
चौड़ा या बड़ा माथा – जिन लोगों का माथा चौड़ा या बड़ा होता है, वे इंटेलिजेंट, ओपन-माइंडेड, और ऑर्गनाइज़्ड होते हैं. ये लोग जल्दी सीखते हैं और मल्टीटास्किंग में माहिर होते हैं. अक्सर लोग इनसे सलाह लेने आते हैं क्योंकि इन्हें लाइफ के उतार-चढ़ाव को अच्छे से हैंडल करना आता है. सोशल गैदरिंग्स में ये अक्सर अट्रैक्शन का सेंटर बन जाते हैं. सेलिब्रिटीज़ और सक्सेसफुल बिजनेसमैन में भी ये खासियत देखी गई है.
इनकी एक कमी होती है कि कभी-कभी ये गुस्से में आकर अपने अच्छे गुणों को भी ओवरशैडो कर देते हैं. अपने इमोशंस को बैलेंस में रखना इनके लिए जरूरी होता है. साथ ही ये अपनी पर्सनल और प्रोफेशनल लाइफ में बहुत पैशनेट होते हैं. इनके लिए सपनों और प्रैक्टिकैलिटी के बीच की बाउंड्री अक्सर ब्लर हो जाती है, जिससे इन्हें इमोशनली नुकसान हो सकता है.

पतला माथा – जिनका माथा पतला या कम चौड़ा होता है, वो काफी इमोशनल होते हैं. ऐसे लोग दिल से सोचते हैं. ये लोग अपने इमोशंस को फॉलो करते हैं और लाइफ में अपने साथ समय बिताना पसंद करते हैं. ये ज्यादा लोगों से इमोशनली अटैच नहीं होते ताकि खुद को प्रोटेक्ट कर सकें. पर जब प्यार में होते हैं, तो पूरी तरह से कमिटेड होते हैं.

इनमें दूसरों के लिए इम्पेथी होती है और ये हमेशा जरूरतमंदों की मदद करते हैं, इसलिए लोग इनसे बहुत प्यार करते हैं. इन्हें अपने हिसाब से जीना पसंद होता है और समाज के नियमों की परवाह नहीं करते. लेकिन कभी गुस्से में आ जाएं, तो इसका इम्पैक्ट उनके रिश्तों पर नेगेटिव हो सकता है.

घुमावदार माथा – जिन लोगों का माथा कर्व्ड होता है, वे फ्रेंडली और ईज़ी-गोइंग होते हैं. नए दोस्तों से जल्दी घुल-मिल जाते हैं और जहां भी जाते हैं वहां की एनर्जी को बढ़ा देते हैं. ये लोग इमोशनली सेंसिटिव होते हैं और जानते हैं कि कब, क्या और किससे कहना है. इनके अंदर नेचुरल पॉज़िटिविटी होती है, जो दूसरों को भी इंस्पायर करती है. हालांकि, ये अपनी फीलिंग्स को अंदर ही अंदर छुपा लेते हैं और साइलेंस में दर्द सहते हैं, जो इनके लिए मुश्किल बन सकता है.
M-शेप का माथा- ये लोग क्रिएटिव और आर्टिस्टिक होते हैं, जिनकी नजरें छोटी से छोटी डीटेल्स पकड़ लेती हैं. ये इमोशनल और लॉजिकल, पारंपरिक और मॉडर्न का बेहतरीन मिक्स होते हैं. ऐसे लोग वो काम पसंद करते हैं जहां उन्हें खुद को खुलकर दिखाने का मौका मिले. ये लोग आमतौर पर शांत और पेशंट होते हैं, लेकिन गुस्सा आए तो जल्दी शांत भी हो जाते हैं और दूसरों के प्रति गिले-शिकवे नहीं रखते. ये अपनी जिंदगी बहुत ग्रेसफुली जीते हैं और असफलताओं को अच्छे से हैंडल कर लेते हैं. पर्सनल रिलेशनशिप्स में ये अपने पार्टनर, फैमिली और फ्रेंड्स के लिए बहुत प्रोटेक्टिव होते हैं.
]]>आईआरसीटीसी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर इस पैकेज की जानकारी दी है. इस पैकेज की शुरुआत सिकंदराबाद रेलवे स्टेशन से होगी. पैकेज की शुरुआत 3 नवंबर, 2024 से की जा रही है. इस पैकेज में पर्यटकों को खाने-पीने की चिंता करने की जरूरत नहीं है. आईआरसीटीसी की ओर से यात्रियों के लिए ऑनबोर्ड मील (शाकाहारी) की व्यवस्था की जाएगी.
