उन्होंने सर्वप्रथम देश के यशस्वी प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के साहसपूर्ण और दूरदर्शी नेतृत्व के प्रति आभार प्रकट किया, जिनके मार्गदर्शन, संकल्प और सतत प्रेरणा ने माओवादी हिंसा के विरुद्ध इस निर्णायक अभियान को दिशा दी। मुख्यमंत्री श्री साय ने वर्ष 2015 में दंतेवाड़ा में प्रधानमंत्री द्वारा दिए गए उस संदेश को भी स्मरण किया, जिसमें उन्होंने हिंसा का मार्ग छोड़ने का आह्वान करते हुए युवाओं से मानवता के दृष्टिकोण से सोचने की प्रेरणा दी थी।
मुख्यमंत्री श्री साय ने केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह के प्रति भी विशेष धन्यवाद ज्ञापित किया और उन्हें माओवादी उन्मूलन की रणनीति का प्रमुख शिल्पी बताया। उन्होंने कहा कि श्री अमित शाह ने रायपुर में 31 मार्च 2026 तक माओवाद समाप्त करने का संकल्प लिया था, जिसे पूरी दृढ़ता के साथ पूरा किया गया। उनके नेतृत्व में सुरक्षा बलों को स्पष्ट दिशा, आवश्यक संसाधन और निरंतर प्रोत्साहन मिला, साथ ही उन्होंने यह स्पष्ट संदेश दिया कि हिंसा का उत्तर दृढ़ता से दिया जाएगा, जबकि शांति का मार्ग अपनाने वालों का स्वागत किया जाएगा।
शहीदों के बलिदान से लिखी गई बस्तर की नई कहानी: मुख्यमंत्री श्री साय
मुख्यमंत्री श्री साय ने शहीद जवानों के प्रति भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि उनके सर्वोच्च बलिदान ने इस ऐतिहासिक सफलता की नींव रखी है। साथ ही उन्होंने सुरक्षा बलों के उन बहादुर जवानों के प्रति आभार व्यक्त किया, जिन्होंने साहस और संकल्प के साथ अपनी जान की परवाह किए बिना माओवाद की जड़ों पर प्रहार किया।
मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने बस्तर की जनता के प्रति भी विशेष कृतज्ञता व्यक्त करते हुए कहा कि जनता का विश्वास ही इस परिवर्तन की सबसे बड़ी ताकत बना। उन्होंने उस दौर को याद किया जब मतदान करने पर उंगली काटने की धमकियाँ दी जाती थीं, इसके बावजूद लोगों ने निर्भय होकर लोकतंत्र को मजबूत किया। यही जनविश्वास एक ऐसे नेतृत्व को स्थापित करने में निर्णायक सिद्ध हुआ, जिसने एक दशक के भीतर इस चुनौती का समाधान किया।
हिंसक माओवादी विचारधारा ने वर्षों तक अनगिनत परिवारों को पीड़ा दी – मांओं की कोख उजड़ी, बहनों का सुहाग छिना और मासूम बच्चों के सिर से पिता का साया उठ गया, जबकि देश की रक्षा और आंतरिक सुरक्षा के लिए हजारों जवानों ने अपने प्राणों की आहुति दी; यह संघर्ष केवल सुरक्षा बलों का नहीं बल्कि पूरे राष्ट्र के आत्मबल और संकल्प का प्रतीक रहा।
उन्होंने कहा कि वर्ष 2014 में प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र में सरकार बनने के बाद माओवादी हिंसा के विरुद्ध एक निर्णायक और सुनियोजित रणनीति पर कार्य प्रारंभ हुआ, जिसके परिणामस्वरूप देश के कई राज्य इस चुनौती से मुक्त हुए, हालांकि छत्तीसगढ़ और उसके पड़ोसी क्षेत्रों में यह समस्या बनी रही; ऐसे में प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन और आशीर्वाद से राज्य में डबल इंजन सरकार के गठन के बाद पिछले ढाई वर्षों में सामूहिक संकल्प के बल पर इस सशस्त्र माओवादी नासूर का समूल नाश संभव हो सका।
मुख्यमंत्री श्री साय ने यह भी कहा कि प्रदेश सरकार ने उन लोगों का स्वागत किया है, जिन्होंने माओवादी हिंसा का रास्ता छोड़कर संविधान और लोकतांत्रिक व्यवस्था में विश्वास जताया है, और यह परिवर्तन केवल सुरक्षा अभियान का परिणाम नहीं बल्कि विश्वास, पुनर्वास और विकास के समन्वित प्रयासों का प्रतिफल है। उन्होंने प्रदेशवासियों को आश्वस्त किया कि जनता के विश्वास की रक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता रहेगी।
