तनाव कम करें – तनाव डायबिटीज को बढ़ाने वाला एक बड़ा कारण हो सकता है. जब आप तनाव में होते हैं, तो आपके शरीर में कॉर्टिसोल और अन्य हार्मोन निकलते हैं, जो शुगर लेवल बढ़ा सकते हैं. इसलिए ध्यान, मेडिटेशन, डीप ब्रीदिंग या अपनी पसंद की हॉबी में समय बिताना चाहिए. तनाव कम करने से न सिर्फ आपका शुगर लेवल कंट्रोल होगा, बल्कि ओवरऑल हेल्थ को भी गजब के फायदे मिल सकते हैं.
रोज शुगर लेवल की जांच करें – डायबिटीज मैनेजमेंट में नियमित ब्लड शुगर जांच बेहद जरूरी है. इससे आपको पता चलता रहता है कि आपका शुगर स्तर कितना है और दवा या डाइट में किसी बदलाव की जरूरत है या नहीं. अपने डॉक्टर से सलाह लेकर रोजाना या सप्ताह में कुछ दिन ब्लड शुगर मापें और रिकॉर्ड रखें. इससे आपकी दवा का असर भी बेहतर होगा क्योंकि आप सही समय पर अपनी सेहत का ध्यान रख पाएंगे.
दवा को सही समय पर लें – डायबिटीज की दवाइयों का सही समय पर और सही मात्रा में लेना बहुत जरूरी होता है. दवाओं को लेकर लापरवाही आपके शुगर कंट्रोल को बिगाड़ सकती है. साथ ही दवा के साथ सही डाइट और एक्सरसाइज करने से दवा का असर दोगुना हो जाता है. डॉक्टर की सलाह के बिना दवा न बदलें या बंद न करें. अगर दवा से कोई साइड इफेक्ट होता है तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें.
इतना होना चाहिए BMI
मेडिकल डायरेक्टर और मिनिमल एक्सेस सर्जरी डायरेक्टर, डॉ. सचिन अंबेकर और मैश ग्रुप ऑफ हॉस्पिटल्स की संस्थापक और सीईओ मानसी बंसल झुनझुनवाला ने बताया कि लोगों का बॉडी मास इंडेक्स Body mass index (BMI) लगभग 25 से 26 के बीच होना चाहिए. अगर 26 के ऊपर है तो यानी सामने वाला शख्स मोटापे का शिकार है और अगर 30 या 32 है बॉडी मास इंडेक्स तब यह खतरे की घंटी होती है.
डॉ. सचिन अंबेकर ने कहा कि मोटापा सिर्फ सौंदर्य से जुड़ी समस्या नहीं, बल्कि यह एक गंभीर मेडिकल कंडिशन है, जो डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर, हृदय रोग और यहां तक कि विभिन्न प्रकार के कैंसर का भी कारण बन सकता है. उन्होंने बताया कि बलूनिंग, 3डी लेप्रोस्कोपिक वर्टिकल स्लीव गैस्ट्रेक्टॉमी, 3डी मिनी गैस्ट्रिक बायपास और 3डी लेप्रोस्कोपिक रॉक्स एन वायगैस्ट्रिक बायपास जैसी वेट लॉस सर्जरी तकनीकें उपलब्ध हैं.
ये हैं मोटापे की वजह
डॉ. अंबेकर के अनुसार प्रोसेस्ड और हाई-कैलोरी फूड, सॉफ्ट ड्रिंक्स और पैक्ड जूस में अधिक चीनी, बड़े पोर्शन साइज, जंक फूड और स्ट्रेस के कारण ओवरईटिंग मोटापे के प्रमुख कारण हैं. तेजी से बढ़ते शहरीकरण और एक्सरसाइज़ की कमी ने भी इसे बढ़ावा दिया है. जबकि मोबाइल, लैपटॉप और टीवी के सामने बिताया गया अधिक समय निष्क्रिय जीवनशैली को बढ़ा रहा है. मोटापा न केवल शरीर की बनावट को प्रभावित करता है, बल्कि यह हृदय रोग, हाई ब्लड प्रेशर, टाइप-2 डायबिटीज, बांझपन और ऑस्टियोआर्थराइटिस जैसी बीमारियों का कारण बन सकता है. इसके अलावा, स्तन, पेट, कोलन और किडनी कैंसर का खतरा भी बढ़ जाता है. मानसिक स्वास्थ्य पर भी असर पड़ता है, जिससे डिप्रेशन और एंग्जायटी जैसी समस्याएं हो सकती हैं.
दिल्ली में बढ़ता मोटापा और आंकड़े
एनएफएचएस-5 (NFHS-5) सर्वे के अनुसार, दिल्ली-एनसीआर में 80.7% लोग मोटापे के शिकार हैं, लेकिन 78.5% लोग अब भी खुद को सामान्य वजन वाला मानते हैं. पंजाबी बाग, रोहिणी, ग्रेटर कैलाश-2, साउथ एक्सटेंशन और डीएलएफ में यह समस्या सबसे अधिक देखी गई है. भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (ICMR) द्वारा किए गए एक अध्ययन में पाया गया कि भारत में मोटापे की दर शहरी क्षेत्रों में ग्रामीण क्षेत्रों की तुलना में अधिक है. तमिलनाडु, महाराष्ट्र, झारखंड और चंडीगढ़ में किए गए इस अध्ययन के अनुसार, जनरल ओबेसिटी (GO) की दर तमिलनाडु में 24.6%, महाराष्ट्र में 16.6%, झारखंड में 11.8% और चंडीगढ़ में 31.3% पाई गई. एब्डॉमिनल ओबेसिटी (AO) की दर तमिलनाडु में 26.6%, महाराष्ट्र में 18.7%, झारखंड में 16.9% और चंडीगढ़ में 36.1% पाई गई. महिलाओं, उच्च सामाजिक-आर्थिक वर्ग और डायबिटीज व हाई ब्लड प्रेशर से ग्रस्त व्यक्तियों में मोटापे की संभावना अधिक पाई गई.
ऐसे करें बचाव
-डॉक्टर के मुताबिक अगर आप रोज 10000 कदम चलते हैं तो आपका वजन कंट्रोल होगा.
-इसके अलावा पैकेज फूड और शुगर मिले हुए फूड, फास्ट फूड और जंक फूड का सेवन जितना कम करेंगे उतना अच्छा रहेगा.
– अगर सीढ़ियां चढ़ते हुए आपकी सांस फूल रही है और रोजमर्रा के काम करने में आपको दिक्कत हो रही है और आपका वजन तेजी से बढ़ रहा है, तो डॉक्टर से तुरंत मिलें, क्योंकि यह मोटापे के बढ़ने के लक्षण हो सकते हैं.
– सबसे ज्यादा मोटापे का शिकार महिलाएं हैं. फिर पुरुष हैं और इसके बाद बच्चे हैं. ऐसे में सभी को एक्सरसाइज करने की जरूरत है. पानी ज्यादा से ज्यादा पिए. रोज एक्सरसाइज करें या फिर मोबाइल लैपटॉप पर हर वक्त वक्त बिताने से बेहतर है कि ग्राउंड में जाकर कोई ना कोई एक्टिविटी करें या कोई खेल खेले जैसे आउटडोर गेम तमाम हैं. कोई ना कोई गेम खेलने की कोशिश करें.
– खाने में हरी सब्जियां, फल और भारतीय थाल को अपनाएं भारतीय थाल यानी जिसमें सिर्फ देसी फूड हो.