जशपुर जिले के पत्थलगांव विकासखंड के ग्राम पंडरीपानी निवासी प्रमनाथ मिर्रे का मामला इसका एक प्रेरक उदाहरण है। दिव्यांग पेंशन प्राप्त करने के लिए लगातार प्रयास करने के बावजूद उनकी पेंशन स्वीकृत नहीं हो पा रही थी, जिससे उन्हें आर्थिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा था।
जब अन्य प्रयास सफल नहीं हुए, तब उनके पुत्र प्रताप मिर्रे ने सीएम हेल्पलाइन में शिकायत दर्ज कराई। शिकायत प्राप्त होते ही संबंधित विभाग ने प्रकरण को प्राथमिकता देते हुए आवश्यक कार्रवाई शुरू की। सभी आवश्यक प्रक्रियाएं समयबद्ध रूप से पूरी की गईं और मात्र 12 दिनों के भीतर शिकायत का निराकरण कर प्रमनाथ मिर्रे की दिव्यांग पेंशन प्रारंभ कर दी गई।
पेंशन शुरू होने के बाद प्रमनाथ मिर्रे और उनके परिवार ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय तथा जिला प्रशासन के प्रति हार्दिक आभार जताया। उन्होंने कहा कि जिस कार्य के लिए वे लंबे समय से प्रयासरत थे, वह सीएम हेल्पलाइन के माध्यम से कुछ ही दिनों में पूरा हो गया।
परिवार का कहना है कि सीएम हेल्पलाइन दिव्यांगों, वरिष्ठ नागरिकों और जरूरतमंद लोगों के लिए अत्यंत उपयोगी एवं भरोसेमंद व्यवस्था बनकर सामने आई है। इससे आम नागरिकों को अपनी समस्याओं के समाधान के लिए एक प्रभावी मंच मिला है, जहां शिकायतों का त्वरित और संवेदनशील तरीके से निराकरण किया जाता है।
प्रमनाथ मिर्रे की यह सफलता की कहानी मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में सुशासन, जवाबदेही और जनसेवा के प्रति शासन की प्रतिबद्धता को दर्शाती है। सीएम हेल्पलाइन के माध्यम से पात्र हितग्राहियों तक योजनाओं का लाभ समय पर पहुंच रहा है, जिससे आम नागरिकों का शासन के प्रति विश्वास और अधिक मजबूत हो रहा है।
]]>आत्मसमर्पित युवाओं को स्थायी आजीविका से जोड़कर आर्थिक रूप से सशक्त बनाना है
22 जून से 14 जुलाई 2026 तक आयोजित इस प्रशिक्षण में युवाओं को प्राकृतिक खेती, आधुनिक कृषि तकनीकों और कृषि आधारित व्यवसायों का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया गया। प्रशिक्षण का उद्देश्य आत्मसमर्पित युवाओं को स्थायी आजीविका से जोड़कर आर्थिक रूप से सशक्त बनाना और उन्हें समाज की मुख्यधारा में सम्मान के साथ आगे बढ़ने का अवसर देना था।
प्रशिक्षण में सीखी प्राकृतिक खेती और आधुनिक कृषि तकनीकें
प्रशिक्षण के दौरान विशेषज्ञों ने युवाओं को बीजामृत, जीवामृत, घनजीवामृत, नीमास्त्र, हांडी दवा, थ्री-जी दवा और मछली टॉनिक तैयार करने की जानकारी दी। इसके साथ ही नाडेप खाद, वर्मी कम्पोस्ट, हरी खाद और प्राकृतिक खेती की विभिन्न तकनीकों का व्यावहारिक प्रशिक्षण भी दिया गया। युवाओं ने फलदार पौधों का रोपण, नीलहरित काई उत्पादन, कृषि यंत्रों का उपयोग, सब्जी नर्सरी तैयार करना, धान की कतारबद्ध बुवाई और गर्मी में गहरी जुताई जैसी तकनीकें भी सीखीं।
कृषि के साथ पशुपालन और अन्य व्यवसायों का प्रशिक्षण
प्रशिक्षण में युवाओं को बकरी पालन, मुर्गी पालन, ऑयस्टर मशरूम उत्पादन और मत्स्य पालन जैसे कृषि आधारित व्यवसायों की जानकारी दी गई। इन गतिविधियों से युवा अपनी रुचि और संसाधनों के अनुसार स्वरोजगार शुरू कर सकते हैं।
अध्ययन भ्रमण से मिला प्रत्यक्ष अनुभव
प्रशिक्षणार्थियों को दंतेवाड़ा जिले का अध्ययन भ्रमण भी कराया गया। मैलावाड़ा में उन्होंने धान की एसआरआई पद्धति और भूमगादी में प्राकृतिक खेती की उन्नत तकनीकों को प्रत्यक्ष रूप से देखा। इससे प्रशिक्षणार्थियों को सीखी गई तकनीकों को खेतों में लागू करने का व्यावहारिक अनुभव मिला।