उन्होंने कहा कि अब बस्तर में एक नया अध्याय प्रारंभ हो चुका है – जहाँ बच्चे निर्भय होकर विद्यालय जाएंगे, माताएं और बहनें स्वतंत्रता के साथ जीवन जी सकेंगी और विकास का प्रकाश हर गांव तक पहुंचेगा।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि अब कहीं रेड कॉरिडोर नहीं, हर तरफ ग्रीन कॉरिडोर है। इसी विश्वास और संकल्प के साथ छत्तीसगढ़ एक उज्ज्वल और समृद्ध भविष्य की ओर अग्रसर है।
]]>खनिज विभाग के सचिव श्री पी दयानंद ने बताया कि छत्तीसगढ़ ने वित्तीय वर्ष 2025–26 में ₹16,625 करोड़ का खनिज राजस्व अर्जित कर लक्ष्य का 98 प्रतिशत प्राप्त किया है, जो सुशासन, प्रभावी नीति क्रियान्वयन और मजबूत निगरानी व्यवस्था का प्रत्यक्ष परिणाम है।यह उपलब्धि न केवल प्रभावी प्रशासनिक रणनीति का परिणाम है, बल्कि राज्य की खनिज आधारित अर्थव्यवस्था की मजबूती को भी दर्शाती है।
इस वर्ष खनिज राजस्व में 14 प्रतिशत की वर्ष-दर-वर्ष वृद्धि दर्ज की गई है, जो पिछले पांच वर्षों की औसत वार्षिक वृद्धि दर (CAGR) 6 प्रतिशत से दोगुनी से अधिक है। यह वृद्धि राज्य शासन द्वारा अपनाए गए सुधारात्मक और तकनीकी उपायों की सफलता को रेखांकित करती है।
खनिज राजस्व में इस वृद्धि के प्रमुख कारकों में एनएमडीसी (NMDC) तथा अन्य सार्वजनिक उपक्रमों के लिए डिस्पैच रूट्स का प्रभावी अनुकूलन शामिल है। इसके साथ ही, ‘खनिज 2.0’ (Khanij 2.0) जैसे आईटी-आधारित प्लेटफॉर्म के माध्यम से पारदर्शिता, निगरानी और संचालन दक्षता में उल्लेखनीय
सुधार हुआ है।
आगामी वित्तीय वर्ष में राज्य सरकार का विशेष ध्यान गौण खनिजों को भी ‘खनिज 2.0’ प्लेटफॉर्म से जोड़ने पर रहेगा, जिससे संपूर्ण खनन प्रणाली को डिजिटल और एकीकृत बनाया जा सके। इसके अतिरिक्त, खनिज परिवहन की निगरानी को और अधिक सुदृढ़ करने के लिए वीटीएस (VTS), आई-चेक गेट्स (iCheck Gates) तथा ड्रोन आधारित निगरानी प्रणाली को और व्यापक स्तर पर लागू किया जाएगा।
छत्तीसगढ़ सरकार का उद्देश्य खनिज संसाधनों के प्रबंधन में पारदर्शिता, दक्षता और जवाबदेही सुनिश्चित करते हुए राजस्व में सतत वृद्धि करना है। इन प्रयासों से न केवल राज्य की आर्थिक स्थिति मजबूत होगी, बल्कि विकास कार्यों के लिए संसाधनों की उपलब्धता भी सुनिश्चित होगी – श्री विष्णु देव साय, मुख्यमंत्री छत्तीसगढ़
]]>अवलोकन के उपरांत राज्यपाल ने संतोष व्यक्त किया। साथ ही अधिकारियों से कहा कि विशेष पिछड़ी जनजातीय क्षेत्रों में नियमित रूप से भ्रमण कर स्वास्थ्य जांच एवं उपचार सुनिश्चित किया जाए, ताकि इन समुदायों को समय पर बेहतर चिकित्सा सुविधाएं मिल सकें। इस अवसर पर पद्म श्री जागेश्वर यादव, कलेक्टर श्री रोहित व्यास, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक डॉ. लाल उमेद सिंह, मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. जी.एस. जात्रा सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।