टूर पैकेज की खास बातें
पैकेज का नाम- Dev Bhoomi Uttarakhand Yatra (SCZUBG15)
कितने दिन का होगा टूर- 10 रात और 11 दिन
प्रस्थान करने की तारीख- 3 नवंबर, 2024
मील प्लान- ऑनबोर्ड मील
ट्रैवल मोड- ट्रेन
बोर्डिंग/डिबोर्डिंग स्टेशन- हैदराबाद, वारंगल, बल्हारशाह, नागपुर, इटारसी, भोपाल, झांसी, आगरा
डेस्टिनेशन कवर-
भीमताल
नैनीताल – नैना देवी मंदिर और नैनी झील
कैंची धाम – बाबा नीम करोली मंदिर
कसार देवी और कटारमल सूर्य मंदिर
जागेश्वर धाम
गोलू देवता – चितई
अल्मोडा – नंदा देवी मंदिर
बैजनाथ
बागेश्वर
कौसानी
रानीखेत
कितना होगा खर्च?
पैकेज का खर्च कैटेगरी के मुताबिक होगा. पैकेज की शुरुआत 28,020 रुपये प्रति व्यक्ति से होगी. स्टैंडर्ड कैटेगरी के लिए एक व्यक्ति का किराया 37,220 रुपये है और डीलक्स कैटेगरी के लिए 46,945 रुपये है. 5 से 12 साल के बच्चे के लिए स्टैंडर्ड कैटेगरी का किराया 37,220 रुपये और डीलक्स कैटेगरी के लिए 46,945 रुपये है.
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]]>इन्वेस्टमेंट बैंकर का नाम साईश्वरी है. नींद पूरी कर अपने सपने को वास्तविकता में बदल दिया है. उन्होंने बेंगलुरु बेस्ड स्टार्टअप वेकफिट (Wakefit) के स्लीप इंटर्नशिप प्रोग्राम के तीसरे सीजन में ‘स्लीप चैंपियन’ का खिताब जीता है. वह इस कार्यक्रम की 12 ‘स्लीप इंटर्न’ में से एक थीं. यह इंटर्नशिप प्रोग्राम उन लोगों के लिए डिजाइन किया गया है जो नींद को प्रायोरिटी देते हैं. इसमें प्रतिभागियों को हर रात कम से कम 8 से 9 घंटे की नींद लेने की जरूरत होती है.
स्लीप एडवाइजर के नेतृत्व में नियमित वर्कशॉप
इसके अलावा, पार्टिसेपेंट को दिन में 20 मिनट की पावर नैप लेने के लिए प्रोत्साहित किया गया. हर इंटर्न को एक प्रीमियम गद्दा और स्लीप ट्रैकर दिया गया, ताकि उनकी नींद के पैटर्न की निगरानी की जा सके. इंटर्न ने अपनी नींद की आदतों को सुधारने और ‘स्लीप चैंपियन’ का खिताब जीतने की संभावनाओं को बढ़ाने के लिए अनुभवी स्लीप एडवाइजर के नेतृत्व में नियमित वर्कशॉप में भी भाग लिया.
10 लाख लोगों ने कराया रजिस्ट्रेशन
10 लाख से ज्यादा लोगों ने किया इस इंटर्नशिप प्रोग्राम के लिए रजिस्ट्रेशन 3 पार्ट में स्लीप इंटर्नशिप कार्यक्रम के तहत 10 लाख से ज्यादा रजिस्ट्रेशन हुए और 51 इंटर्न को रोजगार भी मिला.
इसके लिए सबसे पहले 2-3 चम्मच चावल को एक गिलास पानी में रातभर या 4-5 घंटे के लिए भिगोकर रख दें. फिर चावल को निथारकर पानी अलग करें. इसी पानी को इस्तेमाल करना है. चावल उबालने के बाद बचे हुए पानी को भी आप इस्तेमाल कर सकते हैं.
त्वचा को होंगे ढेरों फायदे
चावल के पानी में विटामिन बी1, सी और ई की मौजूदगी होने के साथ ही पर्याप्त मात्रा में खनिज और एंटीऑक्सीडेंट भी मौजूद होते हैं, जो ना सिर्फ त्वचा के छिद्रों को कम करते हैं बल्कि इसे जवां बनाए रखने में भी मददगार हैं. इसमें मौजूद विटामिन बी कॉम्प्लेक्स त्वचा की रंगत सुधारने में सहायक है. चावल का पानी त्वचा को हाइड्रेटेड रखता है और इसके चिकनाई बरकरार रखने वाले गुण दरारों को ठीक करते हैं व त्वचा को मुलायम बनाए रखते हैं. चावल के पानी में सूजनरोधी गुण भी होते हैं जो त्वचा पर लालिमा और जलन को कम करने में मदद करता है. इसके अलावा ये त्वचा से मृत कोशिकाओं को हटाने में भी सहायक है जिससे त्वचा साफ और तरोताजा दिखती है.
