रह हिला. भूकंपीय तरंगें पैदा हुईं. इन तरंगों की आवाज को दुनियाभर में महसूस किया गया.
क्या होता है पर्माफ्रास्ट, जिसकी भी भूमिका
इस घटना की वजह भी जलवायु बदलाव से जुड़ा माना जाना चाहिए. जैसे-जैसे ग्लेशियर पतले होते जा रहे हैं, वैसे वैसे पर्माफ्रॉस्ट गर्म होता जा रहा है. पर्माफ्रॉस्ट वो जमीन होती है जो सालों से बर्फ के घुलमिलकर जमीं होती है. ये खासकर आर्कटिक, अंटार्कटिका और ऊंचे पहाड़ों में पाई जाती है. इसकी वजह से ध्रुवीय क्षेत्रों में भूस्खलन और सुनामी की घटनाएं आम होती जा रही हैं. वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि जैसे-जैसे ग्रह गर्म होता जाएगा, हमें ऐसी अप्रत्याशित घटनाएं और भी देखने को मिलेंगी.
नौ दिनों तक जारी रही गड़गड़ाहट
पिछले साल सितंबर के मध्य में जब दुनिया में अजीबोगरीब गड़गड़ाहट का पता चला, तब दुनियाभर के वैज्ञानिक स्टेशनों पर एक अजीब भूकंपीय संकेत दिखाई देने लगा. हालांकि ये भूकंप की व्यस्त लहरों जैसा नहीं लग रहा था. एक दिन बीता, धीमी गति से कंपन गूंज रहा था. जब ये तीसरे दिन भी जारी रहा, तो दुनिया भर के वैज्ञानिक आपस में बात करने लगे कि आखिर जमीन में ये गड़गड़ाहट क्यों हो रही है.
साइंटिस्ट समझ नहीं पाए क्यों आ रही ये आवाज
वैज्ञानिकों को इसकी कोई वजह समझ में नहीं आ रही थी. कुछ साइंटिस्ट ने तो इसे एलियन घटना से जोड़कर इसे “अज्ञात भूकंपीय वस्तु” या यूएसओ नाम दे दिया. खैर नौ दिनों बाद कंपन काफी हद तक कम हो गया लेकिन यूएसओ का रहस्य बहुत लंबे समय तक बना रहा.
अब जाकर सुलझी ये पहेली
अब जाकर ये पहेली सुलझी है. साइंस जर्नल में प्रकाशित एक अध्ययन के अनुसार, इस मामले को सुलझाने के लिए 15 अलग-अलग देशों के करीब 70 साइंटिस्ट ने 8,000 से अधिक संदेशों का आदान-प्रदान किया.
तो ये था इस रहस्यमयी आवाज का स्रोत
फिर खोजते खोजते इसका स्रोत पता लगा, जो पूर्वी ग्रीनलैंड में था., वहां ग्लेशियर के गिरने से ऐसे विशाल भूस्खलन का जन्म हुआ. इसमें करीब डेढ़ मील का पहाड़ का टुकड़ा. फिर इसमें से इतना मलबा और बर्फ निकली कि उससे 10,000 ओलंपिक आकार के स्विमिंग पूल को भरे जा सकते थे. और ये सब कुछ काफी दूर तक फैला. जो टुकड़ा टूटा वह डिक्सन फ्योर्ड में गिरा, जिससे 650-फुट ऊंची सुनामी आई. दुनिया की सबसे ऊंची सुनामी. ऐसी सुनामी आज तक कभी नहीं आई. इससे बहुत नुकसान भी हुआ.
दुनिया में ऐसी घटनाएं क्या और होंगी
फिर फ्योर्ड में ऐसी मेगा-सुनामी लहरें बनीं जो वहां आगे पीछे चलने लगीं, पानी में यह लयबद्ध कंपन. इसने वैश्विक स्तर पर भूकंपीय तरंगों को प्रभावित किया, इसी वजह से पृथ्वी 09 दिनों तक हिलती रही और आवाज होती रही. फिर ये खत्म हो गई.लेकिन माना जा रहा है कि अब दुनिया में ऐसी घटनाएं और होंगी.