]]>राज्यपाल श्री रमेन डेका ने बिरहोर समुदाय के लोगों से संवाद करते हुए उनके सामाजिक एवं आर्थिक सशक्तिकरण के लिए कई महत्वपूर्ण सुझाव दिए। उन्होंने समुदाय के लोगों से अपने बच्चों को नियमित रूप से स्कूल भेजने की अपील की। साथ ही उन्होंने स्वास्थ्य के प्रति सजग रहने की सलाह देते हुए कहा कि बीमारी की स्थिति में अस्पताल या स्वास्थ्य शिविरों में जाकर समय पर उपचार कराना चाहिए। राज्यपाल ने अधिकारियों से कहा कि बिरहोर समुदाय को स्व-सहायता समूहों से जोड़ा जाए, ताकि उन्हें रोजगार के अवसर मिल सकें और वे आर्थिक रूप से सशक्त बन सकें। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि विशेष पिछड़ी जनजातियों के समग्र विकास के लिए संचालित पीएम जनमन योजना का शत-प्रतिशत क्रियान्वयन सुनिश्चित करें। उन्होंने यह भी कहा कि इन क्षेत्रों में नियमित रूप से स्वास्थ्य शिविर आयोजित किए जाएं, जिससे लोगों का समय-समय पर स्वास्थ्य परीक्षण हो सके। साथ ही उन्होंने बच्चों के लिए टीकाकरण को अनिवार्य बताते हुए सभी अभिभावकों से अपने बच्चों को समय पर वैक्सीन लगवाने की अपील की।
राज्यपाल श्री डेका ने बिरहोर समुदाय के लोगों को अपने घरों में पढ़ाई के लिए एक अलग कोना बनाने की सलाह दी, जिससे बच्चों को अध्ययन के लिए अनुकूल वातावरण मिल सके और वे अधिक प्रेरित हों। उन्होंने अधिकारियों से यह भी कहा कि बिरहोर समुदाय द्वारा बनाए जाने वाले उत्पादों का वैल्यू एडिशन किया जाए, ताकि उनके उत्पादों को बाजार में उचित मूल्य मिल सके।
इस अवसर पर बिरहोर समुदाय के गुरुबारु ने राज्यपाल को जानकारी दी कि क्षेत्र में सड़क निर्माण कार्य प्रगति पर है तथा प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत आवासों का निर्माण भी किया जा रहा है। साथ ही विभिन्न शासकीय योजनाओं के लाभ भी मिल रहा है। उन्होंने पद्मश्री जागेश्वर यादव के सहयोग की सराहना भी की। कार्यक्रम के दौरान बिरहोर समुदाय के लोगों ने राज्यपाल का पारंपरिक रूप से स्वागत करते हुए उन्हें केंद फूल, लाटा तथा स्वयं निर्मित रस्सी भेंट की। राज्यपाल ने भी समुदाय के लोगों को साल भेंट कर सम्मानित किया तथा उपयोगी सामग्री के रूप में टॉर्च प्रदान की। साथ ही उन्होंने पद्मश्री जागेश्वर यादव को राजकीय गमछा भेंट कर सम्मानित किया। इस दौरान कलेक्टर श्री रोहित व्यास, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक डॉ लाल उमेद सिंह, जिला पंचायत सीईओ श्री अभिषेक कुमार सहित अधिकारीगण मौजूद रहे।
पद्मश्री जागेश्वर यादव ने बिरहोर समुदाय को मुख्यधारा से जोड़ने के अपने संघर्षों का किया उल्लेख
पद्मश्री जागेश्वर यादव ने राज्यपाल श्री रमेन डेका के प्रति आभार व्यक्त किया। इस दौरान उन्होंने उन्होंने बिरहोर समुदाय को समाज की मुख्यधारा से जोड़ने के अपने लंबे संघर्षों का उल्लेख भी किया। उन्होंने बताया कि वे वर्ष 1980 से इस विशेष पिछड़ी जनजाति के बीच रहकर कार्य कर रहे हैं। उस समय बिरहोर समुदाय के लोग घने जंगलों में निवास करते थे, जंगलों से प्राप्त फलों पर निर्भर रहते थे और जमीन पर ही जीवन यापन करते थे। उन्होंने कहा कि इन समुदायों को वर्तमान स्थिति तक लाने में उन्हें अनेक कठिनाइयों और चुनौतियों का सामना करना पड़ा। लगातार प्रयास, जागरूकता और शासन-प्रशासन के सहयोग से आज बिरहोर समुदाय के जीवन स्तर में सकारात्मक बदलाव आया है और वे धीरे-धीरे मुख्यधारा से जुड़ रहे हैं।
बेहराखार में बिरहोर परिवारों के समग्र विकास के लिए प्रशासन पूरी तत्परता से कर रहा कार्य
कलेक्टर श्री रोहित व्यास ने राज्यपाल को जानकारी देते हुए बताया कि विशेष पिछड़ी जनजाति समुदायों को शासन की विभिन्न योजनाओं से जोड़ने के लिए प्रशासन गंभीरता और तत्परता के साथ कार्य कर रहा है। उन्होंने बताया कि ग्राम बहेराखार में बिरहोर समुदाय के कुल 22 परिवार निवासरत हैं, जिनकी कुल जनसंख्या 85 है। इनमें से 73 लोगों के आधार कार्ड और आयुष्मान कार्ड बनाए जा चुके हैं। सभी परिवारों का सिकल सेल स्क्रीनिंग परीक्षण पूर्ण कर लिया गया है तथा सभी को राशन कार्ड उपलब्ध कराए जा चुके हैं। इसके अतिरिक्त 19 परिवारों के जॉब कार्ड भी बनाए जा चुके हैं। कुछ परिवारों को उज्ज्वला गैस कनेक्शन प्राप्त हो चुका है, जबकि शेष परिवारों को लाभ प्रदान करने की प्रक्रिया जारी है। महतारी वंदन योजना का लाभ भी दिया जा रहा है। साथ ही अन्य योजनाओं का लाभ भी प्रदान किया जा रहा है।