अब खेती बनेगी नई पहचान का आधार
प्रशिक्षण के समापन अवसर पर उप संचालक कृषि श्री पी.आर. बघेल, सहायक संचालक कृषि श्री सुधीर कुजूर और कृषि विज्ञान केंद्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं प्रमुख श्री एच.एस. तोमर सहित वैज्ञानिकों ने प्रशिक्षणार्थियों को शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि खेती, पशुपालन और कृषि आधारित व्यवसाय ग्रामीण अर्थव्यवस्था की मजबूत नींव हैं। इन गतिविधियों के माध्यम से आत्मसमर्पित युवा अपने परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत करने के साथ-साथ समाज की मुख्यधारा में सम्मान के साथ आगे बढ़ सकते हैं।
कौशल का उपयोग आजीविका के साधन विकसित करने में करेंगे
प्रशिक्षणार्थियों ने कहा कि उन्हें खेती और स्वरोजगार की नई तकनीकों की जानकारी मिली है। अब वे सीखे गए कौशल का उपयोग कर अपने गांव में आजीविका के साधन विकसित करेंगे। उन्होंने आत्मनिर्भर बनने और सम्मानजनक जीवन जीने का संकल्प लिया।
आत्मसमर्पित युवाओं के जीवन में बदलाव की एक नई शुरुआत
यह प्रशिक्षण आत्मसमर्पित युवाओं के जीवन में बदलाव की एक नई शुरुआत है। हथियार छोड़कर अब ये युवा खेती और स्वरोजगार के माध्यम से अपने भविष्य का निर्माण कर रहे हैं।
]]>दंतेवाड़ा जिले की प्राथमिक लघु वनोपज सहकारी समिति गीदम ने तेंदूपत्ता विक्रय में ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है। राज्य लघु वनोपज संघ द्वारा आयोजित ऑनलाइन निविदा में समिति का तेंदूपत्ता 10 हजार 609 रुपये और 10 हजार 909 रुपये प्रति मानक बोरा की रिकॉर्ड दर पर बिका। यह गीदम समिति के 38 वर्षों के इतिहास में तेंदूपत्ता विक्रय की सबसे अधिक कीमत है।
वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री श्री केदार कश्यप ने इस उपलब्धि पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए इसे वनाश्रित परिवारों की आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में महत्वपूर्ण सफलता बताया है। उन्होंने कहा कि पारदर्शी ऑनलाइन निविदा प्रक्रिया और गुणवत्तापूर्ण कार्यप्रणाली का लाभ अब सीधे तेंदूपत्ता संग्रहकों तक पहुंच रहा है।
करीब 4 हजार संग्राहक परिवारों को मिलेगा बोनस का लाभ
वन मंत्री श्री केदार कश्यप ने कहा कि तेंदूपत्ता रिकॉर्ड दर पर बिकने से समिति को अतिरिक्त आय प्राप्त होगी। इसका लाभ बोनस के रूप में समिति से जुड़े करीब 4 हजार तेंदूपत्ता संग्रहक परिवारों को मिलेगा। इससे वनाश्रित परिवारों की आय बढ़ेगी और उनकी आर्थिक स्थिति और मजबूत होगी।
डिजिटल व्यवस्था से भुगतान में पारदर्शिता
राज्य सरकार द्वारा तेंदूपत्ता संग्रहण, बोनस, छात्रवृत्ति, बीमा और अन्य लघु वनोपज योजनाओं में डिजिटल व्यवस्था को बढ़ावा दिया जा रहा है। प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (डीबीटी) के माध्यम से संग्रहकों के बैंक खातों में राशि सीधे जमा की जा रही है। इससे भुगतान प्रक्रिया अधिक पारदर्शी, सुरक्षित और समयबद्ध हुई है।
सामूहिक प्रयासों से मिली ऐतिहासिक सफलता
