जगदलपुर, 27 सितंबर 2026।
बस्तर में भारी बारिश और इंद्रावती नदी के बढ़ते जलस्तर से बने बाढ़ एवं जलभराव के हालात के बीच बस्तर अधिकार मुक्ति मोर्चा एवं जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ (जे) के मुख्य संयोजक एवं बस्तर संभाग अध्यक्ष नवनीत चाँद ने प्रशासन के सामने बाढ़ प्रबंधन और जलनिकासी व्यवस्था से जुड़े सात तकनीकी सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने प्रभावित क्षेत्रों में राहत कार्य जारी रखने के साथ जगदलपुर के पूरे ड्रेनेज नेटवर्क का स्वतंत्र तकनीकी ऑडिट कराने तथा बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का वैज्ञानिक सर्वे कराने की मांग की है।
भारत मौसम विज्ञान विभाग के जगदलपुर केंद्र के अनुसार 25 सितंबर को पिछले 24 घंटों में 246.3 मिमी बारिश दर्ज की गई थी। भारी बारिश के बाद जगदलपुर सहित बस्तर के कई शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्रों में जलभराव और बाढ़ की स्थिति बनी हुई है। प्रभावित क्षेत्रों में बचाव एवं राहत अभियान भी जारी हैं।
प्रभावित इलाकों में पहुंच रहा राहत दल
नवनीत चाँद के नेतृत्व में संगठन का राहत प्रतिनिधिमंडल प्रवीण वार्ड, महादेव घाट, धरमपुर, लालबाग सहित अन्य जलभराव वाले क्षेत्रों का निरीक्षण कर रहा है। संगठन के अनुसार प्रभावित परिवारों की समस्याएं दर्ज करने के साथ भोजन, पेयजल और आवश्यक राहत सहायता उपलब्ध कराने तथा गंभीर परिस्थितियों की जानकारी प्रशासन तक पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है।
“सवाल बारिश पर नहीं, जोखिम कम करने की तैयारी पर है”
नवनीत चाँद ने कहा कि अत्यधिक बारिश एक प्राकृतिक घटना है, लेकिन बाढ़ से होने वाले नुकसान को कम करने के लिए जोखिम वाले क्षेत्रों की पहचान, पूर्व चेतावनी, पर्याप्त राहत संसाधन, प्रभावी जलनिकासी और आपदा-पूर्व तैयारी महत्वपूर्ण हैं।
इसी को आधार बनाते हुए उन्होंने प्रशासन से सात सवालों पर आधिकारिक और रिकॉर्ड आधारित जवाब मांगा है।
प्रशासन से पूछे गए 7 अहम सवाल
1. बारिश और नदी जलस्तर का आधिकारिक आंकड़ा क्या है?
25 से 27 सितंबर के दौरान प्रभावित क्षेत्रों में स्थानवार बारिश, इंद्रावती नदी का जलस्तर और चेतावनी स्तर कितना रहा?
2. जगदलपुर का Flood Risk Map कहां है?
बाढ़ एवं जलभराव संभावित वार्डों और गांवों की आधिकारिक सूची तथा जोखिम मानचित्र उपलब्ध है या नहीं?
3. ड्रेनेज की वास्तविक क्षमता कितनी है?
प्रमुख नालों, स्टॉर्म-वॉटर ड्रेनेज, पुलियों और आउटफॉल की डिजाइन क्षमता तथा वास्तविक जलनिकासी क्षमता का तकनीकी परीक्षण कब किया गया?
4. क्या हुआ है स्वतंत्र Hydraulic Audit?
क्या पूरे जगदलपुर ड्रेनेज नेटवर्क का स्वतंत्र Hydrological/Hydraulic Audit कराया गया है? यदि नहीं, तो इसकी समयसीमा क्या है?
5. जलनिकासी पर खर्च हुए सरकारी धन का परिणाम क्या रहा?
पिछले वर्षों में नालों, पुलियों, जलनिकासी और बाढ़ नियंत्रण पर स्वीकृत राशि, निविदा, कार्यादेश, व्यय, पूर्णता प्रमाणपत्र और वर्तमान स्थिति सार्वजनिक की जाए।
6. भारी बारिश से पहले कितनी तैयारी थी?
चेतावनी, निकासी, राहत शिविर, नाव एवं रेस्क्यू संसाधन, भोजन-पेयजल, दवा और संचार व्यवस्था के लिए क्या पूर्व तैयारी की गई थी?
7. स्थायी समाधान कब तक सामने आएगा?
बार-बार जलभराव वाले क्षेत्रों के लिए DPR, लागत, बजट, कार्य एजेंसी और समयसीमा सहित स्थायी समाधान की योजना कब तक सार्वजनिक होगी?
नवनीत चाँद की 5 तत्काल मांगें
वैज्ञानिक क्षति सर्वे: प्रभावित घरों, परिवारों, खेतों, फसलों, पशुधन और सार्वजनिक अधोसंरचना का संयुक्त एवं पारदर्शी सर्वे।
समयबद्ध राहत: लागू शासन नियमों और राहत मानकों के अनुसार पात्र प्रभावित परिवारों एवं किसानों को समयबद्ध सहायता।
स्वतंत्र Drainage Audit: पूरे जगदलपुर शहरी जलनिकासी तंत्र का स्वतंत्र Hydrological/Hydraulic एवं Technical Audit और प्रमुख निष्कर्षों को सार्वजनिक किया जाए।
GIS आधारित Flood Risk Map: जलभराव क्षेत्रों, प्राकृतिक जलप्रवाह, नालों, आउटफॉल, पुलियों और संवेदनशील आबादी का वैज्ञानिक जोखिम मानचित्र तैयार किया जाए।
Urban Flood Resilience Plan: जगदलपुर के लिए दीर्घकालिक Urban Flood & Drainage Resilience Plan तैयार कर DPR, लागत, वित्तीय स्रोत, कार्य एजेंसी और समयसीमा सार्वजनिक की जाए।
“राहत भी जरूरी, जवाबदेही भी”
नवनीत चाँद ने कहा कि इस समय सबसे पहली प्राथमिकता प्रभावित नागरिकों तक भोजन, पेयजल, दवा और सुरक्षित सहायता पहुंचाना है। इसके साथ भविष्य में ऐसी परिस्थितियों में नुकसान कम करने के लिए प्रशासनिक एवं तकनीकी व्यवस्था की समीक्षा भी जरूरी है।
उन्होंने कहा कि “अत्यधिक बारिश एक प्राकृतिक घटना है। लेकिन जोखिम वाले क्षेत्रों की पहचान, पूर्व चेतावनी, राहत संसाधन, जलनिकासी की क्षमता, क्षति का वैज्ञानिक आकलन और भविष्य के लिए शमन योजना प्रशासनिक व्यवस्था के वे हिस्से हैं, जिनकी समीक्षा रिकॉर्ड और तकनीकी रिपोर्ट के आधार पर होनी चाहिए।”
उन्होंने प्रशासन से राहत एवं बचाव कार्यों में सामाजिक संगठनों और नागरिक समूहों के साथ समन्वय बढ़ाने तथा प्रभावित परिवारों को आधिकारिक सहायता तंत्र तक पहुंचाने की व्यवस्था मजबूत करने की अपील की।