]]>रिकॉर्ड ओपीडी और इनडोर सुविधाएं
पालनार और आस-पास के गांवों में स्वास्थ्य के प्रति आई इस जागरूकता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इस अल्प अवधि में ही कुल 747 मरीजों ने ओपीडी (OPD) सेवाओं का लाभ उठाया है। इसके अलावा, आवश्यकतानुसार 16 मरीजों को भर्ती कर उनका सफलतापूर्वक उपचार किया गया। पहले जिन ग्रामीणों को छोटी बीमारियों के लिए भी मीलों पैदल चलना पड़ता था, उन्हें अब विशेषज्ञ परामर्श और निःशुल्क दवाएं स्थानीय स्तर पर ही मिल रही हैं।
मातृत्व एवं शिशु स्वास्थ्य
सुरक्षित प्रसव और त्वरित सेवाएं
संवेदनशील क्षेत्रों में संस्थागत प्रसव को बढ़ावा देने के उद्देश्य से इस केंद्र में अब तक 5 सुरक्षित प्रसव कराए गए हैं। शासन की मंशा के अनुरूप, नागरिकों को शासकीय योजनाओं का लाभ दिलाने हेतु नवजातों के जन्म प्रमाण पत्र भी प्रदान किए गए। साथ ही, क्षेत्र की 15 गर्भवती महिलाओं (ANC) और 18 धात्री माताओं (PNC) की नियमित स्वास्थ्य जांच और टीकाकरण सुनिश्चित किया गया है।
गंभीर बीमारियों की समय पर पहचान (NCD स्क्रीनिंग)
योजना के तहत गैर-संचारी रोगों (NCD) पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। पालनार केंद्र में अब तक 250 ग्रामीणों की स्वास्थ्य स्क्रीनिंग की गई, जिसमे
25 मरीज उच्च रक्तचाप (Hypertension) से ग्रसित पाए गए।
बारह मरीज मधुमेह (Diabetes) से पीड़ित मिले।
एक ग्रामीण में ब्रेस्ट कैंसर के लक्षण मिलने पर तत्काल उच्च चिकित्सा केंद्र हेतु रेफर किया गया।
पालनार में आयुष्मान आरोग्य मंदिर की सफलता यह दर्शाती है कि शासन की योजनाएं अब अंतिम व्यक्ति तक पहुंच रही हैं। इससे न केवल स्वास्थ्य सुविधाओं में सुधार हुआ है, बल्कि ग्रामीणों का प्रशासन के प्रति विश्वास भी सुदृढ़ हुआ है।
]]>गौरतलब है कि श्रीमती कुंजाम ने परंपरागत खेती से आगे बढ़ते हुए नवाचार और वैज्ञानिक पद्धतियों को अपनाकर अपनी आर्थिक स्थिति मजबूत की है। सीमित संसाधनों के बावजूद उन्होंने मेहनत, लगन और कृषि विभाग के मार्गदर्शन से सफलता की एक प्रेरणादायक मिसाल प्रस्तुत की है। शकुन बाई के पास कुल 7 एकड़ कृषि भूमि है, जो ट्यूबवेल से सिंचित है। उनके पास ट्रैक्टर, रोटावेटर, सीड ड्रिल, मल्टी क्रॉप थ्रेसर एवं रीपर जैसे आधुनिक कृषि उपकरण उपलब्ध हैं। उनके परिवार के 5 सदस्य खेती में सक्रिय सहयोग करते हैं, जिससे कृषि कार्य व्यवस्थित ढंग से संचालित हो पाता है।
श्रीमती शकुन बाई ने बताया कि रबी सीजन में 3 एकड़ क्षेत्र में लघु धान्य फसल रागी (छत्तीसगढ़ रागी-2) की खेती की। उन्होंने बीजोपचार के लिए बीजामृत, तथा खाद के रूप में वर्मी कम्पोस्ट, डीएपी, पीएसबी एवं केएसबी का उपयोग किया। वैज्ञानिक विधियों से की गई खेती के परिणामस्वरूप उन्हें 28.50 क्विंटल उत्पादन प्राप्त हुआ। कुछ वर्ष पहले बीज उत्पादन कार्यक्रम के अंतर्गत रागी की खेती से उन्हें 5200 रुपये प्रति क्विंटल की दर से कुल 1,48,200 रुपये की आय हुई। इस उत्पादन में कुल लागत 27,000 रुपये रही, जिससे उन्हें 1,21,200 रुपये का शुद्ध लाभ प्राप्त हुआ।