वन मंत्री श्री केदार कश्यप ने इस उपलब्धि के लिए मुख्य वन संरक्षक, दंतेवाड़ा वनमंडलाधिकारी, जिला लघु वनोपज सहकारी संघ, समिति के पदाधिकारियों, फड़ मुंशियों और सभी अधिकारी-कर्मचारियों को बधाई दी। उन्होंने कहा कि सभी के सामूहिक प्रयासों से गीदम समिति ने यह ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार वनाश्रित परिवारों के हितों को सर्वाेच्च प्राथमिकता देते हुए लघु वनोपज के माध्यम से उनकी आय बढ़ाने के लिए लगातार कार्य कर रही है। आने वाले समय में भी तेंदूपत्ता और अन्य लघु वनोपज से जुड़े परिवारों को बेहतर आर्थिक लाभ दिलाने के प्रयास जारी रहेंगे।
]]>मुख्यमंत्री श्री साय आज राजधानी रायपुर के ग्राम-बरौदा में आयोजित झेरिया यादव समाज के महासम्मेलन एवं सामाजिक भवन लोकार्पण समारोह को संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर उन्होंने रायपुर में झेरिया यादव समाज के सामाजिक भवन के लिए 15 लाख रुपये की घोषणा की तथा ग्राम बरौदा में नवनिर्मित सामाजिक भवन का लोकार्पण भी किया।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि यादव समाज भारतीय संस्कृति, जीवन-मूल्यों और गौ-सेवा की समृद्ध परंपरा का संवाहक है। भगवान श्रीकृष्ण के आदर्शों पर चलने वाला यह समाज धर्म, सेवा और सामाजिक समरसता का संदेश देता है। उन्होंने कहा कि संगठित और जागरूक समाज ही मजबूत राष्ट्र की आधारशिला होता है तथा ऐसे सामाजिक सम्मेलन समाज सुधार और सामाजिक एकता को नई दिशा देते हैं।
मोदी गारंटियों को पूरा करने में छत्तीसगढ़ अग्रणी
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि सरकार गठन के बाद पहली ही कैबिनेट बैठक में 18 लाख प्रधानमंत्री आवास स्वीकृत करने का ऐतिहासिक निर्णय लिया गया। विशेष पिछड़ी जनजातियों (पीवीटीजी) के लिए 32 हजार प्रधानमंत्री आवास स्वीकृत किए गए हैं, जिससे समाज के अंतिम व्यक्ति तक विकास का लाभ पहुंचाया जा रहा है।
किसानों को 3100 रुपये प्रति क्विंटल धान का मूल्य
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार किसानों से 3100 रुपये प्रति क्विंटल की दर से धान खरीदी कर रही है। किसान कल्याण सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में है और खेती को लाभकारी बनाने के लिए लगातार प्रभावी कदम उठाए जा रहे हैं।
महतारी वंदन योजना से महिलाओं का आर्थिक सशक्तिकरण
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि महतारी वंदन योजना के माध्यम से प्रदेश की माताओं-बहनों के खातों में प्रतिमाह एक हजार रुपये की राशि अंतरित की जा रही है। इस योजना ने महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण को नई मजबूती प्रदान की है और परिवारों की आर्थिक सुरक्षा बढ़ाई है।
बस्तर में शांति और विकास का नया दौर
मुख्यमंत्री ने कहा कि कभी बस्तर के विकास में सबसे बड़ी बाधा नक्सलवाद था, लेकिन अब वहां शांति और विकास का नया वातावरण निर्मित हुआ है। सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य, आवास और रोजगार जैसी सुविधाओं का तेजी से विस्तार हो रहा है तथा विकास की मुख्यधारा अंतिम गांव तक पहुंच रही है।
रामलला दर्शन योजना से आस्था को मिला सम्मान
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ भगवान श्रीराम का ननिहाल है। रामलला दर्शन योजना के माध्यम से अब तक 50 हजार से अधिक श्रद्धालुओं को अयोध्या धाम में प्रभु श्रीराम के दर्शन का अवसर मिल चुका है। उन्होंने कहा कि सरकार “विकास भी और विरासत भी” के मूलमंत्र पर कार्य कर रही है।
सुशासन और डिजिटल सेवाओं से आसान हो रहा जनजीवन