इस तरह करें उपयोग
क्लींजर के रूप में: चावल के पानी से त्वचा की गंदगी और अशुद्धियों को हटाने में मदद मिलती है. इसलिए इसका प्रयोग त्वचा को साफ करने में किया जा सकता है. एक रुई का फाहा लें और उसमें चावल का पानी लेकर चेहरे पर धीरे-धीरे लगाएं. थोड़ी देर बाद चेहरे को ठंडे पानी से धो लें.
फेस टोनर के रूप में: चावल के पानी को टोनर के रूप में प्रयोग करने के लिए, एक स्प्रे बोतल में भरें और फ्रिज में स्टोर करें. इसके बाद साफ चेहरे पर स्प्रे करके टोनर के रूप में इस्तेमाल करें.
फेस मास्क बनाने में: फेस मास्क बनाने के लिए 2 चम्मच मुल्तानी मिट्टी या बेसन में थोड़ा-सा चावल का पानी मिलाकर गाढ़ा पेस्ट बनाएं. तैयार पेस्ट को चेहरे पर लगाकर 20 से 30 मिनट बाद गुनगुने पानी से धो लें.
मुंहासे से दिलाएगा निजात: यदि आपको चेहरे पर मुंहासे हो गए हैं तो चावल के पानी को रुई की मदद से प्रभावित हिस्से पर लगाएं. सूख जाने के बाद ठंडे पानी से धो लें. ऐसा करने से आपको मुंहासों से राहत मिलेगी.
केस स्टडी जानने से पहले आपको यह बता दें कि ‘मजदूर जिहाद’ के बारे में प्रशासन भी अवगत है और सरकार की नजर में यह समस्या है, लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं हो रही है. हम आपके लिए तीन केस स्टडी झारखंड के दुमका जिले से सामने लाए हैं जो इस ‘मजदूर जिहाद’ जैसे टर्म की तस्दीक करते हैं. बता दें कि दुमका जिले में आदिवासी मजदूरों का शोषण एक गंभीर समस्या बनती जा रही है. विशेष रूप से मुस्लिम मजदूर ठेकेदारों के माध्यम से इस तरह के उत्पीड़न किए जाने की घटनाएं बढ़ रहीं हैं. मजदूरों को काम दिलाने के बहाने जम्मू-कश्मीर और लेह-लद्दाख जैसे दूरदराज के क्षेत्रों में ले जाया जाता है, लेकिन काम पूरा होने के बाद न तो उन्हें उनका मेहनताना मिलता है और न ही वे घर लौट पाते हैं. ऐसा ही एक मामला दुमका जिला के काठिकुंड थाना क्षेत्र के जंगला गांव का है, जहां एक ही गांव के तीन परिवार के परिजन वर्षों बाद भी नहीं लौट पाए हैं. परिजनों का आरोप है कि मेट आलम अंसारी काम दिलाने के बहाने जम्मू कश्मीर ले गया था, लेकिन वर्षो बीत जाने के बाद भी ना तो परिजन लौटे और ना ही किसी तरह की जानकारी दी गई.
दुमका जिला के काठिकुंड थाना क्षेत्र के जंगला गांव के तीन आदिवासी परिवार वर्षों से अपने परिजनों की प्रतीक्षा कर रहे हैं, जिन्हें आलम अंसारी नाम का ठेकेदार काम दिलाने के बहाने जम्मू-कश्मीर लेकर गया था. तीनों आदिवासी मजदूर अब तक घर नहीं लौटे हैं. इस वजह से इनके परिवार गहरे संकट में हैं. इन्होंने दुमका पुलिस और राज्य सरकार से गुहार लगाई है, लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है. आइये हम केस स्टडी के जरिये मुद्दे की गहराई समझते हैं.