उल्लेखनीय है कि कृषि विभाग द्वारा संचालित आत्मा कार्यक्रम के तहत उन्हें निरंतर मार्गदर्शन एवं तकनीकी सहयोग प्राप्त हुआ, जिससे उन्होंने फसल चक्र परिवर्तन और लघु धान्य फसलों की खेती को सफलतापूर्वक अपनाया। फसल कटाई के बाद वे ग्रीष्मकालीन जुताई भी करती हैं, जिससे भूमि की उर्वरता बनी रहती है। इस प्रेरक सफलता की जानकारी मिलने पर जिले के कलेक्टर श्री अबिनाश मिश्रा स्वयं शकुन बाई के घर पहुंचे और उनकी खेती-किसानी के संबंध में बातचीत की। उन्होंने शकुन बाई की सराहना करते हुए इसे जिले के अन्य किसानों के लिए प्रेरणास्रोत बताया। इस अवसर पर शकुन बाई ने अपनी बाड़ी में उगाए गए मुनगा (सहजन) को भेंट स्वरूप प्रदान किया तथा पारंपरिक पत्तल-दोना में ‘माड़िया पेय’ से स्वागत किया। यह ग्रामीण संस्कृति और आत्मनिर्भरता का सुंदर उदाहरण रहा।
शकुन बाई की यह उपलब्धि दर्शाती है कि यदि किसान आधुनिक तकनीकों के साथ पारंपरिक ज्ञान का समन्वय करें, तो कम लागत में अधिक लाभ अर्जित किया जा सकता है। उनकी सफलता न केवल उनकी आर्थिक सुदृढ़ता का आधार बनी है, बल्कि क्षेत्र के अन्य किसानों के लिए भी एक नई दिशा और प्रेरणा का स्रोत बनी है।
]]>लोक निर्माण विभाग ने शहर के बीच जी.ई. रोड पर गुरू तेज बहादुर उद्यान से तेलीबांधा के नेताजी सुभाष चौक तक फ्लाईओवर के लिए 172 करोड़ 86 लाख 28 हजार रुपए स्वीकृत किए हैं। रायपुर के रिंग रोड क्रमांक-2 में सोनडोंगरी चौक पर ओवरपास के लिए 43 करोड़ 89 लाख 17 हजार रुपए मंजूर किए गए हैं।
विभाग ने रायपुर में वी.आई.पी. रोड के फुंडहर चौक में ओवरपास के निर्माण के लिए 56 करोड़ सात लाख 35 हजार रुपए की स्वीकृति दी है। शहर के अटल पथ एक्सप्रेस-वे पर फुंडहर चौक में ग्रेड सेपरेटर के निर्माण के लिए भी लोक निर्माण विभाग द्वारा 87 करोड़ 53 लाख 13 हजार रुपए मंजूर किए गए हैं।
*”राज्य शासन रायपुर में यातायात को तेज, सुरक्षित और सुव्यवस्थित बनाने के लिए पूरी गंभीरता से काम कर रही है। शहर में फ्लाईओवर्स और सड़कों के चौड़ीकरण के कार्य लगातार किए जा रहे हैं। इनसे ट्रैफिक-जॉम में कमी आएगी और लोगों की आवाजाही अधिक सहज होगी। हमारी प्राथमिकता है कि रायपुरवासियों और यहां आने वाले हर व्यक्ति को बेहतर और सुगम यातायात मिले।“
– श्री अरुण साव, उप मुख्यमंत्री तथा लोक निर्माण मंत्री
]]>मंत्री श्रीमती राजवाड़े ने विकासखंड ओड़गी के ग्राम हरिहरपुर (छतरंग रोड) में कागज नाला पर 419.37 लाख रूपये की लागत से बनने वाले पुल निर्माण कार्य का शुभारंभ किया।
श्रीमती राजवाड़े ने भैयाथान विकासखंड के ग्राम सांवरावा में 136.23 लाख रूपये की लागत से जलाशय जीर्णोद्धार कार्य का शुभारंभ किया । उन्होंने प्रतापपुर–भैयाथान मुख्य मार्ग से परसापारा तक लगभग 5 किलोमीटर लंबी सड़क के निर्माण कार्य का भी भूमिपूजन किया, जिसकी लागत 766.37 लाख रूपये है।
मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े ने इस अवसर पर कहा कि राज्य सरकार ग्रामीण विकास को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए लगातार बुनियादी सुविधाओं का विस्तार कर रही है। उन्होंने कहा कि इन कार्यों के पूर्ण होने से क्षेत्र के लोगों के जीवन में सीधा सकारात्मक परिवर्तन आएगा और भटगांव क्षेत्र विकास की नई दिशा में अग्रसर होगा।इन परियोजनाओं से क्षेत्र में सड़क, पुल और जल संरचना का सुदृढ़ीकरण होगा, जिससे न केवल आवागमन आसान होगा बल्कि कृषि और स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी।
कार्यक्रम में वन विकास निगम अध्यक्ष श्री रामसेवक पैकरा, अन्य जनप्रतिनिधि, प्रशासनिक अधिकारी तथा बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिक उपस्थित रहे।