दरअसल, यह मामला 10 अप्रैल 1993 का है. इंडियन एयरलाइंस का बोइंग 737 प्लेन ने लखनऊ के अमौसी एयरपोर्ट से दिल्ली के इंदिरा गांधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट के लिए उड़ान भरी थी. इस प्लेन में 7 क्रू-मेंबर्स के साथ करीब 52 पैसेंजर्स सवार थे. उड़ान भरने के कुछ देर बाद प्लेन में सवार चार नौजवान अपनी सीट से उठे और किसी केमिकल से भरी हुई बोतलों को लहराते हुए चिल्लाना शुरू कर दिया… प्लेन हाईजैक… प्लेन हाईजैक. इन चारों हाईजैकर्स धमकी दी कि उनकी बात नहीं मानी गई तो वह बोतल में भरे केमिकल में ब्लास्ट कर प्लेन को हवा में ही उड़ा देंगे. इन चारों हाईजैकर्स की बात सुन फ्लाइट के कप्तान और केबिन-क्रू सकते में आ गए.
हाईजैकर्स की डिमांड सुन हैरान रह गया हर कोई
इन चारों नौजवानों ने करीब दस मिनट तक अपने डिमांड से जुड़ी लिस्ट पढ़ी और फिर प्लेन को वापस लखनऊ ले चलने की जिद करने लगे. इन चारों हाईजैकर्स की डिमांड सुन न केवल प्लेन के क्रू और पैसेंजर्स हैरान थे, बल्कि एयरपोर्ट प्रशासन के लिए इस तरह की मांग हैरान करने वाली थी. दरअसल, इन चारों हाईजैकर्स की पहली डिमांड थी कि गवर्नमेंट आर्ट्स कॉलेज की परीक्षाओं को रद्द किया जाए. इसको लेकर उनका तर्क था कि दिसंबर 1992 में हुए दंगों की वजह से उनका कॉलेज लंबे समय तक बंद रहा, लिहाजा उनकी परीक्षाओं को रद्द कर उनकी तारीखों को आगे बढ़ाया जाए. इन हाईजैकर्स की डिमांड में एक प्रोफेसर को दिया गया अवार्ड वापस लिए जाने की मांग भी शामिल थी.
सीधे राज्यपाल से बात करना चाहते थे हाईजैकर्स
इसके अलावा, ये चारों हाईजैकर्स कॉलेज में मास्टर कोर्स शुरू करने और इस कोर्स के लिए 5 करोड़ रुपए की राशि आवंटित करने की मांग भी कर रहे थे. इन चारों हाईजैकर्स की जिद थी कि वह सीधे उत्तर प्रदेश के तत्कालीन राज्यपाल सत्यनारायण रेड्डी से बातचीत करेंगे. इन हाईजैकर्स और एयरपोर्ट अथॉरिटीज के बीच करीब तीन घंटे तक समझौते को लेकर बातचीत चलती रही. आखिर में, हाईजैकर्स को बताया गया कि उनकी मांगों पर बातचीत के लिए राज्यपाल सत्यनारायण रेड्डी एयरपोर्ट पहुंच रहे हैं. यह सुनने के बाद इन चारों हाईजैकर्स ने प्लेन को लखनऊ एयरपोर्ट पर उतरने की इजाजत दे दी.
और जब पैसेंजर्स ने कर दी हाईजैकर्स की पिटाई’
वहीं, लखनऊ एयरपोर्ट पर प्लेन लैंड होने के बाद एक नया घटनाक्रम हुआ. प्लेन की सकुशल लैंडिंग के बाद दो यात्री इन हाईजैकर्स से भिड़ गए. इन दोनों ने हाईजैकर्स के हाथ में मौजूद दोनों बोतलों को छीन लिया. इस घटनाक्रम के बाद अन्य पैसेंजर भी बढ़कर आगे आ गए. पैसेंजर्स ने पहले हाईजैकर्स की जमकर पिटाई की और फिर उन्हें एयरपोर्ट सुरक्षा एजेंसियों के हवाले कर लिया गया. पूछताछ के बाद पता चला कि चारों हाईजैकर्स लखनऊ के गवर्नमेंट आर्ट्स कॉलेज के छात्र थे. इस घटनाक्रम को जानने के बाद आप अंदाजा लगा सकते हैं कि उन दिनों प्लेन को हाईजैक करना किसी भी शख्स के लिए बाएं हाथ का खेल बन चुका था.