जंगला गांव के क्रिस्टोफन मुर्मू एकमात्र कमाने वाले थे, लेकिन वह आज तक नहीं लौटे. उसके घर में एक वृद्ध मां और एक बेटी समी मुर्मू अकेली किसी तरह जिंदगी काट रही है. सुमी मुर्मू बताती हैं कि वर्षों पहले पिता क्रिस्टोफर मुर्मू को काम दिलाने के लिए एक मुस्लिम ठेकेदार जम्मू-कश्मीर ले गया जो अब तक नहीं लौटे. अकेले किसी तरह जिंदगी बसर कर रही हैं और उन्हें देखने वाला सिवाय दादी के कोई नहीं है.
वहीं, दूसरा मामला एक अन्य आदिवासी महिला मनी किस्कू का भी है जिनके पति शिवधन मुर्मू भी आज तक नहीं लौटे हैं. मनी किस्कू बताती हैं कि एक ही गांव के तीन लोग डेहरी मरांडी, शिवधन मुर्मू और क्रिस्टोफर मुर्मू काम करने के लिए बाहर गए थे, लेकिन अब तक नहीं लौटे हैं. इन तीनों को ही मुस्लिम ठेकेदार ही अपने साथ बाहर ले गए थे.
तीसरा मामला डेहरी मरांडी का है जो वर्षों बीत जाने के बाद भी नहीं लौटे हैं. डेहरी मरांडी की पत्नी जुबा सोरेन बताती हैं कि ठेकेदार आलम अंसारी इनको काम दिलाने के बहाने जम्मू कश्मीर ले गया था, लेकिन वे अब तक नहीं लौटे हैं. वहीं, अब तीनों परिवार के लोग काठीकुंड थाना में आवेदन देकर मेट आलम अंसारी पर कार्रवाई की मांग कर रहे हैं.
इस मामले में काठिकुंड थाना प्रभारी त्रिपुरारी कुमार ने बताया कि जंगला गांव के तीन लोग लापता होने की शिकायत मिली है. मामला 4 साल पुराना है और शिकायत पहली बार थाने में पहुंची है. पुलिस इस शिकायत के मद्देनजर सभी बिंदुओं पर जांच-पड़ताल कर रही है. पुलिस पीड़ित परिवारों के संपर्क में है और जांच के बाद ही इस पर कुछ स्पष्ट कहा जा सकता है.
मुस्लिम ठेकेदारों का प्रभाव
एक जानकारी के अनुसार, दुमका जिला और उसके आस-पास के क्षेत्रों में लगभग 130 मुस्लिम मेट्स (ठेकेदार) सक्रिय हैं. दुमका में ही 14 मुस्लिम ठेकेदार हैं, जबकि मसलिया में 23, टोंगरा में 12, रामगढ़ में 6, जरमुंडी में 5 और जामा में 4 मेट्स यानी ठेकेदार लोग सक्रिय हैं. इन मेट्स द्वारा आदिवासी मजदूरों को न्यूनतम मजदूरी देकर काम करवाया जाता है, जबकि मजदूरों को मिलने वाली असल राशि अक्सर हड़प ली जाती है.
संख्यात्मक असमानता और शोषण
आदिवासी जनसंख्या का कम होना और उनकी आर्थिक और सामाजिक रूप से पिछड़ी स्थिति का फायदा मुस्लिम मेट्स (ठेकेदार) उठा रहे हैं. ये आदिवासी मजदूरों को बाहरी राज्यों में ले जाकर शोषण करते हैं, और फिर उन्हें वापस नहीं आने देते. ये एक तरह से ‘मजदूर जिहाद’ की तरह देखा जा सकता है, जहां आदिवासियों की जिंदगी और उनके परिवारों की उम्मीदों को तोड़ा जा रहा है.
आधार कार्ड और बैंक पासबुक की जब्ती
बताया जाता है कि ये मुस्लिम मेट्स द्वारा इन आदिवासियों का शोषण सिर्फ मजदूरी नहीं देने तक सीमित नहीं है. मजदूरों को काम पर भेजने से पहले उनके आधार कार्ड, बैंक पासबुक और एटीएम कार्ड तक जब्त कर लिये जाते हैं. इसका मतलब यह है कि ये उन्हें पूरी तरह से असहाय बना देते हैं, जिससे मजदूरों के पास कोई कानूनी सहारा भी नहीं बचता है.
मालामाल होते मुस्लिम मेट्स
स्थानीय लोगों का कहना है कि कुछ मुस्लिम मेट्स अवैध तरीके से काफी संपत्ति अर्जित की है. अगर इस पर गहन जांच की जाए, तो कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आ सकते हैं. दुमका और आस-पास के इलाकों में मेट्स की अवैध संपत्ति का मामला भी बड़ा सवाल खड़ा करता है.