]]>खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स-2026 में कर्नाटक के 9 पहलवानों ने हिस्सा लिया, जिनमें से 4 सिद्दी समुदाय से थे। इन चार पहलवानों में से तीन ने स्वर्ण पदक अपने नाम किया जबकि एक को रजत पदक मिला। स्वर्ण पदक जीतने वाले पहलवानों में मनीषा जुआवा सिद्दी (76 किग्रा), रोहन एम डोड़ामणि (ग्रीको रोमन 60 किग्रा) और प्रिंसिता पेदरू फर्नांडिस सिद्दी (68 किग्रा) शामिल हैं जबकि शालिना सेयर सिद्दी (57 किग्रा) को रजत पदक से संतोष करना पड़ा।
इन पहलवानों की सफलता न सिर्फ उनके संघर्ष और मेहनत की कहानी कहती है, बल्कि कुश्ती जैसे खेलो में सिद्दी समुदाय के बढ़ते वर्चस्व को भी दिखाता है। कर्नाटक के इन चारों पहलवानों का दिल्ली के इंदिरा गांधी स्टेडियम में ट्रायल हुआ था और वहां भी ये पहले नंबर पर रहे थे।
सिद्दी समुदाय के प्रदर्शन से कर्नाटक कुश्ती टीम की कोच ममता बेहद गौरवान्वित महसूस कर रही हैं।
ममता ने कहा, ”जैसे हमारे देश में कुश्ती में हरियाणा का दबदबा है तो ठीक वैसे ही हमारे राज्य में अहलियाल क्षेत्र का कुश्ती में वर्चस्व रहता है। राज्य में डिपार्टमेंट ऑफ यूथ एंड डेवलपमेंट एंड सेंटर मुख्य रूप से इन्हीं सिद्दी समुदाय के लिए है। इनके बच्चे यहीं पर ट्रेनिंग करते हैं। पिछले कुछ समय से इस समुदाय के लोगों के अंदर कुश्ती का क्रेज बढ़ा है और वे अब अपने बच्चों को कुश्ती में भेजने लगे हैं।
उत्तरी कर्नाटक के धारवाड़ जिले से आने वाले पुरुष पहलवान रोहन एम. डोड़ामणि भी इसी समुदाय से आते हैं। डोड़ामणि की मां सरकारी स्कूल में खाना पकाती हैं जबकि पिता का छह साल पहले ही देहांत हो चुका है।
रोहन ने कहा, “सिद्दी समुदाय के अंदर समय-समय पर छोटे दंगल होते रहते हैं और जो इनमें जीतता है, उन्हें ज्यादा से ज्यादा पुरस्कार राशि देकर सम्मानित किया जाता है। खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स-2026 में स्वर्ण जीतने से पहले मैं सीनियर नेशनल चैंपियनशिप, नेशनल गेम्स और ऑल इंडिया यूनिवर्सिटी गेम्स में भी भाग ले चुका हूं।”
देश में खिलाड़ियों के अंदर छिपी प्रतिभा की पहचान करने और उन्हें एक बेहतर मंच देने के लिए भारतीय खेल प्राधिकरण (साई) और खेल मंत्रालय ने मिलकर 2018 में खेलो इंडिया यूथ गेम्स की शुरुआत की थी। उसके बाद खेलो इंडिया यूनिवर्सिटी गेम्स और अब खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स की शुरुआत हुई है।
साई के टैलेंट डेवलपमेंट कमेटी के सदस्य महा सिंह राव कहते हैं, ” साई और खेल मंत्रालय की तरफ से हम कम उम्र के प्रतिभाशाली बच्चों की पहचान करते हैं ताकि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी का जो सपना है कि 2036 ओलंपिक खेल भारत में हो, उस सपने को साकार करने के लिए ये सरकार की रणनीति का एक हिस्सा है। प्रधानमंत्री के अलावा खेल मंत्री, साई और हम इस सपने को साकार करने में लगे हुए हैं कि आगे आने वाले ओलंपिक खेलों में हम ज्यादा से ज्यादा मेडल जीते।”
उत्तर कन्नड़ कारवार जिले से आने वाली शालिना सेयर सिद्दी ने इस प्रतियोगिता में रजत पदक जीतने के बाद कहा, ”हमारे समुदाय में कुश्ती को लेकर अब लोग दिलचस्पी लेने लगे हैं। मैंने अपने अंकल के कहने पर कुश्ती शुरू की थी और शुरू से ही वह मुझे ट्रेनिंग देते आ रहे हैं। मैंने इस प्रतियोगिता के लिए मेहनत तो पूरी की थी, लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था और मैं स्वर्ण जीतने से चूक गई।”