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ देश का पहला राज्य है जहां सुशासन एवं अभिसरण विभाग की स्थापना की गई है। सरकारी सेवाओं को पारदर्शी, जवाबदेह और समयबद्ध बनाने के लिए प्रक्रियाओं का तेजी से डिजिटलीकरण किया जा रहा है। मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 1076 के माध्यम से नागरिक 24 घंटे, सप्ताह के सातों दिन अपनी शिकायत दर्ज करा सकते हैं। शिकायतों के त्वरित समाधान के लिए विभिन्न विभागों के लगभग 8 हजार अधिकारियों और कर्मचारियों को चार स्तरीय व्यवस्था से जोड़ा गया है। साथ ही प्रत्येक पंचायत में अटल डिजिटल सेवा केंद्र स्थापित किए जा रहे हैं, जहां नागरिकों को विभिन्न प्रमाणपत्र और सरकारी सेवाएं एक ही स्थान पर आसानी से उपलब्ध हो रही हैं।
कार्यक्रम में विधायक श्री अनुज शर्मा, श्री रामकुमार यादव, छत्तीसगढ़ झेरिया यादव समाज के प्रदेश अध्यक्ष श्री जगनीक यादव, श्री भगत सिंह यादव, श्रीमती आशा संतोष यादव सहित प्रदेशभर से आए समाज के पदाधिकारी एवं बड़ी संख्या में समाजजन उपस्थित थे।
]]>छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले में स्व-सहायता समूहों की दीदियां इस बार रक्षाबंधन के पर्व को प्रकृति संरक्षण से जोड़ने की एक अनूठी मिसाल पेश कर रही हैं। कलेक्टर श्री मयंक चतुर्वेदी के मार्गदर्शन में जिला पंचायत रायगढ़ और राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन बिहान के सहयोग से जिले भर में पर्यावरण-अनुकूल बीज राखियां तैयार की जा रही हैं।
फेंकने पर अंकुरित होंगे देसी बीज
इन राखियों की सबसे विशेष बात यह है कि इन्हें धान, मक्का, भुट्टा, सेमी, करेला और बरबटी जैसे विभिन्न देसी बीजों से बेहद आकर्षक ढंग से बनाया जा रहा है। यदि त्योहार के बाद यह राखी मिट्टी में मिल जाती है या बाहर फेंक दी जाती है, तो इसमें लगे बीज अंकुरित होकर पौधे का रूप ले लेंगे। इससे भाई-बहन के अटूट प्रेम के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण को भी बढ़ावा मिलेगा।
गांव-गांव में दिख रहा उत्साह
जिले के सभी सातों विकासखंडों में इस अभियान को लेकर महिलाओं में भारी उत्साह है। धरमजयगढ़ के ग्राम दुलियामुड़ा-कोयलार में कृष्णा स्व-सहायता समूह की सक्रिय महिला कविता राठिया ने आकर्षक बीज राखियां तैयार कर मिसाल पेश की है। रायगढ़ के बैसपाली, जुनवानी, लोइंग, गोपालपुर, संबलपुरी, लैलूंगा, तमनार के लिबरा गांव (जननी समूह), घरघोड़ा के बड़ेगुमड़ा (गायत्री समूह) और पुसौर के पुटकापुरी क्लस्टर सहित जिले भर की कृषि सखियां और महिलाएं इस कार्य में जुटी हुई हैं।
सातों विकासखंडों से चुनी जाएगी सर्वश्रेष्ठ बीज राखी
रायगढ़ जिले के सभी सातों विकासखंडों में इस रचनात्मकता और नवाचार को बढ़ावा देने के लिए कल यानी 20 जुलाई को जिले के सभी सात विकासखंडों से एक-एक सर्वश्रेष्ठ बीज राखी का चयन किया जाएगा। चयन का आधार राखी की आकर्षक डिज़ाइन, देसी बीजों का उपयोग और पर्यावरण संरक्षण का संदेश जैसी खूबियों को बनाया जाएगा।
जिले के शीर्ष अधिकारियों को राखी बांधेंगी विजेता दीदियां
प्रतियोगिता में चुनी जाने वाली सातों विकासखंडों की विजेता दीदियों को 27 जुलाई को एक विशेष गरिमामय समारोह में सम्मानित किया जाएगा। इस अवसर पर ये दीदियां स्वयं कलेक्टर सहित जिले के शीर्ष अधिकारियों को अपने हाथों से बनाई हुई बीज राखी बांधेंगी। बिहान की दीदियों द्वारा शुरू किया गया यह अभियान अब केवल एक प्रतियोगिता न रहकर प्रकृति के प्रति जिम्मेदारी निभाने का एक बड़ा जनआंदोलन बनता जा रहा है।
]]>