कर्नाटक के उत्तर कन्नड़ कारवार जिले से ही आने वाली प्रिंसिता सिद्दी ने कहा, ”शुरुआत में मुझे कुश्ती में दिलचस्पी नहीं थी और मैं बहुत रोई थी। लेकिन फिर धीरे-धीरे जब हमारे समुदाय के बच्चे इसमें भाग लेने लगे तो उन्हें देखकर मैं भी प्रैक्टिस करने लगी। यहां तक पहुंचने के लिए मैं शाम-सुबह दो-दो घंटे प्रैक्टिस करती हूं। मुझे इंटरनेशनल लेवल पर मेडल लाना है और इसके लिए मैं कड़ी मेहनत कर रही हूं।”
इन पहलवानों की सफलता इस बात को सिद्ध करती है कि जब सही मंच, ट्रेनिंग और सपोर्ट मिलता है, तो दूरदराज के समुदायों से भी प्रतिभाएं शिखर तक पहुंच सकती हैं और भारत के खेल भविष्य को आकार दे सकती हैं।
]]>मुख्यमंत्री श्री साय ने अपने उद्बोधन में प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उनके विजन और मार्गदर्शन के कारण छत्तीसगढ़ को राष्ट्रीय स्तर पर प्रथम खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स की मेजबानी का गौरव प्राप्त हुआ। साथ ही केंद्रीय युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया के निरंतर सहयोग की सराहना करते हुए कहा कि उनके प्रयासों से छत्तीसगढ़ आज देश के खेल मानचित्र में प्रमुख स्थान पर स्थापित हुआ है। उन्होंने कहा कि अब यह गेम्स प्रतिवर्ष छत्तीसगढ़ में आयोजित किए जाएंगे, जो राज्य के लिए गर्व का विषय है।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि जनजातीय समाज और खेल का रिश्ता सदियों पुराना है। तीरंदाजी, दौड़ और कुश्ती जैसे खेल जनजातीय जीवन का अभिन्न हिस्सा रहे हैं। उन्होंने स्वयं के जनजातीय पृष्ठभूमि का उल्लेख करते हुए कहा कि जनजातीय समाज में अपार ऊर्जा और प्रतिभा निहित है, जिसे सही मंच मिलने पर देश-विदेश में पहचान मिल सकती है। उन्होंने कहा कि यह आयोजन केवल खेल प्रतियोगिता नहीं, बल्कि देश की एकता, संस्कृति और कौशल का महाकुंभ बनकर उभरा है। देशभर के 30 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के जनजातीय खिलाड़ियों ने इसमें भाग लेकर अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया। यह आयोजन आदिवासी युवाओं को सशक्त बनाने और खेलों को जमीनी स्तर पर मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि खिलाड़ियों ने केवल जीत के लिए नहीं, बल्कि साहस और उत्कृष्टता की नई कहानियां रचने के लिए प्रतिस्पर्धा की है। उन्होंने यह साबित किया है कि प्रतिभा केवल बड़े शहरों तक सीमित नहीं, बल्कि बस्तर, सरगुजा, झारखंड और पूर्वोत्तर के दूरस्थ क्षेत्रों में भी भरपूर है।
समारोह में मुख्यमंत्री श्री साय ने पदक तालिका में शीर्ष स्थान प्राप्त करने वाले कर्नाटक, द्वितीय स्थान ओडिशा और तृतीय स्थान प्राप्त करने वाले झारखंड के खिलाड़ियों को बधाई दी। साथ ही छत्तीसगढ़ के खिलाड़ियों के प्रदर्शन पर गर्व व्यक्त करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ ने कुल 19 पदक (03 स्वर्ण, 10 रजत और 06 कांस्य) हासिल किए हैं। उन्होंने खिलाड़ियों की उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए बताया कि स्विमिंग में अनुष्का भगत ने 4 रजत पदक जीते, निखिल खलखो और न्यासा पैकरा ने भी पदक जीतकर राज्य का नाम रोशन किया। एथलेटिक्स में सिद्धार्थ नागेश ने स्वर्ण और रजत पदक जीते, वहीं अन्य खिलाड़ियों ने भी उत्कृष्ट प्रदर्शन किया। वेटलिफ्टिंग में निकिता ने स्वर्ण पदक जीतकर प्रदेश की बेटियों का मान बढ़ाया। बालिका वर्ग फुटबॉल टीम ने स्वर्ण और बालक वर्ग हॉकी टीम ने कांस्य पदक जीतकर राज्य का गौरव बढ़ाया। उन्होंने सभी खिलाड़ियों को भविष्य के लिए प्रेरित करते हुए कहा कि निरंतर मेहनत और समर्पण से वे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर सफलता प्राप्त कर सकते हैं।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री श्री साय ने पदक विजेताओं के लिए नगद पुरस्कार की घोषणा भी की। व्यक्तिगत स्पर्धाओं में स्वर्ण पदक के लिए 2 लाख रुपये, रजत के लिए 1.5 लाख रुपये और कांस्य के लिए 1 लाख रुपये प्रदान किए जाएंगे। वहीं दलीय स्पर्धाओं में स्वर्ण के लिए 1 लाख रुपये, रजत के लिए 75 हजार रुपये और कांस्य के लिए 50 हजार रुपये देने की घोषणा की गई।
मुख्यमंत्री ने अंत में सभी खिलाड़ियों, कोच, आयोजन समिति, अधिकारियों और सहयोगी संस्थाओं को इस ऐतिहासिक आयोजन को सफल बनाने के लिए बधाई दी और विश्वास व्यक्त किया कि आने वाले समय में छत्तीसगढ़ जनजातीय खेलों का प्रमुख केंद्र बनकर उभरेगा। उन्होंने सभी खिलाड़ियों के उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हुए कहा कि उनकी मेहनत उन्हें ओलंपिक और अंतरराष्ट्रीय मंचों तक अवश्य पहुंचाएगी।
समापन समारोह में उपमुख्यमंत्री एवं खेल एवं युवा कल्याण मंत्री श्री अरुण साव ने सफल आयोजन के लिए बधाई देते हुए कहा कि पूरे देश के जनजातीय खिलाड़ियों ने इस खेल महाकुंभ में उत्साह और ऊर्जा के साथ भाग लिया। उन्होंने बताया कि यह पहला अवसर है जब इस स्तर पर ट्राइबल गेम्स का आयोजन किया गया, जिससे खिलाड़ियों को अपनी प्रतिभा दिखाने और राष्ट्रीय स्तर पर आगे बढ़ने का अवसर मिला। उन्होंने प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी एवं केंद्रीय खेल मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उनके मार्गदर्शन में यह आयोजन संभव हो पाया।श्री साव ने कहा कि राज्य सरकार ने खिलाड़ियों के आगमन से लेकर प्रतियोगिता के दौरान आवास, भोजन और अन्य सुविधाओं की बेहतर व्यवस्था सुनिश्चित की। साथ ही छत्तीसगढ़ की संस्कृति और आतिथ्य का अनुभव कराने का भी प्रयास किया गया। उन्होंने विश्वास जताया कि आने वाले वर्षों में यह आयोजन और अधिक भव्य रूप में आयोजित होगा। उन्होंने पदक तालिका में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाली टीमों को बधाई दी तथा छत्तीसगढ़ के खिलाड़ियों के प्रदर्शन की भी सराहना की।
इस अवसर पर मुख्य सचिव श्री विकास शील ने सभी खिलाड़ियों, अधिकारियों एवं आयोजकों को सफल आयोजन के लिए बधाई दी। उन्होंने बताया कि इस आयोजन में देशभर के 2000 से अधिक जनजातीय खिलाड़ी एवं अधिकारियों ने भाग लिया, जिससे यह प्रतियोगिता एक राष्ट्रीय स्तर का महत्वपूर्ण मंच बन गई। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने जनजातीय प्रतिभाओं को अवसर प्रदान करने के उद्देश्य से इस आयोजन को सफलतापूर्वक संपन्न किया है। यह मंच खिलाड़ियों को अपनी प्रतिभा निखारने और राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं के लिए तैयार होने का अवसर देता है।
इस अवसर पर अंतरराष्ट्रीय बॉक्सर मेरीकॉम और फुटबॉलर बाइचुंग भूटिया भी विशेष अतिथि के रूप में शामिल हुए। साथ ही केबिनेट मंत्री श्री राजेश अग्रवाल, विधायक श्री पुरंदर मिश्रा, छत्तीसगढ़ ओलंपिक एसोसिएशन के महासचिव श्री विक्रम सिसोदिया, छत्तीसगढ़ राज्य तेलघानी विकास बोर्ड के अध्यक्ष श्री जितेन्द्र कुमार साहू, छत्तीसगढ़ नागरिक आपूर्ति निगम के अध्यक्ष श्री संजय श्रीवास्तव, छत्तीसगढ़ फिल्म विकास निगम की अध्यक्ष सुश्री मोना सेन, खेल एवं युवा कल्याण विभाग के सचिव श्री यशवंत कुमार, रायपुर कमिश्नर श्री संजीव शुक्ला, जनप्रतिनिधिगण, वरिष्ठ अधिकारी कर्मचारी सहित बड़ी संख्या में देश भर से आए खिलाड़ी उपस्थित थे।
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